Skip to content

Nagpur में AI का कमाल! 5,000 पेड़ों की होगी डिजिटल जांच, हर दरख्त का बनेगा Health Record

Nagpur में AI का कमाल! 5,000 पेड़ों की होगी डिजिटल जांच, हर दरख्त का बनेगा Health Record

Nagpur ने पर्यावरण की हिफाजत के लिए उठाया नया कदम

Nagpur शहर अब हरियाली को बचाने के लिए टेक्नोलॉजी का सहारा लेने जा रहा है। शहर में पहली बार ऐसा प्रोजेक्ट शुरू किया गया है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और LiDAR जैसी आधुनिक तकनीक की मदद से पेड़ों की सेहत की जांच की जाएगी। इस खास पहल के तहत शुरुआती दौर में करीब 5,000 पेड़ों का सर्वे किया जाएगा।

नगर निगम का कहना है कि इस प्रोजेक्ट का मकसद सिर्फ पेड़ों की गिनती करना नहीं है, बल्कि यह जानना भी है कि कौन-सा पेड़ कितना मजबूत है, किसकी हालत खराब हो रही है और किन पेड़ों को खास देखभाल की जरूरत है। आने वाले वक्त में इससे शहर की हरियाली को बेहतर तरीके से संभालने में मदद मिलेगी।

दीक्षाभूमि से हुई परियोजना की शुरुआत

इस हाईटेक प्रोजेक्ट की शुरुआत नागपुर की मशहूर दीक्षाभूमि से की गई। कार्यक्रम में महापौर नीता ठाकरे, नगर आयुक्त डॉ. विपिन इतनकर और कई अधिकारी मौजूद रहे।

इस मौके पर एक खास सर्वे वाहन भी पेश किया गया, जिसमें आधुनिक सेंसर और स्कैनिंग सिस्टम लगाए गए हैं। यही वाहन शहर के अलग-अलग इलाकों में घूमकर पेड़ों का डेटा जुटाएगा। अधिकारियों का कहना है कि यह तकनीक पेड़ों की निगरानी को पहले से कहीं ज्यादा आसान और असरदार बना देगी।

आखिर क्या है LiDAR तकनीक?

कई लोगों के मन में सवाल होगा कि आखिर LiDAR तकनीक होती क्या है। आसान भाषा में समझें तो यह एक ऐसी तकनीक है जो लेजर किरणों की मदद से किसी भी चीज का बेहद सटीक नक्शा तैयार कर सकती है।

जब LiDAR सेंसर किसी पेड़ को स्कैन करता है, तो उसकी ऊंचाई, चौड़ाई, शाखाओं की बनावट और आसपास की जगह की पूरी जानकारी सामने आ जाती है। इसके बाद उस पेड़ का एक थ्री-डी यानी 3D मॉडल तैयार किया जाता है।

यही वजह है कि दुनिया के कई बड़े शहर अब पेड़ों और पर्यावरण से जुड़े कामों में इस तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं।

AI कैसे करेगा पेड़ों की जांच?

इस पूरे प्रोजेक्ट की जान AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है। LiDAR से जो डेटा मिलेगा, उसे AI सिस्टम समझेगा और उसका विश्लेषण करेगा।

AI यह पता लगाने में मदद करेगा कि पेड़ किस प्रजाति का है, उसकी अनुमानित उम्र कितनी है, कहीं वह किसी बीमारी से तो नहीं जूझ रहा और उसकी जड़ें व तना कितने मजबूत हैं।

अगर कोई पेड़ अंदर से कमजोर हो चुका है या उसके गिरने का खतरा है, तो AI पहले ही इसकी जानकारी दे देगा। इससे प्रशासन वक्त रहते जरूरी कदम उठा सकेगा और किसी बड़े हादसे को टाला जा सकेगा।

30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से होगा सर्वे

इस परियोजना के लिए तैयार किया गया विशेष वाहन शहर की सड़कों पर करीब 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगा।

वाहन में लगे सेंसर चलते-चलते पेड़ों की तस्वीरें, उनकी संरचना और दूसरी अहम जानकारियां रिकॉर्ड करेंगे। सबसे खास बात यह है कि सर्वे के दौरान किसी भी पेड़ को नुकसान नहीं पहुंचेगा और कम समय में बड़ी तादाद में पेड़ों की जांच हो जाएगी।

नगर निगम को उम्मीद है कि इस तकनीक से सर्वे का काम काफी तेजी और सटीकता के साथ पूरा होगा।

5,000 पेड़ों से शुरू होगी नई व्यवस्था

फिलहाल इस प्रोजेक्ट के पहले चरण में 5,000 पेड़ों को शामिल किया गया है। ये ज्यादातर सड़क किनारे मौजूद पेड़ होंगे।

इन पेड़ों का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। हर पेड़ की एक अलग पहचान होगी और उसकी सेहत से जुड़ी तमाम जानकारियां सिस्टम में दर्ज रहेंगी।

अगर यह प्रयोग कामयाब रहता है तो आने वाले समय में पूरे शहर के लाखों पेड़ों को इस डिजिटल व्यवस्था से जोड़ा जा सकता है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पहल से मिली तकनीक, बताया जा रहा है कि इस तकनीक को नागपुर तक पहुंचाने में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की भी अहम भूमिका रही है।

मार्च महीने में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय आर्बोरिकल्चर कॉन्फ्रेंस के दौरान इस तकनीक का प्रदर्शन किया गया था। वहीं से इसे नागपुर में लागू करने की चर्चा शुरू हुई।

इसके बाद संबंधित संस्थाओं और विशेषज्ञों के सहयोग से इस परियोजना को जमीन पर उतारा गया।

मुंबई में भी हो चुका है सफल परीक्षण

इस तकनीक का इस्तेमाल इससे पहले मुंबई में भी किया जा चुका है। वहां पेड़ों की डिजिटल मैपिंग और उनकी सेहत का आकलन करने के लिए AI और LiDAR तकनीक का सहारा लिया गया था।

मुंबई में मिले अच्छे नतीजों के बाद अब नागपुर में भी इसे आजमाया जा रहा है। अधिकारियों को उम्मीद है कि यहां भी यह मॉडल सफल साबित होगा।

पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा नया हथियार

आज के दौर में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और विकास कार्यों के बीच पेड़ों को बचाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

ऐसे में AI और LiDAR जैसी तकनीक पर्यावरण संरक्षण के लिए एक मजबूत हथियार साबित हो सकती है। इससे प्रशासन को यह समझने में आसानी होगी कि किस इलाके में ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है और किन पेड़ों को तत्काल देखभाल चाहिए।

साथ ही भविष्य में वृक्षारोपण और हरित योजनाओं को भी ज्यादा वैज्ञानिक तरीके से लागू किया जा सकेगा।

Nagpur बनेगा देश के लिए मॉडल

अगर यह परियोजना अपने मकसद में कामयाब रहती है तो Nagpur देश के उन चुनिंदा शहरों में शामिल हो जाएगा, जहां पेड़ों की निगरानी पूरी तरह आधुनिक तकनीक के सहारे की जाएगी।

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल सिर्फ नागपुर के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल बन सकती है। टेक्नोलॉजी और प्रकृति के इस खूबसूरत मेल से शहर की हरियाली को नई मजबूती मिलेगी और आने वाली नस्लों के लिए एक बेहतर माहौल तैयार होगा।

कुल मिलाकर देखा जाए तो Nagpur ने एक ऐसा कदम उठाया है, जो आने वाले वर्षों में शहरी पर्यावरण संरक्षण की तस्वीर बदल सकता है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह हाईटेक प्रयोग जमीन पर कितना कामयाब साबित होता है।

यह भी पढ़े –

Nagpur के Khaperkheda में दिनदहाड़े 5 लाख की चोरी, खापरखेड़ा में कार से नकदी लेकर फरार हुए बदमाश

Nagpur के Arshad Khan का कमाल, एक ओवर में 3 विकेट लेकर India A को बनाया Champion