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Nagpur की ‘Green Net’ स्कीम पर बवाल
Nagpur में इस बार गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। दोपहर होते ही सड़कें तवे की तरह तपने लगती हैं और ट्रैफिक सिग्नल पर खड़े लोगों का हाल बेहाल हो जाता है। ऐसे में लोगों को थोड़ी राहत देने के लिए Nagpur Municipal Corporation यानी NMC ने शहर के कई बड़े चौकों पर “Green Net” और “मिस्ट स्प्रिंकलर सिस्टम” लगाने का काम शुरू किया।
लेकिन अब यही स्कीम तारीफ से ज्यादा सवालों में घिरती दिखाई दे रही है। कोई इसे बढ़िया पहल बता रहा है तो कोई कह रहा है कि ये सिर्फ दिखावे का इंतज़ाम है। शहर में हर तरफ इसी बात की चर्चा हो रही है कि आखिर ये प्लान लोगों को राहत देगा या नई मुसीबत खड़ी करेगा।
भीषण गर्मी ने लोगों को कर दिया परेशान
इस वक्त Nagpur और पूरे Vidarbha इलाके में गर्मी अपने चरम पर है। तापमान 44-45 डिग्री तक पहुंच रहा है। दोपहर में सड़क पर निकलना किसी इम्तिहान से कम नहीं लग रहा।
सबसे ज्यादा मुश्किल बाइक वालों, ऑटो चालकों और ट्रैफिक सिग्नल पर रुकने वाले लोगों को हो रही है। चिलचिलाती धूप सिर के ऊपर आग बरसाती महसूस होती है। ऐसे हालात में नगर निगम ने सोचा कि क्यों ना लोगों को थोड़ी राहत दी जाए।
बस इसी सोच के साथ शहर के कुछ बड़े चौकों पर ऊपर Green Net लगाए गए ताकि सीधी धूप लोगों पर ना पड़े। साथ ही “मिस्ट स्प्रिंकलर सिस्टम” भी लगाया गया, जिसमें हल्की-हल्की पानी की फुहार छोड़ी जाती है।

आखिर ये मिस्ट स्प्रिंकलर सिस्टम है क्या?
इस सिस्टम में सड़क के ऊपर पाइप और हाई-प्रेशर नोजल लगाए जाते हैं। इन नोजल्स से बेहद बारीक पानी की बूंदें निकलती हैं जो आसपास का तापमान थोड़ा कम करने में मदद करती हैं।
बताया जा रहा है कि:
नोजल करीब 15 फीट की ऊंचाई पर लगाए गए हैं
दोनों तरफ करीब 40-40 हाई प्रेशर नोजल लगे हैं
सिस्टम को 300 लीटर की पानी की टंकी से जोड़ा गया है
दिन में कई बार पानी भरा जाएगा
नगर निगम का दावा है कि इससे लोगों को गर्मी से काफी राहत मिलेगी और सिग्नल पर खड़े रहने के दौरान थोड़ी ठंडक महसूस होगी।
65 लाख रुपये की लागत पर उठे सवाल
जैसे ही लोगों को पता चला कि इस पूरी स्कीम पर करीब 65 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं, वैसे ही बहस शुरू हो गई।
कई लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी रकम सिर्फ कुछ नेट और स्प्रिंकलर लगाने पर खर्च करना समझदारी नहीं है। लोगों ने सवाल उठाया कि अगर यही पैसा शहर में पेड़ लगाने, पार्क बनाने या स्थायी इंतज़ामों पर खर्च होता तो ज्यादा बेहतर रहता।
कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं और नेताओं ने तो यहां तक कह दिया कि इस स्कीम में इस्तेमाल हो रही सामग्री की गुणवत्ता की जांच होनी चाहिए। आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ जगहों पर घटिया सामान इस्तेमाल किया गया है।
पहले भी गिर चुके हैं ग्रीन नेट
लोगों की चिंता इसलिए भी बढ़ी हुई है क्योंकि Nagpur में इससे पहले भी ग्रीन नेट लगाने का प्रयोग हो चुका है। पिछले साल तेज हवा और बारिश की वजह से कुछ नेट टूटकर नीचे गिर गए थे।
उस वक्त कई लोगों ने कहा था कि अगर कोई बड़ा हादसा हो जाता तो जिम्मेदारी कौन लेता? अब लोग पूछ रहे हैं कि इस बार सुरक्षा का कितना ध्यान रखा गया है।
कुछ नागरिकों का कहना है कि अगर नेट ठीक से फिट नहीं किए गए तो तेज आंधी या बारिश में परेशानी बढ़ सकती है।
लोगों को राहत भी महसूस हो रही है
हालांकि दूसरी तरफ कई लोग इस पहल की तारीफ भी कर रहे हैं।
जो लोग रोज धूप में सफर करते हैं उनका कहना है कि सिग्नल पर खड़े होने के दौरान हल्की फुहार और ऊपर शेड होने से थोड़ा आराम जरूर मिलता है। बाइक सवारों का कहना है कि कुछ सेकंड की ठंडक भी इस भीषण गर्मी में बड़ी राहत जैसी लगती है।
कई नागरिकों ने सोशल मीडिया पर लिखा कि कम से कम प्रशासन ने कुछ करने की कोशिश तो की। वरना हर साल गर्मी बढ़ती जा रही है और लोग परेशान होते रहते हैं।
स्वास्थ्य को लेकर भी बढ़ी चिंता
मिस्ट स्प्रिंकलर सिस्टम को लेकर कुछ डॉक्टरों और एक्सपर्ट्स ने चिंता भी जताई है। उनका कहना है कि अगर साफ पानी इस्तेमाल नहीं हुआ तो बैक्टीरिया और इंफेक्शन फैलने का खतरा हो सकता है।
इसके अलावा सड़क पर ज्यादा नमी होने से फिसलन भी बढ़ सकती है। कुछ लोगों ने बिजली और पानी को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
हालांकि NMC अधिकारियों का कहना है कि पूरी व्यवस्था सुरक्षित तरीके से लगाई गई है और साफ पानी का इस्तेमाल किया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
सोशल मीडिया पर इस स्कीम को लेकर जबरदस्त बहस चल रही है। कोई इसे “ग्रीन राहत” बता रहा है तो कोई “महंगा जुगाड़” कह रहा है।
कुछ लोगों का कहना है कि Nagpur में लगातार पेड़ कट रहे हैं और कंक्रीट बढ़ता जा रहा है, जिसकी वजह से गर्मी पहले से ज्यादा महसूस हो रही है। ऐसे में सिर्फ नेट लगाने से समस्या खत्म नहीं होगी।
लोगों का मानना है कि शहर को लंबे समय के लिए बेहतर प्लानिंग की जरूरत है। ज्यादा पेड़ लगाने होंगे, हरियाली बढ़ानी होगी और हीट कंट्रोल के लिए स्थायी इंतज़ाम करने होंगे।
असली समाधान क्या है?
विशेषज्ञों की मानें तो ग्रीन नेट और मिस्ट सिस्टम सिर्फ अस्थायी राहत दे सकते हैं। असली इलाज शहर को हराभरा बनाना है। अगर शहर में ज्यादा पेड़ होंगे, खुले मैदान बचेंगे और हरियाली बढ़ेगी तो तापमान अपने आप कम होगा। इसके अलावा:
सड़कों के किनारे बड़े पैमाने पर पेड़ लगाने होंगे, वाटर हार्वेस्टिंग पर काम करना होगा, हीट-रेजिस्टेंट रोड टेक्नोलॉजी अपनानी होगी, शहर में हरित क्षेत्र बढ़ाने होंगे तभी आने वाले समय में लोगों को असली राहत मिल पाएगी।
जनता अब क्या चाहती है?
Nagpur के लोग फिलहाल बस यही चाहते हैं कि उन्हें गर्मी से राहत मिले और टैक्स का पैसा सही जगह इस्तेमाल हो।
लोगों का कहना है कि अगर ये स्कीम सही तरीके से लागू होती है तो अच्छी बात है, लेकिन इसमें कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए। सुरक्षा और गुणवत्ता दोनों का पूरा ध्यान रखना जरूरी है।
अब सबकी नजर NMC पर टिकी हुई है कि ये योजना आगे कितना असर दिखाती है। अगर सब सही रहा तो ये दूसरे शहरों के लिए मिसाल बन सकती है, लेकिन अगर गड़बड़ी हुई तो लोगों का भरोसा टूटना तय है।
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