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Nagpur में NEET 2026 की छात्रा ने की Suicide, सुसाइड नोट में बताया परीक्षा रद्द होने पर टूटा आत्मविश्वास

Nagpur में NEET 2026 की छात्रा ने की खुदकुशी, सुसाइड नोट में बताया परीक्षा रद्द होने पर टूटा आत्मविश्वास

डॉक्टर बनने का ख्वाब अधूरा रह गया

मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले की रहने वाली 18 साल की आकांक्षा चतुर्वेदी की पूरी दुनिया उसके डॉक्टर बनने के ख्वाब के इर्द-गिर्द घूमती थी। वह Nagpur में रहकर NEET 2026 की तैयारी कर रही थी और उसके घरवाले भी उसी उम्मीद में दिन-रात मेहनत कर रहे थे कि एक दिन उनकी बेटी सफेद कोट पहनकर लोगों का इलाज करेगी।

लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था। आकांक्षा की मौत की खबर ने न सिर्फ उसके परिवार को बल्कि उन हजारों छात्रों और अभिभावकों को भी झकझोर दिया है जो प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव से गुजर रहे हैं।

NEET 2026 को लेकर थी बड़ी उम्मीद

परिजनों के मुताबिक आकांक्षा पढ़ाई में काफी अच्छी थी और उसने NEET 2026 परीक्षा के लिए जमकर मेहनत की थी। परीक्षा देने के बाद वह खुश भी थी क्योंकि उसे लग रहा था कि उसका पेपर अच्छा गया है और इस बार उसका मेडिकल कॉलेज में दाखिला हो सकता है।

घरवालों को भी पूरा यकीन था कि बेटी अपनी मेहनत का फल जरूर पाएगी। लेकिन कुछ ही दिनों बाद हालात अचानक बदलने लगे।

NEET 2026 Paper Leak Controversy के बाद बढ़ी बेचैनी

जब NEET परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक की खबरें सामने आने लगीं, तो आकांक्षा काफी परेशान रहने लगी। परिवार का कहना है कि परीक्षा रद्द होने और दोबारा परीक्षा की चर्चा ने उसे अंदर से तोड़ दिया था।

जिस इम्तिहान के लिए उसने महीनों की मेहनत की थी, उसके भविष्य को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता उसे लगातार परेशान कर रही थी। धीरे-धीरे उसने लोगों से मिलना-जुलना भी कम कर दिया और वह अक्सर खामोश रहने लगी।

20 मई को हुई दर्दनाक घटना

जानकारी के अनुसार 20 मई को Nagpur में आकांक्षा ने अपनी जान दे दी। उस वक्त परिवार सदमे में था और किसी को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर उसकी परेशानी कितनी गहरी थी।

घटना के बाद अंतिम संस्कार और बाकी रस्में पूरी होने के पश्चात जब परिवार उसके सामान को देख रहा था, तब एक हस्तलिखित नोट मिलने की बात सामने आई। इसी नोट ने पूरे मामले को नई दिशा दे दी।

सुसाइड नोट में छलका दर्द

रिपोर्ट्स के मुताबिक आकांक्षा ने अपने माता-पिता के नाम लिखे नोट में दिल का दर्द बयां किया था। उसने लिखा था कि उसे नहीं लगता कि वह दोबारा उसी आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दे पाएगी।

उसने यह भी जिक्र किया कि पहली बार उसने अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन अगर दोबारा परीक्षा हुई तो यह कोई गारंटी नहीं थी कि वह फिर उतना अच्छा कर पाएगी। नोट में उसने अपने माता-पिता से माफी मांगते हुए अपनी मजबूरी और डर को भी जाहिर किया।

परिवार ने व्यवस्था पर उठाए सवाल

आकांक्षा के परिवार का कहना है कि अगर परीक्षा को लेकर इतना विवाद और असमंजस पैदा नहीं होता, तो शायद आज उनकी बेटी उनके साथ होती।

परिजनों का आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में हुई कथित खामियों का सबसे बड़ा नुकसान उन मेहनती छात्रों को उठाना पड़ता है, जो अपने भविष्य के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। उनका मानना है कि आकांक्षा भी उसी दबाव का शिकार हुई।

बेटी की पढ़ाई के लिए उठाया था आर्थिक बोझ

बताया जा रहा है कि आकांक्षा के पिता किसान हैं और परिवार की आर्थिक हालत बहुत मजबूत नहीं थी। इसके बावजूद उन्होंने बेटी की पढ़ाई के लिए हर मुमकिन कोशिश की।

कोचिंग, रहने और पढ़ाई के खर्च के लिए परिवार ने कर्ज तक लिया था। घरवालों को उम्मीद थी कि बेटी की सफलता से पूरे परिवार की जिंदगी बदल जाएगी, लेकिन अब वही उम्मीद एक दर्दनाक याद बनकर रह गई है।

छात्रों के मानसिक दबाव पर फिर छिड़ी बहस

आकांक्षा की मौत के बाद एक बार फिर छात्रों की मानसिक सेहत और प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव को लेकर बहस शुरू हो गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी बड़ी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र अक्सर बेहद तनाव में रहते हैं। ऐसे में परीक्षा से जुड़ी कोई भी अनिश्चितता या विवाद उनके मानसिक संतुलन पर गहरा असर डाल सकता है।

कई सामाजिक संगठनों और शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि छात्रों को सिर्फ पढ़ाई में ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से मजबूत बनाने और उन्हें समय पर काउंसलिंग उपलब्ध कराने की भी जरूरत है।

एक ऐसा सवाल जो जवाब मांगता है, आकांक्षा चतुर्वेदी की कहानी सिर्फ एक परिवार का दुख नहीं है, बल्कि यह उन लाखों छात्रों की कहानी भी है जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं।

एक होनहार छात्रा का यूं दुनिया छोड़ जाना कई सवाल खड़े करता है। क्या हमारी परीक्षा व्यवस्था छात्रों को भरोसा और स्थिरता दे पा रही है? क्या हम उनके मानसिक दबाव को समझ पा रहे हैं? और क्या ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं?

इन सवालों के जवाब ढूंढना अब बेहद जरूरी हो गया है, ताकि भविष्य में किसी और आकांक्षा का सपना इस तरह अधूरा न रह जाए।

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