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The Indian Express Hindi पत्रकारिता में एक ऐतिहासिक कदम
भारतीय मीडिया की दुनिया में इन दिनों एक बहुत बड़ी और दूर तक असर डालने वाली खबर चर्चा में है। मशहूर और भरोसेमंद पत्रकार, एंकर और एडिटर Saurabh Dwivedi अब The Indian Express के नए हिंदी अवतार की ज़िम्मेदारी संभालने जा रहे हैं। आसान शब्दों में कहें तो अब The Indian Express Hindi की पूरी कमान उन्हीं के हाथ में होगी।
इस नई पहल के तहत Saurabh Dwivedi सिर्फ़ एक सेक्शन या प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि पूरे ऑपरेशन को देखेंगे। इसमें वेबसाइट, डिजिटल प्लेटफॉर्म, वीडियो शोज़ और ई-पेपर सब कुछ शामिल होगा। यानी कंटेंट क्या होगा, कैसे होगा और किस अंदाज़ में हिंदी पाठकों तक पहुँचेगा, इसकी दिशा तय करने में उनकी भूमिका सबसे अहम होगी।
इस कदम के पीछे सोच बिल्कुल साफ और मजबूत है। The Indian Express सालों से अपनी गहरी, तथ्यपरक और बेखौफ अंग्रेज़ी पत्रकारिता के लिए जाना जाता रहा है। अब उसी गहराई, उसी विश्वसनीयता और उसी गंभीर विश्लेषण को हिंदी बोलने-पढ़ने वाले करोड़ों लोगों तक पहुँचाने की कोशिश की जा रही है।
अगर ज़मीनी हकीकत देखें तो भारत में हिंदी समझने और बोलने वालों की तादाद बहुत बड़ी है। इसके बावजूद लंबे समय तक ऐसा होता रहा कि खोजी पत्रकारिता, पॉलिसी एनालिसिस, डेटा के सहारे की गई रिपोर्टिंग ज़्यादातर अंग्रेज़ी मीडिया तक ही सिमटी रही। हिंदी मीडिया में खबरें तो खूब रहीं, लेकिन अक्सर गहराई और ठोस विश्लेषण की कमी महसूस की जाती रही।
ऐसे में The Indian Express जैसे बड़े और प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान का हिंदी में पूरे दम-खम के साथ उतरना, वो भी सौरभ द्विवेदी जैसे तजुर्बेकार पत्रकार के नेतृत्व में, हिंदी पत्रकारिता के लिए एक नया मोड़ माना जा रहा है। बहुत से मीडिया जानकारों का मानना है कि यह कदम हिंदी पत्रकारिता के स्तर को एक नई बुलंदी तक ले जा सकता है।
यह पहल सिर्फ़ इतनी नहीं है कि अंग्रेज़ी खबरों को हिंदी में अनुवाद कर दिया जाए। असल कोशिश यह है कि एडिटोरियल सोच, कंटेंट की क्वालिटी और पत्रकारिता की बुनियादी क़ीमतों को उसी ईमानदारी के साथ हिंदी में पेश किया जाए—बिना किसी समझौते के।
सीधी और बोलचाल की हिंदी में कहें तो मकसद यह है कि हिंदी पाठक भी वही मजबूत, सधी हुई और सवाल पूछने वाली पत्रकारिता पढ़ें, जो अब तक ज़्यादातर अंग्रेज़ी अख़बारों और वेबसाइट्स तक सीमित थी। इसमें न शोर-शराबा होगा, न बेवजह की सनसनी, बल्कि होगी ठोस बात, सही सवाल और सच्चाई के करीब पहुँचने की कोशिश।
उर्दू की खुशबू वाली भाषा में कहें तो यह क़दम हिंदी पत्रकारिता के लिए एक नई सुबह जैसा है—जहाँ अल्फ़ाज़ आसान होंगे, लहजा सादा होगा, लेकिन बात में वज़न और असर पूरी तरह कायम रहेगा।
Saurabh Dwivedi: भरोसे, समझ और संवाद का चेहरा
Saurabh Dwivedi को भारतीय मीडिया में एक ऐसे पत्रकार के तौर पर जाना जाता है, जो भारी-भरकम और गंभीर मुद्दों को भी बेहद आसान, साफ़ और असरदार भाषा में लोगों तक पहुँचा देते हैं। Saurabh Dwivedi की यही खासियत रही है कि वो बात को घुमा-फिराकर नहीं कहते, बल्कि सीधे मुद्दे की जड़ पर हाथ रखते हैं। उनके इंटरव्यू हों, ज़मीनी रिपोर्टिंग हो या फिर राजनीति पर की गई गहरी बातचीत हर जगह उनकी पकड़ साफ़ नज़र आती है। खासकर हिंदी दर्शकों के बीच उन्होंने अपनी एक मजबूत और भरोसेमंद पहचान बना ली है।
उनकी पत्रकारिता की सबसे बड़ी खूबी यह रही है कि वो सत्ता से सवाल पूछने से कभी नहीं हिचकिचाते, हर बात को तथ्यों और सच्चाई के आधार पर रखते हैं, और सबसे अहम आम आदमी की ज़बान में जटिल से जटिल मुद्दे भी इस तरह समझा देते हैं कि बात सीधे दिल-दिमाग तक उतर जाए।
यही वजह है कि The Indian Express का हिंदी संस्करण अगर उनके नेतृत्व में आगे बढ़ता है, तो उसमें भरोसे और लोकप्रियता दोनों का बेहतरीन तालमेल देखने को मिल सकता है। यानी ऐसा मंच, जिसे पढ़कर लोग न सिर्फ़ जुड़ाव महसूस करें, बल्कि उस पर यक़ीन भी करें।

अब बात करें English Editorial Depth को हिंदी में लाने की। The Indian Express बरसों से अपनी खोजी पत्रकारिता, एक्सप्लेनर स्टोरीज़ और पॉलिसी कवरेज के लिए जाना जाता रहा है। यह अख़बार हमेशा से उन सवालों पर काम करता आया है, जिनका असर सीधा देश की सियासत, सिस्टम और आम लोगों की ज़िंदगी पर पड़ता है।
अब इस नई हिंदी पहल के ज़रिये वही मज़बूत कंटेंट – संसद की पेचीदा बहसें, न्यायपालिका और नौकरशाही से जुड़ी जटिल ख़बरें, देश की अर्थव्यवस्था, विदेश नीति और टेक्नोलॉजी पर गहराई से किया गया विश्लेषण, और डेटा व रिसर्च के सहारे तैयार की गई रिपोर्ट्स इन सबको हिंदी में, उसी संजीदगी और साफ़गोई के साथ पेश किया जाएगा, जिसके लिए Indian Express जाना जाता है।
सीधी और बोलचाल वाली हिंदी में कहें तो अब हिंदी पाठकों को भी वो पत्रकारिता मिलने वाली है, जिसमें सिर्फ़ ख़बर नहीं होगी, बल्कि समझ, संदर्भ और सच्चाई की पूरी तस्वीर होगी। और उर्दू के लहजे में कहें तो यह कोशिश हिंदी पत्रकारिता को ज़्यादा वक़ार, ज़्यादा वज़न और ज़्यादा असर देने की एक मजबूत शुरुआत है।
वीडियो शोज़ और ई-पेपर: डिजिटल युग की जरूरत
आज का दौर ऐसा नहीं रहा कि मीडिया सिर्फ़ काग़ज़ के अख़बार तक सिमट कर रह जाए। लोग अब मोबाइल पर खबर देखते हैं, वीडियो सुनते हैं, सोशल मीडिया पर चर्चा करते हैं और हर पल अपडेट रहना चाहते हैं। The Indian Express Hindi इस बदलती हुई हक़ीक़त को अच्छी तरह समझता है, और इसी वजह से वह मल्टी-प्लेटफॉर्म स्ट्रैटेजी के साथ आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा है।
इसका मतलब साफ़ है कि खबरें सिर्फ़ पढ़ने तक सीमित नहीं होंगी, बल्कि देखने, सुनने और समझने के नए तरीक़े भी सामने आएंगे। खासकर वीडियो के ज़रिये ऐसा कंटेंट तैयार किया जाएगा, जो सीधे लोगों से जुड़े और उन्हें सोचने पर मजबूर करे।
वीडियो शोज़ की बात करें तो सौरभ द्विवेदी की अगुवाई में हिंदी वीडियो कंटेंट को एक नया रूप दिया जाएगा। इसमें
– असरदार और बेबाक इंटरव्यू,
– मुश्किल मुद्दों को आसान बनाने वाले एक्सप्लेनर,
– दिन की बड़ी खबरों पर करंट अफेयर्स एनालिसिस,
– और ज़मीनी हकीकत दिखाने वाली ग्राउंड रिपोर्ट्स
सब कुछ एक नए अंदाज़ और सधे हुए लहजे में पेश किया जाएगा। मकसद यही रहेगा कि खबर सिर्फ़ सुनी या देखी न जाए, बल्कि समझ में आए और खासकर युवा दर्शकों से सीधा रिश्ता बना सके।
वहीं दूसरी तरफ़ ई-पेपर और डिजिटल प्लेटफॉर्म भी इस पूरी रणनीति का अहम हिस्सा होंगे। हिंदी ई-पेपर और वेबसाइट के ज़रिये देश-दुनिया की बड़ी खबरें, सोचने पर मजबूर करने वाले ओपिनियन कॉलम और खास विशेष रिपोर्ट्स लोगों तक पहुँचेंगी—वो भी रियल-टाइम अपडेट्स के साथ।
आसान और बोलचाल की ज़बान में कहें तो अब पाठक चाहे मोबाइल पर हों या लैपटॉप पर, सुबह हो या रात—The Indian Express Hindi की खबरें हर वक़्त उनके साथ होंगी। और उर्दू की मिठास में कहें तो यह कोशिश हिंदी मीडिया को ज़माने के साथ कदम से कदम मिलाकर चलाने की एक मजबूत और दूरदर्शी पहल है।
मास हिंदी ऑडियंस तक पहुंचने की रणनीति
इस पूरी पहल का सबसे बड़ा और सबसे अहम मकसद यही है कि ज़्यादा से ज़्यादा हिंदी बोलने-समझने वाले लोगों तक पहुँचा जाए। उत्तर भारत हो, मध्य भारत हो या फिर हिंदी पट्टी के दूसरे राज्य—इन इलाक़ों में ऐसे पाठकों की तादाद बहुत बड़ी है जो अच्छी, सधी हुई और भरोसेमंद पत्रकारिता पढ़ना चाहते हैं। लेकिन अक्सर सिर्फ़ भाषा की वजह से वे अंग्रेज़ी मीडिया से दूरी बना लेते हैं, चाहकर भी उससे जुड़ नहीं पाते।
The Indian Express Hindi इसी फ़ासले को खत्म करने की कोशिश है। यहां खबरें होंगी
– सरल और सीधी भाषा में, ताकि हर कोई समझ सके,
– लेकिन पूरी तरह तथ्यों पर आधारित,
– बिना बेवजह के शोर-शराबे और सनसनी के,
– और विचारधारा से ऊपर उठकर, पूरी निष्पक्षता के साथ पेश की गई।
आसान शब्दों में कहें तो मकसद यह है कि पाठक को हल्की-फुल्की सुर्ख़ियों से नहीं, बल्कि ठोस, सच्ची और काम की खबरों से जोड़ा जाए। ऐसी खबरें, जिन पर भरोसा किया जा सके और जिनसे समझ बढ़े।
अब अगर मीडिया इंडस्ट्री के नज़रिये से देखें तो यह क़दम काफ़ी मायने रखता है। कई मीडिया जानकारों का मानना है कि The Indian Express Hindi की यह शुरुआत हिंदी मीडिया के लिए एक मिसाल और बेंचमार्क बन सकती है। आज के दौर में ज़्यादातर हिंदी न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स पर टीआरपी, व्यूज़ और क्लिकबेट का दबाव इतना ज़्यादा है कि कंटेंट की क्वालिटी पीछे छूट जाती है।
ऐसे माहौल में Indian Express की एंट्री एक अलग और मजबूत संदेश देती है—कि क्वालिटी-फर्स्ट पत्रकारिता आज भी मुमकिन है, वो भी हिंदी में। यह क़दम दूसरे मीडिया हाउसेज़ को भी सोचने पर मजबूर करेगा कि हिंदी दर्शकों को सिर्फ़ हल्का और सतही कंटेंट नहीं, बल्कि गंभीर, जिम्मेदार और असरदार पत्रकारिता भी दी जा सकती है।
उर्दू के लहजे में कहें तो यह कोशिश हिंदी मीडिया को ज़्यादा संजीदा, ज़्यादा वक़ारदार और ज़्यादा भरोसेमंद बनाने की तरफ़ एक मजबूत क़दम है—जिसका असर आने वाले वक़्त में दूर तक दिखाई दे सकता है।
Saurabh Dwivedi भविष्य की तस्वीर
Saurabh Dwivedi की अगुवाई में The Indian Express Hindi को लेकर मीडिया जगत में काफ़ी उम्मीदें बंधी हुई हैं। माना जा रहा है कि उनके नेतृत्व में यह प्लेटफॉर्म हिंदी पत्रकारिता को एक नई विश्वसनीय पहचान देगा। ऐसी पहचान, जिस पर लोग आंख बंद करके भरोसा कर सकें। साथ ही यह भी उम्मीद है कि यह पहल युवाओं को गंभीर और ज़रूरी खबरों से जोड़ेगी, ताकि वे सिर्फ़ ट्रेंडिंग टॉपिक्स तक सीमित न रहें, बल्कि देश-दुनिया को समझने की कोशिश भी करें।
इससे भी आगे बढ़कर, The Indian Express Hindi से यह उम्मीद की जा रही है कि यह लोकतांत्रिक विमर्श को और मज़बूत करेगा। सवाल पूछने की परंपरा को बढ़ावा देगा, सत्ता और सिस्टम से जवाबदेही मांगेगा और आम लोगों को सोचने, समझने और अपनी राय बनाने का मौक़ा देगा।
सीधी और सरल भाषा में कहें तो यह सिर्फ़ एक नया मीडिया प्रोडक्ट लॉन्च नहीं है। इसे हिंदी में एक बौद्धिक और सूचनात्मक बदलाव, बल्कि कहें तो एक तरह की क्रांति की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।
Saurabh Dwivedi का The Indian Express के हिंदी अवतार की कमान संभालना भारतीय मीडिया के इतिहास में एक अहम मोड़ माना जा रहा है। यह पहल न सिर्फ़ भाषा की दीवारों को तोड़ती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि अच्छी और जिम्मेदार पत्रकारिता किसी एक भाषा की मोहताज नहीं होती। अगर इरादा साफ़ हो और नीयत मजबूत हो, तो हिंदी में भी वही स्तर, वही गहराई और वही असर पैदा किया जा सकता है।
और अगर यह प्रयोग कामयाब होता है और इसके संकेत अभी से काफ़ी मज़बूत नज़र आ रहे हैं तो आने वाले वक़्त में हिंदी पत्रकारिता का चेहरा पहले से कहीं ज़्यादा संजीदा, भरोसेमंद और असरदार दिखाई देगा। उर्दू के लहजे में कहें तो यह क़दम हिंदी मीडिया को एक नई सोच, नया वक़ार और नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।
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