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Nagpur की Ambazari Lake से 80 हजार टन जलकुंभी हटाने की मुहिम तेज, कमिश्नर डॉ. विपिन के सख्त निर्देश से बढ़ी कार्रवाई

Nagpur की Ambazari Lake से 80 हजार टन जलकुंभी हटाने की मुहिम तेज, कमिश्नर डॉ. विपिन के सख्त निर्देश से बढ़ी कार्रवाई

Nagpur की पहचान बनी Ambazari Lake पर बढ़ता खतरा

Nagpur की मशहूर Ambazari Lake इन दिनों एक बड़ी परेशानी का सामना कर रही है। झील के पानी पर तेजी से फैल रही जलकुंभी ने हालात ऐसे बना दिए हैं कि प्रशासन को अब जंगी स्तर पर कार्रवाई करनी पड़ रही है। मानसून सिर पर है और ऐसे वक्त में अगर झील की सफाई पूरी नहीं हुई तो आने वाले दिनों में मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

इसी सिलसिले में Nagpur महानगरपालिका के आयुक्त डॉ. विपिन ने हाल ही में अंबाझरी झील का दौरा किया और मौके पर चल रहे सफाई अभियान का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को साफ शब्दों में कहा कि काम की रफ्तार और बढ़ाई जाए ताकि बारिश शुरू होने से पहले झील को जलकुंभी से पूरी तरह राहत मिल सके।

आखिर क्या है जलकुंभी और क्यों बन गई मुसीबत?

जलकुंभी एक ऐसा जलीय पौधा है जो बहुत तेजी से फैलता है। शुरुआत में यह देखने में हरा-भरा और खूबसूरत लगता है, लेकिन हकीकत में यह किसी भी झील या तालाब के लिए बड़ी आफत साबित हो सकता है।

जब जलकुंभी पूरे पानी की सतह को ढक लेती है तो सूरज की रोशनी पानी के अंदर तक नहीं पहुंच पाती। इससे पानी में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है और मछलियों समेत कई जलीय जीवों की जिंदगी खतरे में पड़ जाती है। इसके अलावा पानी की गुणवत्ता भी खराब होने लगती है और मच्छरों की तादाद बढ़ जाती है।

Ambazari Lake में भी कुछ ऐसा ही मंज़र देखने को मिला, जहां जलकुंभी ने काफी बड़े हिस्से को अपनी गिरफ्त में ले लिया था। यही वजह है कि प्रशासन ने इसे हटाने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान शुरू किया।

कमिश्नर ने लिया हालात का जायजा

Ambazari Lake के निरीक्षण के दौरान डॉ. विपिन ने सफाई कार्य का बारीकी से मुआयना किया। उन्होंने अधिकारियों से प्रगति रिपोर्ट ली और यह जानने की कोशिश की कि अब तक कितना काम पूरा हो चुका है।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने साफ कहा कि जलकुंभी केवल झील की खूबसूरती को नुकसान नहीं पहुंचाती बल्कि पूरे पर्यावरण और जल तंत्र के लिए खतरा बन जाती है। इसलिए इसकी जड़ से सफाई बेहद जरूरी है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जो हिस्सा अभी भी जलकुंभी से ढका हुआ है, वहां तेजी से कार्रवाई की जाए और किसी भी तरह की लापरवाही न बरती जाए।

दोनों किनारों पर बढ़ेगा मशीनों का इस्तेमाल

काम को तेजी से पूरा करने के लिए कमिश्नर ने झील के दोनों तरफ अतिरिक्त एक्सकेवेटर मशीनें लगाने के निर्देश दिए हैं। उनका मानना है कि ज्यादा मशीनें लगने से सफाई का काम कम समय में पूरा हो सकेगा।

फिलहाल Ambazari Lake में कई आधुनिक मशीनें लगातार काम कर रही हैं। ये मशीनें पानी में तैर रही जलकुंभी को निकालकर किनारे तक पहुंचाती हैं। इसके बाद ट्रकों की मदद से उसे वहां से हटाया जाता है।

नगर निगम का कहना है कि मशीनों की संख्या बढ़ने के बाद अभियान और ज्यादा असरदार होगा और मानसून से पहले काफी हद तक झील को साफ कर लिया जाएगा।

80 हजार टन से ज्यादा जलकुंभी हटाई गई

अधिकारियों के मुताबिक अब तक Ambazari Lake से लगभग 80 हजार टन जलकुंभी हटाई जा चुकी है। यह आंकड़ा अपने आप में बताता है कि झील में समस्या कितनी गंभीर हो चुकी थी।

इतनी बड़ी मात्रा में जलकुंभी हटाना आसान काम नहीं था। इसके लिए लगातार मशीनों, कर्मचारियों और तकनीकी टीमों को मैदान में उतारा गया। हालांकि काफी हिस्सा साफ हो चुका है, लेकिन अभी भी कुछ इलाकों में काम जारी है।

प्रशासन का मकसद है कि बारिश शुरू होने से पहले पूरी झील को साफ कर दिया जाए ताकि पानी के बहाव में किसी तरह की रुकावट न आए।

मानसून से पहले सफाई क्यों है जरूरी?

Ambazari Lake Nagpur के लिए सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं बल्कि शहर के जल संतुलन का अहम हिस्सा भी है। बारिश के मौसम में यह झील बड़ी मात्रा में पानी को संभालती है।

अगर झील में जलकुंभी मौजूद रहती है तो पानी के प्राकृतिक बहाव में रुकावट पैदा हो सकती है। ऐसे हालात में जलभराव और बाढ़ जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

पिछले कुछ सालों में नागपुर ने भारी बारिश के दौरान कई चुनौतियां देखी हैं। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए प्रशासन इस बार कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। इसलिए मानसून से पहले सफाई अभियान को सबसे बड़ी प्राथमिकता दी जा रही है।

सीवेज का पानी भी बढ़ा रहा है परेशानी

विशेषज्ञों का मानना है कि जलकुंभी की तेजी से बढ़ोतरी के पीछे झील में पहुंच रहा गंदा पानी भी एक बड़ी वजह है।

जब सीवेज या गंदा पानी झील में मिलता है तो उसमें मौजूद पोषक तत्व जलकुंभी के लिए खाद का काम करते हैं। नतीजा यह होता है कि यह पौधा बहुत तेजी से फैलने लगता है।

पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि सिर्फ जलकुंभी हटाने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। अगर झील में गंदे पानी का प्रवाह जारी रहा तो कुछ महीनों बाद यही परेशानी दोबारा सामने आ सकती है।

इसलिए सफाई अभियान के साथ-साथ सीवेज नियंत्रण पर भी बराबर ध्यान देना जरूरी है।

Ambazari Lake का ऐतिहासिक और पर्यावरणीय महत्व

Ambazari Lake Nagpur की सबसे पुरानी और अहम झीलों में से एक मानी जाती है। यह सिर्फ पानी का स्रोत नहीं बल्कि शहर की विरासत का हिस्सा भी है।

हर साल हजारों लोग यहां सैर-सपाटे, मॉर्निंग वॉक और परिवार के साथ वक्त बिताने आते हैं। झील के आसपास का इलाका शहर के सबसे खूबसूरत स्थानों में गिना जाता है।

यही वजह है कि जब भी झील पर कोई खतरा आता है तो पूरे शहर की नजर उस पर टिक जाती है। लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन की मौजूदा कोशिशें झील को फिर से उसकी पुरानी रौनक लौटा देंगी।

नागरिकों की जिम्मेदारी भी कम नहीं

प्रशासन अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहा है, लेकिन केवल सरकारी मशीनरी के भरोसे झील को हमेशा साफ रखना आसान नहीं है।

शहरवासियों की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे झील और उसके आसपास गंदगी न फैलाएं। प्लास्टिक, कचरा और अन्य अपशिष्ट पदार्थों को पानी में फेंकने से बचें।

अगर आम लोग भी पर्यावरण के प्रति जागरूक रहें और प्रशासन का साथ दें तो अंबाझरी झील लंबे समय तक साफ-सुथरी और खूबसूरत बनी रह सकती है।

Ambazari Lake को जलकुंभी से मुक्त कराने की यह मुहिम नागपुर के लिए बेहद अहम साबित होने वाली है। कमिश्नर डॉ. विपिन के सख्त निर्देशों के बाद अभियान में नई तेजी देखने को मिल रही है। अतिरिक्त मशीनें, लगातार निगरानी और समयबद्ध योजना के जरिए प्रशासन मानसून से पहले झील को पूरी तरह साफ करने की कोशिश में जुटा है।

अगर इसी तरह काम जारी रहा और साथ ही गंदे पानी के प्रवाह पर भी रोक लगाई गई, तो आने वाले दिनों में अंबाझरी झील फिर से अपनी पुरानी शान, खूबसूरती और पर्यावरणीय अहमियत के साथ नागपुर की पहचान बनकर उभरेगी।

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