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Nagpur में नेशनल Lok Adalat का बड़ा कमाल
Nagpur में आयोजित नेशनल लोक अदालत ने इस बार ऐसा काम किया कि हजारों लोगों को बड़ी राहत मिल गई। सालों से अदालतों में लटके हुए कई केस आपसी रज़ामंदी और समझौते के जरिए खत्म कर दिए गए। इस खास अभियान में कुल 6,149 मामलों का निपटारा हुआ और करीब 32 करोड़ रुपये से ज्यादा के मामलों में सेटलमेंट किया गया।
लोगों का कहना है कि जहां आम अदालतों में एक केस सालों तक चलता रहता है, वहीं लोक अदालत में कुछ ही घंटों में मसला हल हो गया। यही वजह है कि अब आम लोग भी इस व्यवस्था पर ज्यादा भरोसा करने लगे हैं।
अलग-अलग अदालतों में चला अभियान
यह नेशनल लोक अदालत सिर्फ जिला अदालत तक सीमित नहीं थी, बल्कि फैमिली कोर्ट, डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल, लेबर कोर्ट, को-ऑपरेटिव कोर्ट और जिले की तमाम तहसील अदालतों में भी इसका आयोजन किया गया।
पूरा कार्यक्रम बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस अनिल किलोर और जस्टिस राज वाकोड़े की निगरानी में हुआ। वहीं प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज डी. पी. सुराना ने इसकी कमान संभाली।
अधिकारियों के मुताबिक, इस बार लोगों में समझौते के जरिए मसले सुलझाने का रुझान पहले से ज्यादा देखने को मिला। कई लोग खुद अदालत पहुंचे और बातचीत के जरिए मामला खत्म करने पर राजी हो गए।
पुराने झगड़ों का भी निकला हल, Nagpur Lok Adalat में ऐसे कई मामले भी आए जो काफी अरसे से अदालतों में पड़े हुए थे। कुछ पारिवारिक विवाद थे, कुछ बैंक लोन से जुड़े मामले थे, तो कई चेक बाउंस और एक्सीडेंट क्लेम वाले केस भी शामिल थे।
सबसे अच्छी बात यह रही कि दोनों पक्षों को बैठाकर आराम से बातचीत कराई गई और फिर समझौते का रास्ता निकाला गया। इससे ना सिर्फ अदालतों का बोझ कम हुआ बल्कि लोगों को मानसिक सुकून भी मिला।
कई परिवार ऐसे थे जो लंबे वक्त से कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। लोक अदालत में मामला खत्म होने के बाद लोगों के चेहरों पर राहत साफ दिखाई दे रही थी।

5 हज़ार से ज्यादा प्री-लिटिगेशन मामलों का समाधान
इस अभियान में 5,138 ऐसे मामलों को भी सुलझाया गया जो अभी अदालत तक पहुंचे ही नहीं थे। इन्हें प्री-लिटिगेशन केस कहा जाता है।
मतलब यह कि मामला कोर्ट में जाने से पहले ही दोनों पक्षों को बुलाकर समझौता करा दिया गया। इससे लोगों का वक्त भी बचा और कोर्ट-कचहरी के लंबे चक्कर लगाने से भी राहत मिली।
कानूनी जानकार मानते हैं कि अगर ऐसे मामलों को शुरुआत में ही सुलझा लिया जाए तो अदालतों पर दबाव काफी कम हो सकता है।
आपराधिक मामलों में भी मिली राहत
Lok Adalat के साथ-साथ 4 मई से 8 मई तक एक खास अभियान भी चलाया गया। इस दौरान 2,323 आपराधिक मामलों का निपटारा किया गया।
इनमें छोटे-मोटे अपराध, ट्रैफिक नियम तोड़ने और समझौता योग्य केस शामिल थे। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों को जल्दी खत्म करने से अदालतों में लंबित केस कम होंगे और लोगों को भी राहत मिलेगी।
Nagpur पुलिस और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने इस अभियान को कामयाब बनाने में अहम किरदार निभाया।
Lok Adalat क्यों बन रही है लोगों की पसंद?
आजकल लोग लंबे कोर्ट केस से परेशान हो चुके हैं। तारीख पर तारीख, वकीलों की फीस और मानसिक तनाव इंसान को थका देता है। ऐसे में लोक अदालत लोगों के लिए राहत का रास्ता बनती जा रही है।
यहां ना ज्यादा खर्च होता है और ना ही सालों इंतजार करना पड़ता है। दोनों पक्ष अगर आपसी रज़ामंदी से तैयार हों तो मामला तुरंत खत्म हो जाता है।
इसी वजह से अब बैंक, बीमा कंपनियां और आम लोग भी लोक अदालत के जरिए अपने मामले सुलझाने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
लोगों ने जताई खुशी
Lok Adalat खत्म होने के बाद कई लोगों ने खुशी जाहिर की। किसी का बैंक विवाद खत्म हुआ, किसी को एक्सीडेंट क्लेम मिला, तो किसी के परिवार का पुराना झगड़ा सुलझ गया।
एक बुजुर्ग व्यक्ति ने कहा कि उनका मामला पिछले कई सालों से चल रहा था, लेकिन लोक अदालत में कुछ ही देर में हल निकल आया। उन्होंने कहा कि अगर पहले ऐसी व्यवस्था का पता होता तो शायद इतना लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता।
वहीं अधिकारियों ने भी कहा कि आने वाले समय में ऐसे और अभियान चलाए जाएंगे ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को जल्दी इंसाफ मिल सके।
अदालतों का बोझ कम करने में मददगार
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अगर Lok Adalat इसी तरह लगातार आयोजित होती रहीं तो देशभर की अदालतों में लंबित मामलों की संख्या काफी कम हो सकती है।
Nagpur की यह लोक अदालत उसी दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। यहां जिस तरह हजारों मामलों का निपटारा हुआ, उसने यह साबित कर दिया कि बातचीत और समझौते से बड़े से बड़ा विवाद भी खत्म किया जा सकता है।
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