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Nagpur की सीमेंट सड़कों पर हाईकोर्ट सख्त, मनपा, NHAI और PWD की बढ़ीं मुश्किलें
Nagpur में सीमेंट सड़कों का मसला अब काफी गरमा गया है। शहर के लोग पिछले कई महीनों से टूटी-फूटी सड़कों, जलभराव और खराब काम को लेकर शिकायत कर रहे थे, लेकिन अब मामला सीधे हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है। Bombay High Court की नागपुर बेंच ने इस पूरे मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए मनपा, NHAI और PWD को जमकर फटकार लगाई है। कोर्ट ने साफ अल्फाज़ में कहा कि अवाम की जान के साथ लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अदालत ने सभी संबंधित विभागों को हुक्म दिया है कि 8 जून तक सड़क निर्माण, उसकी क्वालिटी, बारिश में पानी भरने की परेशानी, हादसों और मरम्मत के कामों को लेकर डिटेल रिपोर्ट पेश की जाए। कोर्ट ने ये भी पूछा कि आखिर करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद शहर की कई सड़कें कुछ ही सालों में बदहाल कैसे हो गईं।
अदालत ने जताई सख्त नाराज़गी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने काफी तल्ख़ टिप्पणियां कीं। कोर्ट ने कहा कि शहर में कई जगहों पर सीमेंट रोड्स उखड़ चुकी हैं, कहीं ब्लॉक्स बाहर निकल आए हैं तो कहीं सड़कें इतनी खराब हो गई हैं कि लोगों के लिए खतरा बन चुकी हैं। खास तौर पर बाइक चलाने वालों को सबसे ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

कोर्ट ने ये भी साफ कर दिया कि अगर पहले दिए गए आदेशों का सही तरीके से पालन नहीं हुआ, तो संबंधित अफसरों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई भी की जा सकती है। अदालत ने सवाल उठाया कि आखिर जनता के टैक्स के पैसों से बनने वाली सड़कें इतनी जल्दी खराब क्यों हो रही हैं।
मनपा, NHAI और PWD पर उठे बड़े सवाल
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा सवाल Nagpur Municipal Corporation, NHAI और PWD की कार्यप्रणाली पर उठ रहे हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बिना सही प्लानिंग के सड़कें बनाई गईं। कहीं रोड का लेवल इतना ऊंचा कर दिया गया कि बारिश में घरों और दुकानों में पानी घुसने लगा, तो कहीं ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह फेल हो गया।
कई इलाकों में सड़क बनने के बाद फिर से खुदाई कर दी गई, जिसकी वजह से सड़कें और खराब हो गईं। लोगों का कहना है कि पहले सड़क बनाई जाती है, फिर पाइपलाइन या केबल डालने के लिए उसे दोबारा खोद दिया जाता है। इससे सरकारी पैसे की भी जमकर बर्बादी हो रही है।
शहरवासियों में बढ़ रहा गुस्सा
नागपुर के लोगों में अब इस मुद्दे को लेकर काफी नाराज़गी देखने को मिल रही है। सोशल मीडिया पर भी लोग लगातार तस्वीरें और वीडियो शेयर कर रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि सीमेंट रोड्स की वजह से शहर में गर्मी और धूल दोनों बढ़ गए हैं। वहीं बारिश के मौसम में सड़कें फिसलन भरी हो जाती हैं, जिससे हादसों का डर बना रहता है।
कुछ रहवासियों ने तो ये तक कह दिया कि सड़कें बनाने के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई और क्वालिटी पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया गया।
ठेकेदारों ने भी खोला मोर्चा
मामले ने उस वक्त और तूल पकड़ लिया जब कुछ ठेकेदार भी कोर्ट पहुंच गए। उनका आरोप है कि सरकार और विभागों ने करोड़ों रुपये के बिल अब तक क्लियर नहीं किए हैं। इसकी वजह से कई प्रोजेक्ट अधूरे पड़े हैं और काम की रफ्तार भी धीमी हो गई है।
हाईकोर्ट ने इस मामले में भी सरकार और PWD से जवाब मांगा है। अदालत ने कहा कि अगर भुगतान में गड़बड़ी पाई गई, तो जिम्मेदार अफसरों की जवाबदेही तय की जाएगी।
बारिश से पहले बढ़ी चिंता
मानसून करीब है और ऐसे में जलभराव का खतरा भी बढ़ गया है। कई इलाकों में सड़कें इतनी ऊंची बना दी गई हैं कि पानी निकलने की जगह ही नहीं बची। लोगों को डर है कि बारिश शुरू होते ही हालात और खराब हो सकते हैं।
कोर्ट ने इस मामले में पहले भी प्री-मानसून तैयारी को लेकर सवाल उठाए थे, लेकिन समय पर सही जवाब नहीं मिलने पर अदालत ने नाराज़गी जाहिर की।
अब 8 जून पर टिकी सबकी निगाहें
अब पूरे मामले में अगली अहम तारीख 8 जून मानी जा रही है। कोर्ट ने साफ कह दिया है कि इस बार अधूरी जानकारी या बहानेबाजी नहीं चलेगी। सभी विभागों को पूरी तैयारी के साथ रिपोर्ट पेश करनी होगी।
अगर रिपोर्ट से अदालत संतुष्ट नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में और सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। माना जा रहा है कि कोर्ट थर्ड पार्टी जांच या स्पेशल ऑडिट का आदेश भी दे सकता है।
फिलहाल नागपुर की जनता यही उम्मीद कर रही है कि अदालत की इस सख्ती के बाद शायद शहर की बदहाल सड़कों की तस्वीर बदल जाए और लोगों को राहत मिल सके।
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