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Tu Meri Main Tera Main Tera Tu Meri Review: Ananya Panday की Fresh Energy भी इस Romantic Film को नहीं बचा पाई

Tu Meri Main Tera Main Tera Tu Meri Review: Ananya Panday की Fresh Energy भी इस Romantic Film को नहीं बचा पाई

Tu Meri Main Tera Main Tera Tu Meri कहानी: सुनी-सुनाई मोहब्बत की दास्तान

बॉलीवुड में हर साल ढेर सारी रोमांटिक फिल्में आती हैं। कुछ ऐसी होती हैं जो सीधा दिल को छू जाती हैं, और कुछ ऐसी कि थिएटर की कुर्सी पर बैठे-बैठे आदमी जम्हाई लेने लगता है। ‘Tu Meri Main Tera Main Tera Tu Meri’ भी ठीक वैसी ही फिल्म है। नाम सुनते ही लगता है कि कोई प्यारी-सी, सच्चे प्यार वाली कहानी देखने को मिलेगी, लेकिन पर्दे पर आते ही यह फिल्म उलझी हुई और थकी-थकी सी महसूस होने लगती है।

Tu Meri Main Tera Main Tera Tu Meri फिल्म एक क्लासिक लव स्टोरी बनने की पूरी कोशिश करती है, मगर कमजोर स्क्रिप्ट, बेवजह खिंचा हुआ ट्रीटमेंट और पुराने जमाने का फॉर्मूला इसे खुद ही फंसा लेता है।

हाँ, इस पूरी “yawn fest” में अगर कोई चीज़ थोड़ी-सी जान डालती है, तो वह हैं अनन्या पांडे। अनन्या अपनी फ्रेश एनर्जी और नेचुरल अंदाज़ से फिल्म को पूरी तरह डूबने से किसी हद तक बचा लेती हैं। जब-जब वह स्क्रीन पर आती हैं, फिल्म थोड़ी हल्की और देखने लायक लगने लगती है।

फिल्म की कहानी दो नौजवान दिलों के आसपास घूमती है, जो कॉलेज लाइफ, करियर बनाने के ख्वाब और रिश्तों की उलझनों के बीच अपना प्यार ढूंढने निकलते हैं। लेकिन सच कहें तो इसमें नया कुछ भी नहीं है। वही गलतफहमियां, वही ब्रेकअप का ड्रामा, वही रोना-धोना और आखिर में प्यार की जीत। यह सब हम पहले न जाने कितनी बार देख चुके हैं।

मसला यह नहीं है कि कहानी सादी है, बल्कि दिक्कत यह है कि इसे सुनाने का तरीका बहुत ही पुराना और पूरी तरह से अंदाज़े में आने वाला है। फिल्म के पहले आधे घंटे में ही दर्शक समझ जाता है कि आगे क्या होने वाला है। कोई सस्पेंस नहीं, कोई सरप्राइज नहीं। डायलॉग्स कई जगह ऐसे लगते हैं जैसे जबरदस्ती घुसा दिए गए हों, मानो खुद राइटर भी तय न कर पाया हो कि कहानी को किस तरफ ले जाना है।

इमोशनल सीन दिल को छूने की बजाय बोझ बन जाते हैं, और रोमांटिक पल वो जादू पैदा नहीं कर पाते जिसकी उम्मीद इस तरह की मोहब्बत वाली फिल्मों से की जाती है। कुल मिलाकर, फिल्म देखने के बाद यही एहसास होता है कि काश कहानी में थोड़ी सच्चाई, थोड़ा नया अंदाज़ और थोड़ा दम होता, तो बात बन सकती थी। अनन्या पांडे की मौजूदगी कुछ राहत जरूर देती है, मगर अकेले उनके सहारे फिल्म बहुत दूर तक नहीं जा पाती।

Tu Meri Main Tera Main Tera Tu Meri निर्देशन: अच्छे इरादे, कमजोर अमल

डायरेक्टर ने Tu Meri Main Tera Main Tera Tu Meri को यूथ के करीब और उनसे जुड़ी हुई दिखाने की पूरी कोशिश की है, लेकिन सच कहें तो निर्देशन में कहीं भी नयापन नजर नहीं आता। कई सीन बिना वजह बहुत ज़्यादा लंबे खिंच जाते हैं, जिस वजह से फिल्म की रफ्तार बार-बार थम जाती है। कहानी आगे बढ़ने के बजाय वहीं अटक-सी जाती है।

खासतौर पर सेकंड हाफ में तो हाल ऐसा हो जाता है कि फिल्म बहुत स्लो चलने लगती है। दर्शक अपनी सीट पर बैठा-बैठा बेचैन होने लगता है और मन में यही आता है कि अब ये सीन खत्म क्यों नहीं हो रहा। कुछ जगहों पर साफ लगता है कि अगर थोड़ी कसावट रखी जाती और एडिटिंग पर ज़रा और ध्यान दिया जाता, तो फिल्म कहीं ज़्यादा बेहतर बन सकती थी।

लेकिन अफसोस, वही हालात और वही सीन बार-बार दोहराए जाते हैं। जो इमोशन दिल को छूना चाहिए था, वही धीरे-धीरे बोझ बनने लगता है और एहसास की जगह ऊब घेर लेती है। कुल मिलाकर, इरादे अच्छे थे, मगर अमल में वो बात नहीं आ पाई जो फिल्म को खास बना सके।

Ananya Panday: Tu Meri Main Tera Main Tera Tu Meri की सबसे मजबूत कड़ी

अगर Tu Meri Main Tera Main Tera Tu Meri फिल्म को देखने की कोई पक्की वजह है, तो वो सिर्फ और सिर्फ अनन्या पांडे हैं। अनन्या ने अपने किरदार में वाकई जान फूंक दी है। उनकी बॉडी लैंग्वेज, चेहरे के एक्सप्रेशन्स और स्क्रीन पर उनकी मौजूदगी फिल्म को एक फ्रेश सा एहसास देती है। वह अपने रोल को बड़ी मासूमियत और पूरे कॉन्फिडेंस के साथ निभाती नजर आती हैं, जो सीधे दिल तक पहुंचता है।

जहां कहानी और निर्देशन कई जगह लड़खड़ाते हुए दिखते हैं, वहीं अनन्या का परफॉर्मेंस दर्शकों को किसी तरह फिल्म से जोड़े रखता है। उनकी डायलॉग डिलीवरी में पहले के मुकाबले साफ सुधार दिखता है। खास तौर पर इमोशनल सीन में वह काफी सच्ची और ईमानदार लगती हैं, बिना किसी ओवरएक्टिंग के। सच कहें तो अगर अनन्या इस फिल्म में न होतीं, तो यह फिल्म शायद और भी ज़्यादा फीकी और बेजान लगती।

अब बात करें फिल्म के मेल लीड की, तो उन्होंने अपना काम ठीक-ठाक निभाया है, लेकिन उनके किरदार में वो गहराई नहीं है जो कहानी को मज़बूती दे सके। कई जगह उनका अभिनय सपाट सा लगता है और रोमांटिक सीन्स में अनन्या के साथ वो कैमिस्ट्री पूरी तरह से बन नहीं पाती।

सपोर्टिंग कास्ट की हालत भी कुछ खास बेहतर नहीं है। दोस्त, परिवार और कॉलेज के बाकी किरदार बस कहानी को आगे बढ़ाने के लिए रखे गए लगते हैं। उनमें से कोई भी ऐसा नहीं जो देखने के बाद लंबे वक्त तक याद रह जाए। कुछ कॉमिक सीन ज़रूर हल्की-सी मुस्कान ले आते हैं, लेकिन वे भी कहानी में घुलने-मिलने की बजाय अलग-थलग से महसूस होते हैं। कुल मिलाकर, फिल्म का बोझ ज्यादातर अनन्या पांडे के कंधों पर ही टिका नजर आता है।

म्यूज़िक और बैकग्राउंड स्कोर

रोमांटिक Tu Meri Main Tera Main Tera Tu Meri में म्यूज़िक की अहमियत बहुत ज़्यादा होती है, लेकिन अफसोस कि यहां भी फिल्म कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाती। गाने सुनने में बुरे नहीं हैं, चल जाते हैं, मगर थिएटर से बाहर निकलते ही ज़ेहन से उतर जाते हैं। ऐसा कोई भी गाना नहीं है जिसे बार-बार सुनने का दिल करे या जो लंबे वक्त तक प्लेलिस्ट में टिका रहे।

बैकग्राउंड स्कोर कुछ इमोशनल सीन में माहौल बनाने की कोशिश जरूर करता है, लेकिन कई जगह वो जरूरत से ज़्यादा तेज़ और लाउड हो जाता है। नतीजा ये होता है कि सीन का असर बढ़ने की बजाय और हल्का पड़ जाता है, और जो जज़्बात दिल तक पहुंचने चाहिए थे, वो वहीं रुक जाते हैं।

अब बात करें सिनेमैटोग्राफी और प्रोडक्शन वैल्यू की, तो यहां फिल्म थोड़ा बेहतर नजर आती है। सिनेमैटोग्राफी साफ-सुथरी है और आंखों को अच्छी लगती है। कॉलेज कैंपस, कैफे और शहर के खूबसूरत लोकेशंस अच्छे से फिल्माए गए हैं। हर फ्रेम में एक तरह की चमक जरूर है।

लेकिन सच तो ये है कि सिर्फ चमकदार विजुअल्स के सहारे कोई फिल्म नहीं चल सकती। कहानी की नींव जब कमजोर हो, तो बढ़िया कैमरा वर्क और अच्छी प्रोडक्शन वैल्यू भी उसे ज्यादा देर तक संभाल नहीं पाते। कुल मिलाकर, देखने में फिल्म ठीक लगती है, मगर अंदर से वो दम नहीं है जो इसे यादगार बना सके।

क्या खास है और कहां चूक जाती है फिल्म

अगर Tu Meri Main Tera Main Tera Tu Meri फिल्म की अच्छी बातों से शुरुआत करें, तो सबसे बड़ा प्लस पॉइंट हैं Ananya Panday। उनकी परफॉर्मेंस फ्रेश है, एनर्जी से भरी हुई है और वही फिल्म में थोड़ी जान भरती है। कुछ हल्के-फुल्के रोमांटिक और यूथफुल मोमेंट्स ऐसे हैं जो ठीक-ठाक लगते हैं और चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान ले आते हैं। इसके अलावा सिनेमैटोग्राफी भी साफ-सुथरी है, जो आंखों को सुकून देती है।

लेकिन अगर कमजोर कड़ियों की बात करें, तो लिस्ट काफ़ी लंबी हो जाती है। कहानी बेहद प्रेडिक्टेबल है यानी जो सोचा होता है, वही पर्दे पर होता दिखता है। स्क्रीनप्ले बेवजह खिंचा हुआ है, जिसकी वजह से फिल्म कई जगह थकाने लगती है। खास तौर पर सेकंड हाफ में सुस्ती इतनी बढ़ जाती है कि फिल्म बोझ सी महसूस होने लगती है। ऊपर से म्यूज़िक भी ऐसा नहीं है जो दिल-दिमाग में टिक सके, गाने खत्म होते ही भुला दिए जाते हैं।

अब अगर कुल मिलाकर फैसला दिया जाए, तो ‘Tu Meri Main Tera Main Tera Tu Meri’ एक ऐसी फिल्म है जो दिल को छूने का वादा तो करती है, मगर उस वादे को पूरी तरह निभा नहीं पाती। यह न तो बहुत बुरी फिल्म है और न ही कोई बहुत अच्छी या यादगार फिल्म — बस एक एवरेज सी कोशिश है।

अगर आप अनन्या पांडे के फैन हैं, या फिर बिना ज़्यादा दिमाग लगाए कोई हल्की-फुल्की रोमांटिक फिल्म टाइम पास के लिए देखना चाहते हैं, तो इसे एक मौका दिया जा सकता है। लेकिन अगर आप सिनेमा से कुछ नया, गहराई भरा और दिल में उतर जाने वाला अनुभव चाहते हैं, तो यह फिल्म शायद आपको मायूस ही करेगी।

आखिर में यही कहा जा सकता है कि अनन्या पांडे की ताज़गी इस पूरे yawn fest में थोड़ी-सी रौनक जरूर ले आती है, मगर कमजोर स्क्रिप्ट और पुराने फॉर्मूले की वजह से यह फिल्म लंबी रेस की घोड़ी साबित नहीं हो पाती।

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