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El Nino 2026 का असर, Vidarbha में कम बारिश का खतरा! Nagpur प्रशासन Alert मोड पर

El Nino 2026 का असर, Vidarbha में कम बारिश का खतरा! Nagpur प्रशासन Alert मोड पर

Nagpur समेत पूरे Vidarbha में इस साल मानसून को लेकर फिक्र बढ़ती जा रही है। मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट ने किसानों से लेकर आम लोगों तक की टेंशन बढ़ा दी है। कहा जा रहा है कि इस बार एल नीनो के असर की वजह से दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर पड़ सकता है और नागपुर डिवीजन में सामान्य से कम बारिश होने के आसार हैं।

इसी खतरे को देखते हुए संभागीय आयुक्त ने सभी जिलों के अफसरों को पहले से तैयार रहने के निर्देश दे दिए हैं ताकि किसी भी तरह की कुदरती आफत से वक्त रहते निपटा जा सके।

आखिर क्या है El Nino?

El Nino दरअसल मौसम से जुड़ा एक ऐसा सिस्टम है जो दुनिया के कई हिस्सों के मौसम को बदल देता है। हिंदुस्तान में जब एल नीनो एक्टिव होता है तो अक्सर बारिश कम हो जाती है और गर्मी ज्यादा बढ़ जाती है।

मौसम के जानकारों का कहना है कि इस साल भी एल नीनो का असर दिखाई दे सकता है। यही वजह है कि विदर्भ इलाके में कम बारिश की आशंका जताई जा रही है।

Nagpur डिवीजन में बारिश कम होने का अंदेशा

रिपोर्ट के मुताबिक नागपुर, वर्धा, चंद्रपुर, गोंदिया, भंडारा और गडचिरोली जैसे जिलों में इस बार मानसून कमजोर रह सकता है। अगर ऐसा हुआ तो खेती पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

Vidarbha की बड़ी आबादी खेती-किसानी पर निर्भर है। यहां कपास, धान और सोयाबीन जैसी फसलें बारिश के भरोसे होती हैं। ऐसे में अगर वक्त पर पानी नहीं गिरा तो किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

कई किसानों का कहना है कि पिछले कुछ सालों से मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। कभी जरूरत से ज्यादा बारिश हो जाती है तो कभी खेत सूखे रह जाते हैं। अब इस नई चेतावनी ने उनकी बेचैनी और बढ़ा दी है।

प्रशासन पहले से हुआ चौकन्ना

संभागीय आयुक्त ने सभी जिला कलेक्टरों और सरकारी विभागों के साथ बैठक कर हालात का जायजा लिया। अफसरों को साफ कहा गया है कि किसी भी इमरजेंसी से निपटने के लिए तैयारी मुकम्मल रखी जाए।

प्रशासन ने जिन बातों पर खास जोर दिया है उनमें शामिल हैं:

बाढ़ और जलभराव वाले इलाकों पर नजर रखना

जलसंकट वाले गांवों की पहचान करना

राहत और बचाव टीम तैयार रखना

अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं को अलर्ट रखना

बिजली और पानी सप्लाई सिस्टम दुरुस्त रखना

गांवों में जागरूकता अभियान चलाना

अधिकारियों का कहना है कि मौसम का मिजाज अब तेजी से बदल रहा है। कम बारिश के बीच अचानक तेज बारिश और तूफान जैसी घटनाएं भी हो सकती हैं। इसलिए हर हालात के लिए तैयारी जरूरी है।

किसानों के सामने बड़ा सवाल

कम बारिश की खबर सुनकर किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही हैं। कई किसान अब सोच में पड़ गए हैं कि इस बार कौन-सी फसल बोई जाए ताकि नुकसान कम हो।

खेती विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि पानी बचाने वाली तकनीक अपनाई जाए। ड्रिप इरिगेशन और खेत तालाब जैसी योजनाओं का इस्तेमाल बढ़ाने की बात कही जा रही है।

इसके अलावा कम पानी में तैयार होने वाली फसलों पर भी ध्यान देने की सलाह दी गई है।

पानी का संकट भी बढ़ सकता है, अगर मानसून कमजोर रहा तो सिर्फ खेती ही नहीं बल्कि शहरों और गांवों में पानी की दिक्कत भी बढ़ सकती है। Nagpur और आसपास के कई इलाकों में अभी से गर्मी लोगों को बेहाल कर रही है।

तालाब और डैम अगर वक्त पर नहीं भरे तो आने वाले महीनों में पानी की किल्लत गंभीर रूप ले सकती है। यही वजह है कि प्रशासन ने जल संरक्षण के काम तेज करने के निर्देश दिए हैं।

कई जगह नालों की सफाई, तालाब गहरीकरण और रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर जोर दिया जा रहा है ताकि बारिश का पानी ज्यादा से ज्यादा बचाया जा सके।

मौसम विभाग की चेतावनी

मौसम विभाग का कहना है कि इस साल मानसून औसत से नीचे रह सकता है। हालांकि कुछ इलाकों में अचानक भारी बारिश भी देखने को मिल सकती है।

यानी एक तरफ सूखे जैसे हालात का खतरा रहेगा तो दूसरी तरफ तेज बारिश और बिजली गिरने की घटनाएं भी परेशानी बढ़ा सकती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि क्लाइमेट चेंज की वजह से मौसम अब पहले जैसा नहीं रहा। यही कारण है कि प्रशासन और लोगों दोनों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।

लोगों से एहतियात बरतने की अपील

प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि पानी की बर्बादी बिल्कुल न करें और मौसम विभाग की सलाह पर ध्यान दें।

लोगों को कहा गया है कि गर्मी में जरूरत पड़ने पर ही बाहर निकलें और बारिश के दौरान बिजली के खंभों और पेड़ों से दूर रहें।

साथ ही अफवाहों से बचने और सिर्फ सरकारी जानकारी पर भरोसा करने की भी सलाह दी गई है।

आने वाले कुछ हफ्ते बेहद अहम

अब सबकी नजर जून और जुलाई के मानसून पर टिकी हुई है। अगर शुरुआती बारिश अच्छी हुई तो हालात संभल सकते हैं, लेकिन अगर बारिश कमजोर रही तो विदर्भ के कई इलाकों में मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

फिलहाल प्रशासन अलर्ट मोड पर है और हर विभाग को तैयार रहने को कहा गया है। वहीं किसान भी आसमान की तरफ उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं कि इस बार बारिश मेहरबान हो जाए।

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