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Veer Sharma और उनके भाई की दर्दनाक मौत
Kota, राजस्थान में 28 सितम्बर 2025 की रात एक ऐसा हादसा हुआ जिसने हर किसी का दिल दहला दिया। शहर की मशहूर दीपश्री मल्टी-स्टोरी बिल्डिंग में अचानक आग लग गई। आग चौथे माले (फ्लोर) पर बने एक फ्लैट में भड़की और कुछ ही मिनटों में पूरे फ्लैट को अपनी लपटों में ले लिया।
इस आग की चपेट में आकर टीवी की दुनिया का जाना-पहचाना नाम, 10 साल का बाल कलाकार Veer Sharma और उसका बड़ा भाई 15 साल का शौर्य शर्मा ज़िंदगी की जंग हार गए। दोनों मासूमों की मौत धुएँ और दम घुटने की वजह से हुई।
बिल्डिंग में रहने वाले लोगों ने बताया कि रात क़रीब 11 बजे अचानक आग फैलने लगी। पहले तो लोगों को लगा कि शायद छोटा-मोटा शॉर्ट सर्किट होगा, लेकिन देखते ही देखते लपटें तेज़ हो गईं और धुआँ पूरे फ्लैट में भर गया। शोर मचने पर आसपास के लोग मदद के लिए दौड़े, किसी ने तुरंत फायर ब्रिगेड और पुलिस को फ़ोन किया।
फायर ब्रिगेड की गाड़ियाँ कुछ देर में पहुँचीं और मशक़्क़त के बाद आग पर काबू पाया गया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। Veer Sharma और शौर्य को बाहर निकाला गया, मगर दोनों ने ज़हरीले धुएँ की वजह से वहीं दम तोड़ दिया। इस ख़बर के फैलते ही पूरे इलाके में मातम छा गया।
लोगों की आँखें नम हो गईं, किसी को यक़ीन ही नहीं हुआ कि पर्दे पर मुस्कुराते और चमकते रहने वाला छोटा सा बच्चा वीर अब इस दुनिया में नहीं रहा। टीवी इंडस्ट्री से लेकर आम लोग तक, सबने इस हादसे पर गहरा ग़म और सदमा ज़ाहिर किया।
इस हादसे ने एक बार फिर ये सोचने पर मजबूर कर दिया कि ऊँची इमारतों में रहने वालों के लिए सेफ़्टी (सुरक्षा) इंतज़ाम कितने ज़रूरी हैं। अगर समय पर अलार्म या बेहतर इंतज़ाम होता, तो शायद इन मासूम जानों को बचाया जा सकता था।
आज Kota शहर में हर कोई सिर्फ़ यही दुआ कर रहा है कि वीर और शौर्य की रूह को सुकून (शांति) मिले और उनके माँ-बाप को सब्र (हिम्मत) अता हो
Veer Sharma एक उभरता हुआ सितारा
Veer Sharma महज़ 10 साल के थे, लेकिन उनकी पहचान सिर्फ़ Kota या राजस्थान तक ही सीमित नहीं थी। टीवी की दुनिया में उन्होंने अपने मासूम चेहरे और बेहतरीन अदाकारी से लाखों लोगों का दिल जीत लिया था। उन्होंने मशहूर सीरियल ‘श्रीमद् रामायण’ में पुष्कल का किरदार निभाया था। उनकी भोली-सी मुस्कान और डायलॉग बोलने का अंदाज़ ऐसा था कि देखने वाले बरबस कह उठते— “वाह, क्या बच्चा है!”
हाल ही में उन्हें एक बड़े प्रोजेक्ट के लिए चुना गया था। ख़बर ये थी कि एक आने वाली फिल्म में वे बॉलीवुड एक्टर सैफ़ अली ख़ान के बचपन का किरदार निभाने वाले थे। ज़रा सोचिए, इतनी कम उम्र में ही एक बच्चा इतनी बड़ी पहचान बना ले, तो लोग उसे क्या कहेंगे? एक चमकता हुआ सितारा!
लेकिन अफ़सोस… ये सितारा बहुत जल्दी टूटकर गिर गया।
शौर्य शर्मा – मेहनती और हौसलों वाला छात्र
Veer Sharma के बड़े भाई, 15 साल के शौर्य शर्मा, कोटा के मशहूर कोचिंग इंस्टीट्यूट में पढ़ाई कर रहे थे। उनका सपना था कि वह IIT (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान) में दाख़िला लें और इंजीनियरिंग की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाएँ।
जो लोग उन्हें जानते थे, उनका कहना है कि शौर्य बेहद मेहनती और समर्पित लड़का था। वह सुबह से देर रात तक पढ़ाई करता, नोट्स बनाता और हर वक़्त यही सोचता कि “किसी तरह अपने सपनों को पूरा करूँ और माँ-बाप का सिर गर्व से ऊँचा करूँ।”
उसकी शख़्सियत बहुत ही सादगी भरी थी— न दोस्तों से ज़्यादा घूमना-फिरना, न कोई फ़ालतू शौक। बस किताबें और अपने मक़सद की तरफ़ पूरा ध्यान।
सोचिए, एक घर के दो चिराग एक साथ बुझ जाएँ, तो उस माँ-बाप पर क्या गुज़रती होगी? एक बेटा, जो Veer Sharma नन्हा सितारा बनकर टीवी और फ़िल्मों की दुनिया में चमक रहा था; दूसरा बेटा, जो तन्हाई में बैठकर IIT की किताबों से अपनी ज़िंदगी का सपना बुन रहा था।आज दोनों ही इस दुनिया से चले गए, और पीछे रह गईं सिर्फ़ उनकी यादें और लोगों के दिलों में ग़म की लकीरें।
हादसा: एक दुर्भाग्यपूर्ण रात
रविवार, 28 सितम्बर की रात का वक़्त था, घड़ी में करीब दो बजे होंगे। बाहर सन्नाटा पसरा हुआ था, हर कोई अपनी-अपनी नींद में गुम था। लेकिन उसी वक़्त Kota की दीपश्री मल्टी-स्टोरी बिल्डिंग के चौथे माले पर एक ऐसा हादसा हुआ जिसने हमेशा के लिए एक परिवार की दुनिया उजाड़ दी।
उस रात घर में सिर्फ़ Veer Sharma और शौर्य मौजूद थे। छोटे वीर, जो अभी महज़ दस साल के थे और टीवी पर अपनी मासूम अदाओं से लोगों का दिल जीत चुके थे, और उनके बड़े भाई शौर्य, जो 15 साल के थे और IIT की तैयारी में जुटे हुए थे।
उनके Father, जितेंद्र शर्मा, जो एक कोचिंग संस्थान में रसायन शास्त्र (केमिस्ट्री) पढ़ाते हैं, अपने दोस्तों के साथ एक भजन कार्यक्रम में गए हुए थे। वहीं उनकी Mother, रीता शर्मा, जो ख़ुद एक अभिनेत्री हैं, मुंबई में शूटिंग पर थीं। यानी उस वक़्त घर के अंदर दोनों मासूम भाई अकेले ही थे।
आग का मंजर
अचानक ड्रॉइंग रूम में शॉर्ट सर्किट हुआ। चिंगारी उठी और देखते-ही-देखते लपटें भड़कने लगीं। पहले तो हल्का धुआँ उठा, लेकिन कुछ ही देर में पूरा फ्लैट काला धुएँ से भर गया। ज़हरीली हवा इतनी तेज़ी से फैली कि वीर और शौर्य को संभलने का भी मौक़ा न मिला।
दोनों ने शायद एक-दूसरे को पुकारा होगा, शायद खिड़की तक भागने की कोशिश भी की होगी, मगर धुआँ इतना गाढ़ा था कि उनकी साँसें धीरे-धीरे बंद होती चली गईं। दम घुटने की वजह से दोनों वहीं ढेर हो गए।
माँ-बाप पर टूटा क़हर
सोचिए उस माँ-बाप पर क्या गुज़री होगी, जब ख़बर मिली कि उनके दोनों बेटे अब इस दुनिया में नहीं रहे।जितेंद्र शर्मा, जो अपने बच्चों के लिए हमेशा एक मज़बूत सहारा रहे, सुबह जब घटना स्थल पर पहुँचे, तो रोते-रोते टूट गए। वहीं रीता शर्मा, जो मुंबई में थीं, ये सुनते ही बेसुध हो गईं। एक माँ के लिए इससे बड़ा सदमा और क्या होगा कि उसके दोनों जिगर के टुकड़े एक साथ चले जाएँ।
पूरा Kota शहर इस हादसे से ग़मगीन है। हर कोई यही दुआ कर रहा है कि वीर और शौर्य की रूह को सुकून मिले और उनके माँ-बाप को इस सदमे को सहने की ताक़त मिले|
पड़ोसियों और परिवार का योगदान
हादसे के बाद का मंजर
जब बिल्डिंग के लोगों ने आधी रात के सन्नाटे में धुएँ की बदबू और धुआँ फैलते देखा तो तुरंत हड़बड़ाकर बाहर निकले। किसी ने पुलिस को फ़ोन किया, किसी ने फायर ब्रिगेड को ख़बर दी। कुछ लोग पानी की बाल्टियाँ लेकर भागे, कोई दरवाज़ा तोड़ने की कोशिश करने लगा। हर कोई किसी तरह उन मासूम बच्चों को बचाना चाहता था।
लेकिन अफ़सोस… जब तक आग पर क़ाबू पाया गया, बहुत देर हो चुकी थी। वीर और शौर्य दोनों को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने कोशिश तो की, लेकिन वहाँ भी यही सुनना पड़ा—“दोनों बच्चे अब इस दुनिया में नहीं रहे।”
परिवार का बड़ा फ़ैसला
इतने बड़े सदमे के बाद भी वीर और शौर्य के माँ-बाप ने एक ऐसा क़दम उठाया जिसने हर किसी की आँखें नम कर दीं और दिल को छू लिया। उन्होंने फ़ैसला किया कि दोनों बच्चों की आँखें दान कर दी जाएँ।उन्होंने कहा—”अगर हमारे बच्चे अब इस दुनिया में नहीं हैं, तो कम से कम उनकी आँखों से किसी और की दुनिया रोशन हो सके।”
सोचिए, कितना बड़ा दिल चाहिए होता है ऐसी हालत में इतना बड़ा फ़ैसला लेने के लिए। पूरे शहर में हर कोई इस बात की तारीफ़ कर रहा है कि शर्मा परिवार ने ग़म की इस घड़ी में भी इंसानियत की ऐसी मिसाल पेश की।
ज़िंदगी की सीख
यह हादसा हमें एक बार फिर याद दिलाता है कि ज़िंदगी कितनी अनमोल है। पल भर में सब कुछ बदल सकता है। कल तक हँसते-खेलते बच्चे आज हमारे बीच नहीं हैं। इसलिए हमें हमेशा अपनी सुरक्षा के उपायों को गंभीरता से लेना चाहिए—
बिजली के तार और उपकरणों की समय-समय पर जाँच करनी चाहिए। घर में फ़ायर अलार्म और सेफ़्टी इक्विपमेंट ज़रूर होना चाहिए।और सबसे अहम बात, किसी भी आपात स्थिति में तुरंत और समझदारी से प्रतिक्रिया देनी चाहिए।
यादें हमेशा ज़िंदा रहेंगी
भले ही वीर और शौर्य अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें, उनकी मासूमियत और उनकी मेहनत हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगी। वीर, जिसने इतनी छोटी उम्र में पर्दे पर अपनी पहचान बनाई, और शौर्य, जिसने सपनों को पाने के लिए जी-जान लगा दी थी—ये दोनों भाई अब पूरी दुनिया के लिए मिसाल बन गए हैं|
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