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Nagpur की छात्रा से ₹1.32 लाख का Cyber Fraud
Nagpur में साइबर ठग अब लोगों को फंसाने के लिए रोज नए-नए तरीके अपना रहे हैं। सोशल मीडिया पर मिलने वाले आकर्षक ऑफर्स और सस्ते सामान का लालच कई बार लोगों को बड़ी मुसीबत में डाल देता है।
ऐसा ही एक मामला शहर के एमआईडीसी इलाके से सामने आया है, जहां एक 20 साल की छात्रा ऑनलाइन फर्नीचर खरीदने के चक्कर में ₹1 लाख 32 हजार 500 रुपये गंवा बैठी। ठग ने खुद को सीआरपीएफ का जवान बताकर ऐसा भरोसा पैदा किया कि युवती को उसकी बातों पर शक तक नहीं हुआ।
पीड़िता संजना किशोर लेंडे पढ़ाई कर रही हैं और एमआईडीसी थाना क्षेत्र में रहती हैं। उन्होंने फेसबुक पर फर्नीचर बिक्री का एक विज्ञापन देखा था। विज्ञापन में सामान काफी कम कीमत पर बेचने की बात कही गई थी। अच्छे ऑफर को देखकर उन्होंने दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क किया, लेकिन उन्हें क्या मालूम था कि यह सौदा नहीं बल्कि एक सोची-समझी ठगी का जाल है।
खुद को सीआरपीएफ जवान बताकर जीता भरोसा
फोन पर बातचीत के दौरान आरोपी ने खुद को सीआरपीएफ का जवान बताया। उसने कहा कि उसकी पोस्टिंग जम्मू-कश्मीर में हो गई है और इसलिए वह अपने घर का फर्नीचर जल्द बेच रहा है। उसकी बातें इतनी यकीन दिलाने वाली थीं कि संजना को उस पर भरोसा हो गया।
आरोपी ने फर्नीचर की तस्वीरें भेजीं और दावा किया कि सामान बिल्कुल अच्छी हालत में है। उसने यह भी कहा कि वह सरकारी नौकरी में है, इसलिए किसी तरह की धोखाधड़ी का सवाल ही नहीं उठता। यही बात सुनकर युवती पूरी तरह उसके भरोसे में आ गई।
आजकल साइबर ठग अक्सर सेना, सीआरपीएफ या किसी सरकारी विभाग का नाम लेकर लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं। आम लोग वर्दी और सरकारी पहचान का नाम सुनते ही भरोसा कर लेते हैं और यही उनकी सबसे बड़ी चाल होती है।
सस्ते सौदे के लालच में फंस गई छात्रा
शुरुआत में आरोपी ने फर्नीचर की कीमत काफी कम बताई। संजना को लगा कि इतनी अच्छी कीमत में इतना सामान मिलना फायदे का सौदा है। इसके बाद ठग ने भुगतान की प्रक्रिया शुरू करवाई।
पहले उसने एडवांस मांगा, फिर ट्रांसपोर्ट का खर्च बताकर कुछ और पैसे जमा करवाए। इसके बाद सिक्योरिटी चार्ज, डिलीवरी फीस और दूसरे बहानों से लगातार रकम मांगता रहा। हर बार वह यही कहता कि यह आखिरी भुगतान है और इसके बाद सामान तुरंत भेज दिया जाएगा।
संजना उसकी बातों में आती गईं और अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए पैसे भेजती रहीं। देखते ही देखते कुल ₹1 लाख 32 हजार 500 रुपये आरोपी के खाते में पहुंच गए। उन्हें उम्मीद थी कि जल्द ही फर्नीचर उनके घर पहुंच जाएगा, लेकिन असल कहानी तो इसके बाद सामने आई।
पैसे भी गए, फर्नीचर भी नहीं मिला
जब पूरा भुगतान हो गया तो आरोपी का रवैया बदलने लगा। पहले वह डिलीवरी में देरी का बहाना बनाता रहा और फिर धीरे-धीरे फोन उठाना भी कम कर दिया। कई बार संपर्क करने के बावजूद कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
काफी इंतजार के बाद संजना को एहसास हुआ कि उनके साथ धोखा हो चुका है। न तो फर्नीचर मिला और न ही उनके पैसे वापस आए। इसके बाद उन्होंने एमआईडीसी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साइबर अपराध से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आरोपी के मोबाइल नंबर, बैंक अकाउंट और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन की जानकारी खंगाली जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं इसके पीछे कोई बड़ा साइबर गिरोह तो नहीं है।
सोशल मीडिया बन रहा Cyber Fraud का नया हथियार
पिछले कुछ सालों में फेसबुक और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस तरह की ठगी के मामलों में काफी इजाफा हुआ है। ठग नकली प्रोफाइल बनाकर लोगों को सस्ते दाम में फर्नीचर, बाइक, कार, मोबाइल और दूसरे सामान बेचने का झांसा देते हैं।
खास बात यह है कि ऐसे लोग अक्सर खुद को सेना, सीआरपीएफ, पुलिस या सरकारी कर्मचारी बताते हैं ताकि सामने वाला जल्दी भरोसा कर ले। एक बार भरोसा बनने के बाद वे अलग-अलग बहानों से पैसे मांगते रहते हैं और आखिर में गायब हो जाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन खरीदारी करते वक्त सिर्फ तस्वीरों या मीठी बातों पर यकीन नहीं करना चाहिए। सामान को देखे बिना और विक्रेता की सही पहचान जांचे बिना भुगतान करना जोखिम भरा साबित हो सकता है।
Nagpur Police ने लोगों को दी सावधानी बरतने की सलाह
इस घटना के बाद पुलिस ने नागरिकों से खास एहतियात बरतने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर मिलने वाले किसी भी ऑफर पर आंख बंद करके भरोसा न करें।
अगर कोई खुद को सेना या किसी सरकारी विभाग का कर्मचारी बताता है तो उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से जांच करें। केवल आईडी कार्ड की फोटो या व्हाट्सऐप पर भेजे गए दस्तावेजों को असली मान लेना भारी पड़ सकता है।
इसके अलावा किसी भी अनजान व्यक्ति को बड़ी रकम ट्रांसफर करने से पहले पूरी तस्दीक कर लें। अगर किसी तरह की ठगी का शक हो तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
बढ़ती साइबर ठगी ने बढ़ाई चिंता
Nagpur में सामने आया यह मामला सिर्फ एक छात्रा की कहानी नहीं है, बल्कि उन हजारों लोगों के लिए एक सबक है जो रोज सोशल मीडिया पर खरीदारी करते हैं। सस्ते सामान का लालच और जल्दबाजी में लिया गया फैसला कभी-कभी बड़ी परेशानी का सबब बन जाता है।
संजना किशोर लेंडे के साथ हुई यह वारदात बताती है कि ऑनलाइन दुनिया में हर चमकती चीज सोना नहीं होती। ठग अब पहले से ज्यादा चालाक और तकनीकी रूप से मजबूत हो चुके हैं। ऐसे में लोगों को भी उतना ही सतर्क रहने की जरूरत है।
फिलहाल एमआईडीसी पुलिस इस पूरे मामले की तहकीकात में जुटी हुई है। उम्मीद की जा रही है कि डिजिटल सबूतों के आधार पर आरोपी तक पहुंचा जा सकेगा। लेकिन तब तक सबसे जरूरी बात यही है कि ऑनलाइन खरीदारी करते समय होशियारी और एहतियात को कभी नजरअंदाज न किया जाए।
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