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Nagpur में क्रिकेट Satta Racket का भंडाफोड़, Crime Branch की बड़ी कार्रवाई
Nagpur में टी20 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल मुकाबले के दौरान एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई। मैच का रोमांच अपने चरम पर था, लेकिन इसी बीच Nagpur पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध क्रिकेट सट्टेबाज़ी के एक पूरे रैकेट का पर्दाफाश कर दिया। यह कार्रवाई नागपुर पुलिस की क्राइम ब्रांच यूनिट-3 ने की, जिसने भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच खेले जा रहे इस हाई-वोल्टेज फाइनल मैच के दौरान चल रहे सट्टे के कारोबार पर छापा मारकर दो आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ़्तार कर लिया।
दरअसल, Nagpur पुलिस को पहले से ही ख़ुफ़िया ज़रियों से यह इत्तला मिल रही थी कि शहर के कुछ इलाक़ों में टी20 वर्ल्ड कप के फाइनल मैच को लेकर बड़े पैमाने पर अवैध सट्टेबाज़ी चल रही है। जैसे-जैसे मैच का रोमांच बढ़ रहा था, वैसे-वैसे इस ग़ैरक़ानूनी कारोबार में भी तेज़ी आ रही थी। इसी बीच Nagpur पुलिस की क्राइम ब्रांच यूनिट-3 को एक पुख़्ता और भरोसेमंद मुख़बिर से ख़ास जानकारी मिली कि मानकापुर पुलिस थाना क्षेत्र में कुछ लोग मैच के हर ओवर और हर गेंद पर लाखों रुपये का दांव लगा रहे हैं।
सूचना मिलते ही Crime Branch की टीम हरकत में आ गई। Nagpur पुलिस अधिकारियों ने बड़ी ही सूझबूझ और समझदारी से एक पूरी योजना तैयार की। इसके बाद टीम ने चुपचाप उस जगह पर नज़र रखना शुरू किया, जहां से सट्टेबाज़ी का यह धंधा चलाया जा रहा था। जैसे ही पुलिस को यक़ीन हो गया कि अंदर अवैध सट्टे का खेल जारी है, वैसे ही टीम ने अचानक छापा मार दिया।
छापेमारी के दौरान वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस को देखते ही कुछ लोग घबराने लगे, लेकिन क्राइम ब्रांच की टीम पहले से पूरी तरह तैयार थी। पुलिस ने मौके से दो लोगों को रंगे हाथों गिरफ़्तार कर लिया, जो मोबाइल फ़ोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के ज़रिये मैच पर सट्टा लगवा रहे थे।
बताया जा रहा है कि आरोपी मैच के हर छोटे-बड़े पल पर सट्टा लगवा रहे थे — जैसे कि अगली गेंद पर रन बनेगा या नहीं, विकेट गिरेगा या नहीं, और किस टीम का पलड़ा भारी रहेगा। इस तरह के सट्टे में अक्सर लाखों रुपये का लेन-देन होता है, जो पूरी तरह ग़ैरक़ानूनी माना जाता है।
Nagpur पुलिस ने मौके से कई मोबाइल फ़ोन, सिम कार्ड, नोटबुक और नक़दी भी बरामद की है। शुरुआती जांच में यह भी अंदेशा जताया जा रहा है कि यह सिर्फ़ दो लोगों का छोटा-मोटा खेल नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था, जो अलग-अलग शहरों तक फैला हो सकता है।
Crime Branch के अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों से गहराई से पूछताछ की जा रही है, ताकि इस पूरे सट्टेबाज़ी नेटवर्क के बाकी लोगों तक भी पहुंचा जा सके। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस ग़ैरक़ानूनी धंधे में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और इसका कनेक्शन किन-किन शहरों से जुड़ा हुआ है।
Nagpur पुलिस ने साफ़ तौर पर कहा है कि क्रिकेट सट्टेबाज़ी जैसे अवैध कारोबार को किसी भी क़ीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे ग़ैरक़ानूनी कामों पर सख़्ती से कार्रवाई जारी रहेगी। पुलिस की इस कार्रवाई को शहर में काफ़ी अहम और असरदार माना जा रहा है, क्योंकि बड़े टूर्नामेंट के दौरान अक्सर सट्टेबाज़ी का कारोबार तेज़ हो जाता है।
फिलहाल पुलिस इस मामले की तफ़्तीश में जुटी हुई है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इस पूरे नेटवर्क से जुड़े और भी नाम सामने आ सकते हैं।
गुप्त सूचना के आधार पर की गई कार्रवाई
Nagpur पुलिस के मुताबिक़ 8 मार्च 2026 की रात भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच टी20 वर्ल्ड कप का फ़ाइनल मुकाबला खेला जा रहा था। पूरे देश में इस मैच को लेकर जबरदस्त उत्साह और रोमांच का माहौल था। लोग अपने-अपने घरों में बैठकर मैच का लुत्फ़ उठा रहे थे। लेकिन इसी बीच नागपुर में कुछ लोग इस बड़े मुकाबले का फ़ायदा उठाकर ग़ैरक़ानूनी सट्टेबाज़ी का धंधा चला रहे थे।
इसी दौरान Nagpur Crime Branch यूनिट-3 को अपने भरोसेमंद और विश्वसनीय मुख़बिरों से एक अहम इत्तला मिली। सूचना में बताया गया कि मानकापुर इलाके में कुछ लोग एक मकान के अंदर बैठकर क्रिकेट मैच पर बड़े पैमाने पर सट्टा चला रहे हैं। खबर मिलते ही पुलिस के अफसर तुरंत हरकत में आ गए और बिना वक़्त गंवाए पूरी कार्रवाई की योजना तैयार कर ली।
Nagpur पुलिस टीम ने बेहद समझदारी और गोपनीय तरीके से उस जगह की निगरानी शुरू की, ताकि किसी को भनक न लगे। इसके बाद तय योजना के मुताबिक़ रात लगभग 9 बजकर 20 मिनट से लेकर 12 बजकर 20 मिनट के बीच पुलिस ने गीता नगर के ठाकरे लेआउट, फरस चौक के पास मौजूद एक मकान पर अचानक छापा मार दिया।
जब पुलिस टीम वहां पहुंची तो जांच के दौरान यह सामने आया कि उस मकान की ऊपरी मंज़िल से ही सट्टेबाज़ी का पूरा कारोबार चलाया जा रहा था। अंदर बैठे लोग मोबाइल फ़ोन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के ज़रिये अलग-अलग ग्राहकों से संपर्क कर रहे थे और मैच के हर छोटे-बड़े पल पर दांव लगवा रहे थे। यानी कि मैच के दौरान हर गेंद, हर ओवर और हर रन पर सट्टे का खेल चल रहा था।
छापेमारी के दौरान वहां कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल भी बन गया, लेकिन पुलिस ने फुर्ती दिखाते हुए दो लोगों को मौके पर ही रंगे हाथ पकड़ लिया। पुलिस ने जिन दो आरोपियों को गिरफ़्तार किया, उनकी पहचान चैतन्यकुमार गंगाराम ठाकरे (55 वर्ष) और पुरुषोत्तम दशरथ सोनकुसरे (53 वर्ष) के रूप में हुई है।
पुलिस के अनुसार चैतन्यकुमार गंगाराम ठाकरे नागपुर के इतवारी पोस्ट ऑफिस के पास खापरी मोहल्ला इलाके के रहने वाले हैं। वहीं दूसरे आरोपी पुरुषोत्तम दशरथ सोनकुसरे नागपुर के वाठोडा इलाके के अनमोल नगर में प्लॉट नंबर 100 पर रहते हैं।
Nagpur पुलिस ने दोनों आरोपियों को उस वक़्त दबोचा जब वे मोबाइल फ़ोन के ज़रिये ग्राहकों से सीधे संपर्क में थे और मैच पर सट्टे के दांव स्वीकार कर रहे थे। पुलिस के पहुंचते ही उनके पास मौजूद मोबाइल फ़ोन और अन्य उपकरणों की भी जांच की गई।
प्रारंभिक पूछताछ के दौरान यह भी सामने आया कि ये दोनों आरोपी कोई नए खिलाड़ी नहीं थे, बल्कि काफ़ी समय से क्रिकेट मैचों पर सट्टा लगवाने के इस ग़ैरक़ानूनी धंधे से जुड़े हुए थे। बताया जा रहा है कि जैसे ही कोई बड़ा मैच या टूर्नामेंट होता, वैसे ही इनकी गतिविधियां और ज़्यादा तेज़ हो जाती थीं।

ख़ास तौर पर टी20 वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट के दौरान इनके पास ग्राहकों की संख्या भी बढ़ जाती थी और लाखों रुपये तक का लेन-देन होने की आशंका जताई जा रही है।
फिलहाल पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर आगे की तफ़्तीश शुरू कर दी है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे सट्टेबाज़ी नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और इसका कनेक्शन शहर के बाहर या दूसरे राज्यों से भी जुड़ा हुआ है या नहीं। पुलिस का कहना है कि इस मामले में आगे और भी खुलासे हो सकते हैं।
Satta Racket में इस्तेमाल हो रहे उपकरण जब्त
छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से कई ऐसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी बरामद किए, जिनका इस्तेमाल सट्टेबाज़ी के इस ग़ैरक़ानूनी कारोबार को चलाने में किया जा रहा था। Nagpur पुलिस टीम जब मकान की तलाशी ले रही थी, तब उन्हें वहां से कई अहम चीज़ें हाथ लगीं। इनमें एक टेलीविज़न सेट, अलग-अलग कंपनियों के करीब 10 मोबाइल फ़ोन और सट्टेबाज़ी में इस्तेमाल होने वाले दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण शामिल थे।
Nagpur पुलिस अधिकारियों के मुताबिक़ जब्त किए गए इन सभी सामानों की कुल क़ीमत लगभग 1 लाख 38 हज़ार 220 रुपये बताई जा रही है। जांच के दौरान यह भी पता चला कि आरोपी इन मोबाइल फ़ोन और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की मदद से अलग-अलग ग्राहकों से लगातार संपर्क में रहते थे। टीवी पर लाइव मैच देखकर वे उसी के हिसाब से दांव तय करते थे और लोगों से पैसे लगवाते थे।
बताया जा रहा है कि मैच के हर ओवर और हर गेंद के साथ सट्टे की रक़म बदलती रहती थी। आरोपी लाइव स्कोर पर नज़र रखते हुए अपने ग्राहकों को तुरंत अपडेट देते थे और उसी के मुताबिक़ सट्टा लगवाते थे। इसी तरह यह पूरा ग़ैरक़ानूनी कारोबार बड़ी चालाकी से चलाया जा रहा था।
इधर, गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों से जब पुलिस ने सख़्ती से पूछताछ की, तो इस पूरे मामले में कुछ और चौंकाने वाली जानकारियां सामने आईं। पूछताछ के दौरान यह खुलासा हुआ कि यह सट्टेबाज़ी का खेल सिर्फ़ दो लोगों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे और भी कई लोग शामिल थे जो इस धंधे को मिलकर चला रहे थे।
जांच के दौरान जिन अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं, उनमें संजू रामटेकेकर, हेमराज नामदेवराव कोहाड़ और अविनाश खडके के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि ये सभी आरोपी फिलहाल फरार हैं और छापेमारी के वक्त मौके पर मौजूद नहीं थे।
हालांकि पुलिस अब इन सभी फरार आरोपियों की तलाश में जुट गई है। अलग-अलग इलाक़ों में लगातार दबिश दी जा रही है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इन लोगों को भी गिरफ़्तार कर लिया जाएगा।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे मामले की तफ़्तीश अभी जारी है और जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे इस सट्टेबाज़ी नेटवर्क से जुड़े और भी कई राज़ सामने आ सकते हैं। फिलहाल पुलिस इस ग़ैरक़ानूनी रैकेट की पूरी जड़ तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, ताकि इसमें शामिल हर शख़्स को क़ानून के दायरे में लाया जा सके।
महाराष्ट्र जुआ प्रतिबंध अधिनियम के तहत मामला दर्ज
इस पूरे मामले में Nagpur पुलिस ने गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई भी शुरू कर दी है। नागपुर पुलिस के मुताबिक़ इन पर महाराष्ट्र प्रिवेंशन ऑफ़ गैंबलिंग एक्ट, यानी महाराष्ट्र जुआ प्रतिबंध क़ानून की धारा 4 और 5 के तहत मुक़दमा दर्ज किया गया है। यह मामला मानकापुर पुलिस स्टेशन में बाक़ायदा दर्ज कर लिया गया है और अब इसकी आगे की तफ़्तीश जारी है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल जांच का दायरा और भी बढ़ाया जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं यह सट्टेबाज़ी का नेटवर्क किसी बड़े गिरोह से तो नहीं जुड़ा हुआ है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या इसका कनेक्शन नागपुर के बाहर दूसरे शहरों या राज्यों से भी है। क्योंकि अक्सर ऐसे ग़ैरक़ानूनी धंधे अकेले नहीं चलते, बल्कि इनके पीछे एक बड़ा और संगठित नेटवर्क काम करता है।
इस पूरे ऑपरेशन को Nagpur पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में अंजाम दिया गया। पुलिस विभाग के आला अफसर लगातार इस कार्रवाई पर नज़र बनाए हुए थे और टीम को ज़रूरी निर्देश दे रहे थे। जिन वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में यह पूरी कार्रवाई हुई, उनमें नागपुर के पुलिस आयुक्त रविंदर कुमार सिंगल, संयुक्त पुलिस आयुक्त नवीनचंद्र रेड्डी, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (क्राइम) वसंत परदेशी, डीसीपी (डिटेक्शन) राहुल मकनिकर और एसीपी (क्राइम ब्रांच) अभिजीत पाटिल शामिल थे।
इन अधिकारियों के मार्गदर्शन में Crime Branch यूनिट-3 की टीम ने पूरी योजना के साथ इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। पुलिस टीम ने पहले गुप्त जानकारी जुटाई, फिर पूरी रणनीति तैयार की और उसके बाद सही वक़्त पर छापेमारी करके सट्टेबाज़ी के इस ग़ैरक़ानूनी रैकेट का पर्दाफाश कर दिया।
इस कार्रवाई को सफल बनाने में कई पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की अहम भूमिका रही। जिन लोगों ने इस ऑपरेशन में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया, उनमें पुलिस निरीक्षक महेश सगदे, पीएसआई अमित देशमुख, संतोष सिंह ठाकुर, अजय पाटिल, अनुप तायवाडे, विवेक भोयर, रोहित काले, मनीष रामटेके और प्रमोद देशभ्रतार के नाम शामिल हैं।
इन सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलकर बड़ी सूझबूझ, सतर्कता और टीमवर्क के साथ यह कार्रवाई अंजाम दी। पहले पूरी योजना बनाई गई, फिर सही समय पर छापा मारा गया और आखिरकार सट्टेबाज़ी के इस पूरे खेल को बेनक़ाब कर दिया गया।
पुलिस का कहना है कि शहर में इस तरह के ग़ैरक़ानूनी कामों के ख़िलाफ़ आगे भी सख़्त कार्रवाई जारी रहेगी। अगर कहीं भी अवैध सट्टेबाज़ी या इसी तरह की गतिविधियों की जानकारी मिलती है, तो पुलिस तुरंत कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगी। फिलहाल इस मामले की तफ़्तीश जारी है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस रैकेट से जुड़े बाकी लोगों को भी क़ानून के शिकंजे में ले लिया जाएगा।
बड़े मैचों के दौरान बढ़ जाती है सट्टेबाजी
Nagpur पुलिस अधिकारियों के मुताबिक़ भारत और न्यूज़ीलैंड जैसे बड़े और हाई-प्रोफाइल क्रिकेट मुकाबलों के दौरान अवैध सट्टेबाज़ी का कारोबार अचानक बहुत तेज़ हो जाता है। जब कोई बड़ा टूर्नामेंट, ख़ासकर टी20 वर्ल्ड कप जैसा इंटरनेशनल इवेंट चल रहा होता है, तब सट्टेबाज़ों की गतिविधियां भी काफ़ी बढ़ जाती हैं। ऐसे मौकों पर लाखों नहीं बल्कि कई बार करोड़ों रुपये तक का सट्टा लगाया जाता है।
पुलिस का कहना है कि आजकल सट्टेबाज़ी का तरीक़ा भी काफ़ी बदल गया है। पहले यह काम आमतौर पर फोन कॉल या आमने-सामने बैठकर किया जाता था, लेकिन अब इसमें टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ गया है। कई सट्टेबाज़ मोबाइल ऐप, व्हाट्सऐप, टेलीग्राम और अलग-अलग लाइव स्कोरिंग वेबसाइटों के ज़रिये अपने ग्राहकों से संपर्क करते हैं। इन प्लेटफॉर्म्स के ज़रिये वे तुरंत दांव तय करते हैं और मैच की हर गेंद के हिसाब से सट्टा लगवाते हैं।
इसी वजह से ऐसे ग़ैरक़ानूनी नेटवर्क तक पहुंचना पुलिस के लिए भी कई बार मुश्किल हो जाता है, क्योंकि पूरा खेल मोबाइल और इंटरनेट के ज़रिये चलाया जाता है। लेकिन इसके बावजूद नागपुर पुलिस का कहना है कि वह शहर में चल रही ऐसी अवैध गतिविधियों पर लगातार कड़ी नज़र बनाए हुए है। समय-समय पर पुलिस को जहां भी इस तरह की जानकारी मिलती है, वहां तुरंत कार्रवाई भी की जाती है।
फिलहाल इस पूरे मामले में पुलिस की जांच अभी जारी है और अधिकारी इस रैकेट की गहराई तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस सट्टेबाज़ी नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि यह ग़ैरक़ानूनी कारोबार कब से चल रहा था और इसमें अब तक कितनी बड़ी रकम का लेन-देन हो चुका है।
इसके अलावा Nagpur पुलिस यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि कहीं इस नेटवर्क का संबंध किसी बड़े राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय सट्टेबाज़ी गिरोह से तो नहीं है। क्योंकि अक्सर ऐसे मामलों में छोटे स्तर पर काम करने वाले लोग किसी बड़े नेटवर्क के लिए काम करते पाए जाते हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी और जो आरोपी अभी फरार चल रहे हैं उनकी गिरफ़्तारी होगी, वैसे-वैसे इस पूरे सट्टेबाज़ी नेटवर्क के बारे में और भी कई अहम खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल पुलिस पूरी गंभीरता और सतर्कता के साथ इस मामले की तफ़्तीश में जुटी हुई है।
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