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Narali Purnima:2025 के अवसर पर Maharashtra सरकार द्वारा परीक्षा रद्द

Narali Purnima के अवसर पर Maharashtra सरकार द्वारा परीक्षा रद्द

जैसा कि आप सभी जानते हैं, हमारा भारत त्योहारों की भूमि है। यहाँ मनाया जाने वाला हर पर्व यहाँ पाए जाने वाले लोगों की धार्मिक भावनाओं के साथ-साथ सांस्कृतिक और सामाजिक भावनाओं से भी जुड़ा होता है। Narali Purnima भी इनही में से एक भारतीय त्योहार है |

भारत में Narali Purnima

भारत में मनाए जाने वाले सेकड़ों त्योहारों में से एक त्योहार है नारली पूर्णिमा जो मुख्य रूप से महाराष्ट्र और कोंकण , गोवा, गुजरात राज्यों में तथा दक्षिण भारत के तटीय क्षेत्रों में अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। खासकर समुद्र तटों पर स्थित राज्यों में निराली पूर्णिमा का यह त्यौहार हर्ष और उल्लास से मनाया जाता है

आइए जानते हैं नारळी पूर्णिमा क्या है ?

नारळी पूर्णिमा श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। इस दिन समुद्र देवता की पूजा करके उन्हें नारियल अर्पित किया जाता है। Narali Purnima का यह त्योहार खासकर मछुआरा समाज के लोगों द्वारा हर्ष और उल्लास से मनाया जाता है|

यह त्योहार मछुआरा समुदाय (कोळी समाज) के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसके बाद वे समुद्र में फिर से मछली पकड़ने का कार्य प्रारंभ करते हैं। मॉनसून के दौरान समुद्र में तूफान और ऊँची लहरों के कारण मछुआरे समुद्र में नहीं उतरते। नारळी पूर्णिमा के दिन समुद्र शांत हो जाता है और इसे एक नई शुरुआत के रूप में देखा जाता है।

जानें क्या है ‘नारळी’ शब्द का अर्थ

नारली शब्द का अर्थ है नारियल, असल में नारली यह एक मराठी भाषा का शब्द है। जैसा कि हम सभी जानते हैं, हिंदू धर्म में नारियल को बहुत ही पवित्र माना जाता है। हम किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले नारियल जरूर फोड़ते हैं। नारली पूर्णिमा के दिन मछुआरे समुद्र के सामने नारियल फोड़कर समुद्र का शुक्रिया अदा करते हैं। आगे की खुशहाली और समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं|

Narali Purnima के अवसर पर समुद्र देवता का आभार

निराली पूर्णिमा का सबसे अहम मकसद प्रकृति का शुक्र करना है। मछुआरा समाज के लिए समुद्र उनकी माँ की तरह होता है। इस दिन सभी मछुआरे अपनी नावों की सफाई करते हैं, उनकी हल्दी-कुमकुम और फूलों के साथ नारियल चढ़ाकर पूजा करते हैं। और प्रार्थना करते हैं कि आने वाले पूरे साल उनका काम अच्छा चले और सुख और समृद्धि बनी रहे एवं वह हर प्रकार के हादसों से बचे रहें।

Narali Purnima के अवसर पर महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला

इस वर्ष यानी 8 अगस्त 2025 को महाराष्ट्र सरकार ने नारळी पूर्णिमा को लेकर घोषणा की मुंबई और आसपास के शहरों में सभी राज्य और अर्ध-राज्य कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों और स्कूल-कॉलेजों के लिए सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया ।

BMC (मुंबई नगर निगम) ने भी इस अवसर पर अपने स्कूल एवं गैर-जरूरी कार्यालयों को अवकाश घोषित किया, जबकि अत्यावश्यक सेवाएं जारी रहीं । इस आदेश के प्रकाश में मुंबई विश्वविद्यालय ने उसी दिन निर्धारित अपनी परीक्षाएं स्थगित कर दीं, और नए तारीख की घोषणा बाद में की जाएगी ।

नारली पूनिमा का सामाजिक महत्व

नारळी पूर्णिमा का उत्सव केवल धार्मिक नहीं होता, यह एक सामाजिक त्यौहार भी है। इस दिन महिलाएँ पारंपरिक वस्त्रों में सज-धज कर देवी-देवताओं की पूजा करती हैं।

कोळी नृत्य (Fisherfolk Dance) जैसे पारंपरिक लोकनृत्य प्रस्तुत किए जाते हैं। प्रसाद के रूप में नारियल से बनी मिठाइयाँ, जैसे नारळाची वडी, पूरणपोली, नारियल लड्डू, तैयार किए जाते हैं।

युवक-युवतियाँ पारंपरिक गीत गाकर और डोल-ताशे बजाकर समुद्र के किनारे उत्सव मनाते हैं। कुछ क्षेत्रों में रक्षाबंधन भी इसी दिन मनाया जाता है, जो भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है।

Narali Purnima का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

नारळी पूर्णिमा केवल मछुआरों का पर्व नहीं है, यह सम्पूर्ण मानवता को प्रकृति के साथ समन्वय बनाकर चलने का संदेश देता है। यह त्योहार दर्शाता है कि प्रकृति केवल संसाधन नहीं, बल्कि एक पूज्यनीय शक्ति है, जिसे आदर, श्रद्धा और प्रेम के साथ देखा जाना चाहिए।

और बिना सोचे समझे इसका उपव्‍य नहीं करना चाहिए, प्राकृतिक संसाधनों का संभालकर उपयोग करना चाहिए।यह पर्व सामाजिक एकता और सामूहिकता का भी प्रतीक है। मछुआरा समाज इस दिन मिलजुल कर एकजुट होकर समुद्र देव की पूजा करता है, जिससे सामाजिक बंधन और मजबूत होते हैं।

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