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Maharashtra Government ने Nagpur Highway से जानवरों को हटाने के लिए अभियान चलाने का आदेश दिया
Maharashtra Government ने राज्य के राष्ट्रीय और Nagpur Highway पर घूम रहे आवारा जानवरों को हटाने के लिए एक ख़ास मुहिम (स्पेशल ड्राइव) चलाने का फ़ैसला किया है। आसान ज़बान में कहें तो सरकार अब इस समस्या को हल्के में लेने के मूड में बिल्कुल नहीं है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट की सख़्त फटकार और लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए उठाया गया है।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ शब्दों में Maharashtra Government को चेतावनी दी थी कि अगर सड़क सुरक्षा को लेकर ठोस इंतज़ाम नहीं किए गए, तो अदालत खुद सख़्त आदेश जारी करेगी और सीधे हस्तक्षेप करेगी। इसी चेतावनी के बाद महाराष्ट्र सरकार हरकत में आई और इस पूरे मसले पर बड़ा फ़ैसला लिया।
यह पूरी योजना 2 जनवरी को लोक निर्माण विभाग (PWD) की तरफ़ से जारी किए गए एक सरकारी प्रस्ताव (Government Resolution – GR) के ज़रिये सामने आई। इस प्रस्ताव में साफ़ कहा गया है कि अब सिर्फ एक विभाग नहीं, बल्कि कई सरकारी विभाग और एजेंसियां मिलकर इस मुहिम को अंजाम देंगी, ताकि हाईवे को ज़्यादा से ज़्यादा महफूज़ और सुरक्षित बनाया जा सके।
सरकार का मानना है कि आवारा जानवरों की वजह से होने वाले हादसे अब एक गंभीर और जानलेवा समस्या बन चुके हैं। तेज़ रफ्तार वाहनों के सामने अचानक जानवरों का आ जाना कई बार बड़े हादसों की वजह बनता है। इसी खतरे को कम करने के लिए यह स्पेशल ड्राइव चलाई जा रही है, ताकि लोग बेख़ौफ़ होकर सफ़र कर सकें और सड़कों पर जान-माल का नुक़सान रोका जा सके।
क्या है इसकी वजह? Nagpur Highway पर जानलेवा खतरा
राज्य भर के Nagpur Highway पर आजकल आवारा जानवरों का खुलेआम घूमना एक बहुत बड़ी परेशानी बन चुका है। सड़कों पर पहले से ही गड्ढे, भारी ट्रैफिक और तेज़ रफ़्तार गाड़ियाँ होती हैं, और ऐसे में गाय, भैंस, बकरियाँ या आवारा कुत्ते अचानक सामने आ जाएँ तो हालात पल भर में ख़तरनाक हो जाते हैं। ड्राइवर को संभलने का मौका तक नहीं मिलता और कई बार बड़ा हादसा हो जाता है।
ऐसे हादसों में सिर्फ़ गाड़ियाँ ही नहीं टूटतीं, बल्कि सफ़र कर रहे लोगों को गंभीर चोटें लगती हैं। अफ़सोस की बात यह है कि कई मामलों में लोगों ने अपनी जान तक गंवाई है। यही वजह है कि यह समस्या अब सिर्फ़ ट्रैफिक या सड़क प्रबंधन तक सीमित नहीं रही, बल्कि एक जानलेवा संकट बन चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट ने भी इस बात को बिल्कुल साफ़ लफ़्ज़ों में कहा है कि यह मामला केवल सड़क सुरक्षा का नहीं, बल्कि इंसानी ज़िंदगी को बचाने से जुड़ा हुआ है। अदालत का कहना है कि अगर वक्त रहते सख़्त कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
इसी वजह से कोर्ट ने सरकार को इशारा नहीं, बल्कि सीधी हिदायत दी है कि इस मसले पर ठोस और असरदार कार्रवाई की जाए, ताकि सड़क पर चलने वाला हर शख़्स खुद को महफूज़ महसूस कर सके।
क्या-क्या कदम लिए जा रहे हैं?
Maharashtra Government अब इस मुहिम को ठोस और ज़मीन पर उतारने लायक बनाने की तैयारी में है। इसके तहत सबसे पहले पूरे राज्य के हाईवे का जायज़ा लिया जाएगा और उन रास्तों की एक खास सूची तैयार की जाएगी, जहाँ आवारा जानवरों की वजह से सबसे ज़्यादा हादसे होते हैं। ऐसे ख़तरनाक हाईवे सेक्शन पर खास नज़र रखी जाएगी, ताकि कोई भी जोखिम समय रहते काबू में लाया जा सके।

24×7 पेट्रोलिंग टीम की तैनाती
इस अभियान की बड़ी ज़िम्मेदारी डिस्ट्रिक्ट रोड सेफ्टी कमेटी को सौंपी गई है। कमेटी को हिदायत दी गई है कि हाईवे पर राउंड-द-अवकल यानी 24 घंटे पेट्रोलिंग करने वाली टीमें बनाई जाएँ। ये टीमें लगातार सड़क पर मौजूद रहेंगी और हालात पर नज़र रखेंगी।
इन पेट्रोलिंग टीमों का काम होगा
Nagpur Highway पर घूम रहे आवारा जानवरों की पहचान करना,
उन्हें सुरक्षित और इंसानी तरीके से हटाने और काबू में लेने में मदद करना,
स्थानीय पुलिस, परिवहन विभाग और पशुपालन विभाग के साथ बेहतर तालमेल बनाकर काम करना, ताकि किसी भी हालात में देरी न हो।
इमरजेंसी नंबर होंगे साफ़-साफ़ नज़र में
अब मुख्य Nagpur Highway पर सार्वजनिक हेल्पलाइन नंबर भी बड़े और साफ़ अक्षरों में लगाए जाएंगे। NHAI का नंबर 1033 और महाराष्ट्र सरकार का इमरजेंसी नंबर 112 हाईवे पर जगह-जगह दिखेंगे, ताकि अगर किसी को सड़क पर आवारा जानवर दिखें या खतरा महसूस हो, तो वह फौरन कॉल करके सूचना दे सके। इसका मकसद यही है कि हादसा होने से पहले ही हालात को काबू में लिया जा सके।
पशु शरणों में भेजे जाएंगे जानवर
जो इलाके सबसे ज़्यादा जोखिम वाले माने गए हैं, वहाँ से आवारा जानवरों को पकड़कर सुरक्षित रूप से पशु आश्रयों में भेजा जाएगा। सरकार का कहना है कि जानवरों के साथ कोई ज़ुल्म नहीं किया जाएगा, बल्कि उन्हें बेहतर देखभाल के साथ रखा जाएगा। ज़रूरत पड़ने पर पशु प्रेमी संगठनों और एनजीओ के साथ मिलकर वीटीसी (टीकाकरण, नसबंदी और देखभाल) जैसे कार्यक्रम भी चलाए जा सकते हैं, ताकि समस्या जड़ से हल हो सके।
पहले कभी नहीं उठाया गया इतना सख़्त कदम
यह सच है कि राज्य में आवारा जानवरों की समस्या कोई नई नहीं है। पहले भी इस मुद्दे पर अदालतें नाराज़गी जता चुकी हैं। पिछली बार नागपुर बेंच ने स्थानीय अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई थी और साफ़ कहा था कि अगर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ़ व्यक्तिगत क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी।
लेकिन इस बार मामला और गंभीर हो गया है। सुप्रीम कोर्ट की सख़्त टिप्पणी के बाद अब केंद्र और राज्य सरकार दोनों ने मिलकर ऐलान किया है कि यह अभियान सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि हाई कमांडर यानी उच्च स्तरीय आदेश के तौर पर लागू किया जाएगा। सरकार का साफ़ इरादा है कि सड़क सुरक्षा में सुधार हो और आम लोगों की ज़िंदगी को हर हाल में महफूज़ बनाया जाए।
क्या जनता को राहत मिलेगी?
सड़क सुरक्षा से जुड़े जानकारों का मानना है कि Maharashtra Government का यह अभियान बिल्कुल सही दिशा में उठाया गया एक बड़ा और ज़रूरी क़दम है। उनके मुताबिक, अगर इस मुहिम को ईमानदारी और लगातार अमल में लाया गया, तो हाईवे पर आवारा जानवरों की वजह से होने वाले हादसों में 30 से 40 फ़ीसदी तक कमी लाई जा सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह तभी मुमकिन है, जब कुछ अहम बातों पर पूरी तरह ध्यान दिया जाए
Nagpur Highway पर मज़बूत और प्रभावी पेट्रोलिंग हो, ताकि हर समय हालात पर नज़र रखी जा सके।
त्वरित प्रतिक्रिया देने वाली टीमें मौजूद हों, जो सूचना मिलते ही फौरन मौके पर पहुँचें।
और सबसे ज़रूरी, हेल्पलाइन सेवाओं का सही और व्यापक इस्तेमाल किया जाए, ताकि आम लोग भी इस व्यवस्था का हिस्सा बन सकें।
उनका मानना है कि अगर ये तीनों चीज़ें ठीक से लागू हो जाएँ, तो सड़कें काफी हद तक महफूज़ और सुरक्षित बन सकती हैं।
पशु प्रेमी संगठनों की अलग राय
वहीं दूसरी तरफ़ पशु प्रेमी संगठनों का कहना है कि सिर्फ जानवरों को सड़क से हटाना ही इस समस्या का पूरा हल नहीं है। उनके मुताबिक, अगर जड़ से समस्या खत्म करनी है, तो लंबी अवधि की योजना बनानी होगी।
इन संगठनों का सुझाव है कि सरकार को बड़े पैमाने पर
नसबंदी (Sterilisation),
टीकाकरण (Vaccination)
और पशु कल्याण से जुड़े कार्यक्रम
चलाने चाहिए, ताकि आवारा पशुओं की संख्या पर काबू पाया जा सके।
पशु प्रेमियों का मानना है कि अगर जानवरों की सही देखभाल की जाए और उनकी आबादी को संतुलित तरीके से नियंत्रित किया जाए, तो न सिर्फ सड़क हादसे कम होंगे, बल्कि जानवरों के साथ इंसाफ़ भी होगा। कुल मिलाकर, यही कहा जा सकता है कि इंसानी सुरक्षा और पशु कल्याण दोनों का संतुलन ही इस समस्या का सबसे बेहतर और टिकाऊ हल है।
चुनौतियाँ और उनके हल रास्ता आसान नहीं, मगर मुमकिन ज़रूर है
Nagpur के ज़्यादातर ग्रामीण इलाकों में आवारा जानवरों के लिए कोई पुख़्ता और स्थायी शरण मौजूद नहीं है। न तो सही ढंग के पिंजरे हैं और न ही ऐसी जगहें, जहाँ पकड़े गए जानवरों को सुरक्षित रखा जा सके। इसी वजह से कई बार जानवरों को पकड़ना तो संभव हो जाता है, लेकिन उन्हें रखने और देखभाल करने में भारी दिक्कत आती है।
इसका हल क्या है?
Maharashtra Government को राज्य स्तर पर एक मज़बूत और असरदार पशु आश्रय व्यवस्था खड़ी करनी होगी। ऐसे आश्रय गृह हों, जहाँ
पर्याप्त जगह हो,
ज़रूरी संसाधन उपलब्ध हों,
और प्रशिक्षित कर्मचारी तैनात हों,
ताकि जानवरों को इंसानी तरीके से रखा और संभाला जा सके। बिना इस बुनियादी ढांचे के समस्या का स्थायी हल निकलना मुश्किल है।
एक बड़ी परेशानी यह भी है कि स्थानीय लोगों में जागरूकता की कमी है। कई बार लोग सड़क पर जानवर देखते तो हैं, लेकिन या तो सूचना नहीं देते या देर से देते हैं। नतीजा यह होता है कि जब तक प्रशासन को खबर मिलती है, तब तक हादसा हो चुका होता है।
इसका हल क्या है? इसके लिए सिर्फ सरकार ही नहीं, बल्कि स्थानीय निकायों, पंचायतों और सामुदायिक संगठनों को भी आगे आना होगा। मिलकर जन-जागरूकता अभियान चलाने होंगे, ताकि लोगों को यह समझाया जा सके कि सूचना देना उनकी ज़िम्मेदारी भी है। जब हर नागरिक सड़क सुरक्षा को अपना फ़र्ज़ समझेगा, तभी इस मुहिम को कामयाबी मिलेगी।
मानव जीवन की हिफ़ाज़त सबसे ऊपर
कुल मिलाकर, Maharashtra Government का यह स्पेशल ड्राइव इस बात का साफ़ इशारा है कि अब महाराष्ट्र प्रशासन सड़क सुरक्षा को पूरी गंभीरता से ले रहा है। आवारा जानवरों की वजह से होने वाली दुर्घटनाओं और जान-माल के नुक़सान को रोकने के लिए यह योजना समग्र, ठोस और फ़ौरी कार्रवाई पर आधारित है।
Maharashtra Government का साफ़ पैग़ाम है कि इंसानी ज़िंदगी सबसे क़ीमती है, और उसकी हिफ़ाज़त में कोई कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर यह अभियान उसी जज़्बे के साथ ज़मीन पर उतरा, तो यक़ीनन आने वाले वक़्त में सड़कें ज़्यादा सुरक्षित होंगी और बेवजह जान जाने के मामले भी कम होंगे।
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