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Nagpur में ‘Mission Mukti’ का बड़ा एक्शन
Nagpur में प्रशासन और पुलिस ने मिलकर एक बड़ा अभियान चलाया, जिसके बाद शहर में इस ऑपरेशन की काफी चर्चा हो रही है। ‘मिशन मुक्ति’ के तहत Tajbagh, Medical Square और Sakkardara इलाकों में खास रेस्क्यू ड्राइव चलाई गई। इस कार्रवाई में 14 मासूम बच्चों समेत कुल 59 लोगों को भीख मांगने की हालत से बाहर निकाला गया।
अफसरों के मुताबिक शहर को भिक्षावृत्ति से आज़ाद करने और बच्चों की हिफाज़त के लिए ये अभियान शुरू किया गया है। पिछले काफी वक्त से इन इलाकों में छोटे बच्चों और महिलाओं के जरिए भीख मंगवाने की शिकायतें मिल रही थीं। कहा जा रहा है कि कुछ गिरोह मजबूर लोगों और बच्चों को सड़कों और ट्रैफिक सिग्नलों पर भेजकर उनसे भीख मंगवाते हैं।
पुलिस और प्रशासन ने मिलकर की कार्रवाई
इस पूरे ऑपरेशन में पुलिस, महिला एवं बाल विकास विभाग और Child Helpline की टीम ने मिलकर काम किया। रेस्क्यू किए गए बच्चों को अब सुरक्षित शेल्टर होम में भेजा गया है, जहां उनके रहने, खाने, इलाज और पढ़ाई का इंतज़ाम किया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि बच्चों को Juvenile Justice Act के तहत सुरक्षा दी जा रही है ताकि उन्हें दोबारा सड़कों पर ना आना पड़े। वहीं महिलाओं और दूसरे लोगों को भी सरकारी मदद, इलाज और पुनर्वास की सुविधा दी जा रही है।

Nagpur शहर को Beggar-Free बनाने की तैयारी
प्रशासन का कहना है कि ‘मिशन मुक्ति’ सिर्फ एक रेस्क्यू अभियान नहीं, बल्कि लोगों को नई ज़िंदगी देने की कोशिश है। अफसरों के मुताबिक आने वाले दिनों में भी शहर के अलग-अलग इलाकों में ऐसे अभियान जारी रहेंगे।
ये पूरा ऑपरेशन Police Commissioner Dr Ravinder Kumar Singal के निर्देश पर चलाया गया। वहीं जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी Sunil Meshram की निगरानी में पूरी टीम ने काम किया। जिला बाल संरक्षण अधिकारी Mushtaq Pathan और Child Helpline के सदस्यों ने भी इस कार्रवाई में अहम किरदार निभाया।
बाल भिक्षावृत्ति को लेकर बढ़ी चिंता
Nagpur में पिछले कुछ सालों से ट्रैफिक सिग्नल, मंदिरों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में बच्चों से भीख मंगवाने के मामले लगातार बढ़े हैं। कई सामाजिक संगठनों ने पहले भी दावा किया था कि इसके पीछे संगठित नेटवर्क काम कर रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि सड़क पर भीख मांगने वाले बच्चे सिर्फ गरीबी नहीं, बल्कि कई दूसरे खतरों का भी शिकार होते हैं। ऐसे बच्चे अपराध, नशे और मानव तस्करी जैसे मामलों में आसानी से फंस सकते हैं। इसी वजह से प्रशासन अब इस मुद्दे को काफी गंभीरता से ले रहा है।
बच्चों को पढ़ाई और बेहतर जिंदगी से जोड़ने की कोशिश
अधिकारियों के मुताबिक अब सबसे बड़ा मकसद इन बच्चों को दोबारा आम जिंदगी से जोड़ना है। इसके लिए उन्हें स्कूलों में दाखिला दिलाने, काउंसलिंग कराने और स्किल ट्रेनिंग देने की तैयारी की जा रही है।
प्रशासन का मानना है कि अगर बच्चों को सही माहौल और तालीम मिले, तो उनका भविष्य बेहतर बनाया जा सकता है। इसलिए अब सिर्फ सड़क से हटाने पर नहीं, बल्कि उनके लंबे वक्त के पुनर्वास पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
लोगों ने की अभियान की तारीफ
सोशल मीडिया पर भी इस कार्रवाई की काफी तारीफ हो रही है। कई लोगों ने कहा कि लंबे समय बाद प्रशासन ने इस गंभीर मुद्दे पर इतनी बड़ी कार्रवाई की है। हालांकि कुछ लोगों का ये भी कहना है कि सिर्फ एक-दो अभियान से मामला खत्म नहीं होगा, इसके लिए लगातार निगरानी और सख्त कदम उठाने होंगे।
फिलहाल प्रशासन का दावा है कि आने वाले दिनों में भी ऐसे ऑपरेशन जारी रहेंगे ताकि बच्चों को सुरक्षित जिंदगी और बेहतर भविष्य दिया जा सके।
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