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Nagpur School Van Accident: 8 महीने बाद RTO अधिकारी सस्पेंड, लापरवाही पर बड़ा एक्शन

Nagpur School Van Accident: 8 महीने बाद RTO अधिकारी सस्पेंड, लापरवाही पर बड़ा एक्शन

8 महीने बाद RTO अफसर सस्पेंड

Nagpur में हुए दर्दनाक स्कूल वैन हादसे के करीब आठ महीने बाद आखिरकार प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। इस मामले में Nagpur शहर के आरटीओ अफसर किरण बिडकर को सस्पेंड कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि हादसे वाली स्कूल वैन बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के सड़कों पर दौड़ रही थी, और ये सीधी तौर पर बड़ी लापरवाही मानी गई।

Nagpur मंकापुर फ्लायओवर पर हुआ था दर्दनाक हादसा

ये हादसा Nagpur मंकापुर फ्लायओवर पर हुआ था, जहां स्कूल वैन और एक बस के बीच जोरदार टक्कर हो गई थी। हादसा इतना खौफनाक था कि एक मासूम बच्ची और वैन ड्राइवर की मौके पर ही मौत हो गई थी। इस खबर ने पूरे नागपुर शहर को हिला कर रख दिया था।

बाद में जब मामले की तहकीकात हुई, तब पता चला कि स्कूल वैन के जरूरी डॉक्यूमेंट पूरे नहीं थे। सबसे बड़ी बात ये सामने आई कि वाहन के पास फिटनेस सर्टिफिकेट तक नहीं था, फिर भी वो बच्चों को लेकर रोज सड़कों पर चल रही थी।

इस तरह की लापरवाहियों के कारण ही मासूम बच्चों के लिए मुश्किलें बढ़ जाती हैं। और जब कभी ऐसे हादसे पेश आते हैं तो मासूम बच्चों को इसकी कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है।

जांच में खुली सिस्टम की पोल

हादसे के बाद जब प्रशासन ने जांच शुरू की, तब कई हैरान करने वाली बातें सामने आईं। मालूम पड़ा कि सिर्फ एक ही नहीं, बल्कि Nagpur शहर में कई स्कूल बसें और वैन बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के चल रही हैं। यानी बच्चों की जान लगातार खतरे में डाली जा रही थी।

लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर आरटीओ विभाग इतने दिनों तक क्या कर रहा था। अगर समय रहते जांच और कार्रवाई होती, तो शायद ये दर्दनाक हादसा टल सकता था।

विधानसभा तक पहुंचा मामला

इस हादसे को लेकर विधानसभा में भी काफी हंगामा हुआ था। विपक्ष ने सरकार और आरटीओ विभाग को जमकर घेरा। इसके बाद ट्रांसपोर्ट मंत्री ने मामले में सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया था।

अब आठ महीने बाद आरटीओ अफसर पर सस्पेंशन की कार्रवाई हुई है। साथ ही विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है ताकि ये पता लगाया जा सके कि आखिर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई।

स्कूल वाहनों पर शुरू हुई सख्ती

हादसे के बाद आरटीओ विभाग अचानक एक्शन मोड में नजर आया।Nagpur शहरभर में स्कूल बसों और वैन की जांच शुरू की गई। कई वाहनों पर जुर्माना लगाया गया, जबकि कुछ गाड़ियों को जब्त भी किया गया।

प्रशासन का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा के साथ किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। जिन स्कूल वाहनों के पास जरूरी परमिशन या फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं होंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

लोगों में अब भी नाराजगी

हालांकि लोगों का कहना है कि सिर्फ एक अफसर को सस्पेंड कर देने से मामला खत्म नहीं होना चाहिए। सिस्टम में जो लापरवाही सालों से चल रही है, उस पर भी जवाबदेही तय होना जरूरी है।

Nagpur शहर के कई नागरिकों का मानना है कि अगर नियमों का सही तरीके से पालन कराया जाता, तो शायद एक मासूम बच्ची की जान बच सकती थी। अब लोग चाहते हैं कि भविष्य में ऐसा कोई हादसा दोबारा न हो और बच्चों की सुरक्षा को सबसे ज्यादा अहमियत दी जाए।

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