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जाने, कब हुआ Rajasthan मे ये Accident
13 अगस्त 2025 की सुबह Rajasthan Accident के दौसा–मनोहरपुर हाईवे पर ऐसा मंजर देखने को मिला, जिसे सोचकर भी रोंगटे खड़े हो जाएं। रात से सुबह के बीच का वक़्त था—करीब 3:30 से 5:00 बजे के बीच—जब ज्यादातर लोग गहरी नींद में होते हैं। खाटू श्याम और सलासर बालाजी के दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालुओं से भरी एक निजी पिकअप वैन Bapi गांव के पास सेवा लेन में जा रही थी। माहौल शांत था, सड़क लगभग सुनसान, लेकिन अगले ही पल सबकुछ बदल गया।

अचानक वैन सीधे एक खड़े हुए भारी ट्रेलर-ट्रक से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि पिकअप का अगला हिस्सा चकनाचूर हो गया। पुलिस और प्रशासन के मुताबिक, शुरुआती जांच में शक है कि ड्राइवर को नींद की झपकी आ गई थी, जिससे वाहन पर नियंत्रण खो बैठा। इस हादसे ने 11 ज़िंदगियां छीन लीं और कई लोग अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।
ये घटना सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि एक चेतावनी है—लंबी यात्रा के दौरान थकान और नींद को नज़रअंदाज़ करना कितना खतरनाक हो सकता है। सड़क पर एक छोटी सी चूक, कई परिवारों की दुनिया उजाड़ सकती है।
Rajasthan Accident में कितने लोगों की जान गई
इस दिल दहला देने वाले हादसे में 11 श्रद्धालुओं की जान चली गई, जिनमें 7 मासूम बच्चे और 4 महिलाएं शामिल थीं। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि पिकअप का आगे का हिस्सा पूरी तरह पिचक गया और लोहे की कुलचियां मुड़कर कबाड़ बन गईं।
हादसे के बाद का मंजर इतना भयावह था कि कई लोग गाड़ी के अंदर ही फंसे रह गए और मदद पहुंचने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया।मौके पर पहुंची Rajasthan पुलिस, स्थानीय लोग और बचाव दल ने मिलकर फंसे हुए लोगों को बाहर निकाला, लेकिन कई घायल इतने गंभीर थे कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी सांसें थम गईं।
Rajasthan के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस हादसे को बेहद दुखद बताते हुए गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने अधिकारियों को आदेश दिया कि घायल लोगों को तुरंत और बेहतर से बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जाए, ताकि और जानें न जाएं। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिवारों के लिए आर्थिक मदद और घायलों की देखभाल में कोई कमी न रहने की बात भी कही।
Rajasthan Accident के मृतकों की पहचान
घायलों और मृतकों की पहचान राहत-बचाव कार्य शुरू होते ही तेजी से कर ली गई। यह पता चला कि सभी श्रद्धालु उत्तर प्रदेश के एटा जिले के असरौली गांव के रहने वाले थे। वे कुछ दिन पहले खाटू श्याम जी के दर्शन और फिर सलासर बालाजी के दर्शन करके वापस लौट रहे थे।
Rajasthan स्थानीय मीडिया ने मृतकों के नाम भी जारी किए, जिनमें मासूम बच्चे और महिलाएं शामिल हैं। इनमें पूरवी, दक्ष, सीमा, प्रियंका, अंशु, सौराब और शीला के नाम प्रमुख रूप से बताए गए हैं। इन नामों को सुनकर गांव में मातम पसर गया-हर गली, हर घर से रोने-बिलखने की आवाजें आने लगीं।
जिन परिवारों ने अपने लाल खो दिए, उनकी आंखों के आंसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे।गांव के लोग बताते हैं कि यह जत्था हर साल दर्शन के लिए जाता था, लेकिन इस बार की यात्रा खुशियों के बजाय गम और दर्द की लकीरें छोड़ गई।
Accident के बाद इमरजेंसी बचाओ कार्य –
जैसे ही हादसे की खबर फैली, Rajasthan स्थानीय प्रशासन, पुलिस और बचाव दल बिना समय गंवाए तुरंत घटनास्थल पर पहुँच गए। चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल था—कहीं घायल कराह रहे थे, तो कहीं परिजन बदहवास हालत में अपनों को खोज रहे थे।
बचावकर्मी फंसे हुए लोगों को पिकअप के मलबे से बाहर निकालने में जुट गए। घायलों को तुरंत एंबुलेंस में डालकर अस्पताल भेजा जाने लगा। ज़्यादातर गंभीर हालत वाले मरीजों को जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल रेफर किया गया, जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टर उनकी देखभाल कर रहे हैं।
वहीं, कुछ घायलों को दौसा जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, ताकि उन्हें भी समय पर इलाज मिल सके।मौके पर मौजूद एक अधिकारी ने बताया कि तेजी से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया, ताकि एक भी जान बचाने का मौका हाथ से न जाए।
जाने इस हादसे पर नेताओं का क्या कहना है?
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस हादसे पर गहरा दुख जताते हुए सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर अपनी संवेदनाएँ साझा कीं। उन्होंने लिखा-
“दौसा में हुई सड़क दुर्घटना में कई लोगों की जान जाने की खबर बेहद दुखद और पीड़ादायक है। मैंने जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि सभी घायलों को तुरंत और बेहतरीन इलाज मिले। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्माओं को शांति मिले और घायलों को जल्द से जल्द स्वस्थ होने की शक्ति प्राप्त हो।”
मुख्यमंत्री के इस संदेश में हादसे की गंभीरता और पीड़ित परिवारों के प्रति उनकी संवेदना साफ झलक रही थी।राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने इस सड़क हादसे पर गहरा दुख जताया और कहा कि वे पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हैं। दोनों नेताओं ने दिवंगत आत्माओं की शांति और घायलों के जल्द ठीक होने की प्रार्थना भी की।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी हादसे में जान गंवाने वाले सभी लोगों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने यूपी और राजस्थान के प्रशासन को कहा कि वे आपस में तालमेल बनाकर पीड़ित परिवारों की हर तरह से मदद करें, चाहे वो आर्थिक हो या इलाज से जुड़ी।
स्थानीय नेता कीरोड़ी लाल मीणा ने याद दिलाया कि इस इलाके में पहले भी कई बार ऐसे हादसे हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह सड़क का हिस्सा काफी खतरनाक है और इस पर तुरंत काम होना चाहिए। मीणा जी ने केंद्र सरकार से गुहार लगाई कि इस हाईवे के इस हिस्से का जल्द से जल्द पुनर्निर्माण किया जाए ताकि आगे और किसी की जान न जाए।
मृतकों के पूरे गाँव में शोक का माहौल
उत्तर प्रदेश के एटा जिले का असरौली गांव इस दर्दनाक हादसे की खबर सुनते ही जैसे थम-सा गया। जहां कल तक हंसी-खुशी का माहौल था, वहां अब हर तरफ मातम और सन्नाटा छाया है। जिन घरों से लोग दर्शन करने निकले थे, वहां अब सिर्फ आंसू और रोने की आवाजें हैं।
गलियों में लोग एक-दूसरे को ढांढस बंधाने की कोशिश तो कर रहे हैं, लेकिन हर आंख नम है और दिल भारी है। गांव के बुजुर्ग, औरतें, बच्चे-सब अपने खोए हुए अपनों को याद करके बेसुध हो रहे हैं। हर घर के आंगन में शोक का माहौल है, और पूरा गांव मिलकर दिवंगतों को अंतिम विदाई देने की तैयारी में जुटा है, ताकि उन्हें सम्मान और प्यार के साथ विदा किया जा सके।
क्या सड़क सुरक्षा इस हादसे की जिम्मेदार है?
इस हादसे ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि सड़क सुरक्षा की व्यवस्थाओं-खासकर उन रास्तों पर जहां होटल, ढाबे और भारी ट्रक रुकते हैं-पर गंभीरता से पुनर्विचार किया जाए। ट्रकों के लिए अलग और स्पष्ट पार्किंग ज़ोन होना जरूरी है, ताकि वे सड़क के किनारे यूं ही खड़े न रहें। तेज रफ्तार वाहनों के लिए स्पीड कंट्रोल ज़ोन और सुरक्षित ब्रेक ज़ोन की व्यवस्था भी होनी चाहिए, जिससे अचानक हादसे टाले जा सकें।
यात्रियों की तरफ से भी सावधानी ज़रूरी है—जैसे सीट बेल्ट लगाना, अच्छे हालत वाले वाहन में सफर करना और ड्राइवर की सेहत पर ध्यान देना, खासकर यह सुनिश्चित करना कि वह पर्याप्त आराम कर चुका हो और नींद से बोझिल न हो।
यह घटना सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि कई घरों के सपनों और खुशियों के टूटने की कहानी है। धार्मिक यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं का कारवां, अचानक एक दर्दनाक मोड़ पर आकर थम गया—जहां 11 मासूम जिंदगियां बुझ गईं, जिनमें चार महिलाएं और सात बच्चे शामिल थे।
प्रशासन ने राहत और बचाव का काम किया, नेता और जनप्रतिनिधि शोक संदेश देते रहे, लेकिन बड़ा सवाल यही है,क्या हम आगे ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सच में ठोस कदम उठा पाएंगे? सड़क सुरक्षा, यात्री सतर्कता और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर पर अब केवल चर्चा नहीं, बल्कि तुरंत कार्रवाई करने का समय आ चुका है।
यह हादसा केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि कई घरों का उजड़ा संसार है। श्रद्धालुओं की धार्मिक यात्रा एक दुखांत घटना में बदल गई—जहां 11 जीवन समाप्त हुए, जिनमें चार महिलाएं और सात बच्चे शामिल थे। प्रशासन ने राहत कार्य किया और नेताओं ने संवेदना जाहिर की; लेकिन असली सवाल यह है कि क्या हम भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सड़क सुरक्षा, यात्री सतर्कता और इंफ्रास्ट्रक्चर पर पर्याप्त कदम उठा पाएंगे? समय यही मांगता है।
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