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Exclusive Report: Nagpur में आएगा Smart Healthcare Hub, Maha Metro ने CARE Group को 350+ Bed Hospital के लिए LoA सौंपा

Exclusive Report: Nagpur में आएगा Smart Healthcare Hub, Maha Metro ने CARE Group को 350+ Bed Hospital के लिए LoA सौंपा

Maha Metro ने CARE Group को 350+ बेड वाले मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल के लिए LoA सौंपा

महाराष्ट्र मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी Maha Metro ने एक बहुत ही बड़ा और अहम फैसला लिया है। उन्होंने M/s Quality Care India Limited (QCIL), जो कि CARE Group of Hospitals से जुड़ी हुई कंपनी है, को 350 से ज्यादा बेड वाले बड़े मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल बनाने के लिए Letter of Acceptance (LoA) दिया है।

इसकी आधिकारिक घोषणा 7 फरवरी 2026 को “Advantage Vidarbha Summit” में की गई थी। इस मौके पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी भी मौजूद थे।

ये फैसला सिर्फ एक कागज़ी औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह Nagpur के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी है। इससे शहर में इलाज की सुविधाएं और बेहतर होने वाली हैं। अब लोगों को बड़े इलाज के लिए बाहर के शहरों में जाने की मजबूरी नहीं रहेगी।

जिस ज़मीन पर यह अस्पताल बनेगा, वह कस्तूरचंद पार्क मेट्रो स्टेशन के पास है, यानी वहां पहुंचना लोगों के लिए बहुत आसान रहेगा। मेट्रो, बस और दूसरे साधनों से मरीज और उनके घरवाले आसानी से वहां आ-जा सकेंगे।

यहां बनने वाला अस्पताल पूरी तरह से आधुनिक और हाई-टेक होगा, जिसमें हर तरह की इलाज की सुविधाएं मिलेंगी। दिल, दिमाग, हड्डी, किडनी, बच्चों और महिलाओं के इलाज से लेकर इमरजेंसी तक सब कुछ एक ही जगह मिलेगा।

कुल मिलाकर, यह परियोजना Nagpur और आसपास के इलाकों के लोगों के लिए उम्मीद की एक नई किरण है। इससे न सिर्फ बेहतर इलाज मिलेगा, बल्कि हजारों लोगों को रोज़गार भी मिलेगा। यह अस्पताल आने वाले वक्त में विदर्भ क्षेत्र के लिए सेहत और तरक्की का नया रास्ता खोलने वाला साबित होगा।

परियोजना का महत्व और विस्तार

यह जो अस्पताल बनने वाला है, उसमें 350 से ज्यादा बेड होंगे, यानी यह कोई छोटा-मोटा अस्पताल नहीं बल्कि एक बहुत बड़ा और पूरी सुविधाओं से लैस मेडिकल सेंटर होगा। यहां लोगों को हर तरह का इलाज एक ही जगह मिल सकेगा।

इमरजेंसी की सुविधा होगी, रोज़ की जांच के लिए ओपीडी होगी, बड़े-बड़े ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू और एचडीयू जैसी खास सुविधाएं भी रहेंगी। इसके अलावा, जांच के लिए आधुनिक मशीनें, एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई और दूसरे टेस्ट की पूरी व्यवस्था होगी। साथ ही दिल, दिमाग, हड्डी, किडनी, बच्चों और महिलाओं से जुड़े इलाज के लिए अलग-अलग सुपर-स्पेशलिटी विभाग भी होंगे।

इस अस्पताल की जगह भी बहुत खास है। यह नागपुर के दिल कहे जाने वाले इलाके, कस्तूरचंद पार्क के पास बनेगा, और सबसे बड़ी बात यह है कि यह मेट्रो स्टेशन से बिल्कुल पास होगा। यानी मरीजों और उनके घरवालों को आने-जाने में कोई परेशानी नहीं होगी। मेट्रो, बस, ऑटो और दूसरे साधनों से लोग आसानी से वहां पहुंच सकेंगे।

शहर के बीचों-बीच होने की वजह से यह जगह डॉक्टरों, नर्सों, स्टाफ और बाहर से आने वाले मरीजों के लिए भी बहुत सुविधाजनक रहेगी। कुल मिलाकर, यह अस्पताल अपनी सुविधाओं और लोकेशन की वजह से नागपुर के लोगों के लिए इलाज का एक भरोसेमंद और आरामदायक ठिकाना बनने वाला है, जहां लोग सुकून के साथ अपना इलाज करवा सकेंगे।

प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत और निवेश

यह अस्पताल परियोजना सिर्फ इलाज से जुड़ी नहीं है, बल्कि पैसों के लिहाज़ से भी एक बहुत बड़ा और मजबूत प्रोजेक्ट है। इसमें QCIL कंपनी करीब ₹600 करोड़ से भी ज्यादा का निवेश करने जा रही है, यानी इतनी बड़ी रकम इस अस्पताल को बनाने और चलाने में लगाई जाएगी।

यह अस्पताल महा-मेट्रो की ज़मीन पर 60 साल की लीज़ पर बनाया जाएगा। मतलब आने वाले कई दशकों तक यह प्रोजेक्ट लगातार शहर को फायदा देता रहेगा। इस पूरे समय में QCIL कंपनी महा-मेट्रो को कुल मिलाकर ₹1,850 करोड़ से ज्यादा की रकम देगी।

इसमें कई तरह के भुगतान शामिल हैं —
सबसे पहले ₹51 करोड़ का upfront प्रीमियम, यानी शुरुआत में ही एक बड़ी रकम दी जाएगी।
फिर हर साल करीब ₹5.85 करोड़ का कंसेशन फीस दिया जाएगा, जिसमें हर साल 5% की बढ़ोतरी भी होगी।
इसके अलावा हर साल ₹50 लाख का लीज़ किराया भी मिलेगा, जो समय के साथ बढ़ता रहेगा।

इतना ही नहीं, Maha Metro को बिल्डिंग पास कराने की फीस, और पहले से बनी हुई सड़कों, बेसमेंट और पार्किंग जैसी सुविधाओं के बदले भी करीब ₹56.80 करोड़ मिलेंगे।

यानि साफ तौर पर कहा जाए तो इस एक प्रोजेक्ट से Maha Metro को आने वाले सालों में मजबूत और लगातार कमाई होती रहेगी। इससे उनकी आमदनी बढ़ेगी और भविष्य की योजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

साथ ही, इतना बड़ा निवेश नागपुर शहर की तरक्की के लिए भी बहुत अहम है। इससे न सिर्फ शहर की पहचान बढ़ेगी, बल्कि व्यापार, रोज़गार और विकास को भी नया सहारा मिलेगा। कुल मिलाकर, यह प्रोजेक्ट नागपुर के लिए सेहत के साथ-साथ तरक्की की भी एक बड़ी सौगात साबित होने वाला है।

रोज़गार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर

इस बड़े अस्पताल के बनने से Nagpur की आमदनी और रोज़गार पर बहुत अच्छा असर पड़ने वाला है। साफ तौर पर कहा जाए तो इससे शहर के हजारों लोगों को काम मिलने वाला है। अंदाज़ा है कि करीब 1500 से 1800 लोगों को सीधे नौकरी मिलेगी। इसमें डॉक्टर, नर्स, लैब टेक्नीशियन, मशीन चलाने वाले स्टाफ, ऑफिस में काम करने वाले लोग और दूसरे हेल्पर सभी शामिल होंगे।

इसके अलावा, बहुत से लोगों को अप्रत्यक्ष तौर पर भी रोज़गार मिलेगा। जैसे दवाइयों की सप्लाई करने वाले, सामान लाने-ले जाने वाले लोग, खाने-पीने की व्यवस्था करने वाले, सफाईकर्मी, सिक्योरिटी गार्ड, ड्राइवर और ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोग। यानी एक अस्पताल बनने से उसके आसपास भी बहुत से छोटे-बड़े काम शुरू हो जाएंगे, जिससे कई घरों का चूल्हा जलेगा।

इससे Nagpur में बेरोज़गारी कम होगी और छोटे दुकानदारों, होटलों, मेडिकल स्टोर्स और दूसरे कारोबारियों को भी फायदा मिलेगा। कुल मिलाकर, यह प्रोजेक्ट शहर की अर्थव्यवस्था को नई ताक़त और नया सहारा देने वाला है।

अगर बात करें CARE Group की, तो यह नाम देश के हेल्थ सेक्टर में बहुत भरोसेमंद माना जाता है। इस ग्रुप की शुरुआत 1997 में कुछ जाने-माने दिल के डॉक्टरों ने की थी, और आज यह पूरे भारत में अपनी अच्छी पहचान बना चुका है।

आज CARE Group देश के 7 राज्यों में 16 बड़े अस्पताल चला रहा है, जिनमें 3000 से ज्यादा बेड हैं। यहां हर तरह का आधुनिक इलाज, नई टेक्नोलॉजी और अनुभवी डॉक्टरों की टीम मौजूद रहती है।

नागपुर जैसे शहर में CARE Group का आना मतलब यहां के लोगों को अब बड़े शहरों जैसा इलाज अपने ही शहर में मिलने लगेगा। लोगों को मुंबई, दिल्ली या हैदराबाद भागने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यहीं, अपने घर के पास, उन्हें बेहतर इलाज और अच्छी सुविधाएं मिलेंगी।

कुल मिलाकर, यह अस्पताल न सिर्फ रोज़गार और कारोबार बढ़ाएगा, बल्कि नागपुर को दुनिया-स्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं के करीब भी ले जाएगा — जो शहर के लिए एक बड़ी कामयाबी और फख्र की बात है।

Nagpur के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार

Nagpur, जो मध्य भारत का एक बड़ा और अहम शहर माना जाता है, यहां पहले से ही कई अस्पताल और इलाज की सुविधाएं मौजूद हैं। लेकिन इसके बावजूद, अब तक यहां बड़ी और आधुनिक सुपर-स्पेशलिटी सुविधाओं की कमी महसूस की जा रही थी। लोगों को गंभीर बीमारी या बड़े ऑपरेशन के लिए अक्सर बाहर के शहरों — जैसे मुंबई, पुणे या हैदराबाद — जाना पड़ता था।

अब इस नए अस्पताल के बनने से लोगों की यह परेशानी काफी हद तक खत्म हो जाएगी। यहां उन्हें दिल, दिमाग, किडनी, कैंसर, हड्डी और दूसरी गंभीर बीमारियों का इलाज अपने ही शहर में मिल सकेगा। इससे नागपुर के लोगों को बहुत बड़ा सुकून मिलेगा।

यह पहल सिर्फ शहर के लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि आस-पास के गांवों और छोटे कस्बों में रहने वाले लोगों के लिए भी एक बड़ी राहत साबित होगी। अब उन्हें अच्छे इलाज के लिए दूर-दराज भटकना नहीं पड़ेगा। पास में ही उन्हें बेहतर डॉक्टर, मशीनें और इलाज की सुविधा मिल जाएगी।

इससे लोगों का वक़्त भी बचेगा और पैसा भी। बार-बार बाहर जाने, रहने और सफर पर खर्च करने की मजबूरी खत्म होगी। गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए यह बहुत बड़ी मदद होगी।

अगर बात करें इस प्रोजेक्ट की टाइमिंग की, तो इसे पूरा होने में करीब 3 साल का वक्त लगेगा। यानी अगर सब कुछ सही तरह से चलता रहा, तो 2029 तक यह अस्पताल पूरी तरह से शुरू हो सकता है।

उसके बाद Nagpur में एक ऐसा मेडिकल सेंटर होगा, जहां लोग भरोसे और इत्मीनान के साथ अपना इलाज करवा सकेंगे। कुल मिलाकर, यह अस्पताल आने वाले वक्त में नागपुर और पूरे विदर्भ इलाके के लिए सेहत, राहत और तरक्की की एक नई मिसाल बनने वाला है।

क्यों यह परियोजना माइलस्टोन है?

यह कदम सिर्फ इमारत बनाने या पैसा लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह Nagpur और पूरे विदर्भ इलाके में सेहत की दुनिया में एक बड़ा बदलाव लेकर आने वाला है। यह एक ऐसा फैसला है, जो आने वाले सालों में लाखों लोगों की ज़िंदगी को बेहतर बना सकता है।

इस अस्पताल के बनने से सबसे पहले तो इलाज की क्वालिटी और सुविधाएं और ज्यादा अच्छी होंगी। लोगों को अब बड़े और खास इलाज के लिए बाहर के शहरों में भागना नहीं पड़ेगा। दिल, दिमाग, कैंसर, किडनी जैसे गंभीर इलाज अब यहीं, अपने शहर में मिल सकेंगे।

दूसरी बड़ी बात यह है कि इससे रोज़गार के नए मौके पैदा होंगे। हजारों लोगों को सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से काम मिलेगा, जिससे कई घरों की रोज़ी-रोटी चलेगी और शहर की तरक्की होगी।

इसके साथ ही, यह प्रोजेक्ट सरकार और प्राइवेट कंपनी के बीच मिलकर काम करने का एक अच्छा उदाहरण भी बनेगा। यानी निजी और सरकारी साझेदारी से कैसे जनता को फायदा पहुंचाया जा सकता है, इसकी एक मिसाल यह अस्पताल बनेगा।

इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि स्थानीय लोगों की ज़िंदगी और सेहत दोनों बेहतर होंगी। जब अच्छा इलाज पास में मिलेगा, तो लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा और तनाव भी कम होगा। बीमार होने पर दूर जाने की मजबूरी खत्म होगी, और इलाज समय पर मिल सकेगा।

महा-मेट्रो द्वारा CARE Group को Letter of Acceptance देना दरअसल नागपुर के हेल्थ सेक्टर में एक नया मोड़ है। यह सिर्फ बेड बढ़ाने की योजना नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा मजबूत सिस्टम तैयार करेगा, जिसमें इलाज, जांच, दवाइयां, डॉक्टर और टेक्नोलॉजी — सब कुछ एक साथ बेहतरीन तरीके से काम करेगा।

आने वाले समय में इससे Nagpur और आसपास के इलाकों में मेडिकल सुविधाओं का चेहरा ही बदल जाएगा। लोग यहां इलाज के लिए आएंगे, और शहर की पहचान एक अच्छे मेडिकल हब के तौर पर बनेगी।

कुल मिलाकर, यह पहल महाराष्ट्र की तरक्की की राह में एक शानदार कदम है। यह दिखाता है कि सरकार और निजी कंपनियां मिलकर कैसे आम लोगों के लिए बेहतर भविष्य बना सकती हैं। आने वाले सालों में यह परियोजना करोड़ों लोगों की सेहत, राहत और खुशहाली का ज़रिया बनेगी — और नागपुर के लिए फख्र की बात साबित होगी।

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