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Indian Railway में 30 हजार पद खत्म करने के फैसले पर बवाल, Nagpur में कर्मचारियों का बड़ा Protest शुरू

Indian Railway में 30 हजार पद खत्म करने के फैसले पर बवाल, Nagpur में कर्मचारियों का बड़ा Protest शुरू

Nagpur में Railway Workers का गुस्सा फूटा

Indian Railway में लगभग 30 हजार पद सरेंडर यानी खत्म करने के रेलवे बोर्ड के फैसले ने अब बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। Nagpur Division में रेलवे कर्मचारियों के बीच इस फैसले को लेकर जबरदस्त नाराज़गी देखने को मिल रही है।

कर्मचारियों का कहना है कि पहले ही रेलवे स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहा है और ऐसे में हजारों पद खत्म करना रेलवे ऑपरेशन और कर्मचारियों दोनों पर बोझ बढ़ाने वाला कदम साबित होगा।

Nagpur में रेलवे कर्मचारियों की यूनियन मध्य रेलवे कर्मचारी संघ (MRKS) ने इस फैसले के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया है। यह संगठन भारतीय मजदूर संघ यानी BMS से जुड़ा हुआ है। यूनियन ने रेलवे बोर्ड के आदेश को कर्मचारी विरोधी बताते हुए खुलकर विरोध जताया है।

क्या है पूरा मामला?

Indian Railway Board ने 24 अप्रैल 2026 को एक निर्देश जारी किया था। इस आदेश में देशभर के रेलवे जोन, प्रोडक्शन यूनिट और दूसरे विभागों को कहा गया कि 1 अप्रैल 2026 तक खाली पड़े करीब 2 फीसदी पदों को सरेंडर किया जाए। रेलवे के अनुसार यह कदम वर्कफोर्स को “रैशनलाइज” करने के लिए उठाया जा रहा है।

लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि रेलवे में पहले ही लाखों पद खाली पड़े हैं। ट्रेनों की संख्या बढ़ रही है, यात्रियों का दबाव लगातार बढ़ रहा है, लेकिन स्टाफ कम होता जा रहा है। ऐसे में और पद खत्म करना हालात को और खराब कर देगा।

यूनियन नेताओं का आरोप है कि रेलवे प्रशासन खर्च कम करने के नाम पर कर्मचारियों पर अतिरिक्त काम का बोझ डाल रहा है। इससे न सिर्फ कर्मचारियों की सेहत पर असर पड़ेगा बल्कि ट्रेन संचालन और सुरक्षा पर भी खतरा बढ़ सकता है।

Nagpur Division में विरोध प्रदर्शन शुरू

रेलवे कर्मचारियों ने 15 मई से 29 मई तक Nagpur Division Protest करने का ऐलान किया है। इस दौरान अलग-अलग तरीकों से शांतिपूर्ण आंदोलन किया जाएगा। कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर काम करने का फैसला लिया है ताकि रेलवे प्रशासन तक उनका विरोध साफ तौर पर पहुंचे।

इसके अलावा 22 मई को नागपुर DRM ऑफिस के बाहर एक बड़ी गेट मीटिंग भी रखी गई है। इसमें बड़ी संख्या में रेलवे कर्मचारी शामिल होंगे। यूनियन की तरफ से DRM को ज्ञापन सौंपकर आदेश वापस लेने की मांग की जाएगी।

रेलवे कर्मचारियों का कहना है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जा सकता है।

कर्मचारियों ने क्या कहा?

MRKS के जोनल जनरल सेक्रेटरी सागर सिंह तोमर ने कहा कि रेलवे में पहले ही स्टाफ की भारी कमी है। कई विभागों में कर्मचारियों को डबल शिफ्ट तक काम करना पड़ रहा है। लोको पायलट, टेक्निकल स्टाफ, ट्रैक मेंटेनेंस टीम और स्टेशन कर्मचारियों पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है।

उन्होंने कहा कि ऐसे समय में 30 हजार पद खत्म करने का फैसला बिल्कुल गलत है। इससे रेलवे कर्मचारियों का मनोबल टूटेगा और यात्रियों की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है।

कर्मचारियों का यह भी कहना है कि रेलवे लगातार नई ट्रेनें शुरू कर रहा है, हाईस्पीड प्रोजेक्ट्स ला रहा है और मालगाड़ियों का नेटवर्क बढ़ा रहा है। लेकिन दूसरी तरफ कर्मचारियों की संख्या कम की जा रही है, जो समझ से परे है।

यात्रियों पर क्या असर पड़ सकता है?

अगर रेलवे में स्टाफ की कमी और बढ़ती है तो इसका असर सीधे यात्रियों पर पड़ सकता है। ट्रेनें लेट होना, मेंटेनेंस में देरी, सफाई व्यवस्था पर असर और तकनीकी समस्याएं बढ़ने का खतरा बताया जा रहा है।

रेलवे कर्मचारी मानते हैं कि किसी भी रेलवे सिस्टम की रीढ़ उसका स्टाफ होता है। अगर कर्मचारियों की संख्या कम होगी तो काम का दबाव बढ़ेगा और गलतियों की संभावना भी बढ़ सकती है।

हालांकि रेलवे प्रशासन की तरफ से अभी तक इस विरोध पर कोई बड़ा आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन कर्मचारियों का आंदोलन लगातार तेज होता दिखाई दे रहा है।

सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस

रेलवे बोर्ड के इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस शुरू हो गई है। कई लोग कर्मचारियों के समर्थन में पोस्ट कर रहे हैं तो कुछ लोग रेलवे में आधुनिकीकरण और ऑटोमेशन की जरूरत बता रहे हैं।

कई यूजर्स का कहना है कि अगर रेलवे में टेक्नोलॉजी बढ़ रही है तो कर्मचारियों की जरूरत कम हो सकती है। वहीं दूसरी तरफ बड़ी संख्या में लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि जब रेलवे में पहले से भारी वैकेंसी हैं तो फिर पद खत्म करने की जरूरत क्यों पड़ रही है।

रेलवे यूनियनों की बढ़ सकती है एकजुटता, जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में दूसरे रेलवे संगठनों और यूनियनों का समर्थन भी इस आंदोलन को मिल सकता है। अगर देशभर में रेलवे कर्मचारी एक साथ विरोध करते हैं तो यह मामला और बड़ा रूप ले सकता है।

नागपुर से शुरू हुआ यह आंदोलन अब दूसरे डिवीजनों तक भी पहुंच सकता है। यूनियन नेताओं का कहना है कि वे कर्मचारियों के हितों के लिए आखिरी दम तक लड़ाई जारी रखेंगे।

सरकार और रेलवे बोर्ड पर बढ़ा दबाव

रेलवे कर्मचारियों के लगातार विरोध के बाद अब रेलवे बोर्ड और सरकार पर भी दबाव बढ़ता नजर आ रहा है। कर्मचारी चाहते हैं कि पहले खाली पदों पर भर्ती निकाली जाए और उसके बाद ही किसी तरह का रैशनलाइजेशन किया जाए।

रेलवे यूनियन का साफ कहना है कि अगर कर्मचारियों की संख्या कम हुई तो रेलवे की कार्यक्षमता और सुरक्षा दोनों पर असर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार को इस फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए।

भारतीय रेलवे देश की लाइफलाइन मानी जाती है और करोड़ों लोग हर दिन इस पर सफर करते हैं। ऐसे में कर्मचारियों और रेलवे प्रशासन के बीच बढ़ता तनाव आने वाले समय में बड़ा मुद्दा बन सकता है। नागपुर में शुरू हुआ यह विरोध सिर्फ एक शहर तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि यह पूरे देश के रेलवे कर्मचारियों की चिंता बनता जा रहा है।

अब सबकी नजर रेलवे बोर्ड और सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है कि क्या कर्मचारियों की मांगों को सुना जाएगा या आंदोलन और ज्यादा तेज होगा।

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