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Indore water Crisis — घटनाक्रम और उसकी भयावहता
देश की आर्थिक राजधानी और “भारत का सबसे साफ़ शहर” कहलाने वाला Indore आजकल एक बेहद गंभीर और अफ़सोसनाक मुश्किल से जूझ रहा है। यहां साफ़ पीने का पानी मिलना लोगों के लिए सपना बनता जा रहा है। जो शहर स्वच्छता की मिसाल माना जाता था, वहीं अब गंदा और दूषित पानी इंसानी जान के लिए खतरा बन गया है।
शनिवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi Indore पहुंचे। उन्होंने उन परिवारों से मुलाकात की, जिनकी ज़िंदगी दूषित पानी की वजह से तबाह हो गई है। किसी का बच्चा बीमार पड़ा है, तो किसी ने अपने घर का चिराग खो दिया। राहुल गांधी ने लोगों का दर्द सुना, उनकी आंखों में भरा डर और ग़ुस्सा महसूस किया और हालात पर गहरी चिंता जताई।
Indore के भागीरथपुरा इलाके में पिछले कई हफ्तों से हालात बेहद खराब हैं। यहां नलों से आने वाला पानी पीने लायक तो दूर, देखने में ही गंदा लग रहा है। लोग बता रहे हैं कि पानी से बदबू आती है और उसका रंग भी सामान्य नहीं है। इसी पानी को पीने से इलाके में उल्टी-दस्त और पेट की गंभीर बीमारियां तेज़ी से फैल रही हैं।
स्थानीय लोगों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दूषित पानी की वजह से अब तक 20 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग अस्पताल में भर्ती हैं। कई मरीजों की हालत अब भी नाज़ुक बनी हुई है। सबसे ज़्यादा असर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर पड़ा है, जिनके पास न तो महंगा बोतलबंद पानी खरीदने का इंतज़ाम है और न ही बेहतर इलाज की सुविधा।
इलाके के लोगों का कहना है कि शहर की पानी सप्लाई लाइन में सीवेज का पानी मिल गया है। कई बार नगर निगम और प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन हर बार सिर्फ़ आश्वासन ही मिले। ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों में गुस्सा भी है और मायूसी भी। उनका कहना है कि अगर वक्त रहते कदम उठाए जाते, तो इतनी जानें नहीं जातीं।
Rahul Gandhi ने इस पूरे मामले को प्रशासन की बड़ी नाकामी बताया और कहा कि साफ़ पानी हर इंसान का बुनियादी हक है। इंदौर जैसे शहर में ऐसी बदहाली होना बेहद शर्मनाक है। आज इंदौर के लोग बस यही सवाल पूछ रहे हैं “जब शहर सबसे साफ़ है, तो हमारा पानी इतना गंदा क्यों?”
Rahul Gandhi का दौरा: दर्द, सवाल और आलोचना
Rahul Gandhi भागीरथपुरा और उसके आस-पास के इलाकों में पैदल घूमते हुए बीमार लोगों और उन परिवारों से मिलने पहुंचे, जिनके अपने दूषित पानी की वजह से इस दुनिया से चले गए। उन्होंने अस्पताल जाकर मरीजों से हालचाल पूछा, उनका हौसला बढ़ाया और कहा कि वे इस मुश्किल घड़ी में उनके साथ खड़े हैं। कई घरों में जाकर उन्होंने मृतकों के परिजनों से मुलाकात की, उनका ग़म बांटा और दिल से तअज़ियत पेश की।
मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने साफ़ लफ़्ज़ों में कहा कि, “आज भी यहां लोगों को साफ़ पानी नसीब नहीं है।” उन्होंने इसे सरकार की बहुत बड़ी नाकामी बताया। उनका कहना था कि साफ़ और सुरक्षित पीने का पानी कोई एहसान नहीं, बल्कि हर इंसान का बुनियादी हक़ है, और जब सरकार यह भी मुहैया नहीं करा पा रही, तो यह बेहद अफ़सोस की बात है।
राहुल गांधी ने कहा कि यह परेशानी सिर्फ़ Indore तक सीमित नहीं है, बल्कि आज पूरे देश के कई शहर इसी हालात से गुज़र रहे हैं। उन्होंने तंज़ कसते हुए कहा कि “स्मार्ट सिटी” सिर्फ़ पोस्टरों और फ़ाइलों में रह गई हैं, जबकि ज़मीनी हक़ीक़त यह है कि लोगों को पीने के लिए साफ़ पानी तक नहीं मिल रहा।

उन्होंने आगे कहा,
“लोग कोई बड़ी या अजीब मांग नहीं कर रहे हैं। उन्हें बस ठोस और सही क़दम चाहिए, ताकि हर घर तक साफ़ पानी पहुंचे। यह सरकार की ज़िम्मेदारी है और इससे भागा नहीं जा सकता।”
राहुल गांधी की इस बात में लोगों का दर्द और ग़ुस्सा दोनों झलकता है, और आज इंदौर के लोग यही चाहते हैं कि सियासत से ऊपर उठकर उनकी बुनियादी ज़रूरतों पर ध्यान दिया जाए।
मुआवज़ा, सवाल और सरकार की जवाबदेही
Rahul Gandhi ने इस दर्दनाक हालात से जूझ रहे परिवारों की मदद के लिए हर प्रभावित परिवार को ₹1 लाख का मुआवज़ा चेक भी सौंपा। उन्होंने कहा कि सिर्फ़ मुआवज़ा देकर सरकार अपनी ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकती, बल्कि उसे आगे आकर यह भी मानना होगा कि यह चूक उसकी ही है। उनका कहना था कि जब बुनियादी इंतज़ाम नाकाम हो जाएं और लोगों की जान चली जाए, तो जवाबदेही तय होना बेहद ज़रूरी है।
Rahul Gandhi ने साफ़ शब्दों में कहा कि वह यह कदम किसी सियासी फ़ायदे या राजनीति के लिए नहीं, बल्कि इंसानियत के नाते उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस वक़्त सबसे ज़्यादा ज़रूरी है पीड़ित परिवारों को सहारा देना और उन्हें इंसाफ़ दिलाना।
उन्होंने भावुक होते हुए कहा,
“लोग मुझसे पूछ सकते हैं कि क्या यह सब राजनीति है? तो मैं उनसे कहता हूँ अगर मज़लूमों को इंसाफ़ दिलाना राजनीति कहलाता है, तो हाँ, मैं यह राजनीति कर रहा हूँ।”
उनकी इस बात ने वहां मौजूद लोगों को गहरी तरह से छू लिया। प्रभावित परिवारों का कहना था कि कम से कम कोई तो है जो उनके दर्द को समझ रहा है, उनकी बात सुन रहा है और उनके साथ खड़ा नज़र आ रहा है।
राजनीतिक बयानबाज़ी और सरकार की प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले को लेकर अब कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गई हैं और सियासी बयानबाज़ी तेज़ हो चुकी है। राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश सरकार पर कड़ी ज़ुबान में हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार इस गंभीर मसले को हल्के में ले रही है और अपनी ज़िम्मेदारियों से बचने की कोशिश कर रही है। उनका कहना था कि जब लोगों की जान जा रही हो, तब बयान नहीं बल्कि ठोस काम होना चाहिए।
वहीं दूसरी तरफ़ भाजपा नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि राहुल गांधी का इंदौर आना सिर्फ़ फोटो खिंचवाने और सियासी फ़ायदा उठाने के लिए है। भाजपा का दावा है कि सरकार हालात पर नज़र बनाए हुए है और स्थिति को काबू में करने के लिए ज़रूरी क़दम उठाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि विपक्ष बेवजह डर फैलाने की कोशिश कर रहा है।
लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त इससे कहीं ज़्यादा डराने वाली नज़र आती है। जानकार और विश्लेषक कहते हैं कि अगर इंदौर जैसे बड़े और विकसित शहर में भी लोगों को साफ़ पीने का पानी नहीं मिल पा रहा, तो यह बहुत बड़ी चेतावनी है। इसका मतलब साफ़ है कि हमारी बुनियादी सुविधाओं में कहीं न कहीं भारी गड़बड़ी है।
पानी की सप्लाई लाइन में सीवेज का मिल जाना, बरसों पुरानी पाइपलाइनों की ठीक से मरम्मत न होना और लोगों की शिकायतों को नज़रअंदाज़ करना ये सब बातें सीधे आम जनता की ज़िंदगी पर असर डालती हैं। इसी लापरवाही का नतीजा है कि आज पूरा इलाका बीमारी और डर के साये में जी रहा है।

कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक़, स्थानीय स्तर पर करीब 70 फ़ीसदी पानी की सप्लाई दूषित या बेहद खराब हालत में है, जो इंसानी सेहत और रोज़मर्रा की ज़िंदगी के लिए बहुत बड़ा ख़तरा है। ऐसे हालात में लोग बस यही सवाल कर रहे हैं कि जब टैक्स पूरा दिया जाता है, तो फिर साफ़ पानी जैसी बुनियादी ज़रूरत भी उन्हें क्यों नसीब नहीं हो रही?
व्यापक सामाजिक प्रभाव
Indore जैसे बड़े और मशहूर शहर में पानी की यह आफ़त अब सिर्फ़ किसी एक इलाके की परेशानी नहीं रह गई है। जिन घरों में अपनों की जान गई है, वहां आज भी मातम का सन्नाटा पसरा हुआ है। लोग सिर्फ़ आज की नहीं, बल्कि आने वाले कल की फ़िक्र में भी डूबे हुए हैं। सबसे ज़्यादा डर इस बात का है कि कहीं आगे भी उन्हें साफ़ और सुरक्षित पानी न मिल पाए।
बच्चों और बुज़ुर्गों की बिगड़ती सेहत ने पूरे शहर में ख़ौफ़ और बेचैनी बढ़ा दी है। हर मां-बाप अपने बच्चे के लिए परेशान है, हर बुज़ुर्ग अपने इलाज को लेकर फ़िक्रमंद है। डॉक्टर और जानकार साफ़ कहते हैं कि जब पीने का पानी ही सुरक्षित न हो, तो सिर्फ़ बीमारी ही नहीं बढ़ती, बल्कि ज़िंदगी का हर पहलू प्रभावित होता है।
माहिरों का कहना है कि अगर साफ़ और सुरक्षित पानी जैसी बुनियादी सहूलत न मिले, तो उसका असर सेहत, तालीम, रोज़गार, कारोबार और पूरे विकास पर पड़ता है। इसका मतलब साफ़ है कि ऐसी हालत में न समाज आगे बढ़ पाता है और न ही मुल्क तरक़्क़ी कर पाता है।
Indore water Crisis से जुड़े हालात वाक़ई बेहद चिंताजनक हैं। आज भी लोग एक-एक बाल्टी साफ़ पानी के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। राहुल गांधी ने पीड़ित परिवारों से मिलकर इस मुद्दे को सिर्फ़ सहानुभूति तक सीमित नहीं रखा, बल्कि सरकार की जवाबदेही पर सीधा सवाल खड़ा कर दिया है। मुआवज़ा देना ज़रूरी है, लेकिन हक़ीक़त यह है कि यह मसला सिर्फ़ पैसों का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की नाकामी को उजागर करता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है –
क्या सरकार इस Indore water Crisis का कोई ठोस और लंबे वक़्त तक चलने वाला हल निकालेगी?
क्या आने वाले दिनों में Indore के लोगों को वाक़ई साफ़ और सुरक्षित पानी मिल पाएगा?
ये सवाल अब सियासत से कहीं आगे निकल चुके हैं। ये सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य, नागरिक अधिकार और शासन-प्रशासन की बुनियादी ज़िम्मेदारियों से जुड़े हुए हैं। Indore के लोग जवाब चाहते हैं, और वो भी सिर्फ़ वादों में नहीं, बल्कि ज़मीनी हक़ीक़त में।
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