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US-Israel-Iran War: Iran के विदेश मंत्री अराघची ने चौथी बार Jaishankar को किया फोन
मध्य पूर्व में चल रहा US Israel Iran war दिन-प्रतिदिन और ज्यादा गंभीर होता जा रहा है। हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि पूरा इलाका लगातार तनाव और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। युद्ध के लगभग 14वें दिन ईरान की राजधानी Tehran से जोरदार धमाकों और ताबड़तोड़ air strikes की खबरें सामने आई हैं, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया है। कई इलाकों में आसमान में धुएँ के गुबार देखे गए और लगातार सायरन की आवाज़ों ने शहर के माहौल को और ज्यादा खौफनाक बना दिया।
इसी दौरान एक अहम diplomatic development भी सामने आया है। ईरान के Foreign Minister Abbas Araghchi ने भारत के External Affairs Minister S. Jaishankar को चौथी बार फोन करके मौजूदा हालात पर तफसीली बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत ऐसे नाजुक वक्त में हुई है जब पूरे West Asia में तनाव अपने चरम पर पहुँच चुका है और कई बड़े देश इस जंग को फैलने से रोकने के लिए diplomatic efforts में जुटे हुए हैं।
सूत्रों के मुताबिक इस बातचीत में मौजूदा security situation, क्षेत्रीय स्थिरता और आगे की संभावित रणनीति जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की गई। माना जा रहा है कि ईरान इस वक्त अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन और बातचीत के रास्ते तलाशने की कोशिश कर रहा है, ताकि बढ़ते तनाव को किसी तरह काबू में लाया जा सके।
फिलहाल हालात काफी नाजुक बने हुए हैं। America, Israel और Iran के बीच बढ़ता सैन्य टकराव पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गया है। कई वैश्विक ताकतें लगातार diplomacy के जरिए इस संकट को कम करने की कोशिश कर रही हैं, ताकि यह टकराव एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में तब्दील न हो जाए।
US Israel Iran war की पृष्ठभूमि: 28 फरवरी से शुरू हुआ बड़ा सैन्य अभियान
इस पूरे युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को हुई थी, जब America और Israel ने मिलकर एक संयुक्त military operation शुरू किया। इस कार्रवाई के तहत ईरान के कई अहम और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। बताया जाता है कि इन ठिकानों पर ताबड़तोड़ air strikes और missile attacks किए गए, जिससे कई इलाकों में जोरदार धमाके सुनाई दिए। इस पूरे सैन्य अभियान को “Operation Lion’s Roar” नाम दिया गया था, जो बहुत ही तेजी और अचानक तरीके से अंजाम दिया गया।
इन हमलों का सबसे ज्यादा असर ईरान की राजधानी Tehran समेत कई बड़े शहरों में देखने को मिला। जगह-जगह धमाकों की आवाज़ें सुनाई दीं, आसमान में धुएँ के गुबार उठते नजर आए और पूरे शहर में अफरा-तफरी जैसा माहौल बन गया। रिपोर्टों के मुताबिक इन हमलों का मकसद सिर्फ सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना ही नहीं था, बल्कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व को भी टारगेट किया गया।
कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि शुरुआती हमलों के दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत हो गई। यह खबर सामने आते ही पूरे इलाके में सियासी हलचल और ज्यादा तेज हो गई। इसके बाद ईरान की सत्ता में बड़ा बदलाव देखने को मिला और उनके बेटे Mojtaba Khamenei को नया सर्वोच्च नेता घोषित कर दिया गया।
इस घटना ने पूरे Middle East के माहौल को और ज्यादा तनावपूर्ण बना दिया। पहले से ही संवेदनशील माने जाने वाले इस क्षेत्र में अचानक हालात और ज्यादा बिगड़ गए। कई देशों ने इसे बेहद गंभीर और खतरनाक मोड़ बताया, क्योंकि इससे पूरे इलाके में geopolitical tension काफी बढ़ गया।

इन हमलों के बाद ईरान ने भी चुप बैठने के बजाय जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। ईरानी सेना की तरफ से missile और drone attacks किए गए, जिनका असर सिर्फ ईरान या इज़राइल तक ही सीमित नहीं रहा बल्कि खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में भी इसका असर महसूस किया गया। कुछ जगहों पर सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिए गए, तो कहीं air defense systems को एक्टिव कर दिया गया।
इस तरह देखते ही देखते यह टकराव एक बड़े क्षेत्रीय संकट में बदल गया, जिसकी गूंज अब पूरी दुनिया में सुनाई देने लगी है।
Tehran में जोरदार हमले और बढ़ता सैन्य दबाव
जंग के ताज़ा दौर में ईरान की राजधानी Tehran से बेहद जोरदार air strikes की खबरें सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि America और Israel की सेनाओं ने मिलकर ईरान के कई अहम military bases, missile launchers और रणनीतिक infrastructure को निशाना बनाया है। इन हमलों के दौरान कई इलाकों में तेज धमाके सुनाई दिए और आसमान में धुएँ के घने गुबार उठते दिखाई दिए। शहर के कई हिस्सों में अफरा-तफरी जैसा माहौल बन गया और लोगों में खौफ का माहौल देखने को मिला।
इन ताबड़तोड़ हमलों की वजह से कई जगहों पर भारी तबाही की खबरें भी सामने आई हैं। कुछ इलाकों में इमारतों को नुकसान पहुंचा है, जबकि कई जगहों पर आग लगने की घटनाएँ भी रिपोर्ट हुई हैं। राहत और बचाव दल लगातार हालात को काबू में करने की कोशिश कर रहे हैं।
कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि इन हमलों का असर ईरान के कुछ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों के आसपास के इलाकों तक भी पहुंचा है। हालांकि इन स्थलों को कितना नुकसान हुआ है, इसकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। लेकिन इस खबर के सामने आते ही कई अंतरराष्ट्रीय cultural organizations और विरासत से जुड़े संस्थानों ने गहरी चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि युद्ध के दौरान ऐतिहासिक धरोहरों को नुकसान पहुंचना पूरी दुनिया के लिए नुकसान की बात होती है।
दूसरी तरफ ईरान ने इन हमलों को एक खुला aggressive war करार दिया है। ईरानी हुकूमत का कहना है कि यह हमला उनकी संप्रभुता के खिलाफ है और वे इसका जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। ईरान के अधिकारियों ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो वे American military bases को भी निशाना बना सकते हैं।
ईरान की जवाबी कार्रवाई और क्षेत्रीय हमले
इन हमलों के बाद ईरान ने भी तेजी से जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। ईरानी सेना ने सिर्फ Israel को ही नहीं बल्कि खाड़ी क्षेत्र में मौजूद कई American military bases और उनके सहयोगी देशों को भी निशाना बनाने की कोशिश की। इसके तहत कई missiles और drones लॉन्च किए गए, जिससे पूरे Gulf region में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया।
बताया जा रहा है कि United Arab Emirates, Kuwait और Bahrain जैसे देशों में कई मिसाइलों को रास्ते में ही रोक लिया गया। इन देशों के air defense systems ने तेजी से कार्रवाई करते हुए कई मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही इंटरसेप्ट कर दिया। हालांकि कुछ इलाकों में मामूली नुकसान की खबरें भी सामने आई हैं।
अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का दावा है कि उनके आधुनिक air defense systems ने बड़ी संख्या में मिसाइलों और ड्रोन को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया, जिससे बड़े पैमाने पर नुकसान होने से बचाव हो गया।
रिपोर्टों के मुताबिक जंग के शुरुआती दिनों की तुलना में अब ईरान के हमलों की संख्या में थोड़ी कमी देखने को मिल रही है। माना जा रहा है कि इसकी एक वजह यह भी है कि हाल के हमलों में ईरान के कई missile production centers और सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया गया है, जिससे उनकी क्षमताओं पर कुछ असर पड़ा है।
फिलहाल पूरे Middle East में हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं और दुनिया भर की निगाहें इस बात पर टिकी हुई हैं कि आगे यह टकराव किस दिशा में बढ़ता है।
भारत की बढ़ती कूटनीतिक भूमिका
इस पूरे संकट और बढ़ते हुए Middle East tension के बीच India भी काफी सक्रिय तरीके से अपनी diplomatic role निभाने की कोशिश कर रहा है। भारत की कोशिश है कि हालात और ज्यादा न बिगड़ें और किसी तरह बातचीत के ज़रिए इस तनाव को कम किया जा सके। इसी सिलसिले में भारत के External Affairs Minister S. Jaishankar और ईरान के Foreign Minister Abbas Araghchi के बीच लगातार संपर्क बना हुआ है।
ताज़ा रिपोर्टों के मुताबिक Abbas Araghchi ने एक बार फिर S. Jaishankar को फोन किया, और यह इस पूरे संकट के दौरान उनकी चौथी बातचीत बताई जा रही है। इस टेलीफोन बातचीत में दोनों नेताओं ने मौजूदा regional situation, America-Israel air strikes और पूरे इलाके में बढ़ती security concerns पर विस्तार से चर्चा की। माना जा रहा है कि यह बातचीत काफी अहम थी, क्योंकि इस वक्त पूरा West Asia बेहद नाज़ुक हालात से गुजर रहा है।
इस बातचीत का एक बेहद अहम पहलू यह भी रहा कि ईरान ने भारत को भरोसा दिलाया है कि Strait of Hormuz से गुजरने वाले भारतीय जहाजों की सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा जाएगा। यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे अहम oil shipping routes में से एक माना जाता है। दुनिया भर के कई देशों के तेल टैंकर इसी रास्ते से होकर गुजरते हैं, इसलिए इसकी सुरक्षा को लेकर पूरी दुनिया की नज़र बनी रहती है।
अगर इस इलाके में हालात और ज्यादा बिगड़ते हैं तो global oil supply पर भी बड़ा असर पड़ सकता है। यही वजह है कि भारत समेत कई देश इस समुद्री रास्ते की सुरक्षा को लेकर काफी सतर्क हैं। भारत ने इस पूरे मामले में दोनों पक्षों से अपील की है कि वे संयम और सब्र से काम लें और बातचीत के जरिए किसी शांतिपूर्ण समाधान तक पहुंचने की कोशिश करें।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
इस युद्ध का असर सिर्फ Middle East तक ही सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसकी गूंज अब पूरी दुनिया की global economy में भी सुनाई देने लगी है। जैसे-जैसे यह टकराव बढ़ रहा है, वैसे-वैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता भी बढ़ती जा रही है।
सबसे पहले असर crude oil prices पर देखने को मिला है। रिपोर्टों के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर 100 dollars per barrel से ऊपर पहुंच गई हैं। तेल की कीमतों में इस तरह की तेज बढ़ोतरी का सीधा असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ता है, क्योंकि इससे transport cost, manufacturing cost और आम लोगों के खर्चे भी बढ़ जाते हैं।
इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय shipping routes पर भी खतरा बढ़ गया है। कई बड़े shipping companies अब इस इलाके से गुजरने वाले रास्तों को लेकर ज्यादा सतर्क हो गई हैं। कुछ जहाजों के रूट भी बदले जा रहे हैं ताकि उन्हें संभावित हमलों से बचाया जा सके।
इसी बीच कई देशों ने अपने नागरिकों को युद्ध प्रभावित इलाकों से निकालने के लिए evacuation operations शुरू कर दिए हैं। कई सरकारें अपने लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए लगातार कोशिश कर रही हैं।
माहिरों और global experts का कहना है कि अगर यह जंग लंबी चलती है तो इसका असर सिर्फ तेल की कीमतों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे global trade, energy markets और यहां तक कि financial markets पर भी गहरा असर पड़ सकता है। इसलिए पूरी दुनिया इस संकट को बहुत करीब से देख रही है और उम्मीद कर रही है कि जल्द ही हालात में कुछ सुधार देखने को मिलेगा।
क्या युद्ध और बढ़ सकता है?
माहिरों और analysts का कहना है कि फिलहाल इस टकराव के जल्द खत्म होने के कोई साफ संकेत दिखाई नहीं दे रहे हैं। हालात अभी भी काफी नाज़ुक बने हुए हैं और हर दिन नई खबरें सामने आ रही हैं। ईरान ने साफ तौर पर यह बयान दिया है कि वह इस जंग के लिए पूरी तरह तैयार है, चाहे यह लड़ाई लंबी ही क्यों न चलनी पड़े। ईरानी हुकूमत का कहना है कि अगर उन पर हमले जारी रहे तो वे भी मजबूती के साथ जवाब देते रहेंगे।
दूसरी तरफ America और Israel की तरफ से भी ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि उनका military campaign फिलहाल रुकने वाला नहीं है। दोनों देशों का कहना है कि जब तक उनके सुरक्षा से जुड़े मकसद पूरे नहीं हो जाते, तब तक यह अभियान जारी रह सकता है। ऐसे में पूरे Middle East में तनाव लगातार बना हुआ है और हालात कब किस दिशा में मुड़ जाएँ, यह कहना मुश्किल हो गया है।
हालांकि इस बढ़ते हुए तनाव के बीच कई international organizations और दुनिया के कई देशों ने इस जंग को रोकने की अपील की है। कई देशों का मानना है कि अगर यह संघर्ष और बढ़ा तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। इसी वजह से कई मंचों पर ceasefire यानी युद्धविराम की मांग उठने लगी है।
ASEAN समेत कई क्षेत्रीय समूहों ने भी साफ तौर पर कहा है कि दोनों पक्षों को तुरंत लड़ाई रोककर बातचीत की मेज़ पर आना चाहिए। उनका मानना है कि बातचीत और diplomacy के जरिए ही इस संकट का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है।
भविष्य की संभावनाएँ
माहिरों का मानना है कि Middle East में चल रहा यह युद्ध आने वाले समय में वैश्विक राजनीति के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। इस जंग के कारण क्षेत्रीय ताकतों के बीच नए alliances यानी गठबंधन बन सकते हैं और पुराने रिश्तों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
इसके अलावा oil और gas supply पर भी लंबे समय तक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। अगर इस इलाके में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो पूरी दुनिया के energy markets प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि मध्य पूर्व को दुनिया का सबसे बड़ा ऊर्जा आपूर्ति क्षेत्र माना जाता है।
कई विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि इस पूरे संकट के दौरान India जैसी उभरती हुई शक्तियों की भूमिका और ज्यादा अहम हो सकती है। भारत पिछले कुछ समय से सक्रिय diplomatic efforts के जरिए दोनों पक्षों के साथ संवाद बनाए हुए है, जिससे उम्मीद जताई जा रही है कि भारत भविष्य में किसी तरह की मध्यस्थता की भूमिका भी निभा सकता है।
माहिरों का यह भी कहना है कि अगर diplomatic talks सफल होती हैं, तो India, कुछ European countries और United Nations की मध्यस्थता के जरिए युद्धविराम का कोई रास्ता निकल सकता है। हालांकि इसके लिए दोनों पक्षों की सहमति और राजनीतिक इच्छाशक्ति बेहद जरूरी होगी।
फिलहाल US-Israel-Iran war एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। Tehran पर लगातार हो रहे हमले, ईरान की तरफ से की जा रही जवाबी कार्रवाई और पूरे Gulf region में बढ़ता तनाव पूरी दुनिया के लिए चिंता का कारण बन गया है।
इस बीच भारत की सक्रिय diplomacy भी काफी अहम मानी जा रही है। ईरान के Foreign Minister Abbas Araghchi और भारत के External Affairs Minister S. Jaishankar के बीच लगातार हो रही बातचीत इस बात का इशारा देती है कि भारत इस संकट को कम करने के लिए गंभीरता से कोशिश कर रहा है।
अब पूरी दुनिया की नज़र इस बात पर टिकी हुई है कि क्या ये diplomatic efforts इस बढ़ते हुए संघर्ष को रोक पाएंगे या फिर Middle East एक और बड़े और लंबे युद्ध की तरफ बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में होने वाले फैसले इस पूरे इलाके और शायद पूरी दुनिया की दिशा तय कर सकते हैं।
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