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Achyut Potdar नहीं रहे –
हमारे देश ने अपने बेहद प्यारे और दिलों में बसने वाले अभिनेता Achyut Potdar जी को खो दिया है।18 अगस्त 2025 को ठाणे के जुपिटर अस्पताल में उन्होंने अपनी आखिरी सांस ली। उस समय उनकी उम्र 91 साल थी।

उनके जाने से न सिर्फ हिंदी और मराठी फिल्मों में, बल्कि टीवी की दुनिया में भी गहरा दुख और खालीपन महसूस किया जा रहा है। दर्शक और फिल्म जगत के लोग उन्हें हमेशा उनके सरल स्वभाव और बेहतरीन अभिनय के लिए याद करेंगे।
Achyut Potdar जीवन के रंग अभिनय से पहले की कहानी
Achyut Potdar का जीवन वाकई किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था।22 अगस्त 1934 को जपुर में उनका जन्म हुआ। पढ़ाई-लिखाई उन्होंने इंदौर में पूरी की। वहां उन्होंने अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर किया और वो भी पहली ही श्रेणी में, साथ ही विश्वविद्यालय पदक भी पाया।
पढ़ाई के बाद उन्होंने सबसे पहले मध्य प्रदेश के रेवां में एक कॉलेज में अध्यापन का काम शुरू किया। इसके बाद उनकी ज़िंदगी ने नया मोड़ लिया और वे भारतीय सेना में शामिल हो गए, जहाँ मेहनत और लगन से उन्होंने कैप्टन का पद हासिल किया।
लेकिन उनकी यात्रा यहीं खत्म नहीं हुई। सेना से निकलने के बाद वे इंडियन ऑयल कंपनी में आ गए और वहां लगभग 25 सालों तक सेवा दी। इस दौरान वे सिर्फ दफ्तर के काम तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि वहां होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और उन्हें आयोजित भी किया।
इन्हीं कार्यक्रमों के जरिए धीरे-धीरे उनका रुझान एक्टिंग की ओर बढ़ता गया। और आखिरकार साल 1980 में, जब उनकी उम्र लगभग 44 साल थी, तब उन्होंने फिल्मी दुनिया में कदम रखा।
दिलचस्प बात ये थी कि Achyut Potdar जी ने एक्टिंग को कभी कमाई का साधन या नौकरी नहीं माना। उनके लिए ये सिर्फ एक शौक और जुनून था। उन्हें जो भी भूमिका मिली, उन्होंने उसे पूरी ईमानदारी और सादगी से निभाया।
चार दशकों में Achyut Potdar ने 200 से ज़्यादा Film की
अभिनेता के तौर पर अच्युत पोतदार जी का योगदान सचमुच बहुत बड़ा रहा है। उन्होंने अपने लंबे करियर में 125 से भी ज़्यादा फिल्मों में अभिनय किया। इसके अलावा 95 टीवी सीरीयल्स, 26 नाटक और 45 विज्ञापनों में भी उन्होंने अपनी अदाकारी का जादू बिखेरा।
उनकी यादगार फिल्मों की लिस्ट भी कमाल की है-तेज़ाब, परिंदा, रंगीला, वास्तव, परिणीता, लगे रहो मुन्ना भाई, दबंग 2, वेंटिलेटर और 3 इडियट्स जैसी हिट फिल्मों में उनका शानदार काम देखने को मिला।
टीवी की दुनिया में भी उन्होंने घर-घर तक अपनी पहचान बनाई। भारत एक खोज, वागले की दुनिया, मजा होशील ना जैसी लोकप्रिय सीरीयल्स में उनकी भूमिकाओं को लोग आज भी याद करते हैं।
उनके अभिनय का एक मज़ेदार और यादगार हिस्सा है ‘3 Idiots’ (2009) की वो लाइन – “अरे, कहना क्या चाहते हो?”
उनका यह छोटा सा डायलॉग लोगों के दिलों में बस गया और वक्त के साथ यह एक फेमस मीम बन गया। इस संवाद में उनकी मासूमियत और सहज अभिनय झलकता है।
जब यह दुखभरी खबर आई कि अच्युत पोतदार जी अब हमारे बीच नहीं रहे, तो सोशल मीडिया पर हर तरफ यही लाइन गूंजने लगी। लोग इस संवाद को याद करके उन्हें अपनी भावनाओं और श्रद्धांजलि के साथ अलविदा कहने लगे।
Achyut Potdar रहेंगे हमें याद हमेशा –
Achyut Potdar जी की खासियत यही थी कि उनका संवाद हमेशा बहुत ही आसान और सुविधाजनक लगता था, उनका अभिनय बेहद सहज होता था और उनके निभाए किरदारों पर दर्शक पूरा भरोसा कर लेते थे। यही वजह थी कि वे सालों-साल भारतीय दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाए रहे।
फिल्मकार हंसल मेहता ने भी उन्हें याद करते हुए श्रद्धांजलि दी और कहा कि Achyut Potdar जी के साथ काम करना अपने आप में एक सौभाग्य (privilege) था। उन्होंने लिखा कि उनका सेंस ऑफ ह्यूमर और कॉमिक टाइमिंग बेमिसाल थी।
उनका जाना न सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री के लिए बल्कि टीवी की दुनिया के लिए भी एक बहुत बड़ा और अपूरणीय नुकसान है।लेकिन अच्छी बात ये है कि उनके निभाए हुए किरदार, उनके बोले हुए संवाद और उनकी प्यारी यादें हमेशा लोगों के साथ जिंदा रहेंगी।
अंतिम रस्म और श्रद्धांजलि
Achyut Potdar जी का अंतिम संस्कार 19 अगस्त 2025 को ठाणे में किया गया। उनके जाने से सिनेमा प्रेमियों के दिलों में एक ऐसा खालीपन रह गया है, जिसे भर पाना मुश्किल है। ऐसा लगता है जैसे एक पूरा युग खत्म हो गया हो, लेकिन साथ ही उनकी यादें और उनका काम एक महान विरासत के रूप में हमेशा हमारे साथ रहेंगे।
अक्सर अभिनेता अपनी मुख्य भूमिकाओं के लिए याद किए जाते हैं, लेकिन पोतदार जी ने यह साबित कर दिया कि छोटे-से छोटे किरदार भी दर्शकों के दिलों पर गहरी और स्थायी छाप छोड़ सकते हैं।
वे सिर्फ एक कलाकार नहीं थे, बल्कि एक ऐसी आवाज़ थे, जो फिल्मों, सीरियल्स और नाटकों से गुजरकर सीधे दर्शकों के दिलों और दिमाग में गूंज जाती थी। उनकी याद में हमें हमेशा उनका सरल, सहज और अभिनव अंदाज़ याद रखना चाहिए और संजोकर रखना चाहिए। यही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
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