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Global Update: Khamenei Death पर India का बड़ा कदम, Jaishankar ने Iran से की High-Level Talk

Global Update: Khamenei Death पर India का बड़ा कदम, Jaishankar ने Iran से की High-Level Talk

Khamenei के निधन पर India ने जताया शोक और वैश्विक प्रतिक्रिया

मध्य-पूर्व की सियासत में इन दिनों एक बहुत बड़ा और अहम घटनाक्रम सामने आया है। ईरान के सर्वोच्च रहबर आयतुल्ला अली Khamenei के इंतकाल की खबर सामने आते ही पूरी दुनिया की सियासत में हलचल तेज हो गई है।

अलग-अलग मुल्कों से तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं और कई जगह इस खबर को लेकर गहरी चिंता भी जताई जा रही है। इसी बीच भारत ने भी आधिकारिक तौर पर गम और अफसोस का इज़हार करते हुए ईरान की अवाम और वहां की हुकूमत के साथ अपनी ताज़ियत पेश की है।

India के विदेश मंत्री डॉ. एस. Jaishankar ने Iran के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से टेलीफोन पर बात की और इस मुश्किल घड़ी में अपनी हमदर्दी और संवेदनाएं जाहिर कीं। इसके अलावा भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी नई दिल्ली में मौजूद ईरानी दूतावास पहुंचे, जहां उन्होंने शोक-पुस्तिका में अपने हस्ताक्षर किए और ईरान के राजनयिकों से मुलाकात कर भारत की तरफ से गहरा दुख और ताज़ियत पेश की।

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे वक्त में सामने आया है जब पश्चिम एशिया का माहौल पहले से ही काफी नाज़ुक और तनावपूर्ण बना हुआ है। ईरान, अमेरिका और इज़रायल के बीच लंबे समय से तनातनी चल रही है और कई बार हालात टकराव के करीब पहुंचते दिखाई दिए हैं। ऐसे माहौल में खामेनेई के इंतकाल की खबर ने सियासी हलकों में नई हलचल पैदा कर दी है और कई मुल्कों के लिए यह एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती भी बनती दिखाई दे रही है।

86 साल के आयतुल्ला अली Khamenei को Iran की सियासत और मजहबी निजाम का सबसे ताकतवर चेहरा माना जाता था। पिछले कई दशकों से वह ईरान के सर्वोच्च नेता के तौर पर देश की दिशा और नीतियों को तय करने में अहम भूमिका निभा रहे थे। ईरान की घरेलू सियासत से लेकर उसकी विदेश नीति तक, लगभग हर बड़े फैसले में उनकी अहम मौजूदगी मानी जाती थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल की तरफ से किए गए एक संयुक्त सैन्य हमले में उनकी मौत हो गई। हालांकि इस हमले को लेकर अलग-अलग दावे और चर्चाएं भी सामने आ रही हैं, लेकिन इतना तय है कि इस खबर ने पूरे मध्य-पूर्व के सियासी माहौल को और ज्यादा गर्म कर दिया है।

Khamenei के इंतकाल के बाद Iran में राष्ट्रीय शोक का ऐलान किया गया है। देश के कई बड़े शहरों में लोगों ने बड़ी तादाद में इकट्ठा होकर शोक सभाएं आयोजित कीं और अपने नेता को याद किया। सड़कों पर मातम का माहौल दिखाई दिया और लोगों ने खामेनेई की तस्वीरें लेकर उनके लिए दुआएं कीं।

ईरानी नेतृत्व ने इस हमले को खुली आक्रामक कार्रवाई बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया देने की चेतावनी भी दी है। वहां के कई वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि इस घटना को यूं ही नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और इसके अंजाम पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

दुनिया के अलग-अलग मुल्कों से भी इस घटना पर प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ देशों ने इस हमले की आलोचना की और इसे क्षेत्रीय शांति के लिए खतरनाक बताया, जबकि कुछ देशों ने इसे मध्य-पूर्व की जटिल सियासत के नजरिए से देखा।

India ने इस पूरे मामले में एक संतुलित और समझदारी भरा कूटनीतिक रुख अपनाया है। भारत की तरफ से साफ तौर पर कहा गया है कि वह इस दुखद घड़ी में ईरान की जनता के साथ खड़ा है और क्षेत्र में अमन, स्थिरता और बातचीत के जरिए समाधान की उम्मीद करता है।

भारत और ईरान के रिश्ते लंबे समय से दोस्ताना और अहम रहे हैं। दोनों मुल्कों के बीच व्यापार, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग के कई बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं। ऐसे में भारत का यह ताज़ियत भरा कदम न सिर्फ कूटनीतिक शिष्टाचार का हिस्सा है, बल्कि दोनों देशों के पुराने रिश्तों की भी झलक पेश करता है।

कुल मिलाकर Khamenei का इंतकाल सिर्फ ईरान के लिए ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की सियासत के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ईरान की सियासत किस दिशा में आगे बढ़ती है और मध्य-पूर्व के बदलते हालात पर दुनिया के बड़े मुल्क किस तरह की रणनीति अपनाते हैं।

India की आधिकारिक प्रतिक्रिया

India सरकार की तरफ से इस मामले में संवेदना जताने के लिए विदेश सचिव विक्रम मिस्री खुद नई दिल्ली में मौजूद ईरान के दूतावास पहुंचे। वहां उन्होंने शोक-पुस्तिका में अपने हस्ताक्षर किए और आयतुल्ला अली खामेनेई के इंतकाल पर गहरा अफसोस और ताज़ियत का इज़हार किया।

इस दौरान उनकी मुलाकात ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली से भी हुई। बातचीत के दौरान विक्रम मिस्री ने साफ तौर पर कहा कि इस मुश्किल और गमगीन घड़ी में भारत ईरान की अवाम के साथ पूरी हमदर्दी और मजबूती के साथ खड़ा है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत और ईरान के रिश्ते सिर्फ कूटनीतिक नहीं बल्कि ऐतिहासिक और तहज़ीबी भी हैं, जो कई दशकों से आपसी भरोसे और दोस्ती पर टिके हुए हैं। यही वजह है कि जब भी किसी एक मुल्क पर मुश्किल वक्त आता है तो दूसरा मुल्क उसके साथ खड़ा नजर आता है।

असल में India और ईरान के दरमियान लंबे अरसे से मजबूत रिश्ते रहे हैं। दोनों देशों के बीच कारोबार, ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग और कई अहम रणनीतिक प्रोजेक्ट्स पर मिलकर काम किया जा रहा है।

इन्हीं में से एक बहुत महत्वपूर्ण परियोजना चाबहार पोर्ट का विकास भी है, जिसे भारत और ईरान की दोस्ती का एक बड़ा प्रतीक माना जाता है। यह पोर्ट न सिर्फ व्यापार के लिहाज से अहम है बल्कि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और रणनीतिक नजरिए से भी काफी मायने रखता है।

यही वजह है कि भारत ने इस पूरे घटनाक्रम के बाद बेहद संतुलित और संवेदनशील रुख अपनाते हुए ईरान के प्रति अपनी ताज़ियत और हमदर्दी जाहिर की है, ताकि दोनों मुल्कों के बीच भरोसे और दोस्ती का रिश्ता पहले की तरह मजबूत बना रहे।

Jaishankar और ईरानी विदेश मंत्री की बातचीत

India के विदेश मंत्री डॉ. एस. Jaishankar ने भी इस पूरे मामले को लेकर ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से टेलीफोन पर बात की। इस बातचीत के ज़रिये दोनों नेताओं ने मौजूदा हालात और मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव पर खुलकर चर्चा की। बाद में जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी इस बातचीत की जानकारी साझा की और बताया कि दोनों देशों के बीच हालिया घटनाक्रम को लेकर अहम बातचीत हुई है।

बताया जा रहा है कि इस बातचीत का मकसद सिर्फ हालात की जानकारी लेना ही नहीं था, बल्कि इस बात पर भी चर्चा करना था कि इस नाज़ुक स्थिति में किस तरह से अमन और स्थिरता कायम रखी जा सकती है। भारत ने साफ तौर पर अपनी चिंता जाहिर की है कि मध्य-पूर्व में अगर तनाव और ज्यादा बढ़ता है तो उसका असर पूरे इलाके और दुनिया की सियासत पर पड़ सकता है।

सियासी जानकारों और अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का भी यही मानना है कि भारत इस पूरे संकट में एक संतुलित और समझदारी भरी भूमिका निभाना चाहता है। भारत की कोशिश यही है कि बातचीत और कूटनीतिक रास्तों के जरिए हालात को समझा जाए और किसी भी तरह की बड़ी टकराव वाली स्थिति से बचा जा सके, ताकि इलाके में अमन-ओ-सुकून और स्थिरता बरकरार रह सके।

India और Iran संबंधों की अहमियत

भारत और ईरान के रिश्ते काफी पुराने, गहरे और मजबूत माने जाते हैं। दोनों मुल्कों के बीच सिर्फ सियासी ही नहीं बल्कि तहज़ीबी, सांस्कृतिक और कारोबारी ताल्लुकात भी लंबे समय से बने हुए हैं। सदियों से दोनों देशों के बीच आपसी समझ, भरोसा और सहयोग की एक मजबूत परंपरा रही है। यही वजह है कि आज भी भारत और ईरान कई अहम क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं।

दोनों देशों के दरमियान ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग जैसे कई बड़े क्षेत्र हैं, जहां लगातार साझेदारी बढ़ रही है। खास तौर पर चाबहार बंदरगाह की परियोजना को बहुत अहम माना जाता है। यह बंदरगाह भारत के लिए बेहद रणनीतिक मायने रखता है, क्योंकि इसके जरिए भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया के देशों तक सीधे पहुंच बनाने का रास्ता मिलता है। यही वजह है कि इस प्रोजेक्ट को भारत-ईरान दोस्ती की एक मजबूत कड़ी भी माना जाता है।

इसके अलावा ईरान लंबे समय से भारत के लिए तेल और गैस का एक अहम स्रोत भी रहा है। ऊर्जा के क्षेत्र में दोनों देशों का सहयोग भारत की जरूरतों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी कारण भारत हमेशा कोशिश करता है कि ईरान के साथ उसके रिश्ते संतुलित और मजबूत बने रहें।

अब जब आयतुल्ला अली खामेनेई के इंतकाल की खबर सामने आई है, तो दुनिया भर के सियासी विश्लेषकों और अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों की नजर भी भारत-ईरान के रिश्तों पर टिकी हुई है। कई लोग यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि इस बड़े घटनाक्रम के बाद दोनों देशों के संबंधों पर क्या असर पड़ सकता है। हालांकि भारत की तरफ से अब तक जो संकेत सामने आए हैं, उनसे यही साफ होता है कि नई दिल्ली ईरान के साथ अपने पारंपरिक और दोस्ताना रिश्तों को बरकरार रखना चाहती है।

दूसरी तरफ अगर पूरे मध्य-पूर्व के हालात पर नजर डालें तो वहां पहले से ही तनाव का माहौल बना हुआ है। खामेनेई की मौत ऐसे वक्त में हुई है जब ईरान और पश्चिमी देशों के बीच रिश्ते पहले ही काफी तल्ख और तनावपूर्ण चल रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में ईरान और इज़रायल के बीच टकराव की कई घटनाएं सामने आई हैं, खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं और तेल के कारोबार को लेकर भी कई तरह के विवाद और सियासी खींचतान देखने को मिली है।

ऐसे माहौल में खामेनेई का इंतकाल पूरे इलाके की सियासत को एक नए मोड़ पर ला सकता है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना के बाद मध्य-पूर्व में ताकत का संतुलन बदल सकता है और आने वाले समय में नए सियासी समीकरण भी बन सकते हैं। इसके साथ ही ईरान की अंदरूनी राजनीति में भी नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

कुल मिलाकर हालात काफी नाज़ुक और संवेदनशील माने जा रहे हैं। दुनिया भर की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में ईरान की सियासत किस दिशा में आगे बढ़ती है और मध्य-पूर्व का बदलता हुआ सियासी मंजर किस तरह से वैश्विक राजनीति को प्रभावित करता है।

India के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह घटनाक्रम

मध्य-पूर्व में होने वाली हर बड़ी घटना का असर भारत पर भी किसी न किसी तरह से जरूर पड़ता है। इसकी कई अहम वजहें हैं। सबसे पहली वजह है ऊर्जा की जरूरत। भारत अपनी तेल और गैस की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी और मध्य-पूर्व के देशों से ही मंगाता है। अगर इस इलाके में तनाव बढ़ता है या हालात बिगड़ते हैं तो तेल की सप्लाई और कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है, जिसका प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देता है।

दूसरी बड़ी वजह है प्रवासी भारतीयों की मौजूदगी। खाड़ी देशों और मध्य-पूर्व के कई मुल्कों में लाखों की तादाद में भारतीय काम करते हैं। ये लोग वहां अलग-अलग क्षेत्रों में नौकरी और कारोबार से जुड़े हुए हैं। ऐसे में अगर इलाके में तनाव या टकराव बढ़ता है तो उनकी सुरक्षा और रोज़गार को लेकर भी चिंता बढ़ जाती है। यही कारण है कि भारत सरकार हमेशा इस क्षेत्र के हालात पर बेहद करीब से नज़र रखती है।

तीसरी अहम बात है व्यापार और रणनीतिक सहयोग। भारत के कई आर्थिक समझौते, व्यापारिक रिश्ते और कुछ रक्षा सहयोग भी इस इलाके के देशों के साथ जुड़े हुए हैं। इसलिए जब भी मध्य-पूर्व में कोई बड़ा सियासी या सैन्य घटनाक्रम होता है, तो भारत के लिए वह एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन जाता है। यही वजह है कि भारत आम तौर पर ऐसे मामलों में बहुत सोच-समझकर और संतुलित कूटनीतिक रुख अपनाता है, ताकि किसी भी तरह की अनावश्यक तनातनी से बचा जा सके और इलाके में अमन-ओ-सुकून बना रहे।

अब अगर मौजूदा हालात की बात करें तो आयतुल्ला अली खामेनेई के इंतकाल के बाद अंतरराष्ट्रीय सियासत में एक नया दौर शुरू होने की चर्चा भी तेज हो गई है। कई वैश्विक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना के बाद दुनिया की बड़ी ताकतों के बीच नए सियासी समीकरण बन सकते हैं। अमेरिका, इज़रायल, रूस, चीन और यूरोप के देशों की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में काफी अहम मानी जा रही है, क्योंकि इन्हीं के रुख से आगे की स्थिति काफी हद तक तय हो सकती है।

जानकारों का यह भी कहना है कि अगर इस पूरे मामले में तनाव और ज्यादा बढ़ता है तो इसका असर सिर्फ मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक तेल बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और दुनिया की सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, व्यापारिक रास्तों पर दबाव और कूटनीतिक खींचतान जैसे हालात भी पैदा हो सकते हैं।

फिलहाल हालात काफी तेजी से बदल रहे हैं और कई अहम सवाल ऐसे हैं जिनके जवाब अभी साफ नहीं हैं। मसलन ईरान में अब नया नेतृत्व कौन संभालेगा, वहां की सियासत किस दिशा में जाएगी, और अमेरिका तथा इज़रायल के साथ मौजूदा तनाव किस रूप में आगे बढ़ेगा — यह सब अभी आने वाले वक्त में ही साफ हो पाएगा।

इसके अलावा यह भी एक बड़ा सवाल है कि मध्य-पूर्व की क्षेत्रीय ताकतें इस पूरे संकट को किस तरह संभालती हैं। क्या हालात बातचीत और कूटनीति के जरिए शांत होंगे या फिर टकराव और बढ़ेगा — इस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं।

कुल मिलाकर देखा जाए तो आयतुल्ला अली खामेनेई का इंतकाल सिर्फ ईरान के लिए ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की सियासत के लिए एक बहुत अहम घटना माना जा रहा है। भारत ने इस मौके पर बेहद संतुलित और समझदारी भरा रुख अपनाते हुए ईरान के प्रति अपनी ताज़ियत और हमदर्दी का इज़हार किया है और साथ ही बातचीत के जरिए हालात को समझने की कोशिश भी की है।

विदेश मंत्री डॉ. एस. Jaishankar और Iran के विदेश मंत्री के बीच हुई बातचीत भी इसी बात का इशारा करती है कि भारत इस पूरे मसले को लेकर गंभीर है और चाहता है कि इलाके में अमन, स्थिरता और सियासी संतुलन बना रहे। अब आने वाले दिनों में यह देखना काफी दिलचस्प होगा कि मध्य-पूर्व की सियासत किस मोड़ पर जाती है और दुनिया की बड़ी ताकतें इस नाज़ुक हालात को किस तरह संभालती हैं।

मध्य-पूर्व में होने वाली हर बड़ी घटना का असर भारत पर भी पड़ता है। भारत अपनी तेल की बड़ी जरूरत इसी इलाके से पूरी करता है और खाड़ी देशों में लाखों भारतीय काम करते हैं। इसलिए इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव भारत के लिए चिंता का विषय बन जाता है।

खामेनेई के इंतकाल के बाद दुनिया की सियासत में नए समीकरण बनने की चर्चा है। भारत ने संतुलित कूटनीतिक रुख अपनाते हुए ईरान के साथ हमदर्दी जताई और बातचीत के जरिए हालात को समझने की कोशिश की है।

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