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Independence Day का इतिहास
भारत को Independence Day दिलाने की लड़ाई बहुत पहले शुरू हो गई थी। जब अंग्रेजों की ईस्ट इंडिया कंपनी 1600 के बाद भारत आई, तो उन्होंने धीरे-धीरे व्यापार के बहाने राज करना शुरू कर दिया। 18वीं सदी तक उन्होंने कई हिस्सों पर कब्ज़ा कर लिया और 1857 में जब देश के लोगों ने पहली बार बगावत की, तो अंग्रेजों ने सीधे भारत पर राज करना शुरू कर दिया।
1885 में राष्ट्रीय कांग्रेस बनी, जिसने लोगों को आज़ादी के लिए एकजुट किया। फिर आए Mahatma Gandhi, जिन्होंने बिना हिंसा के लड़ाई लड़ने का तरीका अपनाया। उन्होंने असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन, और भारत छोड़ो आंदोलन चलाए, जिससे अंग्रेजों को भारत छोड़ने की मजबूरी हुई।

ये लड़ाई सिर्फ नेताओं की नहीं थी—हर आम इंसान ने इसमें हिस्सा लिया। किसी ने जेल झेली, किसी ने जान दी, और किसी ने अपने सपनों की कुर्बानी दी।
1930 में पूर्ण स्वराज (Purna Swaraj) की घोषणा करते हुए कांग्रेस ने 26 जनवरी को स्वराज दिवस के रूप में मनाया, जो स्वतंत्रता की दिशा में एक प्रेरक कदम था । अंततः, 3 जून 1947 के माउंटबेटन योजना तथा भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 (Indian Independence Act 1947) के माध्यम से भारत और पाकिस्तान को 15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि (14-15 अगस्त) से स्वतंत्र डोमिनियन घोषित कर दिया गया ।
पहले Independence Day पर भाषण
14 अगस्त और 15 अगस्त 1947 की दरमियानी रात भारत को आज़ाद देश घोषित किया गया। उसी ऐतिहासिक रात को, देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा में अपना मशहूर भाषण “Tryst with Destiny” दिया।इस भाषण को 20वीं सदी के सबसे असरदार और यादगार भाषणों में गिना जाता है।
अगले ही दिन, यानी 15 अगस्त 1947 की सुबह, पंडित नेहरू ने दिल्ली के लाल किले की ऊँची प्राचीर पर पहली बार तिरंगा झंडा फहराया और पूरे देश को संबोधित किया। यह दिन भारतवासियों के लिए अपार खुशी और गर्व लेकर आया, क्योंकि सदियों की गुलामी के बाद भारत ने आज़ादी की सांस ली।
लेकिन इस खुशी के साथ ही एक गहरा दर्द भी जुड़ा था देश का बंटवारा। इस विभाजन में लाखों लोग अपने घर-बार से उजड़ गए, कई परिवार बिछड़ गए और हजारों लोग घायल हुए। यह दिन भारत की आज़ादी के साथ-साथ उस समय की कठिन परिस्थितियों और बलिदानों की याद भी दिलाता है।
Independence Day का महत्व
15 अगस्त – यह सिर्फ़ कैलेंडर की एक तारीख़ नहीं है, बल्कि हमारे दिलों की धड़कन है। यह वह दिन है जब हमारा भारत सदियों की गुलामी की बेड़ियों को तोड़कर आज़ाद हुआ था। स्वतंत्रता दिवस हमें याद दिलाता है कि आज़ादी हमें यूँ ही नहीं मिली, इसके पीछे अनगिनत वीरों की कुर्बानियाँ और संघर्ष छुपा है।
इस दिन का सबसे बड़ा गौरव हमारा तिरंगा है, जो हवा में लहराकर हमसे कहता है – “मैं तेरी शान हूँ, मुझे ऊँचा रखना”। राष्ट्रगान की हर पंक्ति हमारे भीतर एक अटूट जोश भर देती है। हम उन स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करते हैं जिन्होंने हँसते-हँसते फाँसी के फंदे को चूमा और अपना लहू इस मिट्टी के नाम कर दिया।
पूरे देश में इस दिन ध्वजारोहण, देशभक्ति के गीत, सांस्कृतिक कार्यक्रम, और परेड का आयोजन होता है। स्कूलों में बच्चे तिरंगा हाथों में लेकर नारे लगाते हैं – “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम”।दिल्ली के लाल किले पर प्रधानमंत्री का संबोधन और 21 तोपों की सलामी, इस दिन को और भी ऐतिहासिक और गौरवशाली बना देती है।
स्वतंत्रता दिवस हमें सिर्फ़ अपने अतीत की याद नहीं दिलाता, बल्कि यह वादा भी करवाता है कि हम अपने देश की एकता, भाईचारे और सम्मान की रक्षा हमेशा करेंगे। यह दिन हमें सिखाता है कि भारत सिर्फ़ एक ज़मीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि हमारे दिल की धड़कन, हमारी पहचान और हमारी आत्मा है।
वर्ष 2025: हमारा 79वाँ Independence Day
15 अगस्त 2025 को हमारा प्यारा भारत अपना 79वाँ स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। भले ही हमें आज़ाद हुए पूरे 78 साल हो चुके हैं, लेकिन गिनती के हिसाब से 1947 में पहला स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था, इसलिए साल 2025 में हम 79वाँ स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं।
यह दिन सिर्फ़ एक तारीख़ नहीं है, बल्कि यह हमारे देश की तरक्की, एकता और सबको साथ लेकर चलने की भावना का प्रतीक है। आज़ादी के इन दशकों में भारत ने हर क्षेत्र में, चाहे वह विज्ञान हो, शिक्षा, खेल, तकनीक, या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाना,बेहद बड़ी उपलब्धियाँ हासिल की हैं।
इस बार का स्वतंत्रता दिवस हमें यह याद दिलाता है कि हम सभी मिलकर अपने देश को और मज़बूत, समृद्ध और खुशहाल बनाने के लिए ज़िम्मेदार हैं। यह दिन हमें गर्व से सिर ऊँचा करने का मौका देता है और यह वादा दोहराने का भी कि हम हमेशा अपनी आज़ादी की रक्षा करेंगे और देश को नई ऊँचाइयों तक ले जाएंगे।
2025 Independence Day की तैयारियाँ
साल 2025 का Independence Day पूरे देश में बड़ी धूमधाम और उत्साह के साथ मनाने की तैयारियाँ जोरों पर हैं। इस बार इसे और खास, उत्सवमय और सबको जोड़ने वाला बनाने के लिए अलग-अलग राज्यों और शहरों में कई योजनाएँ और कार्यक्रम शुरू किए गए हैं।
“हर घर तिरंगा” अभियान – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के हर नागरिक से अपील की है कि 13 से 15 अगस्त के बीच अपने-अपने घरों पर तिरंगा ज़रूर फहराएँ। यह सिर्फ़ देशभक्ति दिखाने का तरीका नहीं है, बल्कि हमारी भारतीय सेना की बहादुरी और बलिदान को सम्मान देने का भी एक सुंदर संदेश है।
उत्तर प्रदेश की “हर घर तिरंगा” योजना – यूपी सरकार ने खासतौर पर शहरी गरीब इलाकों में 60 लाख तिरंगों का मुफ्त वितरण करने का फैसला लिया है। Independence Day अभियान के लिए ₹12 करोड़ का बजट रखा गया है और 29,000 महिलाओं को रोजगार देने की भी योजना है, ताकि यह कार्यक्रम रोज़गार और राष्ट्रभक्ति—दोनों को बढ़ावा दे सके।
तेलंगाना में तिरंगा वितरण – यहाँ भाजपा की ओर से 40 लाख तिरंगे लोगों में बाँटे जा रहे हैं, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग इस अभियान का हिस्सा बनें।
स्कूलों में देशभक्ति गतिविधियाँ – दिल्ली के शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पत्र लेखन प्रतियोगिता और तिरंगा-थीम पर आधारित कला कार्य आयोजित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि बच्चों में देशप्रेम की भावना गहरी हो।
सूरत की “तिरंगा यात्रा” – सूरत शहर में 10,000 से अधिक लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। यहाँ रंग-बिरंगी सजावट, सफाई अभियान और कला प्रदर्शन जैसी गतिविधियों के साथ कार्यक्रम को खास बनाया जा रहा है।
राजस्थान में मंत्रियों की जिम्मेदारी – राजस्थान के 23 मंत्रियों को अलग-अलग जिलों में जाकर ध्वजारोहण करने की जिम्मेदारी दी गई है। इस सूची में उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी का नाम भी प्रमुख है। साथ ही, राजस्थान से कई विशेष ट्रेनें चलाई जा रही हैं ताकि लोगों को यात्रा में कोई परेशानी न हो।
रांची में सुरक्षा व्यवस्था – मोरहाबादी ग्राउंड में स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम के लिए 100 से अधिक CCTV कैमरे लगाए गए हैं। इसके साथ ही अतिरिक्त पुलिस बल, ट्रैफिक मैनेजमेंट और बिहार पुलिस व झारखंड सशस्त्र पुलिस की तैनाती भी की गई है, ताकि कार्यक्रम पूरी तरह सुरक्षित माहौल में हो सके।
“ऑपरेशन सिंदूर” थीम वाले आमंत्रण कार्ड – इस साल के मुख्य अतिथि कार्ड पर “ऑपरेशन सिंदूर” का लोगो छपा होगा। इसके अलावा, समारोह में 105 मिमी लाइट फील्ड गन से सलामी दी जाएगी, जो भारतीय सेना की उपलब्धियों को सलाम करने का प्रतीक होगा।
प्रधानमंत्री के संबोधन में जनता की भागीदारी – इस बार लाल किले से प्रधानमंत्री के भाषण में जनता की राय और विचार भी शामिल किए जा रहे हैं। इसके लिए वर्चुअल इवेंट, ग्रीन कैंपेन और युवाओं के लिए अलग-अलग प्रतियोगिताएँ आयोजित हो रही हैं, ताकि हर वर्ग के लोग इस राष्ट्रीय पर्व से जुड़ सकें।
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