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Nagpur में नशे के कारोबार के खिलाफ चल रही मुहिम के दौरान Crime Branch को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पुलिस ने एक ऐसे ट्रक को पकड़ा है जिसमें स्टील कॉइल के भारी माल के बीच बड़ी चालाकी से गांजा छुपाकर ले जाया जा रहा था।
इस कार्रवाई में 150.520 किलो गांजा बरामद हुआ है, जिसकी कीमत करीब ₹37.63 लाख बताई जा रही है। वहीं जब्त किए गए पूरे माल, ट्रक और अन्य सामान की कुल कीमत लगभग ₹1.5 करोड़ आंकी गई है।
यह कार्रवाई पर्डी थाना क्षेत्र के तहत आने वाले Nagpur-हैदराबाद रिंग रोड पर जोगिंदर सिंह ढाबा के पास की गई। पुलिस की इस कार्रवाई से नशे के कारोबार से जुड़े लोगों में खलबली मच गई है।
मुखबिर की सूचना पर बिछाया गया जाल
पुलिस को पहले से खबर मिली थी कि एक ट्रक के जरिए बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ Nagpur के रास्ते दूसरे इलाके में पहुंचाया जाने वाला है। सूचना मिलते ही क्राइम ब्रांच की सोशल सिक्योरिटी विंग हरकत में आ गई और इलाके में निगरानी शुरू कर दी गई।
मंगलवार तड़के करीब 4.40 बजे टीम ने संदिग्ध अशोक लेलैंड ट्रक (OD-34-H-4489) को रोककर उसकी जांच शुरू की। शुरुआत में ट्रक में लदा माल बिल्कुल सामान्य दिखाई दे रहा था, लेकिन जब पुलिस ने बारीकी से तलाशी ली तो पूरा मामला सामने आ गया।
स्टील कॉइल के बीच छुपा रखा था गांजा
तलाशी के दौरान Nagpur Police को स्टील कॉइल के बीच कई पैकेट मिले। जब इन पैकेटों को खोला गया तो उनमें गांजा भरा हुआ था। कुल 150.520 किलो गांजा बरामद हुआ, जिसकी अनुमानित कीमत ₹37.63 लाख बताई गई है।
आरोपियों ने गांजा को इस तरह छुपाया था कि सामान्य जांच में किसी को शक भी नहीं होता। ट्रक में करीब 29.260 टन स्टील कॉइल भी लदी हुई थी, जिसकी कीमत लगभग ₹71.98 लाख बताई गई है।
Nagpur Police अधिकारियों का मानना है कि तस्करों ने चेकिंग से बचने के लिए यह तरीका अपनाया था, लेकिन उनकी पूरी चालाकी पुलिस की सतर्कता के सामने नाकाम साबित हुई।
ओडिशा के दो आरोपी गिरफ्तार
इस मामले में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है। उनकी पहचान जोगेश धर्मोधर देवुरी (30) और महेंद्र हुरदा देवुरी (40) के रूप में हुई है। दोनों ओडिशा के अंगुल जिले के कथानिया, किसान नगर इलाके के रहने वाले बताए गए हैं।
गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि गांजा कहां से लाया गया था, इसे किस जगह पहुंचाया जाना था और इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
ट्रक और मोबाइल फोन भी हुए जब्त
Ganja बरामद होने के बाद पुलिस ने ट्रक को भी अपने कब्जे में ले लिया है। जब्त किए गए अशोक लेलैंड ट्रक की कीमत करीब ₹40 लाख बताई गई है।
इसके अलावा आरोपियों के पास से दो मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं, जिनकी कीमत लगभग ₹18,000 है। पुलिस अब मोबाइल फोन के कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल जानकारी खंगाल रही है ताकि तस्करी से जुड़े दूसरे लोगों तक पहुंचा जा सके।
कुल जब्ती की कीमत पहुंची करीब 1.5 करोड़ रुपये, इस कार्रवाई में पुलिस ने केवल गांजा ही नहीं बल्कि स्टील कॉइल, ट्रक और मोबाइल फोन समेत बड़ी मात्रा में संपत्ति जब्त की है। जब्त किए गए सभी सामान की कुल कीमत लगभग ₹1.5 करोड़ बताई जा रही है।
इतनी बड़ी मात्रा में गांजा पकड़े जाने को हाल के दिनों में नागपुर की महत्वपूर्ण कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है।
NDPS एक्ट के तहत दर्ज हुआ मामला
Nagpur Police ने दोनों आरोपियों के खिलाफ NDPS एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। जांच एजेंसियां अब पूरे मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।
अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में यह मामला अंतरराज्यीय तस्करी से जुड़ा हुआ नजर आ रहा है। इसलिए संभावना है कि जांच के दौरान कुछ और बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।
Nagpur बना तस्करों के निशाने पर
पिछले कुछ वर्षों में नागपुर देश के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ने वाला एक अहम ट्रांजिट रूट बनकर उभरा है। इसी वजह से कई तस्कर यहां से होकर मादक पदार्थों की सप्लाई करने की कोशिश करते हैं।
हालांकि पुलिस और क्राइम ब्रांच लगातार ऐसे नेटवर्क पर नजर बनाए हुए हैं। समय-समय पर चलाए जाने वाले विशेष अभियानों के कारण कई बड़ी खेप पकड़ी जा चुकी हैं और कई तस्कर सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं।
पुलिस की मुस्तैदी से नाकाम हुई बड़ी साजिश
अगर यह खेप अपने ठिकाने तक पहुंच जाती तो बड़ी मात्रा में नशा बाजार में फैल सकता था। लेकिन पुलिस की फुर्ती और सटीक सूचना के चलते यह पूरी साजिश बेनकाब हो गई।
फिलहाल जोगेश धर्मोधर देवुरी (30) और महेंद्र हुरदा देवुरी (40) पुलिस हिरासत में हैं और उनसे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां अब इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि इस गांजा तस्करी के पीछे कौन-सा बड़ा गिरोह काम कर रहा था और उसके तार किन-किन राज्यों तक फैले हुए हैं।
नागपुर पुलिस की यह कार्रवाई एक बार फिर साबित करती है कि नशे के कारोबार के खिलाफ एजेंसियां पूरी सख्ती के साथ मैदान में उतरी हुई हैं और कानून से बच निकलना अब तस्करों के लिए आसान नहीं रह गया है।
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