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DGCA का Powerful खुलासा: कैसे Air India A350 के इंजन में घुसा कार्गो कंटेनर, Safety पर बड़ा सबक

DGCA का Powerful खुलासा: कैसे Air India A350 के इंजन में घुसा कार्गो कंटेनर, Safety पर बड़ा सबक

Delhi एयरपोर्ट पर भयावह विमान हादसा

15 जनवरी 2026 की सुबह Delhi के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक अजीब और खतरनाक वाक़िया सामने आया। Air India का Airbus A350 विमान जब रनवे पर धीरे-धीरे टैक्सी कर रहा था, तभी उसके इंजन में एक बड़ा सा कार्गो कंटेनर चला गया यानी इंजन ने उसे जैसे “निगल” लिया हो।

असल में यह विमान दुबई से न्यूयॉर्क जाने वाली फ्लाइट AI101 था। उड़ान भरने के कुछ देर बाद ही हालात बदल गए, क्योंकि ईरान ने अचानक अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया। इस वजह से विमान को आगे जाने की इजाज़त नहीं मिली और उसे वापस दिल्ली लौटना पड़ा।

री-रूटिंग के बाद विमान सुबह करीब 5:25 बजे पूरी तरह सुरक्षित तरीके से रनवे 28 पर लैंड कर गया। सब कुछ सामान्य लग रहा था, यात्री भी राहत की सांस ले रहे थे, लेकिन लैंडिंग के तुरंत बाद एक ऐसा हादसा हो गया जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। टैक्सी करते वक्त रनवे के पास पड़ा एक कार्गो कंटेनर विमान के इंजन की तेज़ खिंचाव में आ गया और सीधे अंदर चला गया।

यह वाक़िया भले ही कुछ सेकंड में हुआ हो, लेकिन इसकी गंभीरता बहुत ज़्यादा थी। अच्छा यह रहा कि उस वक्त विमान ज़मीन पर था और किसी यात्री या क्रू मेंबर को कोई चोट नहीं आई। फिर भी यह घटना एयरपोर्ट की ज़मीनी सुरक्षा व्यवस्था और ग्राउंड-हैंडलिंग में हुई चूक पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।

क्या वास्तव में कंटेनर इंजन में गया? पूरा घटनाक्रम

सबसे पहले बात उड़ान की करें तो Air India की फ्लाइट AI101 ने रात करीब 02:36 बजे नई दिल्ली से उड़ान भरी थी। सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन तभी अचानक ईरान ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया। इस वजह से विमान को आगे जाने की इजाज़त नहीं मिली और पायलटों को फ्लाइट वापस दिल्ली मोड़नी पड़ी।

वापसी के बाद विमान रनवे 28 पर बिल्कुल सुरक्षित तरीके से उतर गया। लैंडिंग के बाद वह गेट की तरफ़ जाने के लिए धीरे-धीरे टैक्सीवे पर चल रहा था, यानी पार्किंग की ओर बढ़ रहा था। उस वक्त किसी को अंदाज़ा नहीं था कि आगे क्या होने वाला है।

सुबह का समय था और घना कोहरा छाया हुआ था, जिसकी वजह से सामने साफ़ दिखाई नहीं दे रहा था। इसी दौरान किसी लापरवाही के चलते रनवे के पास रखा एक कार्गो कंटेनर गलत जगह पर आ गया और टैक्सीवे तक पहुंच गया। भारी-भरकम विमान के इंजन की तेज़ खिंचाव में वह कंटेनर फिसलकर सीधे No.2 इंजन की तरफ चला गया और इंजन ने उसे अंदर खींच लिया।

जैसे ही कंटेनर इंजन के अंदर गया, उसके ब्लेड और अंदरूनी हिस्सों को ज़बरदस्त नुकसान पहुंचा। हालात की नज़ाकत को देखते हुए विमान को वहीं रोक दिया गया और उसे ग्राउंडेड कर दिया गया। राहत की बात यह रही कि इस पूरे वाक़िये में किसी यात्री या क्रू मेंबर को कोई चोट नहीं आई, लेकिन यह घटना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल ज़रूर छोड़ गई।

कैसे गिरी कंटेनर टैक्सीवे पर? DGCA की शुरुआती जांच

DGCA की शुरुआती जांच में क्या सामने आया

DGCA की शुरुआती जांच में साफ़ हुआ है कि यह मामला सिर्फ इतना नहीं था कि इंजन ने किसी चीज़ को “निगल” लिया, बल्कि इसके पीछे गलती और लापरवाही की एक पूरी कड़ी थी। यानी यह हादसा यूँ ही नहीं हुआ, बल्कि ज़मीनी स्तर पर चूक की वजह से हुआ।

जांच के मुताबिक, टैक्सीवे के पास एक कार्गो कंटेनर ले जाने वाला ट्रक यानी डॉली चल रहा था। यह डॉली कंटेनरों के साथ Bay-242 की तरफ जा रहा था, जो एयरपोर्ट का तय किया हुआ ग्राउंड-सपोर्ट इलाक़ा है। इसी दौरान अचानक उस डॉली का एक पहिया टूट गया। पहिया टूटते ही संतुलन बिगड़ गया और एक भारी कंटेनर फिसलकर सीधे टैक्सीवे पर जा गिरा।

उसी वक्त सुबह का समय था और चारों तरफ घना कोहरा छाया हुआ था। दिखाई बहुत कम दे रहा था, इसलिए वह कंटेनर समय रहते किसी की नज़र में नहीं आया और वहीं पड़ा रह गया। थोड़ी ही देर में एयर इंडिया का विमान टैक्सी करता हुआ उसी रास्ते से गुज़र रहा था।

अब बात आती है इंजन की ताक़त की। Airbus A350 जैसे बड़े और आधुनिक विमान के इंजन के सामने हवा इतनी ज़ोर से खिंचती है कि पास पड़ी छोटी-बड़ी चीज़ें भी उसमें खिंच सकती हैं। जैसे ही विमान पास आया, इंजन की तेज़ सक्शन में वह कंटेनर खिंचकर अंदर चला गया और इंजन को भारी नुकसान पहुंचा।

राहत की बात यह रही कि कोई बड़ा नुक़सान नहीं हुआ। इस पूरे अजीब और खतरनाक वाक़िये में न तो कोई यात्री घायल हुआ और न ही क्रू का कोई सदस्य। विमान में उस वक्त करीब 250 से ज़्यादा यात्री सवार थे, लेकिन चूंकि हादसा टैक्सीइंग के दौरान हुआ और विमान पहले ही सुरक्षित लैंड कर चुका था, इसलिए किसी की जान को ख़तरा नहीं पहुंचा।

यह कहना गलत नहीं होगा कि यह एक बड़ा ख़ुदा का करम था कि इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद सब सुरक्षित रहे। एयर इंडिया और DGCA ने हालात को तुरंत संभाला, सुरक्षा नियमों और प्रोटोकॉल पर सख़्ती से अमल किया, और इसी तेज़ कार्रवाई की वजह से एक बड़ा हादसा टल गया।

DGCA की कार्रवाई और आगे की जांच

DGCA ने इस मामले पर बिल्कुल साफ़ कर दिया है कि इसे हल्के में नहीं लिया जा रहा। उन्होंने कहा है कि घटना की तुरंत जांच शुरू कर दी गई है और इसे एक गंभीर सुरक्षा मामला माना जा रहा है। अब एयरपोर्ट पर अपनाए जाने वाले ग्राउंड-हैंडलिंग नियमों और तरीक़ों की दोबारा समीक्षा की जाएगी, ताकि आगे ऐसी चूक दोहराई न जाए।

DGCA के Air Safety Division (नॉर्थ रीजन) की टीम इस पूरे मामले की गहराई से पड़ताल कर रही है। सिर्फ विमान ही नहीं, बल्कि उस ग्राउंड-हैंडलिंग कंपनी की भी जांच हो रही है, जिसके उपकरण और स्टाफ इस घटना से जुड़े थे। यह देखा जा रहा है कि उपकरण सही हालत में थे या नहीं, सुरक्षा मानकों का पालन हुआ या नहीं, और कहीं किसी स्तर पर लापरवाही तो नहीं बरती गई।

इसके साथ-साथ यह भी जांच का हिस्सा है कि विमान किस हद तक सुरक्षित था, ग्राउंड कंट्रोल ने तय प्रोसीज़र सही तरीके से फॉलो किए या नहीं, और कोहरे जैसे हालात में अतिरिक्त सावधानी क्यों नहीं बरती गई। मतलब, हर छोटे-बड़े पहलू को सामने रखकर पूरे वाक़िये की तह तक जाने की कोशिश की जा रही है।

Air India के ऑपरेशन पर असर

यह भी साफ़ हो गया है कि इस घटना का असर सिर्फ एक इंजन की खराबी तक सीमित नहीं है। Airbus A350 का एक विमान फिलहाल ग्राउंडेड है, यानी उड़ान के लिए इस्तेमाल नहीं हो रहा। Air India के पास कुल 6 A350 विमान हैं, जिन्हें लंदन, न्यूयॉर्क, नेवार्क, सिंगापुर जैसे अहम और लंबी दूरी के अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर उड़ाया जाता है।

एक विमान के बाहर होने से एयर इंडिया की वाइडबॉडी उड़ानों की प्लानिंग पर दबाव बढ़ गया है। दूसरे विमानों पर ज़्यादा लोड आ सकता है और शेड्यूल को संभालना चुनौती बन सकता है। खुद एयरलाइन ने भी माना है कि कुछ A350 रूट्स पर देरी या बदलाव जैसे व्यवधान हो सकते हैं।

कुल मिलाकर, यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक बड़ा सबक है। अब DGCA और एयर इंडिया दोनों की कोशिश यही है कि जांच पूरी पारदर्शिता से हो, गलती जहाँ हुई है वहाँ ज़िम्मेदारी तय हो, और आगे यात्रियों की सुरक्षा में कोई कमी न रह जाए।

भारत में विमानन सुरक्षा पर नया सवाल

यह पूरा वाक़िया हमें एक बार फिर याद दिलाता है कि एयरपोर्ट पर ग्राउंड-हैंडलिंग सिस्टम और सुरक्षा नियम कितने अहम होते हैं। चाहे जहाज़ उड़ान भर रहा हो, उतर रहा हो या फिर रनवे पर धीरे-धीरे टैक्सी कर रहा हो हर एक पल पर सुरक्षा नियमों का सख़्ती से पालन होना बेहद ज़रूरी है। ज़रा सी लापरवाही भी बड़ा ख़तरा बन सकती है।

ख़ास तौर पर यह बात साफ़ है कि टैक्सीवे पर किसी भी तरह की चीज़ का पड़ा होना विमानन नियमों के सख़्त खिलाफ़ है। अंधेरा हो या घना कोहरा, ऐसे हालात में काम करने वाले कर्मचारियों को दोगुनी सावधानी बरतनी चाहिए। छोटी सी चूक भी जानलेवा हादसे की शक्ल ले सकती है।

इसी वजह से DGCA जैसी संस्था की ज़िम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वह यह यक़ीन करे कि ग्राउंड-हैंडलिंग कंपनियाँ पूरी तरह प्रशिक्षित हों, उनके नियम-कायदे अपडेट हों और ज़मीन पर काम करने वाला हर स्टाफ सुरक्षा को सबसे ऊपर रखे।

एक दुर्लभ लेकिन बड़ी सीख देने वाली घटना

इस घटना ने बहुत साफ़ तौर पर दिखा दिया कि एक मामूली-सी चीज़ भी किस तरह बड़े हादसे की वजह बन सकती है। आम तौर पर जिसे छोटी लापरवाही समझा जाता है, वही विमानन जैसे संवेदनशील क्षेत्र में बहुत बड़ा ख़तरा बन जाता है। विमान के इंजन की सुरक्षा बेहद नाज़ुक होती है और ज़रा सी ग़लती भारी नुकसान कर सकती है।

यह वाक़िया हमें यह भी सिखाता है कि एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था, ग्राउंड-हैंडलिंग की प्रक्रिया और मौसम की हालत तीनों पर बराबर ध्यान देना कितना ज़रूरी है। कोहरा हो या कम विज़िबिलिटी, ऐसे वक्त पर हर कदम सोच-समझकर उठाना चाहिए।

अच्छी बात यह है कि DGCA ने इस मामले में फौरन सक्रियता दिखाई और जांच शुरू की। अगर यह जांच सही ढंग से अंजाम तक पहुंची और उससे मिले सबक़ को ज़मीन पर लागू किया गया, तो यक़ीनन भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है। आखिरकार, यात्रियों की जान की हिफ़ाज़त ही सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी है।

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