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Nagpur में हज़रत Baba Tajuddin का 165वा जन्मदिन Spiritual Energy Boost Taj bagh में मोहब्बत और भाईचारे की मिसाल

Nagpur में हज़रत Baba Tajuddin का 165वा जन्मदिन Spiritual Energy Boost Taj bagh में मोहब्बत और भाईचारे की मिसाल

Baba Tajuddin: व्यक्तित्व और इतिहास

हज़रत बाबा सैय्यद मोहम्मद Baba Tajuddin रहमतुल्लाह अलैह एक बहुत बड़े और जाने-माने सूफी बुज़ुर्ग थे। उनका जन्म 27 जनवरी 1861 को Nagpur के कामठी इलाके में हुआ था। लोग उन्हें प्यार और अकीदत से “ताजुद्दीन बाबा” या फिर “ताज बाबा” कहकर पुकारते हैं।

Baba Tajuddin साहब सूफी सिलसिले से जुड़े हुए थे और खास तौर पर उनका ताल्लुक़ क़ादरी-शत्तारी सिलसिले से माना जाता है। लेकिन उनकी पहचान सिर्फ़ किसी एक सिलसिले तक सीमित नहीं थी। वे ऐसे बुज़ुर्ग थे जिनकी सोच और तालीम हर इंसान के लिए थी चाहे वो किसी भी मज़हब, जाति या समाज से ताल्लुक़ रखता हो।

Baba Tajuddin ने अपनी पूरी ज़िंदगी प्यार, मोहब्बत, इंसानियत, खिदमत और रूहानियत का पैग़ाम देने में लगा दी। उनका मानना था कि अगर इंसान के दिल में सच्ची मोहब्बत और इंसाफ़ है, तो वही सबसे बड़ी इबादत है। वे हमेशा कहते थे कि धर्म का असली मतलब इंसान को इंसान से जोड़ना है, न कि बाँटना।

उनके उपदेश बहुत सादे लेकिन दिल को छू लेने वाले होते थे। वे ऊँची-ऊँची बातें नहीं करते थे, बल्कि आम आदमी की ज़िंदगी से जुड़ी बातों को आसान लफ़्ज़ों में समझाते थे। बाबा ताजुद्दीन के लिए कोई छोटा-बड़ा नहीं था — अमीर हो या ग़रीब, हिंदू हो या मुसलमान, सिख हो या ईसाई — हर कोई उनके दरबार में बराबर था।

उनका दरबार हमेशा लोगों से भरा रहता था। लोग वहाँ अपने दुख-दर्द, परेशानियाँ, मन्नतें और उम्मीदें लेकर आते थे। कोई बीमारी से परेशान होता, कोई रोज़गार की चिंता में, तो कोई घर-परिवार की उलझनों से घिरा होता। बाबा ताजुद्दीन सबकी बात बड़े सुकून से सुनते और उन्हें हिम्मत, सब्र और भरोसे का रास्ता दिखाते।

ऐसा कहा जाता है कि बाबा ताजुद्दीन की सबसे बड़ी ताक़त उनकी दुआ और नज़र-ए-करम थी। लोग मानते हैं कि उनके पास जाकर दिल को अजीब सा सुकून मिलता था, जैसे भारी बोझ हल्का हो गया हो। इसी वजह से आज भी लाखों लोग उन पर पूरी अकीदत रखते हैं।

Baba Tajuddin की तालीम आज भी ज़िंदा है। उनकी सीख हमें बताती है कि मोहब्बत सबसे बड़ी इबादत है, इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है, और खिदमत-ए-ख़ल्क़ (लोगों की सेवा) सबसे बड़ा नेक काम है।

यही वजह है कि इतने साल बीत जाने के बाद भी बाबा ताजुद्दीन का नाम, उनकी यादें और उनका पैग़ाम आज भी लोगों के दिलों में पूरी शान और अकीदत के साथ ज़िंदा है।

जन्मदिन 27 जनवरी — क्या खास है?

बाबा ताजुद्दीन का जन्मदिन हर साल 27 जनवरी को बड़े ही अदब, अकीदत और जोश के साथ मनाया जाता है। आज 27/1/2026 को भी नागपुर के ताजबाग दरगाह शरीफ में सुबह से लेकर रात तक रूहानी माहौल बना रहा। यह दिन सिर्फ़ एक तारीख़ नहीं, बल्कि ईमान, सूफियाना रूहानियत और आपसी भाईचारे का पैग़ाम लेकर आता है।

सुबह का आलम – सुकून और दुआओं से शुरुआत

आज सुबह फ़ज्र के वक़्त से ही ताजबाग में रौनक़ बढ़ने लगी। दूर-दराज़ से आए ज़ायरीन, अकीदतमंद और मुरीद दरगाह पहुँचने लगे। दरगाह परिसर को चादरों, फूलों, लाइटों और झंडियों से खूबसूरती से सजाया गया।

सुबह-सुबह क़ुरआन ख़्वानी, फ़ातिहा और ख़ास दुआएँ हुईं। लोग अपने दिल की मुरादें लेकर बाबा की मजार पर हाज़िरी देने पहुँचे। कोई सेहत की दुआ मांग रहा था, कोई रोज़गार की, तो कोई घर-परिवार की सलामती की।

दोपहर – खिदमत और मोहब्बत का पैग़ाम

दोपहर होते-होते दरगाह में भीड़ और बढ़ गई। आज के दिन ख़िदमत-ए-ख़ल्क़ यानी लोगों की सेवा को खास अहमियत दी जाती है। ताजबाग में जगह-जगह लंगर का इंतज़ाम रहा, जहाँ बिना किसी भेदभाव के हर शख़्स को खाना खिलाया गया। अमीर-ग़रीब, छोटे-बड़े, हर मज़हब के लोग एक साथ बैठकर खाना खाते नज़र आए — यही बाबा ताजुद्दीन की तालीम का असली रूप है।

शाम – जन्मदिन की खुशी

शाम के वक़्त दरगाह का माहौल और भी रंगीन हो गया। बाबा ताजुद्दीन के जन्मदिन की खुशी में केक काटा गया, मिठाइयाँ बाँटी गईं और लोग एक-दूसरे को मुबारकबाद देते नज़र आए। बच्चे, बुज़ुर्ग, नौजवान — सबके चेहरों पर अलग ही सुकून और खुशी थी। ऐसा लगता है जैसे पूरा ताजबाग एक परिवार बन गया हो।

रात – कव्वाली और नातख़्वानी का जादू

रात ढलते-ढलते Taj bagh का माहौल पूरी तरह सूफियाना रंग में डूब गया। मशहूर कव्वालों और स्थानीय कलाकारों ने कव्वाली और नातख़्वानी पेश की।
“अल्लाह-हू”, “मौला-मौला” और बाबा की शान में पढ़े गए कलाम से फिज़ा में अजीब सी रूहानी मिठास घुल गई। लोग आँखें बंद कर, दिल से बाबा को याद करते हुए झूमते नज़र आए।

रात के आख़िरी पहर तक ज़ायरीन का आना-जाना जारी रहा। कुछ लोग चुपचाप मजार के पास बैठकर दुआ में मशग़ूल रहे, तो कुछ अपने दिल का बोझ हल्का करके सुकून महसूस करते दिखे। आज का पूरा दिन यही बताता रहा कि बाबा ताजुद्दीन सिर्फ़ एक सूफी बुज़ुर्ग नहीं, बल्कि मोहब्बत, इंसानियत और भाईचारे की ज़िंदा मिसाल हैं।

कुल मिलाकर, 27 जनवरी 2026 को ताजबाग में सुबह से रात तक जो कुछ हुआ, वह सिर्फ़ एक जश्न नहीं था, बल्कि दिलों को जोड़ने वाला, नफ़रत को मिटाने वाला और मोहब्बत फैलाने वाला सूफियाना पैग़ाम था जो Baba Tajuddin ने पूरी ज़िंदगी दिया और आज भी दे रहे हैं।

2026 का जन्मदिन समारोह — ताज़ा तैयारियाँ

इस साल भी Nagpur में हज़रत बाबा ताजुद्दीन रहमतुल्लाह अलैह का 165वां जन्मदिन आज 27 जनवरी 2026 को बड़े ही जोश, अकीदत और रूहानी माहौल के साथ मनाया गया। हर साल की तरह इस बार भी लोगों के दिलों में अलग ही उत्साह और सुकून देखने को मिला। बाबा के चाहने वाले सिर्फ़ नागपुर से ही नहीं, बल्कि आसपास के इलाक़ों और दूर-दराज़ से भी बड़ी तादाद में ताजबाग पहुँचे।

आज की ख़ास तैयारियाँ – सुबह से ही रौनक

आज के दिन की तैयारियाँ सुबह होने से पहले ही शुरू हो गई थीं। ताजबाग दरगाह परिसर को फूलों, रंग-बिरंगी लाइटों, चादरों और झंडियों से बेहद ख़ूबसूरती से सजाया गया। चारों तरफ़ एक अलग ही सूफियाना रौनक़ नज़र आ रही थी। दरगाह के रास्तों पर भी सफ़ाई और रोशनी का खास इंतज़ाम किया गया, ताकि ज़ायरीन को किसी तरह की दिक़्क़त न हो।

सुबह फ़ज्र के बाद से ही लोग मजार शरीफ़ पर हाज़िरी देने लगे। क़ुरआन ख़्वानी, फ़ातिहा और ख़ास दुआओं का सिलसिला शुरू हुआ, जिसमें Baba Tajuddin की शान में दुआएँ मांगी गईं। हर शख़्स अपने दिल की बात अल्लाह के सामने रखते हुए बाबा के वसीले से रहमत की उम्मीद कर रहा था।

सोशल मीडिया पर भी दिखा जोश

आज Baba Tajuddin का जन्मदिन सोशल मीडिया पर भी खूब छाया रहा। सुबह से ही लोग स्टेटस, पोस्ट और वीडियो के ज़रिये एक-दूसरे को मुबारकबाद देते नज़र आए। “ताज बाबा की जय हो”, “या बाबा ताजुद्दीन” जैसे पैग़ाम हर तरफ़ देखने को मिले। स्थानीय समुदायों और दरगाह से जुड़े लोगों ने पहले से ही आज के प्रोग्राम की जानकारी साझा कर दी थी, जिससे लोगों में और भी उत्साह बढ़ गया।

लंगर और खिदमत का ख़ास इंतज़ाम

आज के दिन लंगर का भी खास इंतज़ाम किया गया। दोपहर से लेकर रात तक हज़ारों लोगों ने लंगर में बैठकर खाना खाया। यहाँ कोई अमीर-ग़रीब का फर्क नहीं, सब एक साथ पंक्ति में बैठकर खाना खाते हैं यही Baba Tajuddin की असली तालीम है। लोग अपनी हैसियत के मुताबिक़ खिदमत में हाथ बँटाते नज़र आए — कोई पानी पिला रहा था, कोई सफ़ाई कर रहा था, तो कोई मेहमानों की मदद में लगा था।

शाम और रात का जश्न

शाम होते-होते माहौल और भी खुशनुमा हो गया। बाबा के जन्मदिन की खुशी में केक काटा गया, मिठाइयाँ बाँटी गईं और हर तरफ़ मुबारकबाद का सिलसिला चलता रहा।

रात में दरगाह पूरी तरह रोशनी से जगमगा उठी। इसके बाद कव्वाली और नातख़्वानी का प्रोग्राम शुरू हुआ, जिसमें बाबा की शान में सूफियाना कलाम पेश किए गए। ढोलक, हारमोनियम और बुलंद आवाज़ में पढ़े गए कलाम ने पूरे ताजबाग को रूहानियत से भर दिया।

Nagpur की पहचान बन चुका है यह जश्न

आज का यह आयोजन किसी आम धार्मिक कार्यक्रम से कम नहीं था। यह जश्न अब Nagpur की सांस्कृतिक और रूहानी पहचान का हिस्सा बन चुका है। हर साल की तरह इस बार भी बाबा ताजुद्दीन का जन्मदिन लोगों को मोहब्बत, भाईचारे और इंसानियत का पैग़ाम देकर गया।

कुल मिलाकर, आज 27 जनवरी 2026 को Baba Tajuddin का 165वां जन्मदिन सिर्फ़ एक जश्न नहीं, बल्कि ऐसा मौका था जिसने दिलों को जोड़ा, दुआओं को ज़ुबान दी और ताजबाग की फिज़ा को पूरी तरह सूफियाना रंग में रंग दिया।

Baba Tajuddin जन्मदिन कार्यक्रम क्या होता है?

Baba Tajuddin के जन्मदिन पर दरगाह का माहौल सुबह से ही बिल्कुल रूहानी हो जाता है। जैसे ही सुबह होती है, Taj bagh दरगाह में नमाज़, दुआओं और ज़िक्र का सिलसिला शुरू हो जाता है। हर तरफ़ “या अल्लाह”, “या बाबा ताजुद्दीन” की सदा गूंजती रहती है। लोग सुकून से बैठकर अल्लाह को याद करते हैं और बाबा के वसीले से अपने दिल की मुरादें मांगते हैं।

दिन चढ़ते-चढ़ते कव्वाली और सूफियाना संगीत शुरू हो जाता है। कव्वाल जब बाबा की शान में कलाम पेश करते हैं, तो पूरा माहौल अजीब सी रूहानी ताक़त से भर जाता है। लोग आँखें बंद कर झूमते हैं, कोई आंसुओं के साथ दुआ करता है, तो कोई दिल से बाबा को याद करता है। ऐसा लगता है जैसे सारी परेशानियाँ कुछ देर के लिए थम गई हों।

लंगर और खिदमत – सब बराबर

इस दिन लंगर का भी खास इंतज़ाम किया जाता है। दरगाह ट्रस्ट और आसपास के लोग मिलकर निःशुल्क खाने का प्रबंध करते हैं। सुबह से रात तक हज़ारों लोगों को खाना और प्रसाद बांटा जाता है।

यहाँ कोई अमीर-ग़रीब नहीं होता, कोई छोटा-बड़ा नहीं सब एक साथ बैठकर खाना खाते हैं। यही बाबा ताजुद्दीन की तालीम है कि इंसान-इंसान में कोई फर्क नहीं होना चाहिए। लंगर के ज़रिये सिर्फ़ पेट ही नहीं भरता, बल्कि दिलों में मोहब्बत और भाईचारे का जज़्बा भी पैदा होता है।

शाम के वक़्त जन्मदिन की खुशी और भी बढ़ जाती है। भक्त, परिवार और दरगाह से जुड़े लोग मिलकर केक काटते हैं और बाबा ताजुद्दीन को याद करते हुए अपनी अकीदत पेश करते हैं। चारों तरफ़ मुबारकबाद का माहौल होता है।

रात में कई जगहों पर कव्वाली, नातख़्वानी और सूफी गीतों के प्रोग्राम होते हैं। ढोलक और हारमोनियम की आवाज़, सूफियाना कलाम और लोगों की तालियों से ताजबाग की फिज़ा पूरी तरह रूहानियत में डूब जाती है।

सामाजिक और सांस्कृतिक अहमियत

Baba Tajuddin का जन्मदिन सिर्फ़ एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह एकता, मोहब्बत और सौहार्द का पैग़ाम भी है। यहाँ हर धर्म और हर तबक़े के लोग पूरे प्यार और इज़्ज़त के साथ शामिल होते हैं। Nagpur जैसे विविधता भरे शहर में यह जश्न लोगों को मिलजुल कर रहने, एक-दूसरे का सम्मान करने और अमन-शांति का रास्ता दिखाता है।

कुल मिलाकर, Baba Tajuddin का जन्मदिन ऐसा मौका होता है जहाँ इबादत, खिदमत, खुशी और इंसानियत सब एक साथ नज़र आते हैं। यही वजह है कि यह जश्न हर साल लोगों के दिलों में और गहराई से बसता चला जा रहा है।

श्रद्धा और विश्वास की मिसाल

Baba Tajuddin के चाहने वालों और अकीदतमंदों का पूरा यक़ीन है कि आज भी बाबा का साया और उनकी दुआएँ उनके जीवन में सुख, चैन और बरकत लेकर आती हैं। लोग मानते हैं कि जब दिल सच्चा हो और नीयत साफ़ हो, तो बाबा ताजुद्दीन कभी खाली हाथ नहीं लौटाते। इसी भरोसे के साथ लोग दूर-दूर से ताजबाग दरगाह पर आते हैं।

Baba Tajuddin के जन्मदिन के मौके पर लोग सिर्फ़ जश्न ही नहीं मनाते, बल्कि दिल से बाबा से जुड़ते हैं। कोई अपने ग़म लेकर आता है, कोई अपनी परेशानियाँ, तो कोई अपनी उम्मीदें और ख्वाहिशें। मजार के पास बैठकर लोग रोते भी हैं, मुस्कुराते भी हैं और दिल का बोझ हल्का करके सुकून महसूस करते हैं। बहुत से लोग बाबा से ऐसे बात करते हैं, जैसे कोई अपना हो यही उनकी सबसे बड़ी खासियत है।

Nagpur में 27 जनवरी को मनाया जाने वाला हज़रत बाबा ताजुद्दीन का जन्मदिन सिर्फ़ साल में एक बार होने वाला कोई आम आयोजन नहीं है। यह दिन इंसानियत, मोहब्बत, एकता और रूहानियत का सच्चा जश्न बन चुका है।
हर साल यह मौका हज़ारों लोगों को एक ही धागे में पिरो देता है जहाँ न कोई मज़हब बड़ा होता है, न कोई जाति, बस इंसानियत सबसे ऊपर होती है।

Baba Tajuddin का यह पैग़ाम कि प्यार बाँटो, नफ़रत छोड़ो और सबको साथ लेकर चलो, आज भी उतना ही ज़िंदा है। यही वजह है कि यह जन्मदिन नागपुर की रूहानी और सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा बन गया है और आने वाली पीढ़ियों को भी मोहब्बत और भाईचारे की राह दिखाता रहेगा।

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