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Agni-5 मिसाइल का सफल परीक्षण
21 अगस्त 2025 का दिन India के लिए बहुत अहम रहा। ओडिशा के चांदीपुर वाले टेस्ट रेंज से भारत ने लंबी दूरी तक मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल Agni-5 का कामयाब टेस्ट किया।
Agni-5 की सबसे बड़ी ख़ासियत यह है कि ये 5,000 किलोमीटर से भी ज़्यादा दूरी तक बिलकुल सटीक वार कर सकती है। यानि अगर कभी ज़रूरत पड़ी तो ये एक ही वक़्त में कई टारगेट्स को भी तबाह करने की ताक़त रखती है। इस कामयाबी के पीछे भारत की डिफ़ेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन यानी DRDO और स्ट्रैटेजिक फोर्स कमांड (SFC) की बरसों की मेहनत और लगन है।

ये टेस्ट सिर्फ़ टेक्निकल तौर पर ही नहीं, बल्कि India की सामरिक ताक़त (strategic power) को भी और मज़बूत बनाता है। इसका साफ़ मतलब ये है कि भारत हर हाल में अपनी सरज़मीं और अपने लोगों की सुरक्षा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। दुनिया को अब ये यक़ीन करना ही पड़ेगा कि हमारा मुल्क किसी भी चुनौती का सीधा और मज़बूत जवाब देने की काबिलियत रखता है।
Missile Test का स्थान और नेतृत्व
इस टेस्ट का पूरा इंतज़ाम और संचालन DRDO और रणनीतिक बल कमान (SFC) ने मिलकर किया। मिसाइल के हर छोटे-बड़े टेक्निकल और ऑपरेशनल पॉइंट का गहराई से जायज़ा लिया गया और नतीजा ये रहा कि सब कुछ पूरी तरह कामयाब निकला। ये कामयाबी एक बार फिर साबित करती है कि हमारे भारतीय साइंटिस्ट न सिर्फ़ काबिल हैं बल्कि अपने काम के लिए पूरी तरह समर्पित भी हैं।
अब अगर Agni-5 की ताक़त की बात करें तो इसकी सबसे बड़ी पहचान है इसकी 5,000 किलोमीटर से भी ज़्यादा की मारक क्षमता। इस रेंज के साथ भारत अब उन गिने-चुने मुल्कों की लिस्ट में शामिल हो गया है, जिनके पास इतनी लंबी दूरी तक वार करने वाली मिसाइल मौजूद है। सोचिए, इसकी पहुंच इतनी ज़्यादा है कि ये आसानी से एशिया के ज़्यादातर देशों तक, चीन और पाकिस्तान तक, और यहां तक कि यूरोप के कई हिस्सों तक भी पहुँच सकती है।
इसकी यही ख़ासियत भारत को ना सिर्फ़ अपने इलाक़े (region) में मज़बूत बनाती है बल्कि पूरी दुनिया के सुरक्षा संतुलन (global security balance) में भी हमारी पोज़िशन को और ऊँचा कर देती है। और जब आज के वक़्त में एशिया-प्रशांत इलाक़े (Asia-Pacific region) में देशों के बीच स्ट्रैटेजिक मुकाबला लगातार बढ़ रहा है, तो ऐसे दौर में Agni-5 का ये सफल टेस्ट भारत की “विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध क्षमता” (Credible Minimum Deterrence) को और भी ठोस और भरोसेमंद बना देता है।
Agni-5: तकनीकी चमत्कार की विशेषताएँ
Agni-5 सिर्फ़ एक मिसाइल नहीं, बल्कि भारतीय रक्षा तकनीक का एक असली चमत्कार है। इसमें कई ऐसी ख़ूबियाँ हैं जो इसे औरों से अलग और बेहद ख़ास बनाती हैं। आइए एक-एक करके समझते हैं:
- ठोस ईंधन से चलने वाली तीन-स्टेज मिसाइल
Agni-5 में तीन चरणों वाला ठोस-ईंधन सिस्टम लगाया गया है। इसका मतलब ये है कि लॉन्च के वक़्त मिसाइल को बहुत ज़्यादा स्थिरता, भरोसेमंदी और फ़ौरन (instant) प्रतिक्रिया मिलती है। यानी दुश्मन पर वार करने के लिए इसे तैयार होने में ज़्यादा वक़्त नहीं लगता।
- सटीकता और नेविगेशन
मिसाइल में दो ख़ास सिस्टम लगाए गए हैं –
RINS (Ring Laser Gyro आधारित इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम)
MINS (Micro Navigation System)
इन दोनों की मदद से Agni-5 बहुत ही कम ग़लती (error margin) के साथ अपने टारगेट को सीधा भेद सकती है। साधारण ज़ुबान में कहें तो ये मिसाइल जिस जगह पर वार करने निकलेगी, वहां से चूकने का सवाल ही नहीं उठता।
- कैनिस्टर टेक्नॉलॉजी और मोबिलिटी
Agni-5 को कैनिस्टर टेक्नॉलॉजी से लैस किया गया है। इस वजह से इसे मोबाइल लॉन्चर पर रखकर कहीं से भी फ़ायर किया जा सकता है। इसका सबसे बड़ा फ़ायदा ये है कि दुश्मन चाहे कितनी भी कोशिश कर ले, मिसाइल को ट्रैक करना या नष्ट करना लगभग नामुमकिन हो जाता है।
- MIRV तकनीक – एक साथ कई वार
मार्च 2024 में हुए Mission Divyastra के दौरान Agni-5 को MIRV (Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicles) तकनीक से अपडेट किया गया। इसका मतलब है कि ये मिसाइल एक ही वक़्त में कई अलग-अलग टारगेट्स को हिट कर सकती है। दुनिया में ऐसे देशों की तादाद बहुत कम है, और भारत उनमें शामिल होकर एक नई ऊँचाई पर पहुँच गया है।
- अपग्रेडेड बंकर-बस्टर वर्ज़न
अभी DRDO Agni-5 का एक और ज़बरदस्त वर्ज़न बना रहा है, जिसे बंकर-बस्टर कहा जाएगा। इसमें लगभग 7,500 किलो का पारंपरिक वारहेड लगाया जाएगा। इसकी मदद से ये मिसाइल दुश्मन के 80 से 100 मीटर गहरे भूमिगत ठिकानों को भी तहस-नहस कर सकेगी।
- रणनीतिक और भू-राजनीतिक असर
इन सब खूबियों की वजह से Agni-5 सिर्फ़ एक हथियार नहीं, बल्कि भारत की सामरिक (strategic) और भू-राजनीतिक (geo-political) ताक़त का बड़ा प्रतीक बन गई है। इससे भारत की आवाज़ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर और बुलंद हो जाती है। ये मिसाइल हमारे दुश्मनों को साफ़ संदेश देती है कि भारत शांति का पैरोकार है, लेकिन अगर कभी उसकी सरहदों या अमन को चुनौती मिली, तो उसका जवाब देने में जरा भी देर नहीं होगी।
दक्षिण एशिया में Military संतुलन
Agni-5 का ताज़ा टेस्ट भारत के लिए किसी मील का पत्थर (milestone) से कम नहीं है। इस कामयाबी ने न सिर्फ़ हमारे मुल्क की सुरक्षा व्यवस्था को मज़बूती दी है, बल्कि पूरे एशिया के सुरक्षा समीकरणों (regional security equations) में भी भारत की पोज़िशन और ज़्यादा मजबूत हो गई है।
इससे भारत का आत्मविश्वास कई गुना बढ़ा है। आज हमारे साइंटिस्ट, हमारी फ़ौज और हमारा हर आम नागरिक ये महसूस करता है कि हम अपनी सरज़मीं की हिफ़ाज़त करने में पूरी तरह काबिल हैं।
साथ ही, ये पड़ोसी मुल्कों के लिए भी एक साफ़ और सीधा संदेश है – कि भारत अमन और शांति में यक़ीन रखता है, लेकिन अगर कोई हमारी संप्रभुता (sovereignty) या हमारी सुरक्षा को चुनौती देने की ग़लती करेगा, तो हम हर क़दम उठाने के लिए तैयार हैं।
Competitors पर प्रभाव
Agni-5 के कामयाब टेस्ट से चीन और पाकिस्तान दोनों ही मुल्कों की बेचैनी साफ़ नज़र आ रही है। चीन की बड़ी आबादी और उसके कई अहम सैन्य व सामरिक ठिकाने अब इस मिसाइल की सीधी रेंज के अंदर आ चुके हैं। यानि अगर कभी हालात बिगड़ते हैं, तो भारत के पास इतना दम है कि वो चीन के भीतर तक सटीक वार कर सके।
वहीं पाकिस्तान के लिए भी ये टेस्ट किसी कड़े संदेश से कम नहीं है। पाकिस्तान अक्सर अपनी हरकतों और आक्रामक बयानबाज़ी से हालात को बिगाड़ने की कोशिश करता है। लेकिन इस मिसाइल ने ये साफ़ कर दिया है कि भारत के पास हर तरह की चुनौती का करारा और फ़ौरन जवाब देने की पूरी क्षमता है।
असल में, Agni-5 सिर्फ़ एक हथियार नहीं, बल्कि पड़ोसी देशों के लिए एक तरह की चेतावनी भी है – भारत अमन चाहता है, लेकिन अगर किसी ने हमारी सरहदों या हमारी संप्रभुता को छेड़ा, तो हम चुप बैठने वालों में से नहीं हैं।
वैश्विक रक्षा क्लब में भारत की उन्नति
इस टेस्ट के बाद भारत ने एक और बड़ा मुक़ाम हासिल कर लिया है। अब हमारा मुल्क उन गिने-चुने देशों की कतार में आ खड़ा हुआ है जिनके पास लंबी दूरी तक वार करने वाली और मल्टी-वारहेड तकनीक से लैस ताक़तवर मिसाइलें मौजूद हैं। यह कोई मामूली बात नहीं है, बल्कि भारत की साइंटिफ़िक सोच, टेक्नॉलॉजी और फ़ौजी ताक़त का खुला सबूत है।
इस कामयाबी ने भारत की पहचान को और भी मज़बूत कर दिया है। अब दुनिया भारत को सिर्फ़ एक उभरती हुई शक्ति नहीं, बल्कि एक ऐसे मुल्क के तौर पर देखेगी जो अपनी सरज़मीं की हिफ़ाज़त करने के साथ-साथ वैश्विक सुरक्षा (global security) और ताक़त के संतुलन में भी अहम भूमिका निभा सकता है।
साफ़ शब्दों में कहें तो ये उपलब्धि भारत की वैश्विक पोज़िशन को मज़बूती देने के साथ-साथ पड़ोसी और बड़े देशों को ये संदेश भी देती है कि भारत किसी से कम नहीं है।
भविष्य की संभावनाएँ और अपग्रेड
भारत की मिसाइल ताक़त सिर्फ़ अग्नि-5 तक ही सीमित नहीं है। हमारा DRDO लगातार नई-नई टेक्नॉलॉजी और और भी ताक़तवर मिसाइलों पर काम कर रहा है, ताकि आने वाले कल में भारत और मज़बूत होकर उभरे।
- बंकर-बस्टर वर्ज़न
DRDO इस समय Agni-5 का बंकर-बस्टर वर्ज़न तैयार कर रहा है। इसकी सबसे बड़ी ख़ासियत ये होगी कि ये दुश्मन के गहरे भूमिगत ठिकानों को भी आसानी से निशाना बना सकेगी। माना जा रहा है कि ये ठिकाने अगर 80 से 100 मीटर तक ज़मीन के नीचे भी बने हों, तब भी ये मिसाइल उन्हें तहस-नहस कर देगी। यानी, दुश्मन चाहे ज़मीन के ऊपर छिपे या नीचे, भारत के पास अब हर हाल का जवाब मौजूद रहेगा।
- Agni-6 परियोजना
भविष्य में भारत Agni-6 जैसी और भी उन्नत मिसाइल लाने की योजना बना रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसकी रेंज लगभग 8,000 से 12,000 किलोमीटर तक हो सकती है। अगर ये योजना पूरी होती है, तो भारत उन चंद मुल्कों में शामिल हो जाएगा जिनके पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM) की असली ताक़त होगी। इसका मतलब ये होगा कि भारत एशिया ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के किसी भी हिस्से तक अपनी पहुँच बना सकेगा।
- “नो फर्स्ट यूज़” नीति
भारत हमेशा से अपनी “No First Use” पॉलिसी पर क़ायम रहा है। इसका मतलब ये है कि भारत किसी भी हालात में सबसे पहले हमला नहीं करेगा। हमारी मिसाइलें आक्रामकता के लिए नहीं, बल्कि सिर्फ़ रक्षा और प्रतिरोध (deterrence) के लिए हैं। ये भारत का बड़ा दिल और अमन पर यक़ीन दिखाता है – हम लड़ाई शुरू नहीं करते, लेकिन अगर किसी ने हमारी सरहदों को छेड़ा, तो फिर उसका जवाब बेहद सख़्ती से देंगे।
- दुनिया को साफ़ संदेश
इन सारी तैयारियों और कामयाबियों के बाद भारत ने दुनिया को एक साफ़ और सीधा पैग़ाम दिया है –
भारत शांति चाहता है, लेकिन अपनी हिफ़ाज़त के लिए हर स्तर पर पूरी तरह सक्षम है।
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