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क्या है ‘Jana Nayagan’ और क्यों थी इसे मान्यता दी जा रही थी?
तमिल सिनेमा की सबसे ज़्यादा इंतज़ार की जाने वाली फिल्मों में से एक, थलापथी विजय की ‘Jana Nayagan’, की रिलीज़ में हुई देरी ने सिर्फ़ उनके फैंस को ही नहीं, बल्कि पूरी तमिल फिल्म इंडस्ट्री को परेशान कर दिया है। लोग बड़ी बेसब्री से इस फिल्म का इंतज़ार कर रहे थे, लेकिन जब बार-बार तारीख टलती रही, तो मायूसी और बेचैनी बढ़ती चली गई।
ये देरी सिर्फ़ एक Jana Nayagan फिल्म के लेट होने का मामला नहीं है, बल्कि इसने सिनेमा की दुनिया से जुड़ी कई बड़ी परेशानियों को सामने ला दिया है जैसे पैसों का नुकसान, कानूनी झंझट और सिस्टम की कमज़ोरियाँ। इस वजह से कई निर्माता, थिएटर मालिक और कलाकार भी चिंता में हैं।
‘Jana Nayagan’ विजय की सबसे बड़ी और खास फिल्मों में गिनी जा रही है। इस फिल्म को मशहूर डायरेक्टर H. Vinoth ने बनाया है। कहा जा रहा है कि ये विजय की आख़िरी फिल्म हो सकती है, क्योंकि इसके बाद वह पूरी तरह से सियासत यानी राजनीति में उतरने वाले हैं। इसी वजह से भी इस फिल्म को लेकर लोगों की उम्मीदें और जज़्बात बहुत ज़्यादा जुड़े हुए हैं।
फिल्म में बड़े बजट के साथ ज़बरदस्त स्टार कास्ट रखी गई है। इसमें खूबसूरत अभिनेत्री पोज़ा हेगड़े, दमदार अभिनेता बॉबी देओल, ममिथा बाजू और जाने-माने एक्टर व डायरेक्टर गौतम मेनन जैसे नाम शामिल हैं। इतनी मजबूत टीम होने की वजह से लोग मान रहे थे कि ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा देगी।
‘Jana Nayagan’ को तमिल सिनेमा की सबसे बड़ी “पताका” रिलीज़ माना जा रहा था। इसे साल 2026 में पोंगल के मौके पर 9 जनवरी को रिलीज़ करने की तैयारी थी। पोंगल का त्योहार दक्षिण भारत में बहुत बड़ा माना जाता है और इसी समय बड़ी-बड़ी फिल्में रिलीज़ की जाती हैं, क्योंकि इस दौरान सिनेमाघरों में भारी भीड़ रहती है और कमाई भी ज़बरदस्त होती है।
हर साल पोंगल पर Jana Nayagan रिलीज़ होने वाली फिल्मों से करोड़ों का कारोबार होता है। यही वजह है कि मेकर्स ने भी इसी मौके को चुना था, ताकि फिल्म को ज्यादा से ज्यादा फायदा मिल सके। फैंस पहले से ही टिकट बुक कराने की तैयारी में थे, सोशल मीडिया पर फिल्म की चर्चा ज़ोरों पर थी और माहौल पूरी तरह बना हुआ था।
लेकिन जब अचानक फिल्म की रिलीज़ टल गई, तो सबके अरमानों पर पानी फिर गया। लोग मायूस हो गए, थिएटर वालों को नुकसान हुआ और पूरी इंडस्ट्री में बेचैनी फैल गई।
आज ‘Jana Nayagan’ सिर्फ़ एक फिल्म नहीं रह गई है, बल्कि ये तमिल सिनेमा के लिए एक बड़ा सवाल बन चुकी है — कि आखिर इतनी बड़ी फिल्म होते हुए भी सिस्टम की वजह से क्यों अटक जाती है? और कब तक कलाकारों, दर्शकों और कारोबारियों को ऐसी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा?
Jana Nayagan रिलीज़ देरी के प्रमुख कारण – सीबीएफसी और कानूनी जंग
Jana Nayagan की रिलीज़ में सबसे बड़ी रुकावट बना सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) का सर्टिफ़िकेट न मिलना। मेकर्स ने फिल्म में बोर्ड के कहने पर कई बदलाव भी किए, लेकिन इसके बावजूद समय पर U/A सर्टिफिकेट नहीं दिया गया। इसी वजह से मामला धीरे-धीरे बढ़ता चला गया और आखिरकार अदालत तक पहुँच गया।
जब बोर्ड से कोई साफ़ जवाब नहीं मिला, तो फिल्म के निर्माता KVN प्रोडक्शंस को मजबूर होकर मद्रास हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाना पड़ा। शुरुआत में कोर्ट से उन्हें थोड़ी राहत जरूर मिली और ऐसा लगा कि अब रास्ता साफ़ हो जाएगा, लेकिन कुछ ही समय बाद यह राहत वापस ले ली गई। नतीजा ये हुआ कि फिल्म को अब भी सर्टिफ़िकेट नहीं मिल पाया।
इसी चक्कर में फिल्म की 9 जनवरी 2026 को होने वाली रिलीज़ रद्द करनी पड़ी, जो पोंगल के मौके पर तय थी। ये फैसला फैंस और इंडस्ट्री — दोनों के लिए बहुत बड़ा झटका था। लोग महीनों से इस दिन का इंतज़ार कर रहे थे, लेकिन आख़िरी वक्त पर सब कुछ बिगड़ गया।
मामला यहीं नहीं रुका, बल्कि आगे चलकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया। जैसे-जैसे केस ऊपर जाता गया, वैसे-वैसे तमिल फिल्म इंडस्ट्री में बेचैनी, तनाव और असमंजस बढ़ता चला गया। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर ये मसला कब सुलझेगा और फिल्म कब रिलीज़ होगी।
सबसे बड़ी परेशानी ये है कि अब तक फिल्म की कोई नई रिलीज़ डेट भी सामने नहीं आई है। न मेकर्स कुछ साफ़ कह पा रहे हैं, न ही बोर्ड की तरफ से कोई पुख्ता बयान आ रहा है। ऐसे में पूरी इंडस्ट्री एक तरह की अनिश्चितता में फँसी हुई है।

इस विवाद ने सीबीएफ़सी के काम करने के तरीक़े पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग पूछ रहे हैं कि जब फिल्म में सुधार कर दिए गए थे, तो फिर सर्टिफ़िकेट देने में इतनी देर क्यों हुई? फैसले लेने में इतनी सुस्ती क्यों दिखाई गई?
सबसे ज़्यादा नुकसान तब हुआ, जब फिल्म की एडवांस बुकिंग पहले ही शुरू हो चुकी थी और हजारों टिकट बिक चुके थे। लोग पैसे देकर टिकट ले चुके थे, सिनेमाघरों ने पूरी तैयारी कर ली थी, पोस्टर, बैनर और प्रचार सब चल रहा था। लेकिन अचानक रिलीज़ टलने से सब कुछ बेकार हो गया।
आज हालात ये हैं कि इस पूरे मामले ने फिल्म इंडस्ट्री को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अगर सिस्टम में सुधार नहीं हुआ, तो आगे भी बड़ी फिल्मों को ऐसे ही परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। ‘Jana Nayagan’ का ये मामला अब सिर्फ़ एक फिल्म की देरी नहीं रहा, बल्कि ये पूरे सिस्टम की कमज़ोरी की पहचान बन चुका है।
इंडस्ट्री पर आर्थिक प्रभाव – लगभग ₹100 करोड़ का नुकसान
इस पूरी देरी का सबसे ज़्यादा नुकसान थिएटर मालिकों को झेलना पड़ा है। तमिलनाड़ु के सिनेमाघर इस फिल्म से बड़ी कमाई की उम्मीद लगाए बैठे थे, खास तौर पर पोंगल के मौके पर। पोंगल का टाइम वैसे ही फिल्मों के लिए “सोने का मौका” माना जाता है, क्योंकि इस दौरान परिवार के साथ लोग बड़ी तादाद में सिनेमा देखने जाते हैं।
थिएटर वालों को पूरा यक़ीन था कि ‘Jana Nayagan’ आने के बाद हॉल हाउसफुल चलेंगे, टिकट खिड़की पर लंबी लाइनें लगेंगी और ज़बरदस्त कमाई होगी। लेकिन जब फिल्म की रिलीज़ टल गई, तो उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया।
Jana Nayagan न आने की वजह से सिनेमाघरों का कारोबार पूरी तरह से बिगड़ गया। टिकटों की बिक्री बहुत कम हो गई, कैंटीन में बिकने वाला पॉपकॉर्न, कोल्ड ड्रिंक और स्नैक्स भी नहीं बिक पाए। यानी हर तरफ़ घाटा ही घाटा होने लगा। कई थिएटर तो ऐसे थे, जहाँ दिनभर में मुश्किल से कुछ ही लोग फिल्म देखने आए।
इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि इस देरी की वजह से करीब ₹100 करोड़ तक का नुकसान हो चुका है। ये कोई छोटी रकम नहीं है। इतना बड़ा नुकसान झेलना किसी भी कारोबार के लिए बहुत भारी पड़ता है।
सबसे ज़्यादा परेशानी छोटे और सिंगल-स्क्रीन थिएटरों को हुई है। ये थिएटर ज़्यादातर बड़ी स्टार फिल्मों पर ही टिके रहते हैं। जब विजय जैसे सुपरस्टार की फिल्म आती है, तभी इनके हॉल भरते हैं और घर का खर्च चलता है। लेकिन इस बार फिल्म न आने से उनकी हालत बहुत खराब हो गई।
कई छोटे थिएटर मालिकों का कहना है कि उन्हें स्टाफ की सैलरी देना तक मुश्किल हो गया है। बिजली का बिल, मेंटेनेंस का खर्च और बाकी खर्चे वैसे ही चलते रहते हैं, लेकिन आमदनी नहीं हुई। ऐसे में उनकी मुश्किलें और बढ़ गईं।
‘Jana Nayagan’ के बिना इस बार पोंगल का बॉक्स ऑफिस भी फीका पड़ गया। जिस तरह की धूम हर साल देखने को मिलती है, वैसी इस बार नजर नहीं आई। बाकी जो फिल्में रिलीज़ हुईं, उन्होंने बस औसत कमाई की। कोई भी फिल्म वैसा जलवा नहीं दिखा पाई, जैसा विजय की फिल्म दिखा सकती थी।
इस पूरे नुकसान ने एक बात बिल्कुल साफ़ कर दी है कि तमिल सिनेमा की अर्थव्यवस्था में बड़ी स्टार फिल्मों की बहुत अहम भूमिका होती है। जब कोई सुपरस्टार की फिल्म रिलीज़ होती है, तो उससे सिर्फ़ निर्माता ही नहीं, बल्कि थिएटर मालिक, डिस्ट्रीब्यूटर, कैंटीन स्टाफ और कई छोटे कारोबारियों का भी घर चलता है।
‘Jana Nayagan’ की देरी ने ये साबित कर दिया कि अगर ऐसी बड़ी फिल्म अटक जाती है, तो उसका असर पूरी इंडस्ट्री पर पड़ता है। आज थिएटर मालिक यही दुआ कर रहे हैं कि ये मसला जल्द से जल्द सुलझे और फिल्म रिलीज़ हो, ताकि फिर से सिनेमाघरों में रौनक लौट सके और सबका कारोबार पटरी पर आ सके।
इंडस्ट्री के दिग्गजों की प्रतिक्रिया
इस पूरे विवाद पर फिल्म इंडस्ट्री के कई कलाकारों ने खुलकर अपनी राय रखी है और विजय के साथ खड़े नज़र आए हैं। बहुत से एक्टर्स और फिल्म से जुड़े लोगों ने सोशल मीडिया के ज़रिए अपना समर्थन जताया और कहा कि ये वक्त मुश्किल ज़रूर है, लेकिन इससे हिम्मत हारने की ज़रूरत नहीं है।
खासतौर पर मशहूर अभिनेता सिलंबरासन (STR) ने विजय के हक़ में एक भावुक ट्वीट किया। उन्होंने लिखा कि, “रुकावटें और मुश्किलें कभी भी आपको रोक नहीं सकतीं। आप हमेशा आगे बढ़ते रहेंगे।” साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि असली जश्न तो उस दिन होगा, जब ‘Jana Nayagan’ सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी और फैंस तालियाँ बजाते हुए इसे देखेंगे।
STR का ये बयान सिर्फ़ दोस्ती का इज़हार नहीं था, बल्कि ये दिखाता है कि तमिल सिनेमा में कलाकारों के बीच आपसी मोहब्बत और भाईचारा कितना मज़बूत है। मुश्किल वक्त में एक-दूसरे का साथ देना इस इंडस्ट्री की खूबसूरती है।
सिर्फ़ STR ही नहीं, बल्कि कई और कलाकारों और फिल्मी हस्तियों ने भी विजय के लिए दुआएँ कीं और कहा कि सच की जीत ज़रूर होगी। फैंस भी सोशल मीडिया पर लगातार विजय को सपोर्ट कर रहे हैं और हैशटैग चलाकर अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं।
लेकिन इन सबके बीच एक बात बार-बार सामने आ रही है कि अब सर्टिफिकेशन सिस्टम में सुधार बहुत ज़रूरी हो गया है। कलाकारों और निर्माताओं का कहना है कि फिल्म को पास करने की प्रक्रिया साफ़, पारदर्शी और समय पर पूरी होनी चाहिए, ताकि किसी को बेवजह कोर्ट-कचहरी के चक्कर न लगाने पड़ें।
इस पूरे मामले ने ये भी साबित कर दिया है कि सिर्फ़ एक फिल्म नहीं, बल्कि पूरी इंडस्ट्री एक-दूसरे से जुड़ी हुई है। जब एक को तकलीफ होती है, तो उसका असर सब पर पड़ता है। यही वजह है कि आज कलाकार, निर्माता और फैंस सब एक सुर में यही चाहते हैं कि ‘Jana Nayagan’ जल्द से जल्द रिलीज़ हो और फिर से खुशियों का माहौल बने।
क्या इस घटना से सिनेमा के नियम-नियमनों में बदलाव आएंगे?
जैसा कि फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े जानकार और एक्सपर्ट्स कह रहे हैं, ‘Jana Nayagan’ का ये पूरा मामला साफ़ तौर पर CBFC की फैसले लेने की प्रक्रिया की कमज़ोरियों को सामने ले आया है। लोगों का मानना है कि जब तक कोई साफ़, मजबूत और तयशुदा तरीका नहीं होगा, तब तक ऐसी परेशानियाँ बार-बार सामने आती रहेंगी।
आज हालात ये हैं कि बिना पूरी और सही प्रक्रिया के फिल्म को सर्टिफिकेट देने में देरी होती है, फिर मामला कोर्ट-कचहरी तक पहुँच जाता है। इससे न सिर्फ़ वक्त बर्बाद होता है, बल्कि बड़ी फिल्मों का पूरा रिलीज़ शेड्यूल भी बिगड़ जाता है। मेकर्स महीनों पहले प्लानिंग करते हैं, प्रमोशन करते हैं, थिएटर बुक करते हैं लेकिन एक फैसले की देरी से सब कुछ उलट-पुलट हो जाता है।
अब सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि क्या सरकार और CBFC आगे चलकर इससे कोई सबक लेंगे? क्या भविष्य में कोई ऐसी व्यवस्था बनाई जाएगी, जिसमें तय वक्त के अंदर फिल्म को सर्टिफिकेट मिल जाए? क्या सिस्टम को इतना साफ़ और पारदर्शी बनाया जाएगा कि किसी को कोर्ट जाने की नौबत ही न आए?
अगर ऐसा नहीं हुआ, तो आगे भी बड़ी-बड़ी फिल्में इसी तरह अटकती रहेंगी और इंडस्ट्री को बार-बार नुकसान झेलना पड़ेगा।
दरअसल, ‘Jana Nayagan’ का मामला सिर्फ़ एक फिल्म के लेट होने की कहानी नहीं है। ये पूरे तमिल फिल्म उद्योग के सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है। चाहे बात सर्टिफिकेशन की हो, कानूनी उलझनों की हो, या फिर सिनेमाघरों की आर्थिक हालत की हर जगह इस विवाद का असर साफ़ दिखाई दे रहा है।
ये Jana Nayagan तमिल सिनेमा के लिए एक यादगार और ऐतिहासिक रिलीज़ बन सकती थी। विजय के करियर की खास फिल्म होने की वजह से इसमें भावनाएँ भी जुड़ी हुई थीं। लेकिन अफ़सोस, ये अब एक बड़े विवाद और मुश्किलों की मिसाल बन गई है।
इस पूरे मामले से इंडस्ट्री, फैंस और थिएटर मालिकों सबको एक बड़ा सबक मिला है। सबको ये समझ में आ गया है कि अगर नियम और सिस्टम मजबूत नहीं होंगे, तो नुकसान सबका होगा।
अब वक्त आ गया है कि सर्टिफिकेशन और Jana Nayagan रिलीज़ की प्रक्रिया को समय पर, साफ़ और भरोसेमंद बनाया जाए। ताकि आगे चलकर कोई भी बड़ी फिल्म बेवजह न अटके, फैंस को इंतज़ार न करना पड़े और सिनेमाघरों में फिर से रौनक और खुशियों का माहौल बना रहे।
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