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NASA के Artemis II Wet Dress Rehearsal में बड़ी बाधा
NASA का Artemis II प्रोग्राम बहुत बड़ा और खास मिशन है, जिसका मक़सद इंसानों को एक बार फिर चाँद के क़रीब ले जाना है। लेकिन इस मिशन की तैयारी के दौरान हाल ही में एक अहम टेस्ट में रुकावट आ गई।
दरअसल, Wet Dress Rehearsal नाम का जो टेस्ट किया जा रहा था — यानी रॉकेट में असली ईंधन भरकर बिल्कुल लॉन्च जैसा माहौल बनाना — उसे लॉन्च से सिर्फ़ 5 मिनट 15 सेकंड पहले रोकना पड़ा। उस वक़्त काउंटडाउन चल रहा था और सब कुछ ठीक लग रहा था, तभी टेक्निकल टीम को लिक्विड हाइड्रोजन के रिसाव (लीक) का शक हुआ।
लिक्विड हाइड्रोजन बहुत ज़्यादा ख़तरनाक होता है, ज़रा-सी चूक भी बड़े हादसे में बदल सकती है। इसी वजह से NASA ने कोई रिस्क न लेते हुए टेस्ट को वहीं रोकने का फ़ैसला किया। सेफ़्टी सबसे ऊपर होती है, ख़ासकर तब जब आगे चलकर इंसानी जानें इस मिशन से जुड़ने वाली हों।
यह Wet Dress Rehearsal असल में एक फुल-ड्रेस रिहर्सल होती है, जैसे स्टेज पर जाने से पहले की आख़िरी प्रैक्टिस। इसमें रॉकेट की मशीनरी, फ्यूल भरने की पूरी प्रक्रिया, काउंटडाउन सिस्टम और लॉन्च से पहले की हर छोटी-बड़ी चीज़ को जांचा जाता है — बस रॉकेट उड़ाया नहीं जाता। मक़सद यही होता है कि असली लॉन्च के दिन कोई कमी न रह जाए।
हालाँकि टेस्ट बीच में रोकना थोड़ा मायूस करने वाला ज़रूर है, लेकिन इसे नाकामी नहीं कहा जा सकता। बल्कि यह दिखाता है कि NASA हर क़दम बहुत सोच-समझकर उठा रहा है। छोटी सी ख़राबी को वक़्त रहते पकड़ लेना, बाद में होने वाले बड़े नुक़सान से बचा सकता है।
सीधे शब्दों में कहें तो Artemis II की तैयारी जारी है, रास्ते में मुश्किलें आ रही हैं, मगर NASA पूरी एहतियात और सब्र के साथ आगे बढ़ रहा है — ताकि जब इंसान दोबारा चाँद की तरफ़ बढ़ें, तो सफ़र पूरी तरह महफूज़ हो।
Wet Dress Rehearsal का महत्व
Wet Dress Rehearsal को आसान ज़ुबान में समझें तो यह रॉकेट की आख़िरी रिहर्सल होती है — बिल्कुल वैसी ही जैसे किसी बड़े शो से पहले फुल ड्रेस प्रैक्टिस की जाती है। इसमें सब कुछ असली होता है, बस रॉकेट उड़ाया नहीं जाता।
इस टेस्ट के दौरान रॉकेट के सारे अहम सिस्टम को नक़ली नहीं, बल्कि असली हालात में परखा जाता है। Space Launch System (SLS) में करीब 7 लाख गैलन से ज़्यादा बहुत ठंडा ईंधन भरा जाता है, जिसमें लिक्विड हाइड्रोजन और लिक्विड ऑक्सीजन शामिल होती है। यह ईंधन इतना संवेदनशील होता है कि ज़रा-सी ग़लती भी बड़ी परेशानी बन सकती है।
इसके साथ-साथ रॉकेट के बिजली वाले सिस्टम, कम्युनिकेशन, और सेफ़्टी से जुड़े तमाम इंतज़ामात को भी बारीकी से चेक किया जाता है। कंट्रोल रूम में बैठी टीम ठीक वैसे ही काउंटडाउन चलाती है, जैसे असली लॉन्च के दिन चलाया जाएगा — यानी टाइमर को बिल्कुल आख़िरी लम्हों तक ले जाया जाता है।
असल में यह पूरा अभ्यास यह देखने के लिए होता है कि मिशन के नियम-क़ायदे, इंजीनियरों की तैयारी, और रॉकेट के सिस्टम की मज़बूती पूरी तरह दुरुस्त है या नहीं। जब तक यह टेस्ट कामयाबी से पूरा न हो जाए, तब तक असली लॉन्च को हरी झंडी नहीं मिलती।
साधारण शब्दों में कहें तो Wet Dress Rehearsal यह तय करता है कि जब इंसान चाँद की तरफ़ रवाना हों, तो सफ़र बिना किसी ख़तरे और पूरी सलामती के हो।
क्या हुआ: लिक्विड हाइड्रोजन लीक
Wet Dress Rehearsal के आख़िरी और सबसे नाज़ुक चरण में, जब काउंटडाउन T-5 मिनट 15 सेकंड पर पहुँचा, तभी टेस्ट को अचानक रोकना पड़ा। NASA की तरफ़ से बताया गया कि यह फ़ैसला Tail Service Mast Umbilical (TSMU) नाम के हिस्से में लिक्विड हाइड्रोजन के रिसाव की वजह से लिया गया।

सीधी ज़ुबान में कहें तो TSMU वह जगह होती है जहाँ रॉकेट का मेन फ्यूल टैंक और ज़मीन पर मौजूद सपोर्ट प्लेटफ़ॉर्म आपस में जुड़े होते हैं। यहीं से ईंधन और दूसरी ज़रूरी सप्लाई रॉकेट तक पहुँचती है। जब इसी कनेक्शन पॉइंट पर गड़बड़ी सामने आई, तो हालात गंभीर हो गए।
लिक्विड हाइड्रोजन बहुत ही ठंडा और बेहद ख़तरनाक ईंधन होता है। इसे लगभग –253 डिग्री सेल्सियस जैसे जमा देने वाले तापमान पर भरा जाता है। ऐसे में अगर ज़रा-सी भी लीक हो जाए, तो सेफ़्टी के लिहाज़ से बड़ा ख़तरा पैदा हो सकता है। NASA की टीम ने देखा कि रिसाव की मात्रा तय की गई सुरक्षित सीमा से ज़्यादा है, इसलिए कोई भी रिस्क लेना मुनासिब नहीं समझा गया।
इसी वजह से लॉन्च कंट्रोल टीम ने फ़ौरन काउंटडाउन रोकने और रॉकेट को सुरक्षित हालत में वापस लाने का फ़ैसला किया। अब इंजीनियरों की टीम पूरे सिस्टम को सुकून से स्थिर करने, टैंकों से ईंधन बाहर निकालने (ड्रेन करने) और यह जानने में जुटी हुई है कि लीक आख़िर शुरू कहाँ से हुआ।
मतलब साफ़ है—मिशन भले ही कुछ देर के लिए रुका हो, लेकिन NASA की पूरी कोशिश यही है कि हर चीज़ पूरी तरह महफूज़ रहे, ताकि आगे चलकर किसी भी तरह का ख़तरा पैदा न हो।
क्या यह नया है? – Artemis-1 भी इसी समस्या से जूझा था
यह कोई पहली बार नहीं है जब Artemis मिशन की टेस्टिंग के दौरान लिक्विड हाइड्रोजन से जुड़ी परेशानी सामने आई हो। इससे पहले Artemis I के Wet Dress Rehearsal में भी बिल्कुल ऐसी ही दिक्कत आई थी। उस वक़्त भी फ्यूल लीक पकड़ा गया था, जिसकी वजह से टेस्ट को बीच में ही रोकना पड़ा था। तब NASA की टीम को रॉकेट के सिस्टम को पूरी तरह महफूज़ हालत में लाने और जांच करने में काफ़ी वक़्त लगा था।
अब सवाल यह उठता है कि आगे क्या होगा? इस बारे में NASA ने अभी तक साफ़-साफ़ नहीं बताया है कि अगला Wet Dress Rehearsal या दोबारा टेस्ट कब किया जाएगा। हालात वैसे भी आसान नहीं हैं, क्योंकि बीते कुछ दिनों में असामान्य ठंड और बार-बार बदलते मौसम की वजह से WDR की तारीखें पहले ही आगे-पीछे हो चुकी थीं। इसका सीधा असर उस 8 फ़रवरी की संभावित लॉन्च विंडो पर पड़ा है, जिस पर सबकी नज़र थी।
अंतरिक्ष से जुड़े जानकारों और स्पेस कम्युनिटी के कुछ लोगों का मानना है कि अगर लीक की समस्या जल्द पूरी तरह हल नहीं हुई, तो यह मुमकिन है कि Artemis II का असली लॉन्च इसी महीने में न हो पाए।
सीधी बात यह है कि मिशन थोड़ा लेट ज़रूर हो सकता है, लेकिन NASA जल्दबाज़ी नहीं करना चाहता। उनकी पहली तरजीह यही है कि जब रॉकेट इंसानों को लेकर उड़ान भरे, तो हर चीज़ पूरी तरह सुरक्षित, पुख़्ता और भरोसेमंद हो।
Artemis II मिशन की महत्वता
Artemis II NASA का ऐसा मिशन है जो सिर्फ़ टेस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें असल इंसान अंतरिक्ष में जाने वाले हैं। यह NASA का पहला मानवयुक्त चंद्र मिशन होगा, जिसमें चार अंतरिक्ष यात्री — रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैंसन — चाँद के क़रीब जाकर उसकी फ्लाइबाय यात्रा करेंगे। यानी वे चंद्रमा के चारों ओर से घूमकर वापस आएँगे, ताकि आगे के बड़े मिशनों के लिए रास्ता पूरी तरह साफ़ हो सके।
यह मिशन आने वाले Artemis III के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि उसी मिशन में इंसानों को चंद्रमा की सतह पर उतारने की तैयारी है। आसान शब्दों में कहें तो Artemis II, चाँद पर दोबारा कदम रखने से पहले की आख़िरी बड़ी परीक्षा है।
ऐसे में Wet Dress Rehearsal का T-5:15 पर रद्द होना NASA के लिए किसी झटके से कम नहीं है। यह वही चरण होता है जहाँ से यह तय किया जाता है कि रॉकेट असली लॉन्च के लिए कितना तैयार है। लेकिन जब लिक्विड हाइड्रोजन लीक सामने आया, तो टेस्ट को रोकना मजबूरी बन गया। सेफ़्टी के मामले में कोई समझौता नहीं किया जा सकता, ख़ासकर तब जब आगे चलकर इंसानी जानें दाँव पर हों।
अब हालात ऐसे हैं कि मिशन की टाइमलाइन पर असर पड़ सकता है, और फ़रवरी में लॉन्च होना आसान नहीं लग रहा। फिर भी NASA का रुख़ बिल्कुल साफ़ है — जल्दबाज़ी नहीं, बल्कि पूरी तसल्ली और सुरक्षा के साथ आगे बढ़ना।
कुल मिलाकर, Artemis II सिर्फ़ एक मिशन नहीं है, बल्कि मानव इतिहास में चाँद के क़रीब दोबारा लौटने का सबसे बड़ा मौक़ा है। यही वजह है कि यह मिशन NASA के बड़े सपनों और भविष्य की अंतरिक्ष योजनाओं में एक केंद्रीय किरदार निभाता है।
इसके अलावा, NASA की इंजीनियरिंग टीम इस पूरे मामले को सिर्फ़ एक रुकावट के तौर पर नहीं, बल्कि सीखने के मौके की तरह देख रही है। हर टेस्ट से मिली जानकारी आगे के मिशनों को और ज़्यादा मज़बूत बनाती है। Artemis II में शामिल अंतरिक्ष यात्रियों की ट्रेनिंग भी लगातार जारी है, ताकि जब लॉन्च का फ़ैसला हो, तो हर कोई पूरी तरह तैयार हो।
NASA का मानना है कि चाँद तक दोबारा पहुँचना आसान सफ़र नहीं है, लेकिन सब्र, तकनीक और सावधानी के साथ यह मंज़िल हासिल की जा सकती है। यही मिशन आने वाले समय में मंगल ग्रह की ओर इंसानी उड़ान का रास्ता भी खोलेगा। इसलिए भले ही थोड़ी देरी हो, लेकिन यह मिशन इंसानियत के भविष्य के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
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