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Nagpur डागा अस्पताल लापरवाही पूरा मामला क्या है?
Nagpur: डागा अस्पताल की बड़ी लापरवाही, 9 महीने की गर्भवती महिला को रात में भर्ती से किया इनकार नगरसेवक Wasim Khan ने अस्पताल प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप नागपुर के मशहूर डागा अस्पताल में एक बार फिर इंसानियत और जिम्मेदारी पर सवाल उठ खड़े हुए हैं।
जानकारी के मुताबिक, एक 9 महीने की गर्भवती महिला को तेज़ प्रसव पीड़ा के चलते रात करीब 1:30 बजे अस्पताल लाया गया था।पर अफसोस की बात यह रही कि इतनी गंभीर हालत में होने के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने महिला को भर्ती करने से मना कर दिया और वापस भेज दिया।
मरीज को क्यों नहीं किया गया भर्ती?
जब महिला के परिजन भर्ती के लिए गुहार लगा रहे थे, तब अस्पताल की तरफ से यह कहकर मना कर दिया गया कि “ऑपरेशन थिएटर में पेस्ट कंट्रोल का काम चल रहा है, इसलिए अभी जगह उपलब्ध नहीं है।”
यह जवाब सुनकर परिजन और मौजूद लोग हैरान रह गए, क्योंकि यह मामला मां और बच्चे की जान से जुड़ा था।
नगरसेवक Wasim Khan ने संभाला मोर्चा
मामले की जानकारी मिलते ही प्रभाग 8 के नगरसेवक Wasim Khan रात करीब 2:00 बजे अस्पताल पहुंचे। उन्होंने सीधे डॉक्टरों और स्टाफ से सवाल किया कि इतनी गंभीर हालत में महिला को क्यों लौटाया गया।

वसीम खान ने कहा कि “यह सरासर लापरवाही है। एक गर्भवती महिला को इस हालत में बाहर भेजना इंसानियत के खिलाफ है।”
Wasim Khan ने की लिखित जवाब की मांग
नगरसेवक Wasim Khan ने अस्पताल प्रशासन से इस लापरवाही का लिखित जवाब मांगा। साथ ही उन्होंने तुरंत महिला को मेयो अस्पताल (IGGMC) रेफर करने को कहा, ताकि समय रहते इलाज हो सके और किसी की जान खतरे में न पड़े।
उनका साफ कहना था कि “अगर यहां इलाज संभव नहीं था, तो पहले से सही व्यवस्था क्यों नहीं की गई?”
आज दर्ज कराई गई आधिकारिक शिकायत
इस घटना के बाद आज वसीम खान अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के साथ दोबारा डागा अस्पताल पहुंचे। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से मुलाकात की और इस मामले में कड़ी नाराजगी जताई।
उन्होंने इंचार्ज शमशुन खानम समेत संबंधित अधिकारियों से मिलकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल
रात के समय एक गंभीर हालत में आई गर्भवती महिला को बिना किसी ठोस वैकल्पिक व्यवस्था के वापस भेज देना, हमारी स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
ऐसे मामलों में थोड़ी सी लापरवाही भी किसी की जिंदगी छीन सकती है। अस्पतालों का पहला फर्ज है कि हर मरीज को समय पर इलाज मिले, खासकर जब मामला मां और बच्चे से जुड़ा हो।
जनता की मांग
इस घटना के बाद शहर के सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में ऐसी लापरवाही बार-बार सामने आना बेहद दुखद है। जरूरत है कि प्रशासन सख्त कदम उठाए और मरीजों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे।
अब शहरवासियों की मांग है कि
दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो
अस्पताल में बेहतर व्यवस्था बनाई जाए
भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो
ताकि किसी और मां को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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