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Budget 2026: Strong Vision के साथ जाने भारत में Preventive Healthcare को नई ताक़त क्यों ज़रूरी है

Budget 2026: Strong Vision के साथ जाने भारत में Preventive Healthcare को नई ताक़त क्यों ज़रूरी है

Budget 2026: बदलती बीमारी की तस्वीर

भारत इस वक्त संघीय Budget 2026 – 27 की तैयारियों में लगा हुआ है। देश की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ Healthcare सेक्टर से भी लोगों को बड़ी उम्मीदें हैं। आज हालात ऐसे हैं कि जैसे-जैसे तरक़्क़ी, टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल बदल रही है, वैसे-वैसे सेहत से जुड़ी परेशानियाँ भी बढ़ती जा रही हैं।

ऐसे में ज़रूरत इस बात की है कि हमारी Healthcare पॉलिसी सिर्फ़ इलाज तक ही सीमित न रहे, बल्कि बीमारियों को पैदा होने से पहले ही रोकने पर ज़ोर दे यानी रोकथाम (Preventive Healthcare) को सबसे ऊपर रखा जाए।

आज भारत में लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियाँ जैसे शुगर, हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी बहुत तेज़ी से बढ़ रही हैं। इन बीमारियों का इलाज सालों-साल चलता है, दवाइयों पर मोटा खर्च होता है और अस्पतालों पर भी भारी दबाव पड़ता है। नतीजा यह कि हेल्थ बजट पर बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।

अगर सही वक्त पर जांच (स्क्रीनिंग), लोगों में जागरूकता और बीमारी से बचाव पर ध्यान दिया जाए, तो हालात काफ़ी बेहतर हो सकते हैं। इससे इलाज का खर्च कम होगा, बेवजह की मौतें घटेंगी, लोगों की ज़िंदगी की क्वालिटी बेहतर होगी और परिवारों पर आर्थिक बोझ भी हल्का पड़ेगा।

यही वजह है कि आज ज़्यादातर Healthcare एक्सपर्ट्स और डॉक्टर यह कह रहे हैं कि बजट 2026 में सरकार को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं पर ज़्यादा पैसा खर्च करना चाहिए। मोहल्ला स्तर पर क्लीनिक, समय-समय पर फ्री हेल्थ चेक-अप, और सेहत को लेकर सही जानकारी फैलाने वाले अभियानों पर फोकस होना चाहिए।

सीधी-सी बात है अगर बीमारी को आने से पहले ही रोक लिया जाए, तो इलाज पर होने वाला भारी खर्च अपने आप कम हो जाएगा। यही सोच भारत की हेल्थ पॉलिसी की बुनियाद बननी चाहिए, ताकि हर इंसान तक बेहतर और सस्ती स्वास्थ्य सुविधा पहुँच सके और देश एक सेहतमंद और मज़बूत भारत की तरफ़ आगे बढ़ सके।

वर्तमान बजट और स्वास्थ्य खर्च की स्थिति

हाल ही में आई रिपोर्टों के मुताबिक़, भारत सरकार सेहत पर अभी भी GDP का सिर्फ़ करीब 2 से 2.2 फ़ीसदी ही खर्च कर रही है, जो दुनिया के कई दूसरे मुल्कों के मुकाबले काफ़ी कम माना जाता है। सेहत के जानकार और डॉक्टरों का कहना है कि अगर देश को हर स्तर पर बेहतर इलाज और अच्छी ज़िंदगी देनी है, तो इस खर्च को बढ़ाना बेहद ज़रूरी है।

साल 2025–26 में सरकार ने हेल्थ सेक्टर के लिए करीब ₹99,859 करोड़ का बजट रखा था, जो पिछले साल से लगभग 10 फ़ीसदी ज़्यादा था। लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह बढ़ोतरी नाकाफ़ी है। वजह साफ़ है आज देश में लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियाँ तेज़ी से बढ़ रही हैं, बुज़ुर्गों की तादाद भी बढ़ रही है और गांव-देहात में अब भी सही इलाज और सुविधाओं की भारी कमी है।

सीधी ज़ुबान में कहा जाए तो जितनी बड़ी आबादी और जितनी बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियाँ हैं, उसके हिसाब से यह बजट अभी भी कम पड़ता है। अगर सरकार सच में हर आम आदमी तक अच्छी और सस्ती सेहत की सहूलत पहुँचाना चाहती है, तो आने वाले बजट में हेल्थ पर खर्च को और बढ़ाना ही होगा। यही रास्ता एक सेहतमंद और मज़बूत भारत की तरफ़ ले जाता है।

रोकथाम क्यों जरूरी है: कारण और लाभ

आज भारत में बीमारियों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। खास तौर पर गैर-संक्रामक बीमारियाँ जैसे दिल की बीमारी, शुगर, बीपी अब बीमारी और मौत की सबसे बड़ी वजह बन चुकी हैं। इन बीमारियों में इलाज सालों तक चलता है, दवाइयाँ महंगी होती हैं और परिवारों पर भारी खर्च आ जाता है।

लेकिन अगर सही वक्त पर बचाव और रोकथाम पर ध्यान दिया जाए, तो यही बीमारियाँ शुरुआती दौर में ही पकड़ में आ सकती हैं। इससे इलाज आसान होता है और खर्च भी काफ़ी कम हो जाता है।

रोकथाम से Healthcare अर्थव्यवस्था को फ़ायदा

रोकथाम पर पैसा लगाना सिर्फ़ सेहत सुधारने की बात नहीं है, बल्कि इससे देश की अर्थव्यवस्था को भी सीधा फायदा होता है। जब लोग सेहतमंद रहते हैं, तो वो बेहतर काम कर पाते हैं, ज़्यादा प्रोडक्टिव होते हैं और बार-बार इलाज पर पैसा नहीं खर्च करना पड़ता। इसका नतीजा यह होता है कि घरों की बचत बढ़ती है और खपत भी मज़बूत होती है, जिससे पूरी इकॉनमी को ताक़त मिलती है।

बीमारी की समय रहते पहचान

आज डिजिटल हेल्थ सिस्टम और AI आधारित तकनीकें इतनी आगे बढ़ चुकी हैं कि बीमारी के शुरुआती संकेत भी पकड़ में आने लगे हैं। इससे इलाज जल्दी शुरू हो जाता है और बीमारी गंभीर रूप लेने से पहले ही काबू में आ जाती है। इसका फ़ायदा यह होता है कि बड़ी बीमारियों का बोझ घटता है और अस्पतालों पर भी दबाव कम पड़ता है।

Budget 2026 से क्या उम्मीदें हैं?

Budget 2026 को लेकर उम्मीद की जा रही है कि सरकार प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं पर ज़्यादा ध्यान देगी। खास तौर पर प्राइमरी हेल्थ सेंटर्स (PHCs) और कम्युनिटी हेल्थ कैंप्स को मज़बूत करने पर फोकस हो सकता है। इससे गांव-देहात और पिछड़े इलाकों में रहने वाले लोगों को समय पर इलाज और जांच की बेहतर सुविधा मिलेगी।

कुल मिलाकर, अगर सरकार सच में रोकथाम को प्राथमिकता देती है, तो इसका फ़ायदा सिर्फ़ सेहत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे समाज और देश की तरक़्क़ी में साफ़ नज़र आएगा।

आयुष्मान भारत योजना में विस्तार

खबरों और सरकारी हलकों से यह सुनने में आ रहा है कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत मिलने वाला हेल्थ कवरेज ₹5 लाख से बढ़ाकर ₹10 लाख किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो बड़ी और जानलेवा बीमारियों का इलाज ग़रीब और ज़रूरतमंद परिवारों के लिए और आसान हो जाएगा। महंगे ऑपरेशन और लाइफ सेविंग ट्रीटमेंट के लिए लोगों को कर्ज़ या ज़मीन-जायदाद बेचने की नौबत नहीं आएगी।

स्क्रीनिंग और जागरूकता पर ज़ोर

सरकार की तरफ़ से स्क्रीनिंग प्रोग्राम जैसे कैंसर, शुगर और हाई ब्लड प्रेशर की जांच को और तेज़ किया जा सकता है। इससे बीमारी का पता शुरुआत में ही चल जाएगा और वक्त रहते इलाज शुरू हो सकेगा। जब बीमारी पहले पकड़ में आ जाती है, तो इलाज भी सस्ता पड़ता है और जान बचने की संभावना भी बढ़ जाती है।

सेहत की तालीम और जागरूकता अभियान

इसके साथ-साथ सरकार स्वास्थ्य शिक्षा और लाइफस्टाइल सुधार से जुड़े कार्यक्रमों पर भी ज़्यादा खर्च कर सकती है। खासकर उन इलाकों में, जहाँ संसाधन कम हैं और जानकारी की कमी है, वहाँ लोगों को सेहत के बारे में सही समझ देना बेहद ज़रूरी है। अगर लोग खाने-पीने, रोज़मर्रा की आदतों और समय पर जांच की अहमियत समझें, तो सेहत अपने आप बेहतर होगी।

सीधी बात यह है कि अगर बजट में इन पहलुओं पर सही ध्यान दिया गया, तो आने वाले वक़्त में देश के स्वास्थ्य संकेतक मज़बूत होंगे और आम आदमी की ज़िंदगी ज़्यादा महफ़ूज़ और सुकून भरी बन सकेगी।

विशेषज्ञों की राय: बजट को रोकथाम-आधारित बनाएं

सेहत के मैदान से जुड़े कई बड़े एक्सपर्ट्स Budget 2026 को लेकर यह साफ़ कह रहे हैं कि सिर्फ़ पैसा बढ़ा देना काफ़ी नहीं है, बल्कि नीतियों में भी ठोस बदलाव ज़रूरी हैं। उनका मानना है कि हेल्थ सिस्टम को मज़बूत करने के लिए कुछ अहम क़दम उठाने होंगे।

जैसे —
स्वास्थ्य बीमा में रोकथाम और जांच को भी कवर किया जाए, ताकि लोग बीमारी से पहले ही सतर्क हो सकें। नई स्क्रीनिंग मशीनों और हेल्थ से जुड़ी नई तकनीकों को बढ़ावा मिले। AI और डिजिटल हेल्थ को और मज़बूत सपोर्ट दिया जाए, ताकि बीमारी की पहचान जल्दी हो सके।

सरकारी और निजी सेक्टर के बीच मिलकर काम करने की साझेदारी बढ़ाई जाए, जिससे सुविधाएँ ज़्यादा लोगों तक पहुँच सकें। ये तमाम नीतिगत क़दम हेल्थ सिस्टम को सिर्फ़ इलाज तक सीमित रखने के बजाय बचाव और रोकथाम की तरफ़ ले जा सकते हैं।

रोकथाम भारत की विकास रणनीति का हिस्सा क्यों बने?

आज भी भारत की Healthcare व्यवस्था में बहुत सी कमियाँ हैं, जिन्हें सुधारने की सख़्त ज़रूरत है। अगर हमारी स्वास्थ्य नीति का रुख़ इलाज से ज़्यादा बचाव और रोकथाम की तरफ़ हो जाए, तो इसके कई बड़े फ़ायदे होंगे।

इससे कुल मिलाकर स्वास्थ्य पर होने वाला खर्च घटेगा, लोगों की उम्र और सेहत की क्वालिटी बेहतर होगी, और ग़रीब व कमज़ोर तबके को सस्ती और आसानी से मिलने वाली इलाज की सहूलत मिलेगी। साथ ही, देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा भी मज़बूत होगी।

सबसे अहम बात यह है कि हम एक ऐसे भारत की तरफ़ बढ़ेंगे जहाँ लोग ज़्यादा सेहतमंद, ज़्यादा सक्षम और ज़्यादा आत्मनिर्भर होंगे। ऐसा भारत जो सिर्फ़ बीमारी होने के बाद इलाज पर नहीं टिकेगा, बल्कि हर इंसान की सेहत की बुनियाद पहले से ही मज़बूत करेगा।

Budget 2026 को लेकर अब यह बिल्कुल साफ़ है कि हेल्थ रिफ़ॉर्म का मतलब सिर्फ़ इलाज पर खर्च बढ़ाना नहीं है। असली ज़रूरत है बीमारियों को पैदा होने से रोकने, और समुदाय स्तर पर प्राथमिक रोकथाम पर ध्यान देने की।

अगर इस बार Budget 2026 में प्रिवेंटिव Healthcare को केंद्र में रखा गया, तो न सिर्फ़ हेल्थ सिस्टम टिकाऊ बनेगा, बल्कि देश की तरक़्क़ी और समाज की बेहतरी में भी यह अहम रोल निभाएगा। यही रास्ता है “सबके लिए बेहतर Healthcare” और एक मज़बूत, सेहतमंद भारत के सपने को हक़ीक़त में बदलने का।

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