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Devendra Fadnavis ने की घोषणा:15000 Crore की Big Investment से Nagpur बनेगा Industrial Power Hub

Devendra Fadnavis ने की घोषणा:15000 Crore की Big Investment से Nagpur बनेगा Industrial Power Hub

Devendra Fadnavis ने विदर्भ को विकास का नया केंद्र घोषित किया

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने 6 फ़रवरी 2026 को Nagpur में हुए “Advantage Vidarbha – खासदार औद्योगिक महोत्सव 2026” में विदर्भ के विकास को लेकर एक बड़ा और मजबूत प्लान सामने रखा।

इस कार्यक्रम में कई बड़ी कंपनियों ने विदर्भ में निवेश करने का वादा किया और कई अहम समझौतों पर दस्तखत किए गए। इनमें सबसे खास समझौता करीब 15,000 करोड़ रुपये के ऑटोमोबाइल और ट्रैक्टर बनाने वाले प्लांट को लेकर हुआ, जिसे महिंद्रा एंड महिंद्रा Nagpur में लगाएगी।

मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने कहा कि अब विदर्भ को पीछे नहीं रहने दिया जाएगा। यहां रोज़गार के नए मौके पैदा होंगे, युवाओं को काम मिलेगा और इलाके की तरक्की तेज़ी से होगी। इस पहल से नागपुर और आसपास के इलाकों की पहचान पूरे देश में एक नए औद्योगिक हब के तौर पर बनेगी।

इस मौके पर उन्होंने यह भी बताया कि सरकार का मकसद सिर्फ फैक्ट्रियां लगवाना नहीं है, बल्कि लोगों की ज़िंदगी बेहतर बनाना, कारोबार को बढ़ावा देना और विदर्भ को आत्मनिर्भर बनाना है।

यह पूरा आयोजन इस बात का सबूत है कि महाराष्ट्र सरकार विदर्भ को लेकर बेहद गंभीर है और उसे तरक्की की राह पर आगे बढ़ाने के लिए पूरी ताकत से काम कर रही है। आने वाले समय में इसका फायदा यहां के आम लोगों, दुकानदारों, किसानों और नौजवानों सभी को मिलेगा। कुल मिलाकर, यह महोत्सव विदर्भ के लिए एक नई शुरुआत है, जो उम्मीद, रोज़गार और तरक्की का पैग़ाम लेकर आया है।

Nagpur में महिंद्रा का विशाल निवेश — ₹15,000 करोड़ का ऑटो निवेश

इस ऐतिहासिक समझौते के तहत महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) ने साफ तौर पर ऐलान किया है कि वह आने वाले 10 सालों में महाराष्ट्र में करीब 15,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा Nagpur में लगने वाले एक बड़े और आधुनिक ऑटोमोबाइल और ट्रैक्टर बनाने वाले कारखाने का होगा।

यह फैक्ट्री करीब 1,500 एकड़ ज़मीन पर बनाई जाएगी, जो अपने आप में बहुत बड़ा प्रोजेक्ट है। इसके साथ ही संभाजीनगर (पहले औरंगाबाद) में करीब 150 एकड़ में एक सप्लायर पार्क भी तैयार किया जाएगा, ताकि पार्ट्स और सामान की सप्लाई आसानी से हो सके और काम बिना रुकावट चलता रहे।

इस प्लांट में आने वाली नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा। यहां पेट्रोल-डीज़ल से चलने वाले वाहन (ICE), इलेक्ट्रिक गाड़ियां (EV) और आने वाली पीढ़ी के नए मॉडल तैयार किए जाएंगे। यानी यह फैक्ट्री भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है, जिससे महाराष्ट्र ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का एक बड़ा टेक्निकल सेंटर बन सकेगा।

अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चला, तो यह प्लांट पूरी तरह तैयार होने के बाद हर साल करीब 5 लाख से ज्यादा गाड़ियां और 1 लाख ट्रैक्टर बनाएगा। इससे यह देश के सबसे बड़े और सबसे अहम निर्माण केंद्रों में से एक बन जाएगा।

कंपनी की योजना है कि यह फैक्ट्री 2028 तक उत्पादन शुरू कर देगी, और इसका निर्माण धीरे-धीरे अगले दस सालों में अलग-अलग चरणों में पूरा किया जाएगा।

कुल मिलाकर, यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक फैक्ट्री नहीं है, बल्कि विदर्भ और महाराष्ट्र के लिए रोज़गार, तरक्की और मजबूत भविष्य की एक नई उम्मीद है। इससे हजारों लोगों को काम मिलेगा, कारोबार बढ़ेगा और इलाके की तस्वीर बदलने वाली है।

मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis की प्रमुख बातें

मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने इस मौके पर कहा कि यह निवेश सिर्फ एक फैक्ट्री लगाने का मामला नहीं है, बल्कि विदर्भ के लंबे समय के विकास और तरक्की की तरफ एक बहुत बड़ा और मजबूत कदम है। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट से इलाके में रोज़गार बढ़ेगा, सड़कें, बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं बेहतर होंगी और पूरी क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिलेगी।

Devendra Fadnavis ने ज़ोर देकर कहा कि महाराष्ट्र की अच्छी और दूरदर्शी नीतियों, मज़बूत इंडस्ट्रियल सिस्टम और बेहतर ट्रांसपोर्ट व लॉजिस्टिक्स नेटवर्क की वजह से ही इतनी बड़ी कंपनी ने यहां निवेश करने का भरोसा दिखाया है। यह सरकार की मेहनत और सही नीतियों का नतीजा है।

उन्होंने यह भी साफ कहा कि यह समझौता सिर्फ महिंद्रा ग्रुप के लिए ही फायदेमंद नहीं है, बल्कि इससे विदर्भ के हज़ारों लोगों को सीधा रोज़गार मिलेगा। खासकर यहां के नौजवानों के लिए काम के नए दरवाज़े खुलेंगे, ताकि उन्हें नौकरी के लिए बाहर जाने की मजबूरी न रहे।

मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने कहा कि सरकार चाहती है कि विदर्भ का हर नौजवान अपने ही शहर और अपने ही इलाके में मेहनत करके आगे बढ़े, अपना मुक़ाम बनाए और अपने परिवार का सहारा बने। यह प्रोजेक्ट उसी सोच और उसी मिशन का हिस्सा है।

कुल मिलाकर, यह निवेश विदर्भ के लिए एक नई उम्मीद, नई पहचान और एक रोशन मुस्तक़बिल की शुरुआत है। इससे आने वाले सालों में पूरे इलाके की तस्वीर बदलने वाली है।

विदर्भ में व्यापक निवेश और अवसर

इस बड़े कार्यक्रम में सिर्फ महिंद्रा ही नहीं, बल्कि कई दूसरी बड़ी कंपनियों ने भी विदर्भ में निवेश करने का भरोसा जताया। कुल मिलाकर 48,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश समझौतों (MoUs) पर दस्तखत किए गए, जिसमें ऑटोमोबाइल, स्टील, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर की नामी कंपनियां शामिल रहीं।

इनमें खास तौर पर एक जर्मन EV कंपनी enMotive ने करीब 3,200 करोड़ रुपये के निवेश का ऐलान किया। वहीं स्टील सेक्टर की बड़ी कंपनी Super Smelters ने भी 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा लगाने का वादा किया है। इसके अलावा कई ऑटोमोबाइल, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी कंपनियों ने भी इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया और यहां कारोबार बढ़ाने की दिलचस्पी दिखाई।

सरकार की योजना है कि नागपुर और पूरे विदर्भ इलाके को आने वाले समय में कार बनाने का बड़ा केंद्र, सप्लायर पार्क और ग्रीन एनर्जी हब के रूप में तैयार किया जाए। यानी यहां न सिर्फ फैक्ट्रियां लगेंगी, बल्कि साफ-सुथरी ऊर्जा, आधुनिक तकनीक और पर्यावरण को ध्यान में रखकर विकास किया जाएगा।

इसका सबसे बड़ा फायदा यहां के आम लोगों को मिलेगा। हजारों युवाओं को नौकरी मिलेगी, लोगों को नई-नई ट्रेनिंग और स्किल सीखने के मौके मिलेंगे, छोटे कारोबारियों का धंधा चलेगा और पूरे इलाके की आर्थिक हालत मजबूत होगी।

कुल मिलाकर, यह निवेश विदर्भ के लिए सिर्फ पैसों का मामला नहीं है, बल्कि यह एक बेहतर ज़िंदगी, मजबूत भविष्य और तरक्की से भरे मुस्तक़बिल की तरफ बढ़ाया गया एक अहम कदम है। इससे नागपुर और आसपास के इलाकों की पहचान पूरे देश में एक नए औद्योगिक और विकासशील केंद्र के रूप में बनेगी।

Nagpur और विदर्भ का औद्योगिक भविष्य

विदर्भ इलाका, जो पहले महाराष्ट्र का एक अहम हिस्सा होने के बावजूद तरक्की के मामले में थोड़ा पीछे माना जाता था, अब धीरे-धीरे बदल रहा है। आज Nagpur को एक बड़े ऑटोमोबाइल और इंडस्ट्रियल हब के रूप में तैयार करने की दिशा में तेज़ी से काम हो रहा है।

यह पहल सिर्फ बड़ी कंपनियों को बुलाने और पैसा लगवाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे इलाके की सोच, हालत और ज़िंदगी को बदलने की कोशिश है। यानी यह एक तरह से आर्थिक और सामाजिक बदलाव की मजबूत शुरुआत है।

केंद्र सरकार और महाराष्ट्र सरकार मिलकर इस मिशन को आगे बढ़ा रही हैं, ताकि विदर्भ को आने वाले समय में इंडस्ट्री, लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा केंद्र बनाया जा सके। इसके लिए सड़कें, रेलवे, गोदाम, ट्रांसपोर्ट और दूसरी ज़रूरी सुविधाएं भी लगातार बेहतर की जा रही हैं।

इसका सीधा फायदा यहां के लोगों को मिलेगा। नौजवानों को अपने ही शहर में नौकरी मिलेगी, मजदूरों को काम मिलेगा, छोटे व्यापारियों का धंधा बढ़ेगा और किसानों को भी नए मौके मिलेंगे।

साथ ही, जब विदर्भ मजबूत होगा, तो पूरे महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था को भी नई ताकत मिलेगी। पैसा आएगा, कारोबार बढ़ेगा और विकास की रफ्तार तेज़ होगी।

कुल मिलाकर, विदर्भ अब पीछे रहने वाला इलाका नहीं रहा। यह अब तरक्की, उम्मीद और रोशन मुस्तक़बिल की तरफ तेज़ी से बढ़ता हुआ एक नया केंद्र बनता जा रहा है।

रोजगार और आर्थिक प्रभाव

जानकारों और विशेषज्ञों का कहना है कि इस बड़े निवेश से सिर्फ नई-नई फैक्ट्रियां ही नहीं लगेंगी, बल्कि इनके आसपास छोटे और मझोले उद्योग, पार्ट्स बनाने वाली यूनिट्स, गोदाम, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी सेवाएं भी तेजी से बढ़ेंगी। यानी एक पूरी इंडस्ट्रियल चेन तैयार होगी, जिससे हज़ारों लोगों को सीधा और परोक्ष रूप से रोज़गार मिलेगा।

आज की तारीख में विदर्भ, खासकर नागपुर, को अब एक आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग सेंटर, ग्रीन टेक्नोलॉजी और ऑटो क्लस्टर के लिए एक पसंदीदा जगह के तौर पर देखा जाने लगा है। बड़ी कंपनियां यहां निवेश करने में दिलचस्पी दिखा रही हैं, क्योंकि यहां सुविधाएं भी मिल रही हैं और सरकार का पूरा सपोर्ट भी है।

यह कदम महाराष्ट्र के संतुलित विकास की योजना का भी एक अहम हिस्सा है, ताकि सिर्फ बड़े शहर ही नहीं, बल्कि बाकी इलाके भी बराबरी से आगे बढ़ें। सरकार चाहती है कि तरक्की हर कोने तक पहुंचे, और विदर्भ इसका सबसे बड़ा उदाहरण बने।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस की अगुवाई में उठाया गया यह ऐतिहासिक कदम आने वाले समय में राज्य की अर्थव्यवस्था, इंडस्ट्री और रोज़गार की तस्वीर पूरी तरह बदल सकता है। खास तौर पर महिंद्रा का 15,000 करोड़ रुपये का निवेश नागपुर को एक मजबूत और महत्वाकांक्षी औद्योगिक हब बनाने में बड़ी भूमिका निभाएगा।

यह निवेश सिर्फ मशीनें लगाने या गाड़ियां बनाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह विदर्भ में एक नई आर्थिक और तकनीकी क्रांति की नींव रखेगा। यहां के युवाओं को नई स्किल सीखने का मौका मिलेगा, नए स्टार्टअप्स खुलेंगे और पूरे इलाके में तरक्की की नई लहर दौड़ेगी।

कुल मिलाकर, यह प्रोजेक्ट विदर्भ के लिए एक नया दौर शुरू कर रहा है — एक ऐसा दौर, जो महाराष्ट्र के भविष्य की दिशा बदल सकता है और इसे देश के सबसे मजबूत औद्योगिक राज्यों में शामिल कर सकता है।

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