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Breaking news: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री Ajit Pawar की Plan crash में death, महाराष्ट्र में 3 दिन का शोक घोषित

Breaking news: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री Ajit Pawar की Plan crash में death, महाराष्ट्र में 3 दिन का शोक घोषित

Ajit Pawar Plan Crash का समय, स्थान और स्थिति

28 जनवरी 2026 की सुबह महाराष्ट्र के लिए एक ऐसी सुबह बनकर आई, जिसने पूरे राज्य को गहरे सदमे में डाल दिया। बारामती एयरपोर्ट के पास एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाला हादसा हुआ। इस हादसे में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रीय राजनीति की एक बड़ी और मजबूत शख्सियत Ajit Pawar का निजी विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

कुछ ही पलों में यह खबर आग की तरह फैल गई कि इस विमान हादसे में अजित पवार को मृत घोषित कर दिया गया है। इस दुर्घटना में उनके साथ यात्रा कर रहे अन्य लोग भी अपनी जान गंवा बैठे।

सुबह का वक्त था, करीब 8 बजकर 45 मिनट। मुंबई से बारामती की ओर जा रहा एक चार्टर्ड विमान, जिसका मॉडल Learjet 45XR (VT-SSK) बताया गया है, बारामती एयरपोर्ट पर उतरने की कोशिश कर रहा था। मौसम सामान्य बताया जा रहा था, लेकिन लैंडिंग के दौरान विमान अचानक संतुलन खो बैठा। पायलट ने विमान को सुरक्षित उतारने के लिए दूसरी बार लैंडिंग का प्रयास किया, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था।

दूसरे प्रयास के दौरान विमान का नियंत्रण पूरी तरह से बिगड़ गया और वह रनवे के पास ज़मीन से टकरा गया। टकराते ही विमान आग के गोले में तब्दील हो गया। चंद सेकंडों में ज़ोरदार धमाके हुए और आसमान में काले धुएँ का गुबार फैल गया। आसपास मौजूद लोगों ने बताया कि उन्होंने एक के बाद एक कई धमाकों की आवाज़ें सुनीं, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

स्थानीय लोग जब तक कुछ समझ पाते, तब तक हालात काबू से बाहर हो चुके थे। आग इतनी भीषण थी कि किसी को भी विमान के पास जाने का मौका नहीं मिला। दमकल विभाग और प्रशासन की टीमें तुरंत मौके पर पहुँचीं, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। दुर्भाग्य से विमान में सवार कोई भी व्यक्ति ज़िंदा नहीं बच पाया।

इस दर्दनाक Plan Crash में अजित पवार सहित कुल 5 से 6 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। मृतकों में विमान के पायलट, सह-पायलट और अजित पवार के सुरक्षा अधिकारी भी शामिल बताए जा रहे हैं। यह खबर जैसे ही सामने आई, पूरे महाराष्ट्र में शोक की लहर दौड़ गई। बारामती, पुणे, मुंबई और राज्य के दूसरे हिस्सों में लोग गहरे ग़म में डूब गए।

अगर यात्रा के उद्देश्य की बात करें, तो Ajit Pawar उस दिन बारामती में होने वाले जिला परिषद चुनावों से पहले कई अहम कार्यक्रमों में हिस्सा लेने वाले थे। उनका दिन काफी व्यस्त रहने वाला था। उन्हें जनता से मुलाकात करनी थी, कार्यकर्ताओं को संबोधित करना था और लगभग चार चुनावी बैठकों में शामिल होना था। इसी सिलसिले में वे सुबह मुंबई से चार्टर्ड विमान द्वारा बारामती के लिए रवाना हुए थे।

किसे मालूम था कि जनता की खिदमत और राजनीति की जिम्मेदारियों के लिए निकले Ajit Pawar की यह यात्रा उनकी आख़िरी यात्रा साबित होगी। यह Plan Crash सिर्फ एक नेता की मौत नहीं है, बल्कि यह महाराष्ट्र की राजनीति, प्रशासन और लाखों समर्थकों के लिए एक ऐसा ज़ख्म है, जिसे भरने में वक़्त लगेगा।

राज्य और राष्ट्रीय नेतृत्व का शोक

जैसे ही Ajit Pawar के निधन की खबर सामने आई, पूरे महाराष्ट्र ही नहीं बल्कि पूरे देश में मातम छा गया। यह खबर इतनी अचानक और चौंकाने वाली थी कि किसी को यकीन ही नहीं हुआ। कुछ ही पलों में यह दुखद सूचना राज्य से निकलकर राजधानी दिल्ली तक पहुँच गई और राज्य व केंद्र दोनों स्तरों पर शोक की लहर दौड़ गई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हादसे पर गहरा दुख जाहिर किया। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि Ajit Pawar एक ऐसे नेता थे जो राजनीतिक समझ, प्रशासनिक अनुभव और जनसेवा की भावना से भरपूर थे। प्रधानमंत्री ने उन्हें एक समर्पित जननेता बताते हुए कहा कि समाज और जनता के लिए उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। उनके शब्दों में दर्द भी था और एक सच्चे नेता को खो देने का अफसोस भी साफ झलक रहा था।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और राज्य के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी इस Plan Crash को सिर्फ एक राजनीतिक नुकसान नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय क्षति करार दिया। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि यह हादसा पूरे राज्य के लिए एक बहुत बड़ा सदमा है। उन्होंने इस दुखद घटना की विस्तृत और निष्पक्ष जांच के आदेश भी दिए, ताकि यह साफ हो सके कि आखिर यह Plan Crash किन हालात में हुआ।

इस दर्दनाक खबर से पवार परिवार पूरी तरह टूट सा गया। Ajit Pawar की बहन सुप्रिया सुले, परिवार के अन्य सदस्य और करीबी रिश्तेदारों ने गहरे दुख का इज़हार किया। खबर मिलते ही वे बिना वक्त गंवाए तुरंत बारामती के लिए रवाना हो गए, जहाँ हर गली, हर चौराहा ग़म में डूबा हुआ नज़र आ रहा था। समर्थकों की आँखों में आँसू थे और दिलों में एक भारी सन्नाटा पसरा हुआ था।

Ajit Pawar के निधन पर अलग-अलग राजनीतिक दलों, नेताओं और सामाजिक हस्तियों ने भी शोक जताया। सोशल मीडिया पर हर तरफ श्रद्धांजलि संदेशों की बाढ़ आ गई। कोई उन्हें मज़बूत नेतृत्व के लिए याद कर रहा था, तो कोई उनकी सादगी और जनता से जुड़े रहने की आदत को सलाम कर रहा था। देश के कोने-कोने से लोग अपने-अपने अल्फ़ाज़ में उन्हें आख़िरी सलाम पेश कर रहे हैं।

आज हालात यह हैं कि महाराष्ट्र का माहौल पूरी तरह ग़मगीन है। हर चर्चा में सिर्फ अजित पवार का नाम है, हर जुबान पर उनके लिए अफसोस और दुआएँ हैं। यह सिर्फ एक नेता का जाना नहीं है, बल्कि यह उस भरोसे और उस आवाज़ का ख़ामोश हो जाना है, जिसे लोग बरसों से सुनते और मानते आए थे।

Ajit Pawar का राजनीतिक जीवन और योगदान

Ajit Pawar को महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐसे नेता के तौर पर जाना जाता था, जिनके पास लंबा अनुभव, गहरी समझ और ज़बरदस्त पकड़ थी। वे राज्य के सबसे अनुभवी और असरदार राजनेताओं में शुमार थे। राजनीति उनके लिए सिर्फ़ पद या ताक़त का ज़रिया नहीं थी, बल्कि जनता से जुड़कर काम करने का एक तरीक़ा थी।

Ajit Pawar लंबे समय तक राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (NCP) से जुड़े रहे और पार्टी के एक मज़बूत स्तंभ माने जाते थे। वक्त के साथ-साथ Ajit Pawar ने पार्टी में नेतृत्व की ज़िम्मेदारी भी संभाली और कई अहम फ़ैसलों में उनकी राय को खास तवज्जो दी जाती थी। पार्टी के अंदर ही नहीं, बल्कि विरोधी दलों में भी उनकी राजनीतिक समझ और प्रशासनिक पकड़ को माना जाता था।

अपने राजनीतिक सफ़र के दौरान उन्होंने महाराष्ट्र में कई मुख्यमंत्रियों की कैबिनेट में अहम पदों पर काम किया। वित्त, प्रशासन और विकास से जुड़े विभागों में उनकी भूमिका हमेशा चर्चा में रही। राज्य की आर्थिक नीतियों, सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक ढांचे को मज़बूत करने में उनका योगदान काबिले-तारीफ़ रहा।

खासतौर पर सहकार क्षेत्र (कोऑपरेटिव सेक्टर) और ग्रामीण राजनीति में उनकी पकड़ बेहद मज़बूत मानी जाती थी। गांव-देहात की ज़मीनी हकीकत को वे अच्छी तरह समझते थे और किसानों, सहकारी संस्थाओं और ग्रामीण जनता से उनका सीधा रिश्ता था। यही वजह थी कि गांवों में उनकी बात सुनी जाती थी और लोग उन पर भरोसा करते थे।

Ajit Pawar पार्टी के वरिष्ठ और भरोसेमंद चेहरे थे। बजट निर्धारण हो, विकास योजनाएं हों या प्रशासनिक नीतियां — हर अहम मुद्दे पर उनकी भूमिका साफ दिखाई देती थी। कई मौकों पर उन्होंने राज्य के वित्तीय हालात को संभालने में अहम फैसले लिए और सरकार को मज़बूती दी।

कुल मिलाकर, Ajit Pawar सिर्फ़ एक नेता नहीं थे, बल्कि वे महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐसा नाम थे, जिनकी मौजूदगी से सरकार की दिशा और रफ़्तार तय होती थी। आज उनके जाने से राजनीति में जो ख़लापन पैदा हुआ है, उसे भर पाना आसान नहीं होगा, और उनकी कमी लंबे अरसे तक महसूस की जाती रहेगी।

Plan Crash के कारण और जांच

फिलहाल इस Plan Crash हादसे की असल और पक्की वजह सामने नहीं आ सकी है। जांच एजेंसियां अभी पूरे मामले की गहराई से पड़ताल कर रही हैं। शुरुआती खबरों और सूत्रों के मुताबिक, अंदेशा जताया जा रहा है कि यह दुर्घटना लैंडिंग के वक्त आई किसी तकनीकी खराबी, मौसम से जुड़ी परेशानी या फिर विमान के नियंत्रण प्रणाली में आई किसी गंभीर गड़बड़ी की वजह से हुई हो सकती है। हालांकि, इन कारणों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

इस गंभीर हादसे को देखते हुए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने तुरंत मामले का संज्ञान लिया है और औपचारिक जांच शुरू कर दी है। DGCA की टीम यह जानने की कोशिश कर रही है कि विमान में उड़ान से पहले कोई तकनीकी समस्या थी या नहीं, मौसम की स्थिति क्या थी, और लैंडिंग के समय पायलट को किन हालात का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही ब्लैक बॉक्स और फ्लाइट डेटा से भी अहम जानकारियां जुटाई जा रही हैं।

घटना स्थल से जो शुरुआती तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, वे हालात की भयानकता को साफ दिखाते हैं। विमान का मलबा चारों तरफ बिखरा हुआ नजर आ रहा है। जले हुए हिस्से, उठता हुआ काला धुआँ और आग के निशान यह बताते हैं कि हादसा बेहद तेज़ और अचानक हुआ। ऐसा लगता है कि टकराव इतना ज़ोरदार था कि किसी को संभलने या बचने का मौका ही नहीं मिला।

दमकल विभाग और राहत-बचाव दल मौके पर तुरंत पहुंचे, लेकिन आग की और विस्फोट के कारण हालात पर काबू पाना आसान नहीं था। शुरुआती हालात देखकर यही अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि विमान के ज़मीन से टकराते ही उसमें भारी आग लग गई, जिससे नुकसान और भी बढ़ गया।

अब सबकी निगाहें DGCA की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि यह हादसा तकनीकी चूक, मानवीय गलती या किसी और कारण से हुआ। तब तक प्रशासन ने लोगों से अफवाहों से दूर रहने और आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करने की अपील की है।

बारामती और महाराष्ट्र की शोक स्थिति

महाराष्ट्र के बारामती में, जहाँ यह दर्दनाक विमान हादसा हुआ, पूरा इलाका इस वक्त गहरे ग़म और खामोशी में डूबा हुआ है। शहर की गलियों से लेकर चौराहों तक एक अजीब-सी उदासी पसरी हुई है। आम लोग हों या अजित पवार के समर्थक और कार्यकर्ता — हर किसी के चेहरे पर मायूसी और आँखों में नमी साफ दिखाई दे रही है।

हादसे के बाद स्थानीय लोगों और समर्थकों ने अलग-अलग जगहों पर फूल-मालाएँ चढ़ाकर, मोमबत्तियाँ जलाकर और श्रद्धांजलि स्थल बनाकर उन्हें आख़िरी सलाम पेश किया। हर तरफ़ बस एक ही चर्चा है — इस दुखद घटना की। लोग खामोशी से खड़े होकर दुआ कर रहे हैं और इस अपूरणीय क्षति को याद कर रहे हैं।

सरकारी दफ़्तरों में भी माहौल बिल्कुल बदला-बदला सा नज़र आ रहा है। कई कार्यालयों में शोक सभाएँ और श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। अफ़सरों और कर्मचारियों के चेहरों पर भी ग़म साफ झलक रहा है। रोज़मर्रा की सरकारी गतिविधियाँ जैसे थम-सी गई हैं।

इस हादसे की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने पूरे राज्य में तीन दिनों के शोक की घोषणा कर दी है। इस दौरान सभी सरकारी कार्यक्रम, सांस्कृतिक आयोजन और सार्वजनिक मनोरंजन से जुड़े कार्यक्रम स्थगित कर दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि यह समय शोक और संवेदना प्रकट करने का है, न कि उत्सव का।

शोक अवधि के दौरान राज्य भर में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा, जो इस बात का संकेत है कि यह सिर्फ़ एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि पूरे राज्य के लिए एक बड़ी क्षति है। बारामती से लेकर मुंबई तक, हर जगह माहौल भारी है और दिलों में बस एक ही एहसास है — दुख, अफसोस और सन्नाटा।

राजनीतिक और प्रशासनिक असर

Ajit Pawar के अचानक चले जाने से महाराष्ट्र की राजनीति में एक बहुत बड़ा खालीपन पैदा हो गया है। ऐसा खालीपन, जिसे भर पाना आसान नहीं होगा। वे सिर्फ़ एक पार्टी या एक पद तक सीमित नेता नहीं थे, बल्कि कई राजनीतिक दलों, योजनाओं और फैसलों पर उनकी सीधी और गहरी छाप थी। उनकी मौजूदगी से सियासत की दिशा तय होती थी, और अब उनकी गैरमौजूदगी में राजनीतिक समीकरण बदलते नज़र आ रहे हैं।

उनके निधन का असर सिर्फ़ बयानबाज़ी या शोक संदेशों तक सीमित नहीं रहेगा। माना जा रहा है कि इसका सीधा प्रभाव महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों, पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों पर पड़ेगा। इसके साथ ही, केंद्र की राजनीति में भी जो गठबंधन, रणनीतियाँ और आने वाले बड़े फैसले हैं, उन पर इस हादसे की परछाईं साफ दिखाई दे सकती है। कई राजनीतिक दलों को अब अपनी रणनीति नए सिरे से सोचनी पड़ेगी।

Ajit Pawar का जाना सिर्फ़ महाराष्ट्र के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक राष्ट्रीय क्षति माना जा रहा है। यह हादसा ऐसे वक्त में हुआ, जब वे अपने राजनीतिक करियर के सबसे अहम और निर्णायक दौर में थे। वे लगातार जनता के बीच सक्रिय थे, चुनावी अभियानों में पूरी ताक़त से जुटे हुए थे और राज्य के नेतृत्व में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही थी।

जनता से सीधा जुड़ाव, तेज़ फैसले लेने की काबिलियत और प्रशासनिक समझ — यही उनकी पहचान थी। ऐसे समय में उनका यूँ अचानक चले जाना हर किसी को अंदर तक झकझोर गया है।

यह दुखद हादसा एक बार फिर हमें यह एहसास दिलाता है कि ज़िंदगी कितनी बेयक़ीन और नाज़ुक है। चाहे कोई कितना ही बड़ा नेता क्यों न हो, किस्मत के फैसले से कोई भी अछूता नहीं है। हादसे किसी को मौका नहीं देते और न ही कोई चेतावनी।

आज महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पूरा देश इस ग़म से उबरने की कोशिश कर रहा है। लोगों के दिलों में सवाल भी हैं, अफसोस भी और एक गहरी उदासी भी। इस नुकसान से उबरने में महाराष्ट्र और भारत के जनमानस को वक़्त लगेगा, और अजित पवार की कमी राजनीति में लंबे अरसे तक महसूस की जाती रहेगी।

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