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Nagpur में ₹92.44 लाख की Fraud, फर्जी वन विभाग अधिकारी बनकर 19 लोगों को लगाया चूना

Nagpur में ₹92.44 लाख की Fraud, फर्जी वन विभाग अधिकारी बनकर 19 लोगों को लगाया चूना

Nagpur में सामने आया हैरान कर देने वाला मामला

Nagpur में धोखाधड़ी का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने कई लोगों को हैरत में डाल दिया है। आरोप है कि पुणे का रहने वाला एक शख्स खुद को महाराष्ट्र वन विभाग का बड़ा अफसर बताकर लोगों को सरकारी टेंडर और नौकरियां दिलाने का झांसा देता रहा। इसी बहाने उसने करीब 19 लोगों से ₹92.44 लाख की मोटी रकम वसूल ली।

मामला सामने आने के बाद Sonegaon Police ने आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है और अब पूरे मामले की तहकीकात की जा रही है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि आखिर आरोपी ने इतने लोगों को अपने जाल में कैसे फंसाया और कहीं इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो नहीं है।

कौन है आरोपी?

Sonegaon Police के मुताबिक आरोपी की पहचान विवेक श्याम कांबले (29) के तौर पर हुई है। वह पुणे के पिंपरी-चिंचवड़ इलाके के द्वारका नगरी, चिखली प्राधिकरण का रहने वाला बताया जा रहा है।

जांच में सामने आया है कि विवेक कांबले खुद को महाराष्ट्र Forest Department Officer का वरिष्ठ अधिकारी और टेंडर विभाग का प्रमुख बताता था। लोगों का भरोसा जीतने के लिए वह कथित तौर पर पहचान पत्र भी दिखाता था और दावा करता था कि उसके मंत्रालय और कई सरकारी विभागों में ऊंचे स्तर तक संपर्क हैं।

क्रिकेट क्लब में हुई पहचान, फिर शुरू हुआ खेल

इस मामले की शिकायत अंगद गुलाब खैरे (39) ने दर्ज कराई है, जो नागपुर के नंदा इलाके में कोराडी रोड पर रहते हैं।

शिकायत के मुताबिक उनकी मुलाकात विवेक कांबले से एमआईएचएएन के एक क्रिकेट क्लब में कुछ साझा परिचितों के जरिए हुई थी। शुरुआती मुलाकातों में आरोपी ने खुद को बेहद प्रभावशाली सरकारी अधिकारी के तौर पर पेश किया। उसकी बातचीत और आत्मविश्वास देखकर कई लोगों को उस पर यकीन हो गया।

धीरे-धीरे उसने लोगों को भरोसा दिलाना शुरू किया कि वह सरकारी टेंडर दिलवा सकता है और जरूरत पड़ने पर सरकारी नौकरी लगवाने में भी मदद कर सकता है।

टेंडर और नौकरी का सपना दिखाकर ऐंठे लाखों रुपये

Sonegaon Police के अनुसार आरोपी लोगों से कहता था कि उसके पास ऐसे संपर्क हैं जिनकी मदद से सरकारी काम आसानी से हो सकते हैं। वह दावा करता था कि उसने पहले भी कई ठेकेदारों को बड़े-बड़े सरकारी टेंडर दिलवाए हैं।

कुछ लोगों को उसने सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया, जबकि कुछ को सरकारी टेंडर मिलने का सपना दिखाया। इसके बदले में वह अलग-अलग किस्तों में पैसे मांगता रहा।

लोगों को लगा कि उनका काम जल्द हो जाएगा, इसलिए उन्होंने बिना ज्यादा जांच-पड़ताल किए आरोपी को रकम देना शुरू कर दिया। इसी तरह देखते ही देखते लाखों रुपये उसके पास पहुंच गए।

फर्जी पहचान पत्र से जमाया रौब

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी कथित तौर पर एक पहचान पत्र दिखाकर खुद को वन विभाग का वरिष्ठ अधिकारी साबित करता था। यही वजह रही कि कई लोग उसकी बातों में आ गए।

वह सरकारी सिस्टम की ऐसी बातें करता था जिससे सामने वाले को लगे कि वह सचमुच किसी बड़े पद पर है। कई पीड़ितों ने बताया कि आरोपी का आत्मविश्वास इतना ज्यादा था कि उन्हें उसके झूठ का अंदाजा ही नहीं हुआ।

जब नहीं मिला टेंडर और नौकरी तो हुआ शक

शुरुआत में आरोपी लोगों को भरोसा दिलाता रहा कि उनकी फाइल आगे बढ़ चुकी है और जल्द ही उन्हें अच्छी खबर मिलेगी। लेकिन वक्त गुजरता गया और न किसी को नौकरी मिली, न किसी के हाथ कोई सरकारी टेंडर लगा।

जब लोगों ने उससे जवाब मांगा तो वह अलग-अलग बहाने बनाने लगा। कभी विभागीय प्रक्रिया का हवाला देता, तो कभी चुनाव आचार संहिता या प्रशासनिक देरी की बात कहकर मामला टाल देता।

काफी समय बीतने के बाद पीड़ितों को महसूस हुआ कि उनके साथ धोखा हुआ है। इसके बाद उन्होंने आपस में संपर्क किया और मामला पुलिस तक पहुंचा।

19 लोगों से ₹92.44 लाख की ठगी

Sonegaon Police जांच में अब तक यह सामने आया है कि कम से कम 19 लोग इस कथित ठगी का शिकार बने हैं। सभी से मिलाकर करीब ₹92.44 लाख की रकम वसूली गई।

यह रकम अलग-अलग समय पर और अलग-अलग वादों के नाम पर ली गई थी। किसी से नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे लिए गए, तो किसी से सरकारी ठेका दिलाने के बहाने रकम ऐंठी गई।

Sonegaon Police कर रही है गहराई से जांच

Sonegaon Police अब पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपी ने फर्जी पहचान पत्र कहां से बनवाया और उसके साथ कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या नहीं।

इसके अलावा जिन बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर किए गए, उनकी भी जांच की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि जांच आगे बढ़ने पर कई और अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं।

लोगों के लिए सबक

यह मामला उन लोगों के लिए बड़ी सीख है जो सरकारी नौकरी या टेंडर पाने की जल्दबाजी में किसी भी व्यक्ति पर भरोसा कर लेते हैं। सरकारी भर्तियां और टेंडर की प्रक्रिया पूरी तरह आधिकारिक नियमों के तहत होती है।

अगर कोई व्यक्ति पैसे लेकर नौकरी या टेंडर दिलाने का दावा करता है, तो उसकी पूरी जांच-पड़ताल करना बेहद जरूरी है। वरना मेहनत की कमाई कुछ ही मिनटों में ठगों के हाथ लग सकती है।

Nagpur का यह मामला दिखाता है कि ठग किस तरह बड़े अधिकारी का रुतबा दिखाकर लोगों का भरोसा जीत लेते हैं। विवेक श्याम कांबले पर आरोप है कि उसने सरकारी टेंडर और नौकरी का लालच देकर 19 लोगों से ₹92.44 लाख की ठगी की। फिलहाल Sonegaon Police मामले की जांच में जुटी है और आने वाले दिनों में इस पूरे फर्जीवाड़े से जुड़े कई और राज सामने आ सकते हैं।

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