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Breaking News: Powerful Action के साथ Nagpur हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, 10 अप्रैल तक अवैध निर्माण पर सख्ती का आदेश

Breaking News: Powerful Action के साथ Nagpur हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, 10 अप्रैल तक अवैध निर्माण पर सख्ती का आदेश

मामले की शुरुआत और Nagpur High Court सख्त आदेश का कारण

Nagpur से हाल ही में एक बड़ी और काफी चर्चा में रहने वाली खबर सामने आई है। नागपुर हाई कोर्ट ने Poonam Chamber और पूनम टावर्स में हुए अवैध निर्माण को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए साफ आदेश दिया है कि तय समय के अंदर इन गैरकानूनी ढांचों को गिराया जाए।

High Court ने कहा है कि संबंधित पक्ष को 10 अप्रैल 2026 तक खुद ही इन अवैध निर्माणों को पूरी तरह हटाना होगा। अगर ऐसा नहीं किया गया, तो Nagpur महानगरपालिका यानी एनएमसी खुद कार्रवाई करेगी और इसका पूरा खर्च भी संबंधित लोगों से ही वसूला जाएगा।

इस फैसले को शहर में बिल्डिंग नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ एक मजबूत और अहम कदम माना जा रहा है। दरअसल, यह मामला पिछले कई सालों से Nagpur प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच विवाद का कारण बना हुआ था। Poonam Chamber और पूनम टावर्स के कुछ हिस्सों में बिना इजाजत के निर्माण किया गया था, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही थी।

जानकारी के मुताबिक, बेसमेंट में जो जगह पार्किंग के लिए तय थी, वहां गैरकानूनी तरीके से दुकानें और दूसरे ढांचे बना दिए गए थे। इसके अलावा, कुछ हिस्सों में तय सीमा से ज्यादा ऊंचाई तक इमारत खड़ी कर दी गई थी और प्लॉट की हद से बाहर भी निर्माण किया गया था, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है।

Nagpur महानगरपालिका ने इन अवैध निर्माणों को लेकर साल 2004 से पहले ही कई बार नोटिस जारी किए थे, लेकिन अफसोस की बात यह रही कि लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई। फाइलें चलती रहीं, नोटिस आते रहे, लेकिन जमीन पर काम बहुत धीमी रफ्तार से होता रहा।

इसी बात पर हाई कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए प्रशासन की लापरवाही पर अफसोस जताया। कोर्ट ने साफ कहा कि नियमों के पालन में ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अब सिस्टम को ज्यादा जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ काम करना होगा। अदालत ने प्रशासन से यह भी उम्मीद जताई कि आगे से ऐसे मामलों में तुरंत और सख्त कदम उठाए जाएंगे, ताकि शहर में अवैध निर्माण पर लगाम लगाई जा सके।

एन. कुमार की याचिका और कोर्ट की सख्त प्रतिक्रिया

मामला उस वक्त और ज्यादा गंभीर हो गया, जब इस इमारत के मालिक एन. कुमार ने अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई के खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। उन्होंने कोर्ट में एक याचिका दाखिल करके यह मांग की कि नागपुर महानगरपालिका की तरफ से जो कार्रवाई की जा रही है, उसे रोका जाए। अपनी दलील में उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास निर्माण से जुड़ा नक्शा है और सब कुछ नियमों के मुताबिक ही बनाया गया है।

हालांकि, कोर्ट ने उनकी बातों को ज्यादा अहमियत नहीं दी और साफ शब्दों में कह दिया कि इस मामले में किसी तरह की राहत या स्टे नहीं दिया जाएगा। अदालत ने यह भी साफ किया कि न्याय किसी एक व्यक्ति की मर्जी या शर्तों पर नहीं चल सकता। कानून सबके लिए बराबर है और उसका पालन करना हर किसी की जिम्मेदारी है।

सुनवाई के दौरान जज साहब ने सख्त लहजे में कहा कि अगर किसी भी व्यक्ति या संस्था के पास सही अनुमति और वैध दस्तावेज नहीं हैं, तो उस निर्माण को हटाना ही पड़ेगा। बिना वजह देरी करना, बहाने बनाना या नई-नई शर्तें रखना अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

कोर्ट ने एन. कुमार से यह भी कहा कि वह लिखित रूप में यह भरोसा दें कि वह खुद अपने खर्च पर अवैध निर्माण हटाएंगे। इसी भरोसे के आधार पर अदालत ने ढहाई की अंतिम समयसीमा तय की। कोर्ट का साफ संदेश था कि अब इस मामले में कोई ढील नहीं दी जाएगी और आदेश का पालन हर हाल में करना होगा।

10 अप्रैल तक का अंतिम समयसीमा

High Court ने अपने आदेश में बिल्कुल साफ और दो-टूक शब्दों में कहा है कि 16 फरवरी 2026 से ही Poonam Chamber और पूनम टावर्स में बने अवैध ढांचों को गिराने की कार्रवाई शुरू कर दी जाए। अदालत ने यह भी तय कर दिया है कि हर हाल में इन गैरकानूनी निर्माणों को 10 अप्रैल 2026 तक पूरी तरह हटा दिया जाना चाहिए।

High Court ने चेतावनी दी है कि अगर तय समयसीमा तक संबंधित पक्ष खुद यह काम पूरा नहीं करता है, तो 17 फरवरी से नागपुर महानगरपालिका अपने स्तर पर कार्रवाई शुरू कर देगी। इसके बाद जो भी खर्च आएगा, वह पूरा पैसा संबंधित लोगों से ही वसूला जाएगा। अदालत का यह फैसला साफ दिखाता है कि अब प्रशासन और न्यायपालिका दोनों ही इस मामले को लेकर बेहद गंभीर हैं और आगे किसी भी तरह की लापरवाही या ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इस आदेश के जरिए कोर्ट ने यह मजबूत संदेश दिया है कि नागपुर में अब बिना इजाजत और नियमों को ताक पर रखकर निर्माण करना आसान नहीं होगा। जो भी कानून तोड़ेगा, उसे उसका खामियाजा जरूर भुगतना पड़ेगा।

अवैध निर्माण की सच्चाई

जांच के दौरान यह बात सामने आई कि पूनम चैंबर्स में कई तरह के गैरकानूनी निर्माण किए गए थे। सबसे पहले, बेसमेंट में जो जगह गाड़ियों की पार्किंग के लिए तय थी, वहां करीब 1,298 वर्ग मीटर में बिना अनुमति के दुकानें और दूसरे ढांचे बना दिए गए थे।

इसके अलावा, प्लॉट की तय सीमा से बाहर लगभग 1,494 वर्ग मीटर क्षेत्र में निर्माण कर लिया गया था, जो साफ तौर पर नियमों का उल्लंघन है। यही नहीं, इमारत की सातवीं मंजिल पर करीब 1,175 वर्ग मीटर में एक अतिरिक्त मंजिल भी गैरकानूनी तरीके से खड़ी कर दी गई थी।

सबसे गंभीर बात यह रही कि अनुमति से लगभग तीन मीटर ज्यादा ऊंचाई तक इमारत बना दी गई थी, जो सुरक्षा के लिहाज से भी काफी खतरनाक मानी जाती है।

इन अवैध निर्माणों की वजह से न सिर्फ कानून का मजाक बना, बल्कि आसपास रहने वाले लोगों को भी कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। पार्किंग की समस्या बढ़ गई, रास्ते संकरे हो गए और सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे। यही वजह है कि कोर्ट ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त कदम उठाने का फैसला किया।

Nagpur निगम की कार्रवाई और नगर सुरक्षा

High Court के सख्त आदेश के बाद अब नागपुर महानगरपालिका यानी एनएमसी भी पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। प्रशासन ने अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है और धीरे-धीरे इसे आगे बढ़ाया जा रहा है। सबसे पहले बेसमेंट में बनी गैरकानूनी दुकानों और वहां रखा सामान हटाने का काम शुरू किया गया है।

एनएमसी के एंटी-अतिक्रमण विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर कंटेनर, शटर, फर्नीचर और दूसरी सामग्रियों को हटाने में जुटी हुई है। इस पूरे अभियान के दौरान सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए हैं, ताकि किसी तरह की अफरातफरी या नुकसान न हो।

स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई सिर्फ पूनम चैंबर्स तक ही सीमित नहीं रहने वाली है। शहर के दूसरे इलाकों में भी जहां-जहां अवैध कब्जे और गैरकानूनी निर्माण पाए जाएंगे, वहां भी इसी तरह सख्त कदम उठाए जाएंगे। प्रशासन अब किसी को भी नियम तोड़ने की छूट देने के मूड में नहीं है।

अधिकारियों का यह भी मानना है कि इस अभियान से आम लोगों को काफी राहत मिलेगी। सार्वजनिक जगहें फिर से खुलेंगी, फुटपाथों पर पैदल चलना आसान होगा और पार्किंग की समस्या में भी सुधार आएगा। कुल मिलाकर, इस कार्रवाई से शहर की व्यवस्था बेहतर होने और लोगों को ज्यादा सहूलियत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

स्थानीय लोगों और दुकानदारों की प्रतिक्रिया

जहां एक तरफ कोर्ट और प्रशासन अवैध निर्माण हटाने को लेकर पूरी सख्ती के साथ आगे बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ दुकानदारों और यहां काम करने वाले लोगों में चिंता भी देखने को मिल रही है। उनका कहना है कि अगर दुकानें और ढांचे तोड़ दिए गए, तो उनका रोज़गार प्रभावित होगा और घर चलाना मुश्किल हो जाएगा। इसी वजह से कुछ व्यापारियों ने कोर्ट से थोड़ी राहत देने की गुहार भी लगाई थी।

इन व्यापारियों की बातों को सुनवाई के दौरान सुना गया, लेकिन कोर्ट ने साफ कर दिया कि कानून सबके लिए बराबर होता है और इसमें किसी के साथ कोई खास रियायत नहीं दी जा सकती। अदालत ने यह भी कहा कि अगर नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो कार्रवाई होना तय है, चाहे वह किसी के लिए भी मुश्किल क्यों न हो।

न्याय सही तरीके से हो, इसके लिए कोर्ट ने नागपुर महानगरपालिका को निर्देश दिया है कि वह पूरी कार्रवाई पर कड़ी नजर रखे। साथ ही, संबंधित पक्षों से समय-समय पर रिपोर्ट लेकर अदालत को जानकारी देती रहे, ताकि किसी तरह की गड़बड़ी या लापरवाही न हो।

नियमों का पालन अब जरूरी

Nagpur High Court का यह फैसला सिर्फ पूनम चैंबर्स तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे शहर के लिए एक सख्त संदेश है। अदालत ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अब कानून तोड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और नियमों की अनदेखी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

कोर्ट ने यह भी कहा है कि अगर 10 अप्रैल तक अवैध निर्माण नहीं हटाए गए, तो महानगरपालिका बिना किसी झिझक के खुद बुलडोजर चलाकर कार्रवाई करेगी। इसके बाद किसी तरह की बहस या बहानेबाजी नहीं चलेगी।

इस फैसले से यह साफ हो गया है कि अब बिना इजाजत और नियमों को नजरअंदाज करके मनमर्जी से निर्माण करना आसान नहीं होगा। जो भी ऐसा करेगा, उसे उसका अंजाम भुगतना पड़ेगा। अदालत का मकसद शहर में कानून का राज कायम करना और आम लोगों को सुरक्षित व बेहतर माहौल देना है।

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