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Air India का Dreamliner ग्राउंड: क्या हुआ पूरी बात?
सोमवार, 2 फ़रवरी 2026 को देश की राष्ट्रीय एयरलाइन Air India ने अपने एक Boeing 787-8 Dreamliner विमान को उड़ानों से हटा दिया, यानी उसे ग्राउंड कर दिया गया। यह फैसला उस वक्त लिया गया जब विमान के पायलट ने उड़ान के दौरान एक संभावित तकनीकी खराबी की जानकारी दी।
दरअसल यह विमान लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट से बेंगलुरु के लिए उड़ान भर रहा था और इसका फ्लाइट नंबर AI132 था। उड़ान सामान्य तरीके से चल रही थी, लेकिन लैंडिंग के वक्त पायलट को यह महसूस हुआ कि विमान के बाएँ इंजन (Left Engine) से जुड़ा फ्यूल कंट्रोल स्विच ठीक से काम नहीं कर रहा है। यह स्विच इंजन तक ईंधन की सप्लाई को कंट्रोल करता है, इसलिए इसमें किसी भी तरह की गड़बड़ी को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
हालाँकि राहत की बात यह रही कि पायलट ने सूझ-बूझ और सतर्कता दिखाते हुए विमान को पूरी तरह सुरक्षित तरीके से बेंगलुरु एयरपोर्ट पर उतार लिया। सभी यात्री और क्रू मेंबर सुरक्षित रहे और किसी तरह की अफरातफरी या आपात स्थिति नहीं बनी।
लेकिन एहतियातन और सुरक्षा को सबसे ऊपर रखते हुए, एअर इंडिया ने इस विमान को तुरंत परिचालन से बाहर कर दिया। एयरलाइन का कहना है कि जब तक विमान की पूरी तकनीकी जाँच नहीं हो जाती और निर्माता कंपनी (OEM) के इंजीनियर यह सुनिश्चित नहीं कर लेते कि सब कुछ दुरुस्त है, तब तक इस विमान को दोबारा उड़ान में नहीं लगाया जाएगा।
एअर इंडिया ने साफ कहा है कि यात्रियों की जान-माल की हिफ़ाज़त उनके लिए सबसे अहम है और किसी भी तरह के जोखिम से बचने के लिए यह कदम उठाया गया है। फिलहाल तकनीकी टीम विमान की गहराई से जाँच कर रही है और रिपोर्ट आने के बाद ही आगे का फैसला लिया जाएगा।
फ्यूल कंट्रोल स्विच क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है?
विमान में लगा फ्यूल कंट्रोल स्विच कोई मामूली पुर्जा नहीं होता, बल्कि यह जहाज़ के लिए बेहद अहम हिस्सा माना जाता है। इसी स्विच के ज़रिये यह तय होता है कि इंजन तक ईंधन पहुँचेगा या नहीं। आसान शब्दों में कहें तो इंजन चलेगा या बंद रहेगा, इसका फैसला यही स्विच करता है।
आमतौर पर इस स्विच की दो पोज़िशन होती हैं। पहली होती है RUN, यानी जब विमान उड़ान में हो या उड़ान के लिए तैयार हो, तब यह स्विच ‘रन’ पर रहता है और इंजन को लगातार ईंधन मिलता रहता है। दूसरी पोज़िशन होती है CUTOFF, यानी जब इंजन को बंद करना हो, तो ईंधन की सप्लाई पूरी तरह रोक दी जाती है।
अब ज़रा सोचिए, अगर यह स्विच गलती से या किसी खराबी की वजह से RUN की जगह अपने आप CUTOFF की तरफ खिसक जाए, तो इंजन तक ईंधन पहुँचना बंद हो सकता है। ऐसी हालत में इंजन की ताक़त खत्म हो जाती है और विमान की उड़ान पर सीधा असर पड़ता है। उड़ान के दौरान ऐसा होना बेहद ख़तरनाक माना जाता है और किसी भी एयरलाइन के लिए यह एक बड़ी चिंता की बात होती है।
इसी खतरे को देखते हुए Boeing 787 Dreamliner जैसे आधुनिक विमान में यह स्विच स्प्रिंग-लोडेड और लॉक सिस्टम के साथ बनाया जाता है, ताकि यह अपने आप या झटके से ‘कटऑफ’ की ओर न जाए। मतलब, इसे जानबूझकर और पूरी प्रक्रिया के साथ ही बदला जा सके।
लेकिन इस मामले में जो बात सामने आई है, वह काफी चिंताजनक है। रिपोर्ट के मुताबिक, उस विमान में लगा फ्यूल कंट्रोल स्विच दो बार अपने आप ठीक से RUN में लॉक नहीं रहा और CUTOFF की दिशा में जाने की कोशिश करता दिखा। यह कोई छोटी-मोटी तकनीकी गड़बड़ी नहीं मानी जा रही, बल्कि ऐसा संकेत है कि सिस्टम में कहीं न कहीं गंभीर खामी हो सकती है।
इसी वजह से पायलट ने समय रहते इसकी जानकारी दी और एयरलाइन ने भी एहतियात बरतते हुए विमान को तुरंत ग्राउंड कर दिया, ताकि किसी भी बड़े हादसे से पहले हालात को काबू में रखा जा सके।
क्यों यह खबर इतनी बड़ी और गंभीर है?
यह मामला सिर्फ किसी छोटी-मोटी तकनीकी खराबी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी गंभीरता कहीं ज़्यादा गहरी है। इसकी वजह यह है कि इसी तरह के फ्यूल कंट्रोल स्विच को लेकर पिछले साल एअर इंडिया के ड्रीमलाइनर विमान की एक बड़ी और दर्दनाक दुर्घटना सामने आ चुकी है, जिसे लोग आज भी भूले नहीं हैं।
दरअसल, जून 2025 में Air India की फ्लाइट AI171, जो अहमदाबाद से लंदन जा रही थी, उड़ान के दौरान भयानक हादसे का शिकार हो गई थी। उस दुर्घटना में विमान के दोनों इंजनों की ईंधन सप्लाई अचानक बंद हो गई थी, जिसके चलते जहाज़ हवा में ही अपनी ताक़त खो बैठा। इस हादसे में 260 बेगुनाह लोगों की जान चली गई, जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया था।

उस दुर्घटना के बाद जब AAIB (एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो) ने शुरुआती जांच रिपोर्ट जारी की, तो उसमें एक बेहद अहम बात सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक, विमान के दोनों फ्यूल कंट्रोल स्विच अपनी सामान्य स्थिति RUN से अचानक CUTOFF में चले गए थे। जैसे ही ऐसा हुआ, इंजनों तक ईंधन पहुँचना बंद हो गया और दोनों इंजन एक-एक करके ठप हो गए।
हालाँकि अब तक उस हादसे की अंतिम जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है और न ही किसी पुख्ता नतीजे पर पहुँचा गया है, लेकिन यह साफ है कि फ्यूल कंट्रोल स्विच उस जांच का एक बेहद संवेदनशील और अहम हिस्सा बना हुआ है। तकनीकी विशेषज्ञ अब भी इस पहलू को गहराई से खंगाल रहे हैं।
ऐसे में अब जब फिर से उसी तरह की प्रणाली, यानी फ्यूल कंट्रोल स्विच में संभावित खराबी की खबर सामने आई है, तो यह बात अपने आप में ख़तरे की घंटी मानी जा रही है। यही वजह है कि इस बार न सिर्फ एअर इंडिया, बल्कि विमानन सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञ और नियामक संस्थाएँ भी इस मामले को पूरी संजीदगी से देख रही हैं।
सीधी-सी बात यह है कि जब किसी एक तकनीकी सिस्टम का नाम बार-बार गंभीर घटनाओं से जुड़ने लगे, तो उसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। इसी सोच के साथ इस नई घटना को भी बहुत सीरियस लिया जा रहा है, ताकि किसी भी तरह की लापरवाही आगे चलकर एक और बड़े हादसे की वजह न बन जाए।
Air India और DGCA क्या कर रहे हैं?
Air India ने इस पूरे मामले पर अपना आधिकारिक बयान जारी करते हुए साफ किया है कि एयरलाइन ने हालात को हल्के में नहीं लिया और जैसे ही तकनीकी दिक्कत की जानकारी मिली, विमान को तुरंत ग्राउंड कर दिया गया। यानी उस जहाज़ को आगे की किसी भी उड़ान के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।
एयरलाइन ने यह भी बताया कि इस जांच में सिर्फ उसकी अपनी तकनीकी टीम ही नहीं, बल्कि विमान बनाने वाली कंपनी Boeing और उससे जुड़े OEM पार्टनर, जैसे Honeywell, को भी शामिल किया गया है। इसका मकसद यह है कि जाँच हर पहलू से की जाए और किसी भी तरह की कमी या खामी नज़रअंदाज़ न हो।
इसके साथ ही Air India ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को भी इस पूरे मामले की तुरंत जानकारी दे दी है। DGCA देश की सबसे बड़ी विमानन नियामक संस्था है, और ऐसे मामलों में उसकी निगरानी बेहद अहम मानी जाती है।
एयरलाइन के मुताबिक, फिलहाल पूरी जांच और तकनीकी परीक्षण प्राथमिकता के आधार पर चल रहे हैं। हर पुर्ज़े, हर सिस्टम और खास तौर पर फ्यूल कंट्रोल स्विच को बारीकी से परखा जा रहा है, ताकि यह पूरी तरह साफ हो सके कि दिक्कत कहां और कैसे हुई।
Air India ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यात्रियों की सुरक्षा उसके लिए सबसे ऊपर है और भविष्य में भी वह इसी नीति पर कायम रहेगी। कंपनी का कहना है कि जब तक पूरी तरह संतोषजनक रिपोर्ट सामने नहीं आ जाती, तब तक किसी भी तरह का जोखिम नहीं लिया जाएगा।
यह बात भी ज़िक्र करने लायक है कि इससे पहले DGCA ने Boeing 787 Dreamliner विमानों के फ्यूल कंट्रोल स्विच की जांच कराने के निर्देश दिए थे। उस समय की गई जांच में कोई बड़ी तकनीकी खामी सामने नहीं आई थी। लेकिन अब जब एक नया मामला सामने आया है, तो यह साफ हो गया है कि लगातार निगरानी और और भी गहन परीक्षण की ज़रूरत है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
एविएशन से जुड़े जानकारों और सुरक्षा पर नज़र रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि फ्यूल कंट्रोल स्विच देखने में भले ही एक छोटा सा हिस्सा लगे, लेकिन हकीकत में यह विमान के सबसे बुनियादी और अहम कंट्रोल्स में से एक होता है। इंजन को कब ईंधन मिलना है और कब नहीं, इसका सीधा फैसला यही स्विच करता है, इसलिए इसमें ज़रा सी भी गड़बड़ी को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले बड़े हादसे के बाद से इस फ्यूल कंट्रोल स्विच पर खास तौर से ध्यान दिया जा रहा है। अब हर छोटी-बड़ी रिपोर्ट को गंभीरता से देखा जा रहा है, क्योंकि पहले की घटनाओं ने साफ कर दिया है कि ऐसी तकनीकी चीज़ें कितनी बड़ी मुसीबत की वजह बन सकती हैं।
उनका यह भी कहना है कि अगर मौजूदा मामले में सामने आई खराबी वाकई तकनीकी साबित होती है, तो इसे बिना वक्त गंवाए जल्द से जल्द ठीक करना बेहद ज़रूरी होगा। देरी करना या इसे मामूली समझना आगे चलकर किसी बड़े खतरे को दावत देने जैसा हो सकता है।
कुछ विशेषज्ञों ने यह आशंका भी जताई है कि अगर Airbus, Embraer या दूसरी एयरलाइनों में भी इसी तरह की शिकायतें सामने आती हैं, तो यह सिर्फ किसी एक विमान या एक कंपनी की दिक्कत नहीं रहेगी, बल्कि यह पूरे सिस्टम से जुड़ी एक बड़ी चिंता बन सकती है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी जांच और समीक्षा की ज़रूरत पड़ेगी।
इसके अलावा जानकारों ने यह भी बताया कि Boeing 787 Dreamliner की डिजाइन पूरी तरह आधुनिक है, जिसमें सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए होते हैं। इसलिए इस तरह के मामलों में सिर्फ ऊपर-ऊपर की जांच काफी नहीं होती, बल्कि OEM लेवल पर गहन परीक्षण करना जरूरी होता है, ताकि असली वजह तक पहुँचा जा सके।
यात्रियों को क्या जानना चाहिए?
यह पूरी घटना विमान की लैंडिंग के दौरान सामने आई, यानी ऐसा नहीं हुआ कि जहाज़ हवा में कहीं बीच रास्ते में फँस गया हो या किसी आपात हालात का सामना करना पड़ा हो। पायलटों ने वक्त रहते सतर्कता दिखाई और जैसे ही उन्हें तकनीकी गड़बड़ी का अंदेशा हुआ, उन्होंने तुरंत उसकी रिपोर्ट कर दी। नतीजा यह रहा कि विमान को पूरी तरह सुरक्षित तरीके से बेंगलुरु एयरपोर्ट पर उतार लिया गया और सभी यात्री महफूज़ रहे।
इसके बाद एयरलाइन ने बिना देर किए उस विमान को तुरंत ग्राउंड कर दिया और आगे की तकनीकी जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी। यानी अब वह जहाज़ तब तक उड़ान नहीं भरेगा, जब तक पूरी तरह यह यक़ीन न हो जाए कि सब कुछ ठीक है।
फिलहाल यह साफ़ नहीं हो पाया है कि यह खराबी पूरे सिस्टम से जुड़ी कोई बड़ी तकनीकी समस्या है या फिर किसी एक हिस्से में आई स्थानीय गड़बड़ी। इसी वजह से विशेषज्ञ अभी किसी नतीजे पर पहुँचने से बच रहे हैं और पूरी रिपोर्ट का इंतज़ार किया जा रहा है।
यात्रियों के लिए सबसे अहम बात यह है कि घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है। बेहतर यही होगा कि लोग धैर्य रखें और देखें कि आगे चल रही तकनीकी जांच में क्या नतीजे सामने आते हैं।
हालाँकि सुरक्षा के नज़रिये से देखें तो यह मामला काफी गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि:
इसमें विमान की कंट्रोल सिस्टम से जुड़ी संभावित खामी सामने आई है
इसी तरह की तकनीकी समस्या का नाम पिछले साल हुई एक बड़ी दुर्घटना से भी जुड़ा रहा है
एयरलाइन और नियामक, दोनों ने बिना देर किए तुरंत एहतियाती कदम उठाए हैं
इस पूरे मामले को सीधे तौर पर विमान निर्माता कंपनी Boeing से जोड़कर देखा जा रहा है
अब आगे सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि DGCA, Boeing (या Airbus) और तकनीकी विशेषज्ञ मिलकर इस मसले पर क्या नतीजा निकालते हैं। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि क्या इस घटना से एयरलाइन इंडस्ट्री में उड़ान सुरक्षा को लेकर कोई नए नियम, नई गाइडलाइंस या नई दिशा सामने आती है या नहीं।
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