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Delhi NCR AQI Update: Big Relief के साथ जारी है सतर्कता, GRAP 4 हटा लेकिन ख़तरा अभी बाकी

Delhi NCR AQI Update: Big Relief के साथ जारी है सतर्कता, GRAP 4 हटा लेकिन ख़तरा अभी बाकी

AQI में सुधार कब और कैसे आया?

हाल के दिनों में Delhi और उसके आसपास के इलाकों यानी NCR की हवा में थोड़ी-सी राहत देखने को मिली है। कुछ वक्त पहले तक यहाँ का AQI इतना ज़्यादा खराब था कि उसे “Severe Plus” या “Severe” की कैटेगरी में रखा जा रहा था। मगर अब हालात में हल्का सुधार आया है और इसी को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने GRAP-IV यानी सबसे सख्त पाबंदियों वाले नियमों को हटा दिया है।

GRAP (Graded Response Action Plan) का चौथा चरण तब लागू किया जाता है, जब Delhi NCR की हवा बेहद ज़हरीली हो जाती है और लोगों की सेहत पर सीधा असर पड़ने लगता है। इस दौरान कंस्ट्रक्शन पर रोक, गाड़ियों पर सख्ती और कई तरह के कड़े कदम उठाए जाते हैं। लेकिन अब चूंकि AQI पहले के मुकाबले थोड़ा नीचे आया है, इसलिए GRAP-IV को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।

पिछले कुछ दिनों में मौसम ने भी थोड़ा साथ दिया है। हवाओं की रफ्तार बढ़ने से हवा में जमी धूल और प्रदूषण के कण कुछ हद तक फैल गए, जिससे AQI “Severe Plus” से खिसककर “Very Poor” या कहीं-कहीं “Severe” के लेवल तक आ गया। यानी हालात अभी भी अच्छे नहीं हैं, मगर पहले जितने बदतर भी नहीं रहे।

यह कहना गलत होगा कि दिल्ली की हवा अब साफ हो गई है। अभी भी सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और गले में खराश जैसी परेशानियां बनी हुई हैं। इसलिए भले ही GRAP-IV हटा लिया गया हो, लेकिन बाकी ज़रूरी कदम और पाबंदियां जारी रखना बेहद अहम है। जब तक हवा सच में बेहतर नहीं हो जाती, तब तक एहतियात बरतना, नियमों का पालन करना और सेहत का ख्याल रखना ही सबसे बेहतर रास्ता है।

GRAP-IV हटने के बाद क्या बदल गया है?

GRAP-IV के कड़े नियम हटने के बाद Delhi NCR के लोगों को अब थोड़ी राहत ज़रूर मिली है। जिन पाबंदियों की वजह से रोज़मर्रा की ज़िंदगी और कारोबार ठप-सा हो गया था, उनमें अब कुछ ढील दी गई है।

अब क्या-क्या फिर से शुरू हो सकता है?
सबसे पहले तो निर्माण कार्यों (Construction Activities) पर लगी रोक हटा दी गई है, यानी अधूरे पड़े काम अब दोबारा चल सकेंगे। भारी वाहनों की आवाजाही में भी कुछ हद तक रियायत दी गई है, जिससे माल की सप्लाई और ट्रांसपोर्ट में आसानी होगी। औद्योगिक गतिविधियाँ भी सीमित तौर पर फिर से सामान्य ढंग से चल सकती हैं। इसका असर यह होगा कि पब्लिक लाइफ और प्राइवेट ज़िंदगी—दोनों में थोड़ी सुकून और राहत महसूस होगी।

इन फैसलों का मक़सद साफ हैआर्थिक गतिविधियों और आम लोगों की दिनचर्या को वापस पटरी पर लाना। लंबे वक्त तक कड़े प्रतिबंध लगे रहने से न सिर्फ़ कारोबारियों को नुकसान होता है, बल्कि आम नागरिकों पर भी भारी बोझ पड़ता है।

लेकिन यहाँ एक बात समझना बेहद ज़रूरी है GRAP-IV हटने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि सारी पाबंदियाँ खत्म हो गई हैं। CAQM ने साफ-साफ कहा है कि GRAP के चरण-1, 2 और 3 के नियम अभी भी लागू रहेंगे। हवा की गुणवत्ता पर लगातार नज़र रखी जाएगी और सभी कंट्रोल एजेंसियों को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

यानी यह मान लेना कि अब सब कुछ पहले जैसा हो गया है, सही नहीं होगा। सिर्फ़ सबसे सख्त चरण-IV हटाया गया है, बाकी कम कड़े लेकिन बेहद ज़रूरी नियम अब भी लागू हैं। हालात पर पैनी नज़र बनी रहेगी, ताकि हवा फिर से ज़हरीली न हो और लोगों की सेहत महफूज़ रह सके।

Delhi सरकार की नीतियाँ: ‘No PUC, No Fuel’

दिल्ली सरकार ने हवा को साफ रखने के लिए सख़्ती बरकरार रखते हुए ‘No PUC, No Fuel’ की पॉलिसी को जारी रखा है। इसका सीधा और आसान मतलब यह है कि अगर किसी गाड़ी के पास वैध PUC (Pollution Under Control) सर्टिफिकेट नहीं होगा, तो उसे पेट्रोल या डीज़ल नहीं मिलेगा।

अब यह नियम सिर्फ़ GRAP-IV के वक्त तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे साल लागू रहेगा — चाहे सख़्त पाबंदियाँ हों या न हों। सरकार का साफ कहना है कि जो गाड़ियाँ ज़्यादा धुआँ छोड़ती हैं, पुरानी हैं या सही हालत में नहीं हैं, उन्हें सड़कों से धीरे-धीरे बाहर करना ज़रूरी है।

इस फैसले का मक़सद यही है कि लोग अपनी गाड़ियों का वक्त पर PUC करवाएँ, गाड़ी की सेहत का ख़याल रखें और बेवजह प्रदूषण फैलाने से बचें। आसान शब्दों में कहा जाए तो अब बिना PUC के गाड़ी चलाना और फ्यूल लेना मुश्किल हो जाएगा। यह क़दम हवा को थोड़ा साफ करने और दिल्ली वालों की सेहत को महफूज़ रखने की दिशा में एक अहम कोशिश मानी जा रही है।

हाल के प्रदूषण के आंकड़े क्या दर्शाते हैं?

दिल्ली की हवा ने पिछले कुछ वक्त में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। कुछ दिन पहले हालात इतने खराब हो गए थे कि AQI 441 तक पहुँच गया, जो सेहत के लिए बेहद ख़तरनाक माना जाता है। उसी वजह से कड़े नियम लागू करने पड़े थे। फिर मौसम और हवाओं की मदद से थोड़ी राहत मिली और हवा में मामूली सुधार देखने को मिला, जिसके बाद GRAP-IV को हटा दिया गया।

लेकिन यह समझना बहुत ज़रूरी है कि हवा अभी भी “साफ” नहीं हुई है। AQI अब भी “Very Poor” और “Severe” के बीच ही बना हुआ है। यानी हालात पहले से बेहतर ज़रूर हैं, मगर अब भी चिंता की बात बने हुए हैं। इसलिए पूरी ढील देना या लापरवाह हो जाना सही नहीं होगा।

वायु प्रदूषण का सेहत पर गहरा और सीधा असर पड़ता है। खास तौर पर बच्चों और बुज़ुर्गों के फेफड़ों के लिए यह काफी ख़तरनाक हो सकता है। लंबे समय तक खराब हवा में रहने से ब्रोन्काइटिस, अस्थमा, दिल से जुड़ी बीमारियाँ और सांस की तकलीफ़ बढ़ने का ख़तरा रहता है। यही वजह है कि डॉक्टर और विशेषज्ञ बार-बार सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।

संवेदनशील लोगों को अब भी मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए और जहाँ मुमकिन हो, एयर प्यूरीफायर का सहारा लेना बेहतर रहेगा। एक्सपर्ट्स साफ कहते हैं कि AQI अभी भी ऊँचे स्तर पर है, इसलिए वायु प्रदूषण से बचाव के उपाय जारी रखना बेहद ज़रूरी है — चाहे GRAP-IV हट गया हो या नहीं। थोड़ी सी एहतियात आज, आगे चलकर बड़ी परेशानी से बचा सकती है।

क्या यह स्थायी सुधार है?

यह कहना अभी जल्दबाज़ी होगी कि हालात पूरी तरह ठीक हो गए हैं। हवा में जो थोड़ा-बहुत सुधार दिख रहा है, उसे स्थायी मान लेना सही नहीं है। मौसम बदलते ही, हवाओं की रफ्तार कम होते ही, गाड़ियों का धुआँ, फैक्ट्रियों का प्रदूषण या खेती से उठने वाला धुआँ—इन सब वजहों से हालात फिर बिगड़ सकते हैं।

इसीलिए सरकारी एजेंसियाँ लगातार AQI पर नज़र बनाए हुए हैं। अगर हवा की क्वालिटी दोबारा गिरती है, तो बिना देर किए फिर से सख़्त क़दम उठाए जा सकते हैं। हालात को देखते हुए फैसले बदले जा सकते हैं, ताकि स्थिति हाथ से बाहर न जाए।

दिल्ली-NCR में हवा में हल्का सुधार ज़रूर हुआ है, इसी वजह से सबसे कड़े क़ानून वाले GRAP-IV प्रतिबंध हटा दिए गए हैं। मगर इसे पूरी राहत समझना गलत होगा। यह सिर्फ़ एक अस्थायी, यानी अंतरिम राहत है।

अब भी GRAP के बाकी स्तर—चरण 1, 2 और 3—लागू हैं और उन पर सख़्ती से अमल किया जा रहा है। मतलब साफ है: हालात पर कड़ी निगरानी जारी रहेगी और ज़रूरत पड़ी तो पाबंदियाँ फिर से बढ़ाई जा सकती हैं। इसलिए लापरवाही नहीं, बल्कि एहतियात ही सबसे बेहतर रास्ता है।

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