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भारत की ऑस्कर उम्मीद: Homebound क्या हुआ है अभी तक?
भारतीय सिनेमा ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि हमारी कहानियाँ सिर्फ़ देश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े मंचों पर भी अपनी मज़बूत मौजूदगी दर्ज करा सकती हैं। इस बार यह गौरव हासिल किया है निर्देशक नीरज घेवान की फिल्म Homebound ने, जिसे भारत ने 98वें अकादमी अवॉर्ड्स यानी Oscars 2026 के लिए अपनी आधिकारिक एंट्री के तौर पर भेजा था। अब यह फिल्म इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी में दुनिया भर से चुनी गई टॉप 15 फिल्मों की लघु सूची में शामिल हो चुकी है।
यह खबर अपने आप में बेहद खास है, क्योंकि इस मुक़ाम तक पहुँचना आसान नहीं होता। Homebound का इस टॉप-15 लिस्ट में जगह बनाना इस बात का सबूत है कि फिल्म ने ऑस्कर की दौड़ में एक अहम पड़ाव पार कर लिया है। अब यह फिल्म वोटिंग के अगले राउंड में पहुँच गई है, जो सीधे-सीधे ऑस्कर नामांकन की तरफ़ बढ़ने का रास्ता खोलता है। यही वजह है कि इस उपलब्धि को भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है।
अकादमी ऑफ मोशन पिक्चर्स आर्ट्स एंड साइंसेज (AMPAS) की ओर से आधिकारिक तौर पर यह एलान किया गया है कि Homebound समेत दुनिया के अलग-अलग देशों की कुल 15 फिल्मों को इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी में अगले चरण की वोटिंग के लिए चुना गया है। ऑस्कर की प्रक्रिया कई स्तरों में पूरी होती है — पहले सैकड़ों फिल्मों में से कुछ चुनी जाती हैं, फिर उनमें से यह शॉर्टलिस्ट तैयार होती है, और आख़िरकार कड़ी वोटिंग के बाद सिर्फ़ 5 फिल्में (या कभी-कभी थोड़ी ज़्यादा) अंतिम नामांकन में जगह बना पाती हैं।
अब सबकी निगाहें 22 जनवरी 2026 पर टिकी हैं, क्योंकि इसी दिन ऑस्कर के फाइनल नॉमिनेशन्स का ऐलान किया जाएगा। अगर Homebound इस आख़िरी सूची में भी शामिल हो जाती है, तो यह भारतीय सिनेमा के लिए एक ऐतिहासिक पल होगा। लेकिन नामांकन मिले या न मिले, इतना तो तय है कि इस मुक़ाम तक पहुँचना ही अपने आप में एक बड़ी जीत है।
Homebound का यहां तक का सफ़र इस बात को साफ़ तौर पर दिखाता है कि आज भारतीय सिनेमा की पहचान सिर्फ़ मसाला या ग्लैमर तक सीमित नहीं रही है। अब हमारी फिल्में संवेदनशील, सच्ची और ज़मीन से जुड़ी कहानियों के ज़रिये अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के दिलों तक पहुँच रही हैं। यही वजह है कि Homebound का चयन पूरे देश के लिए फ़ख़्र और खुशी का सबब बन गया है।
फिल्म Homebound विषय, कहानी और कलाकार
Homebound एक ऐसी फिल्म है जो दिल को छू जाती है और समाज की सच्चाइयों से रू-बरू कराती है। यह कहानी उस भारत की झलक दिखाती है जहाँ सपने देखना आसान नहीं, लेकिन लोग फिर भी उम्मीद का दामन नहीं छोड़ते। फिल्म के केंद्र में दो दोस्त हैं शोएब अली (ईशान खट्टर) और चन्दन कुमार (विशाल जेठवा) जिनका एक ही ख्वाब है: पुलिस अफ़सर बनना और अपनी ज़िंदगी को इज़्ज़त और मक़सद देना।
इन दोनों दोस्तों का सफ़र सिर्फ़ नौकरी पाने की जद्दोजहद नहीं है, बल्कि यह दोस्ती की कसौटी, हालात से जूझने की हिम्मत और अपनी पहचान तलाशने की कहानी भी है। रास्ते में उन्हें समाज की सख़्त हक़ीक़तें, भेदभाव, टूटते सपने और खुद से सवाल करने जैसे कई मुश्किल मोड़ देखने पड़ते हैं। फिल्म बड़ी ख़ामोशी से यह दिखाती है कि कैसे हालात इंसान को तोड़ भी सकते हैं और मज़बूत भी बना सकते हैं।
फिल्म में जन्हवी कपूर का किरदार भी कहानी को एक अलग गहराई देता है। उनका रोल भावनात्मक सहारा, उम्मीद और संवेदना की आवाज़ बनकर सामने आता है, जो कहानी को और इंसानी बना देता है। Homebound की सबसे ख़ास बात यह है कि इसकी कहानी किसी कल्पना की दुनिया से नहीं, बल्कि ज़िंदगी की सच्ची ज़मीन से उठी हुई है।

यह फिल्म मशहूर पत्रकार बशारत पीर के न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित निबंध “Taking Amrit Home” से प्रेरित है। इसी वजह से फिल्म की सोच और एहसास बेहद असली लगते हैं। Homebound सिर्फ़ एक फिल्म नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं की दास्तान है जो हालात के बावजूद बेहतर भविष्य का ख़्वाब देखते हैं और उसे पूरा करने की कोशिश में अपनी पूरी जान लगा देते हैं।
वैश्विक मंच पर Homebound की पहचाना
Homebound ने रिलीज़ से पहले ही दुनिया के कई बड़े और प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों में अपनी अलग पहचान बना ली थी। इस फिल्म का सफ़र सिर्फ़ भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी दर्शकों और समीक्षकों का दिल जीता है।
सबसे पहले कैन फिल्म फेस्टिवल (Cannes Film Festival) में Homebound की स्क्रीनिंग हुई, जहाँ इसे दुनियाभर से आए फिल्म प्रेमियों और सिनेमा के जानकारों ने काफी सराहा। कान जैसे बड़े मंच पर किसी भारतीय फिल्म का दिखाई जाना ही अपने आप में बड़ी बात होती है, और वहां मिली तारीफ़ ने यह साफ़ कर दिया कि Homebound की कहानी सरहदों से परे जाकर लोगों से जुड़ने की ताक़त रखती है।
इसके बाद फिल्म टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (TIFF) में भी दिखाई गई। यहां दर्शकों की प्रतिक्रिया काफ़ी सकारात्मक रही और फिल्म ने ज़बरदस्त चर्चा बटोरी। इतना ही नहीं, Homebound को TIFF इंटरनेशनल पीपल्स चॉइस अवॉर्ड की रेस में रनर-अप का स्थान भी मिला, जो यह दिखाता है कि फिल्म सिर्फ़ आलोचकों ही नहीं, बल्कि आम दर्शकों को भी गहराई से पसंद आई।
फिल्म का सफ़र यहीं नहीं रुका। मेलबर्न इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भी Homebound ने अपनी छाप छोड़ी और वहां इसे “बेस्ट फिल्म” और “बेस्ट निर्देशक” जैसे अहम अवॉर्ड्स से नवाज़ा गया। इन सम्मानों ने फिल्म की विश्वसनीयता और सिनेमा के स्तर को और मज़बूत कर दिया।
इन तमाम अंतरराष्ट्रीय सराहनाओं और पुरस्कारों ने मिलकर Homebound को ऑस्कर की दौड़ में एक मज़बूत दावेदार बना दिया है। यही वजह है कि आज यह फिल्म सिर्फ़ भारत की नहीं, बल्कि वैश्विक सिनेमा की बातचीत का हिस्सा बन चुकी है और दुनिया अब इसकी अगली कामयाबी का इंतज़ार कर रही है।
यह भारत के लिए कितना बड़ा माइलस्टोन है?
भारतीय फिल्मों के लिए ऑस्कर की इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी में लघु सूची तक पहुँचना कोई आम बात नहीं होती। यह एक ऐसी मंज़िल है, जहाँ तक बहुत कम भारतीय फिल्में पहुँच पाई हैं। ऐसे में Homebound का इस शॉर्टलिस्ट में शामिल होना अपने आप में एक दुर्लभ और बेहद इज़्ज़त भरी उपलब्धि है। यह फिल्म अब उन चुनिंदा भारतीय फिल्मों की कतार में खड़ी हो चुकी है, जिन्होंने दुनिया के सबसे बड़े फिल्म मंच पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है।
अगर ऑस्कर के लगभग 98 साल के इतिहास पर नज़र डाली जाए, तो साफ़ समझ आता है कि भारत के लिए इस स्तर तक पहुँचना कितना मुश्किल रहा है। बीते दशकों में कई बेहतरीन भारतीय फिल्मों ने कोशिश की, लेकिन बहुत कम को यह मौका मिल पाया। यही वजह है कि Homebound की यह कामयाबी सिर्फ़ एक फिल्म की जीत नहीं है, बल्कि पूरे भारतीय सिनेमा के लिए फ़ख़्र और खुशी का लम्हा है।
हालाँकि ऑस्कर की यह यात्रा अभी खत्म नहीं हुई है। असली इम्तिहान अब भी बाकी है। आगे की प्रक्रिया में सबसे अहम पड़ाव है फाइनल नॉमिनेशन, जिनका एलान 22 जनवरी 2026 को किया जाएगा। इसी दिन यह तय होगा कि कौन-सी फिल्में आख़िरी दौर में पहुँचकर ऑस्कर ट्रॉफी की दौड़ में शामिल होंगी।
इसके बाद दुनिया भर की निगाहें टिकी होंगी 15 मार्च 2026 पर, जब लॉस एंजेलिस में ऑस्कर अवॉर्ड्स का भव्य समारोह आयोजित किया जाएगा और विजेताओं के नाम सामने आएँगे।
अगर Homebound इन अंतिम नामांकनों में अपनी जगह बना लेती है, तो यह भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक नया सुनहरा अध्याय जोड़ देगी। यह सिर्फ़ एक पुरस्कार की बात नहीं होगी, बल्कि उस सोच, मेहनत और सच्ची कहानी की जीत होगी, जो भारत से निकलकर पूरी दुनिया तक पहुँची है।
बॉलीवुड और दुनिया की प्रतिक्रिया
फिल्म के निर्माता करण जौहर ने इस कामयाबी पर सोशल मीडिया के ज़रिये अपनी खुशी ज़ाहिर की है। उन्होंने इसे “गर्व और खुशी का पल” बताते हुए कहा कि नतीजा चाहे जो भी हो, लेकिन इस मुक़ाम तक पहुँचना ही अपने आप में बहुत बड़ी बात है। उनके मुताबिक, Homebound का इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुँचना पूरी टीम की मेहनत और सच्ची कहानी की जीत है।
वहीं, हॉलीवुड के दिग्गज निर्देशक मार्टिन स्कोरसेज़ी, जो इस फिल्म से कार्यकारी निर्माता के तौर पर जुड़े हैं, उन्होंने भी पूरी टीम को दिल से मुबारकबाद दी है। स्कोरसेज़ी जैसे नाम का समर्थन मिलना इस बात का सबूत है कि Homebound की कहानी और उसकी सिनेमाई भाषा ने दुनिया के बड़े फिल्मकारों का भी ध्यान खींचा है। इससे फिल्म की वैश्विक सराहना और भी मज़बूत हुई है।
हालांकि भारत में कुछ फ़िल्म समीक्षक यह भी मानते हैं कि ऑस्कर को सिर्फ़ एक ट्रॉफी तक सीमित करके नहीं देखना चाहिए। उनके मुताबिक, ऑस्कर दरअसल एक ऐसा मंच है जो किसी फिल्म को दुनिया भर के दर्शकों तक पहुँचने का मौका देता है। इस नज़रिए से देखा जाए तो Homebound का टॉप-15 वोटिंग राउंड में पहुँचना ही एक बड़ी कामयाबी है, चाहे आख़िरी नतीजा कुछ भी हो।
Homebound का ऑस्कर की इस अहम लिस्ट में जगह बनाना सिर्फ़ इस फिल्म की नहीं, बल्कि पूरे भारतीय फिल्म उद्योग की जीत मानी जा रही है। यह इस बात का साफ़ संकेत है कि अब भारतीय कहानियाँ, हमारे कलाकार और हमारा फिल्म-निर्माण का अंदाज़ वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।
अब सबकी निगाहें 22 जनवरी पर टिकी हैं, जब ऑस्कर के अंतिम नामांकनों की घोषणा होगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि Homebound उस प्रतिष्ठित सूची में जगह बना पाती है या नहीं। लेकिन इतना तो तय है कि इस फिल्म ने पहले ही इतिहास के पन्नों में भारत का नाम इज़्ज़त और फ़ख़्र के साथ दर्ज करा दिया है।
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