Skip to content

7% तक टूटा Gold-Silver: निवेशकों के लिए बड़ा Alert – Expert Insight

7% तक टूटा Gold-Silver: निवेशकों के लिए बड़ा Alert – Expert Insight

West Asia तनाव के बीच Gold Silver में 7% से ज्यादा गिरावट

इस वक्त global market का माहौल कुछ ऐसा बना हुआ है कि हर तरफ हलचल ही हलचल नज़र आ रही है। एक तरफ West Asia में बढ़ता हुआ tension और जंग जैसे हालात हैं, और दूसरी तरफ investors का भरोसा भी थोड़ा डगमगाता हुआ दिख रहा है। कुल मिलाकर market में एक अजीब सी बेचैनी और uncertainty छाई हुई है।

इस पूरे सूरत-ए-हाल का सबसे बड़ा असर पड़ा है gold और silver पर, जिन्हें आमतौर पर “safe haven” यानी मुश्किल वक्त का सबसे सुरक्षित investment माना जाता है। लेकिन इस बार कहानी कुछ अलग ही नजर आ रही है। हाल ही में इनकी कीमतों में 7% से ज्यादा की तेज गिरावट देखी गई है, जिसने investors को सच में हैरान और थोड़ा परेशान कर दिया है।

आम तौर पर जब दुनिया में tension बढ़ता है—जैसे जंग, crisis या कोई बड़ा geopolitical issue—तो लोग stock market से पैसा निकालकर gold और silver में लगाते हैं, जिससे इनके daam बढ़ जाते हैं। लेकिन इस बार मामला बिल्कुल उल्टा हो गया है। tension बढ़ने के बावजूद gold-silver गिर रहे हैं।

अब सवाल ये उठता है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? क्या वजह है कि safe investment माने जाने वाले ये metals भी इस बार pressure में आ गए हैं? आइए इसे थोड़ा तफ्सील से और आसान अंदाज़ में समझते हैं।

सोना-चांदी में रिकॉर्ड गिरावट

ताज़ा reports के मुताबिक हालात काफी दिलचस्प और थोड़ा हैरान करने वाले हैं। Gold ETF में करीब 6–7% तक की गिरावट देखी गई है, वहीं Silver ETF भी पीछे नहीं रहा—उसमें लगभग 7–8% तक की गिरावट दर्ज हुई है। यानी जो assets आमतौर पर safe माने जाते हैं, वही इस वक्त pressure में आ गए हैं।

अगर international market की बात करें, तो वहाँ भी सूरत-ए-हाल कुछ खास अच्छी नहीं है। सोना अपने peak level से करीब 20–25% नीचे आ चुका है, जो अपने आप में काफी बड़ी गिरावट मानी जाती है। वहीं चांदी में तो कुछ cases में एक हफ्ते के अंदर ही 10–14% तक की गिरावट देखने को मिली है। यकीन मानिए, ये गिरावट कोई मामूली बात नहीं है—इसे पिछले कई दशकों की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक माना जा रहा है।

अब सवाल ये उठता है कि आखिर इसके पीछे वजह क्या है? तो सबसे बड़ी वजह निकलकर सामने आती है West Asia में चल रहा crisis। इस पूरे region में जो tension और जंग जैसे हालात बने हुए हैं—खासकर America, Iran और Israel के बीच बढ़ती military activity—उन्होंने global market को पूरी तरह हिला कर रख दिया है।

सबसे अहम असर पड़ा है Strait of Hormuz पर, जो oil supply का एक बड़ा रास्ता माना जाता है। यहाँ पर instability बढ़ने की वजह से oil supply को लेकर uncertainty पैदा हो गई है। नतीजा ये हुआ कि Crude Oil के daam तेजी से बढ़कर $100 per barrel के ऊपर पहुंच गए हैं।

अब जब oil महंगा होता है, तो energy crisis का डर भी बढ़ जाता है, और साथ ही inflation यानी महंगाई की फिक्र भी लोगों को सताने लगती है। ऐसे माहौल में investors अपनी strategy बदलने लगते हैं। इस बार भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है।

जहाँ पहले लोग tension के वक्त gold की तरफ भागते थे, वहीं अब कई investors oil और US dollar जैसे options को ज्यादा safe मान रहे हैं। यानी market का पूरा mood ही बदलता हुआ नजर आ रहा है, और यही वजह है कि gold और silver इस बार दबाव में आ गए हैं।

मजबूत डॉलर ने तोड़ा सोने का सहारा

सोना और चांदी की कीमतों में जो गिरावट आई है, उसकी एक बड़ी वजह है US Dollar का मज़बूत होना। जब dollar मजबूत होता है, तो gold अपने आप महंगा लगने लगता है—खासतौर पर उन investors के लिए जो दूसरे currencies में invest करते हैं। ऐसे में लोग धीरे-धीरे अपना पैसा gold से निकालकर dollar और bonds में लगाने लगते हैं, क्योंकि वहाँ उन्हें ज़्यादा stability और returns की उम्मीद नजर आती है। नतीजा ये होता है कि gold की demand कम होने लगती है और उसके daam नीचे आने लगते हैं।

Experts भी यही कहते हैं कि gold एक “non-yielding asset” है—यानि इसमें आपको कोई interest या regular return नहीं मिलता। इसलिए जब interest rates बढ़ते हैं, तो gold थोड़ा कमजोर पड़ जाता है, क्योंकि लोग उन assets की तरफ जाने लगते हैं जहाँ उन्हें fixed return मिलता है।

अब अगर इस पूरे मामले को थोड़ा और गहराई से समझें, तो इसमें interest rates और inflation का भी बड़ा खेल है। West Asia में जो tension चल रहा है, उसकी वजह से oil के daam बढ़ गए हैं। जब oil महंगा होता है, तो transport से लेकर production तक हर चीज़ महंगी हो जाती है, और इससे inflation बढ़ने का खतरा पैदा हो जाता है।

ऐसे हालात में central banks—जैसे US Federal Reserve—interest rates घटाने के बजाय उन्हें बढ़ाने या ऊँचा बनाए रखने का फैसला करते हैं, ताकि inflation को काबू में रखा जा सके। लेकिन इसका सीधा असर gold पर पड़ता है। जैसे ही interest rates बढ़ने की उम्मीद बनती है, investors gold से दूरी बनाने लगते हैं, क्योंकि उन्हें दूसरी जगह बेहतर returns दिखने लगते हैं।

इसी के साथ एक और दिलचस्प बदलाव देखने को मिल रहा है, जिसे हम safe haven trend का बदलना कह सकते हैं। पहले जब भी दुनिया में कोई crisis आता था, तो लोग सीधे gold की तरफ भागते थे। लेकिन अब धीरे-धीरे ये trend बदल रहा है।

अब investors के लिए US Dollar और bonds ज़्यादा safe option बनते जा रहे हैं। वहीं कुछ लोग energy commodities—जैसे oil—में भी पैसा लगा रहे हैं, क्योंकि वहाँ demand और prices दोनों बढ़ रहे हैं। market में अब एक नया balance बन रहा है, जिसे “risk-on” और “risk-off” mood कहा जाता है—यानि लोग situation के हिसाब से अपनी strategy बदल रहे हैं।

एक तरह से देखा जाए, तो अब investors gold को सिर्फ crisis का सहारा नहीं मान रहे, बल्कि उसे interest rates से जुड़ा हुआ asset समझने लगे हैं। और यही सोच में आया ये बदलाव gold और silver की कीमतों पर साफ नजर आ रहा है।

Profit Booking और Panic Selling

जब किसी भी चीज़ की कीमतें लंबे वक्त तक ऊँचाई पर बनी रहती हैं, तो एक वक्त ऐसा आता है जब investors अपना मुनाफ़ा निकालना शुरू कर देते हैं—जिसे market की ज़बान में profit booking कहा जाता है। इस बार भी कुछ ऐसा ही मंजर देखने को मिला।

जनवरी में जब gold ने अपना record high touch किया, तो उसके बाद बड़े-बड़े investors और funds ने धीरे-धीरे selling शुरू कर दी। बड़े funds ने तेज़ी से सोना बेचना शुरू किया, और जब market में selling बढ़ती है, तो daam गिरना तो लाज़मी हो जाता है। यही वजह रही कि gold और silver की कीमतों में अचानक तेज़ गिरावट देखने को मिली।

अब इसका असर सिर्फ gold-silver तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे financial market पर इसका ripple effect पड़ा। share market में भी कमजोरी देखने को मिली, और खासकर gold loan से जुड़ी companies के shares में गिरावट आई—कुछ cases में तो करीब 7% तक की गिरावट दर्ज हुई। global markets में भी uncertainty और volatility बढ़ गई, जिससे investors और ज्यादा cautious हो गए।

हालांकि, दिलचस्प बात ये है कि कुछ experts इस गिरावट को पूरी तरह negative नहीं मान रहे। उनका कहना है कि अगर gold से पैसा निकलकर stock market में आता है, तो इससे equities को support मिल सकता है—यानि share market के लिए ये एक positive signal भी बन सकता है।

अब अगर India की बात करें, तो यहाँ gold सिर्फ एक investment नहीं है, बल्कि हमारी culture और traditions का भी अहम हिस्सा है। शादी-ब्याह से लेकर त्योहारों तक, gold का एक अलग ही importance होता है। ऐसे में जब इसके daam ऊपर-नीचे होते हैं, तो उसका असर सीधा आम लोगों तक पहुंचता है।

शादी के season में अगर prices बढ़े होते, तो लोगों पर extra बोझ पड़ता, लेकिन अब गिरते daam कुछ लोगों के लिए राहत भी लेकर आ सकते हैं। वहीं दूसरी तरफ, जिन लोगों ने ऊँचे दाम पर investment किया था, उनके portfolio पर दबाव जरूर बना है।

gold loan sector भी इस situation से अछूता नहीं रहा—क्योंकि जब gold की कीमत गिरती है, तो loan की value और risk दोनों पर असर पड़ता है।

लेकिन हर गिरावट अपने साथ एक मौका भी लेकर आती है। जो लोग लंबे वक्त के लिए invest करना चाहते हैं, उनके लिए ये गिरती कीमतें एक अच्छा buying opportunity भी बन सकती हैं—बस जरूरत है समझदारी और सही timing की।

आगे क्या होगा?

Experts के मुताबिक आगे का पूरा मंजर कुछ अहम बातों पर depend करेगा। सबसे पहले तो ये देखना होगा कि West Asia में जो tension चल रहा है, वो कम होता है या और ज़्यादा बढ़ता है। इसके अलावा oil prices किस दिशा में जाते हैं, ये भी बहुत बड़ा factor रहेगा। साथ ही America में interest rates को लेकर क्या फैसला होता है और US Dollar कितना मजबूत रहता है—ये सारी चीज़ें मिलकर market का रुख तय करेंगी।

अगर हालात और बिगड़ते हैं, tension बढ़ता है, तो market में और ज़्यादा उथल-पुथल देखने को मिल सकती है। volatility बढ़ेगी, investors और cautious हो जाएंगे, और daam में उतार-चढ़ाव तेज़ हो सकता है। लेकिन दूसरी तरफ, long term में ये भी माना जा रहा है कि gold फिर से अपनी पकड़ मजबूत कर सकता है, क्योंकि आखिरकार वो एक traditional safe asset तो है ही।

West Asia का ये crisis एक बार फिर ये साबित कर चुका है कि दुनिया में कहीं भी कोई बड़ी geopolitical हलचल होती है, तो उसका सीधा असर investment markets पर पड़ता है। इस बार सबसे बड़ा झटका gold और silver को लगा है—जो आमतौर पर ऐसे वक्त में मजबूत होते हैं, लेकिन इस बार उल्टा हो गया।

दरअसल, बदलते हुए economic हालात, strong dollar, बढ़ते interest rates और investors की बदलती हुई strategy ने पूरे game को ही पलट दिया है। अब market पहले जैसा react नहीं कर रहा, बल्कि एक नए pattern पर चल रहा है।

ऐसे माहौल में investors के लिए सबसे जरूरी चीज़ है सब्र और समझदारी। जल्दबाज़ी में कोई भी फैसला लेना नुकसानदेह हो सकता है। बेहतर यही होगा कि long-term सोच के साथ, planning के साथ और थोड़ा patience रखकर investment decisions लिए जाएं, ताकि future में बेहतर returns मिल सकें।

यह भी पढ़े –

India Energy Crisis Alert: PM Modi की चेतावनी, आने वाले कठिन दिन – Must Read

Air India ने West Asia में 2,500 उड़ानें रद्द, जानिए पूरा मामला Shocking