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Nagpur Bajaj Nagar में दर्दनाक Hit and Run
नागपुर, 13 जनवरी 2026, Bajaj Nagar थाना इलाके में हुई इस दर्दनाक और दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस के मुताबिक इस Hit and Run हादसे में जान गंवाने वाले युवक की पहचान सुरेन्द्र रामदास पराते (29) के रूप में हुई है, जो MIDC इलाके के रहने वाले थे। रोज़ी-रोटी के सिलसिले में वह नागपुर में रहकर काम कर रहे थे।
Hit and Run हादसे वाली रात, यानी 12 जनवरी को करीब 10 बजे, सुरेन्द्र Bajaj Nagar के Infotech Tower के पास सड़क पार कर रहे थे। उसी दौरान एक तेज़ रफ्तार से आ रहा सफेद रंग का सीमेंट मिक्सर ट्रक अचानक उन पर चढ़ दौड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि ट्रक की रफ्तार इतनी ज़्यादा थी कि संभलने का मौका ही नहीं मिला। टक्कर इतनी जोरदार थी कि सुरेन्द्र सड़क पर गिर पड़े और बुरी तरह घायल हो गए।
Bajaj Nagar, स्थानीय लोगों ने बताया कि ट्रक चालक ने इंसानियत तक नहीं दिखाई। वह न तो रुका, न ही घायल की मदद की और मौके से फरार हो गया। यही बात इस हादसे को और भी ज़्यादा संगीन बना देती है। आसपास मौजूद लोगों ने फौरन एम्बुलेंस बुलवाई और सुरेन्द्र को नज़दीकी सरकारी अस्पताल पहुँचाया गया।
अस्पताल में डॉक्टरों ने उनकी जान बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन ज़ख्म बेहद गंभीर थे। आखिरकार सुबह करीब 6 बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस खबर के बाद परिवार पर जैसे ग़मों का पहाड़ टूट पड़ा। घरवालों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे मोहल्ले में मातम का माहौल है।
Bajaj Nagar पुलिस ने इस मामले में हिट-एंड-रन का केस दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि ट्रक और उसके चालक की तलाश तेज़ कर दी गई है। आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, साथ ही चश्मदीदों से पूछताछ भी की जा रही है, ताकि जल्द से जल्द आरोपी को पकड़ा जा सके।
इलाके के लोगों में इस घटना को लेकर गुस्सा और डर दोनों है। लोगों का कहना है कि इस सड़क पर भारी वाहन बेलगाम रफ्तार से चलते हैं और प्रशासन की तरफ से कोई सख़्त निगरानी नहीं है। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे हादसे दोबारा भी हो सकते हैं।
यह हादसा एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि तेज़ रफ्तार और लापरवाही किसी की ज़िंदगी कैसे छीन लेती है। सड़क सिर्फ गाड़ियों के लिए नहीं होती, वहाँ पैदल चलने वालों की जान भी उतनी ही क़ीमती है। उम्मीद है कि पुलिस जल्द आरोपी को पकड़कर उसे कानून के कटघरे में खड़ा करेगी और पीड़ित परिवार को इंसाफ़ मिलेगा।
अस्पताल में मौत: बचाया नहीं जा सका जीवन
हादसे के बाद वहाँ मौजूद लोगों ने बिना देर किए 108 और 1099 इमरजेंसी सेवा को फोन किया। घायल सुरेन्द्र पराते को फौरन सरकारी मेडिकल अस्पताल ले जाया गया। हालत बेहद नाज़ुक थी, लेकिन डॉक्टरों ने पूरी कोशिश की कि किसी तरह उसकी जान बच जाए।
अफसोस, तमाम इलाज के बावजूद सुबह करीब 6 बजे इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। डॉक्टरों ने शुरुआती जांच के बाद मौत की वजह बताई और पुलिस को मृत्यु प्रमाण पत्र सौंप दिया।
इस दर्दनाक खबर के मिलते ही परिवार और दोस्तों पर ग़मों का पहाड़ टूट पड़ा। घर में मातम पसरा हुआ है, हर आँख नम है और हर दिल बोझिल। ऐसी सड़क दुर्घटनाएँ सिर्फ़ एक इंसान की जान नहीं लेतीं, बल्कि पूरे परिवार को अंदर से तोड़ देती हैं। अपनों का यूँ अचानक बिछड़ जाना, परिवार के लिए एक ऐसा ज़ेहनी और जज़्बाती सदमा बन जाता है, जिसकी भरपाई उम्र भर नहीं हो पाती।
पुलिस की कार्रवाइयाँ और एफआईआर
Bajaj Nagar थाना पुलिस ने इस मामले में कारोबारी करण राजू चिकाते (34) की शिकायत पर FIR दर्ज कर ली है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक हादसा इतना संगीन है कि इसमें क़ानून की कई सख़्त धाराएँ लगाई गई हैं।
Bajaj Nagar पुलिस ने बताया कि ट्रक चालक पर धारा 281 (लापरवाही और तेज़ रफ्तार से वाहन चलाकर हादसा करना), धारा 106(1) BNS (आम लोगों की जान और सुरक्षा को ख़तरे में डालना) और मोटर वाहन अधिनियम की धारा 134 व 177 के तहत केस दर्ज किया गया है। ये सारी धाराएँ ऐसे मामलों में लगती हैं, जहाँ किसी की बेपरवाही और रफ़्तार की वजह से किसी की जान पर बन आए।
Bajaj Nagar पुलिस का कहना है कि फिलहाल ट्रक चालक की पहचान नहीं हो पाई है, लेकिन उसे पकड़ने के लिए हर मुमकिन कोशिश की जा रही है। आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ट्रक से जुड़ा हर छोटा-बड़ा सुराग जुटाया जा रहा है और चश्मदीदों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं।
इस पूरे मामले की जांच की कमान Bajaj Nagar पुलिस उप-निरीक्षक अतुल आदे (PSI अतुल आदे) के हाथ में है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि आरोपी चाहे जहाँ भी छिपा हो, उसे जल्द ही पकड़ लिया जाएगा और कानून के मुताबिक सख़्त कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय लोगों का गुस्सा और प्रतिक्रिया
Bajaj Nagar के लोगों के दिलों में इस हादसे को लेकर दर्द भी है और ग़ुस्सा भी। इलाके के दुकानदारों और रोज़ाना इस सड़क से गुज़रने वाले लोगों का कहना है कि यहाँ गाड़ियों की रफ्तार पर कोई काबू नहीं है। भारी वाहन बेलगाम दौड़ते रहते हैं, लेकिन उनकी निगरानी के लिए कोई ठोस इंतज़ाम नज़र नहीं आता। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि पैदल चलने वालों के लिए सड़क पार करना खुद को ख़तरे में डालने जैसा हो गया है।
कई स्थानीय लोगों का साफ़ कहना है कि अगर इस इलाके में सीसीटीवी कैमरों की ठीक से निगरानी होती और ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी मज़बूत रहती, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था। लोगों का मानना है कि प्रशासन की लापरवाही भी कहीं न कहीं ऐसी घटनाओं की वजह बन रही है।
जहाँ तक सड़क सुरक्षा नियमों की बात है, तो भारत के मोटर वाहन कानून साफ़ तौर पर कहते हैं कि हर वाहन चालक की ज़िम्मेदारी होती है कि वह तय गति सीमा में गाड़ी चलाए, सड़क पर चल रहे पैदल लोगों को अहमियत दे, और अगर कभी हादसा हो जाए तो घायल की मदद करे और तुरंत पुलिस को सूचना दे।
लेकिन हिट-एंड-रन जैसे मामलों में, जब चालक हादसे के बाद इंसानियत भूलकर मौके से भाग जाता है, तो यह अपराध और भी संगीन हो जाता है। ऐसे मामलों में कानून बहुत सख़्त है। वाहन जब्त किया जा सकता है, भारी चालान कटता है और आरोपी की गिरफ्तारी भी तय मानी जाती है। लोगों की माँग है कि ऐसे मामलों में बिना ढिलाई किए सख़्त कार्रवाई हो, ताकि आगे कोई और बेगुनाह अपनी जान न गंवाए।
सड़क हादसों का बड़ा परिदृश्य
पिछले कई सालों से Nagpur जैसे बड़े शहरों में सड़क हादसे लगातार बढ़ते जा रहे हैं, जो अब एक बड़ी चिंता बन चुके हैं। खास तौर पर भारी वाहनों की तेज़ रफ्तार, कई जगहों पर सड़कों की खराब हालत, और ट्रैफिक नियमों की खुली अवहेलना ये सब मिलकर रोज़मर्रा की ज़िंदगी को खतरनाक बना रहे हैं। आम आदमी घर से निकलते वक्त यह सोचकर निकलता है कि सही-सलामत वापस लौट पाएगा या नहीं।
ज़रूरत इस बात की है कि लोगों को सड़क सुरक्षा के बारे में लगातार जागरूक किया जाए और साथ ही सख़्त निगरानी व्यवस्था लागू की जाए। जानकारों का मानना है कि अगर सही समय पर सही कदम उठा लिए जाएँ, तो कई जानें बचाई जा सकती हैं। अर्थशास्त्रियों, ट्रैफिक एक्सपर्ट्स और नगर प्रशासन से जुड़े अफसरों का कहना है कि अब सिर्फ बातें नहीं, बल्कि ज़मीन पर काम होना चाहिए।
उनके मुताबिक शहर में स्मार्ट ट्रैफिक कैमरे, सही जगहों पर स्पीड ब्रेकर और साफ़ संकेत, आवासीय इलाकों में कम रफ्तार की सख़्ती, और वाहन चालकों की बाकायदा ट्रेनिंग ये सब आज वक्त की सबसे बड़ी ज़रूरत बन चुके हैं। जब तक इन उपायों को ईमानदारी से लागू नहीं किया जाएगा, तब तक ऐसे दर्दनाक हादसों को रोक पाना मुश्किल रहेगा।
इस एक हादसे ने एक परिवार से उसका अपना छीन लिया, दोस्तों और साथ काम करने वालों के दिलों में डर बैठा दिया, और प्रशासन को एक बार फिर यह याद दिला दिया कि सड़क सुरक्षा कोई मामूली मुद्दा नहीं है। सड़क पर नियमों का पालन करना सिर्फ कानून की मजबूरी नहीं, बल्कि किसी की जान बचाने का ज़रिया भी है।
अब वक्त आ गया है कि हम सब मिलकर यह तय करें कि सड़क सुरक्षा नियमों का पूरी ईमानदारी से पालन होगा, ड्राइविंग की तालीम और अनुशासन सख़्ती से लागू किया जाएगा, पैदल चलने वालों को सड़क पर पूरा हक़ और तवज्जो दी जाएगी, और हादसों को रोकने के लिए आधुनिक तकनीक का सही इस्तेमाल किया जाएगा। तभी हम अपने शहर को एक ऐसी जगह बना पाएँगे, जहाँ सड़कें डर की नहीं, बल्कि सुरक्षित और इंसानी ज़िंदगी की क़द्र करने वाली हों।
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