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आज का लेटेस्ट Gold Silver Price
भारतीय सर्राफ़ा बाज़ार हो या फिर अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी मार्केट, आज हर तरफ़ एक ही चर्चा रही Gold Silver Price में ज़बरदस्त गिरावट। ऐसी गिरावट बहुत कम देखने को मिलती है। एक ही दिन में Silver Crash के दाम करीब ₹1 लाख तक टूट गए, वहीं सोने की कीमत भी लगभग ₹33,000 तक फिसल गई। इस अचानक आई गिरावट ने न सिर्फ़ निवेशकों को, बल्कि शादी-ब्याह और ज़ेवर ख़रीदने वालों को भी हैरान कर दिया है।
Gold: आज का हाल क्या है?
अगर Gold की बात करें, तो आज भारत में इसके भाव साफ़ तौर पर नीचे आते नज़र आए।
24 कैरेट सोना आज लगभग ₹16,026 प्रति ग्राम के आसपास ट्रेड करता दिखा, जबकि
22 कैरेट सोना करीब ₹14,690 प्रति ग्राम तक आ गया।
वहीं MCX पर सोने का वायदा भाव (10 ग्राम) लगभग ₹1,69,200 के आस-पास दर्ज किया गया।
आसान शब्दों में समझें तो — जो सोना कुछ दिन पहले रिकॉर्ड ऊँचाई पर था, वह अब लगभग ₹33,000 प्रति 10 ग्राम सस्ता हो चुका है। बाज़ार की ज़बान में इसे Correction कहा जाता है, यानी बहुत तेज़ी के बाद दामों का थोड़ा संभलना और नीचे आना।
Silver Crash ने सबको चौंका दिया
अब बात करें Silver की, तो यहाँ हालात और भी ज़्यादा चौंकाने वाले रहे। चांदी के दामों में आज भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
1 किलो चांदी की कीमत लगभग ₹3,35,000 से ₹3,95,000 के दायरे में आ गई,
जबकि Silver 925 का भाव करीब ₹3,34,900 से ₹4,05,000 के बीच रहा।
यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि इसी महीने की शुरुआत में चांदी करीब ₹4,20,000 प्रति किलो तक पहुँच गई थी, और अब एक ही झटके में ₹1 लाख से ज़्यादा सस्ती हो गई। यही वजह है कि बाज़ार में कहा जा रहा है कि चांदी का “तेज़ी वाला बुलबुला” अचानक फूट गया।
आखिर मतलब क्या है?
सरल भाषा में कहें तो, Gold Silver Price में जो तेज़ी बहुत जल्दी आई थी, अब वही तेज़ी थोड़ा दम भर रही है। बड़े निवेशकों ने मुनाफ़ा वसूल लिया, ग्लोबल बाज़ारों से दबाव आया और नतीजा यह हुआ कि दाम एकदम नीचे आ गए।
ख़रीदारों के लिए यह गिरावट राहत की सांस जैसी हो सकती है, निवेशकों के लिए यह वक्त सोच-समझकर कदम उठाने का है। बाज़ार का मिज़ाज अभी नाज़ुक है, इसलिए जल्दबाज़ी से ज़्यादा ज़रूरी है सब्र और समझदारी।
गिरावट का सबसे बड़ा कारण क्या है?
Gold Silver Price में जो रिकॉर्ड तोड़ तेज़ी हाल ही में देखने को मिली थी, उसके तुरंत बाद इस तरह की ज़बरदस्त गिरावट आना सिर्फ़ एक मामूली Correction नहीं माना जा सकता। दरअसल, इसके पीछे कई बड़े कारण एक साथ काम कर रहे हैं — भारी प्रॉफिट-बुकिंग, बाज़ार में फैला डर और घबराहट, और वैश्विक दबाव (Global Pressure)। जब ये सारे फैक्टर एक साथ आते हैं, तो कीमतों का इस तरह लुढ़क जाना लाज़मी हो जाता है।
प्रॉफिट-बुकिंग का दबाव
आम भाषा में समझें तो, जब कोई चीज़ बहुत तेज़ी से ऊपर जाती है — चाहे वो शेयर हो या सोना-चांदी जैसी कमोडिटी — तो बड़े निवेशक, जैसे बड़े फंड और संस्थाएं, अपना मुनाफ़ा जेब में डालने लगते हैं। इसे ही Profit-Booking कहा जाता है।

जैसे ही बड़े खिलाड़ी बिकवाली शुरू करते हैं, बाज़ार पर अचानक दबाव बन जाता है। आज Gold Silver Price दोनों में जो भारी बिकवाली दिखी, उसकी सबसे बड़ी वजह यही मुनाफ़ा वसूलने की दौड़ रही।
डॉलर की मजबूती और वैश्विक संकेत
इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने भी आग में घी डालने का काम किया। जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोना और चांदी जैसी कीमती धातुएँ विदेशी निवेशकों के लिए महंगी हो जाती हैं। नतीजा यह होता है कि बाहर से खरीद कम हो जाती है और बिकवाली बढ़ जाती है।
इसी वजह से ग्लोबल मार्केट में दबाव बढ़ा और उसका सीधा असर भारतीय बाज़ार पर भी देखने को मिला।
फेड पॉलिसी और ब्याज दरों का असर
अमेरिका के केंद्रीय बैंक यानी Federal Reserve (Fed) की नीतियों को लेकर चल रही चर्चाओं ने भी निवेशकों के मन में असमंजस पैदा कर दिया। ब्याज दरों में बदलाव या सख्त रुख की अटकलों ने निवेशकों की Risk लेने की भूख को प्रभावित किया।
जब निवेशक ज़्यादा जोखिम लेने से कतराने लगते हैं, तो Safe-Haven Assets जैसे GoldSilver Price की मांग कभी बढ़ती है, तो कभी अचानक घट जाती है। इसी उतार-चढ़ाव ने बाज़ार में और अस्थिरता पैदा की।
तकनीकी बिकवाली और Overbought स्थिति
तकनीकी नज़रिये से देखें तो सोना और चांदी दोनों ही बहुत ऊपर तक पहुँच चुके थे। चार्ट पर इन्हें Overbought यानी “हद से ज़्यादा खरीदा गया” माना जा रहा था। ऐसी हालत में बाज़ार अक्सर खुद को संतुलित करने के लिए नीचे आता है। यानी, जब दाम जरूरत से ज़्यादा बढ़ जाते हैं, तो Correction आना बिल्कुल कुदरती बात होती है।
क्या चांदी का बुलबुला सच में फूट गया?
जनवरी 2026 की शुरुआत में चांदी ने ऐसी तेज़ रफ्तार पकड़ी कि निवेशकों में जबरदस्त जोश भर गया। लोगों को लगने लगा था कि Industrial Demand, सोलर और टेक्नोलॉजी सेक्टर की ज़रूरतें चांदी को और ऊपर ले जाएंगी।
लेकिन एक ही दिन में ₹1 लाख तक की गिरावट ने साफ़ कर दिया कि बाज़ार कुछ हद तक Speculation के सहारे चल रहा था। यानी लोग असली बुनियादी वजहों (Fundamentals) से ज़्यादा, सिर्फ़ भाव और Momentum देखकर खरीदारी कर रहे थे।
जब ये Speculative Buying हद से ज़्यादा बढ़ जाती है, तो उसका अंजाम अक्सर अचानक और तेज़ गिरावट के रूप में सामने आता है। आज चांदी में जो भारी Selling देखने को मिली, वो उसी ज़्यादती का नतीजा है।
Gold Silver Price Crash का अर्थ — क्या यह Correction या Bear Market है?
आने वाले समय में बाज़ार का मिज़ाज कैसा रह सकता है?
शॉर्ट-टर्म (1 से 4 हफ्ते)
अभी Gold Silver Price का बाज़ार काफी उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है और आने वाले कुछ हफ्तों तक यही हाल बना रह सकता है। दाम कभी तेज़ी से ऊपर जाएंगे, तो कभी अचानक नीचे फिसल सकते हैं।
जो लोग शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग करते हैं, उनके लिए यह समय थोड़ा खतरनाक माना जा रहा है। बिना Stop-loss लगाए ट्रेड करना नुकसानदेह साबित हो सकता है। इस वक्त बाज़ार पूरी तरह ट्रेडिंग मानसिकता से चल रहा है, यानी भाव ख़बरों और अफ़वाहों पर तुरंत प्रतिक्रिया दे रहे हैं। यही मानसिकता तय करेगी कि अगले कुछ दिनों में बाज़ार किस तरफ़ जाएगा।
मीडियम-टर्म (1 से 6 महीने)
अगर आने वाले महीनों में महंगाई (Inflation) थोड़ी ठंडी पड़ती है, या डॉलर इंडेक्स में मजबूती रुकती है, या फिर अमेरिकी फेड (Fed) ब्याज दरों को लेकर नरम रुख अपनाता है, तो Gold Silver Price में दोबारा तेज़ी की शुरुआत हो सकती है।
खासतौर पर Silver को लेकर उम्मीदें बनी हुई हैं, क्योंकि इसका इस्तेमाल सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और टेक्नोलॉजी सेक्टर में लगातार बढ़ रहा है। यह Industrial Demand चांदी के दामों को नीचे गिरने से रोकने में सहारा दे सकती है।
लॉन्ग-टर्म (1 साल या उससे ज़्यादा)
लंबी अवधि की बात करें तो Gold Silver Price की अहमियत आज भी कायम है। ये दोनों धातुएँ हमेशा से महंगाई से बचाव (Inflation Hedge) और पोर्टफोलियो को संतुलित रखने (Portfolio Diversification) का मज़बूत ज़रिया रही हैं।
सिर्फ़ एक Correction के आधार पर यह कहना कि अब लंबे समय के लिए भारी गिरावट आ जाएगी, फिलहाल सही नहीं लगता। इतिहास गवाह है कि ऐसी गिरावटों के बाद बाज़ार खुद को संभाल भी लेता है।
निवेशक को क्या करना चाहिए?
लंबे समय के निवेशक (Long-Term Investors)
जो लोग लंबी अवधि के लिए निवेश करते हैं, उनके लिए घबराने की खास वजह नहीं है। बाज़ार की Correction अक्सर Permanent Trend नहीं बनती।
जिस स्तर पर आज सोना और चांदी आ चुकी हैं, वही स्तर कभी-कभी एक अच्छा खरीदारी का मौका (Buying Opportunity) भी साबित हो सकता है — बशर्ते निवेशक सब्र और समझदारी से काम लें।
शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स / एक्टिव ट्रेडर्स
आज जैसा भारी उतार-चढ़ाव शॉर्ट-टर्म ट्रेड करने वालों के लिए जोखिम बढ़ा देता है।
इस दौर में:
Stop-loss लगाना बेहद ज़रूरी है
Risk Management को नज़रअंदाज़ करना नुकसानदेह हो सकता है
Technical Levels का सख्ती से पालन करना चाहिए
बिना प्लानिंग के ट्रेड करना इस समय जेब पर भारी पड़ सकता है।
आगे क्या हो सकता है? दो संभावित तस्वीरें
Bullish Scenario (तेज़ी वाला माहौल)
अगर Fed का अगला कदम बाज़ार के लिए थोड़ा सकारात्मक रहा, और डॉलर कमजोर पड़ा, तो सोना-चांदी में फिर से रफ्तार आ सकती है। इसके अलावा, अगर दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है या महंगाई फिर सिर उठाती है, तो लोग Safe-Haven के तौर पर सोना-चांदी की ओर लौट सकते हैं, जिससे मांग बढ़ेगी।
Bearish Scenario (दबाव वाला माहौल)
दूसरी तरफ़, अगर ब्याज दरें लंबे समय तक ऊँची बनी रहती हैं और ग्लोबल मार्केट पूरी तरह Risk-On Mode में रहते हैं, तो लोग सोना-चांदी से दूरी बना सकते हैं। ऐसे में Safe-Haven Assets की मांग घटेगी और दाम दबाव में रह सकते हैं।
आज की भारी गिरावट यह साफ़ इशारा देती है कि सोना-चांदी का बाज़ार इस वक्त बेहद अस्थिर (Volatile) है। इसे सिर्फ़ एक मामूली Correction कहकर नज़रअंदाज़ करना भी ठीक नहीं होगा। चांदी में एक ही दिन में ₹1,00,000 की गिरावट और सोने में ₹33,000 तक की कमजोरी यह दिखाती है कि बहुत ज़्यादा तेज़ी के बाद बाज़ार अब थोड़ा सांस ले रहा है।
हालांकि, आज के ताज़ा रेट यह भी बताते हैं कि सोना-चांदी अभी भी अपने Historic High Levels के आसपास ही हैं। यानी बाज़ार पूरी तरह Crash नहीं हुआ है, बल्कि फिलहाल Correction Phase में चल रहा है। ऐसे में सबसे बेहतर रास्ता यही है जल्दबाज़ी नहीं, समझदारी, और डर नहीं, सही रणनीति।
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