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Exclusive Report: Maharashtra के Nagpur, मुंबई समेत 438 लोग Gulf में फंसे, Maharashtra सरकार का Action Plan तैयार

Exclusive Report: Maharashtra के Nagpur, मुंबई समेत 438 लोग Gulf में फंसे, Maharashtra सरकार का Action Plan तैयार

लगभग 438 Maharashtrians पश्चिम एशिया Gulf में फंसे

भारत और दुनिया के बीच जो मौजूदा तनाव का माहौल बना हुआ है, खासकर Gulf मुल्कों में जो हालात चल रहे हैं, उसका असर सीधे-सीधे Maharashtra के लोगों पर भी पड़ा है। बहुत से लोग जो काम, तालीम, कारोबार या सैर-सपाटे के लिए बाहर गए थे, वो अचानक वहीं फँस गए। खास तौर पर यूएई जैसे Gulf देशों में फ्लाइटें रद्द होने, एयरस्पेस बंद होने और सफ़र पर पाबंदियाँ लगने की वजह से हालात मुश्किल हो गए।

ताज़ा मालूमात के मुताबिक, Maharashtra सरकार और लोकल प्रशासन ने जो आंकड़े जारी किए हैं, उनके हिसाब से करीब 438 Maharashtra के लोग फिलहाल विदेशों में फँसे हुए हैं। ये लोग अलग-अलग शहरों से ताल्लुक रखते हैं और ज़्यादातर खाड़ी इलाक़ों में अटके हुए हैं।

शहरों के हिसाब से देखें तो:

कोल्हापुर से तकरीबन 115 लोग बाहर फँसे हुए हैं।

मुंबई से करीब 98 लोग अभी तक वापस नहीं आ पाए।

पुणे के लगभग 75 नागरिक वहीं रुके हुए हैं।

नाशिक, खासकर मालेगांव इलाके से, करीब 221 लोग फँसे बताए जा रहे हैं।
इसके अलावा जालगाँव, अहिल्यानगर और दूसरे जिलों के भी कुछ लोग इस मुश्किल हालात में घिरे हुए हैं।

इनमें हर तरह के लोग शामिल हैं — कोई सैर के लिए गया था, कोई पढ़ाई के सिलसिले में, कोई रोज़गार कमाने के लिए, तो कोई अपने रिश्तेदारों से मिलने। लेकिन अचानक हालात बदलने से सबको वहीं रुकना पड़ा। कई लोगों ने बताया कि फ्लाइट कैंसिल होने के बाद होटल का खर्च बढ़ गया, टिकट दोबारा बुक करना मुश्किल हो गया और घरवालों की फ़िक्र अलग सताने लगी।

हालाँकि इस मुश्किल दौर में थोड़ी राहत की खबर भी आई है। अब तक 164 महाराष्ट्र के लोग सुरक्षित वतन लौट चुके हैं। ये वापसी खास इंतज़ाम के तहत मुमकिन हो पाई। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की पहल पर दो स्पेशल फ्लाइट्स का इंतज़ाम किया गया, जिनके ज़रिये यूएई में फँसे महाराष्ट्र के नागरिकों को सुरक्षित मुंबई लाया गया।

इन 164 लोगों में बड़ी तादाद तलबा (छात्रों) और सैलानियों की थी। जानकारी के मुताबिक करीब 84 छात्र, जो पुणे के Indira School of Business Studies से ताल्लुक रखते हैं, वो भी इस स्पेशल फ्लाइट से वापस आए। इसके अलावा ठाणे, अहिल्यानगर, पुणे और आसपास के इलाकों के लोग भी इस राहत अभियान का हिस्सा बने।

जब ये लोग मुंबई एयरपोर्ट पर उतरे तो उनके चेहरे पर सुकून साफ़ झलक रहा था। कई परिवार वाले एयरपोर्ट पर अपने अपनों का इंतज़ार कर रहे थे। किसी माँ की आँखों में आँसू थे, तो कोई बच्चा अपने पिता से लिपट गया। ये लम्हा सिर्फ एक सफ़र की वापसी नहीं, बल्कि राहत और इत्मीनान का एहसास था।

फिलहाल Maharashtra सरकार का कहना है कि बाकी फँसे हुए लोगों को भी जल्द से जल्द सुरक्षित वापस लाने की कोशिशें जारी हैं। हेल्पलाइन नंबर और तालमेल के ज़रिये लगातार संपर्क किया जा रहा है, ताकि किसी को भी तन्हा या बेसहारा महसूस न हो।

Maharashtra सरकार का हेल्पलाइन और सहायता

मौजूदा हालात को देखते हुए Maharashtra सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। विदेशों, खासकर खाड़ी मुल्कों में फँसे अपने नागरिकों की मदद के लिए सरकार ने व्हाट्सऐप हेल्पलाइन शुरू की है। इसका मकसद यही है कि जो लोग बाहर मुश्किल हालात में घिरे हुए हैं, वो सीधे सरकार से संपर्क कर सकें और अपनी परेशानी बता सकें।

ये हेल्पलाइन खास तौर पर उन भारतीयों के लिए बनाई गई है जो यूएई, सऊदी अरब, ईरान और दूसरे खाड़ी देशों में फँसे हुए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय यानी CMO के मुताबिक, ये सेवा इसलिए शुरू की गई है ताकि कोई भी शख्स खुद को लाचार या बेखबर महसूस न करे।

अगर किसी को मदद की ज़रूरत है, या वो अपने घरवालों तक कोई पैगाम पहुँचाना चाहता है, या उसे सुरक्षित रास्ते और वापसी की जानकारी चाहिए — तो वो इस हेल्पलाइन के ज़रिये सीधे बात कर सकता है। कई लोग ऐसे भी हैं जो सिर्फ ये जानना चाहते हैं कि आगे का प्लान क्या है, फ्लाइट कब मिलेगी, या हालात कब तक सामान्य होंगे। ऐसे सभी सवालों के जवाब देने और रहनुमाई करने के लिए ये इंतज़ाम किया गया है।

दूसरी तरफ, भारत सरकार ने भी बड़े स्तर पर कोशिशें तेज़ कर दी हैं। हाल के तनाव और उड़ानों में रुकावट के बावजूद केंद्र सरकार ने राहत अभियान चलाकर अब तक करीब 10,000 भारतीयों को खाड़ी देशों से वापस वतन लाया है। ये एक बड़ा ऑपरेशन रहा, जिसमें लगातार तालमेल और स्पेशल इंतज़ाम किए गए।

इनमें से लगभग 3,000 भारतीय सिर्फ ईरान से विशेष उड़ानों के ज़रिये वापस लाए गए। हालात को देखते हुए स्पेशल फ्लाइट्स का इंतज़ाम करना आसान नहीं था, लेकिन सरकार ने कोशिश जारी रखी और हजारों लोगों को सुरक्षित घर पहुँचाया।

ये आंकड़े सिर्फ Maharashtra के लोगों के नहीं हैं, बल्कि पूरे देश के नागरिकों को मिलाकर हैं। लेकिन इसमें महाराष्ट्र के लोग भी बड़ी तादाद में शामिल हैं। यानी राज्य के परिवार भी इस राहत अभियान का अहम हिस्सा रहे हैं।

कुल मिलाकर हालात भले ही चुनौतीपूर्ण हों, लेकिन सरकार की तरफ से कोशिशों में कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही। हेल्पलाइन, स्पेशल फ्लाइट्स और लगातार संपर्क — इन सबके ज़रिये यही कोशिश है कि हर फँसा हुआ शख्स जल्द से जल्द अपने घर, अपने अपनों के पास सुरक्षित लौट सके।

शहरों के हिसाब से स्थिति

Maharashtra के अलग-अलग शहरों के लोग इस वक्त अलग-अलग मुल्कों में फँसे हुए हैं। हालात ऐसे बने कि जो लोग काम, कारोबार, तालीम या सैर-सपाटे के लिए खाड़ी देशों में गए थे, वो अचानक वहीं रुक गए। उड़ानों के रद्द होने, एयरस्पेस बंद होने और सियासी तनाव की वजह से उनकी वापसी मुश्किल हो गई है।

अगर शहरों के हिसाब से देखें तो तस्वीर कुछ यूँ है —

कोल्हापुर से तकरीबन 115 लोग अलग-अलग खाड़ी देशों में फँसे बताए जा रहे हैं। इनमें कुछ लोग नौकरी के सिलसिले में गए थे, तो कुछ रिश्तेदारों से मिलने या घूमने।

मुंबई से करीब 98 नागरिक अभी तक बाहर ही अटके हुए हैं। मुंबई जैसे बड़े शहर से लोगों का विदेश जाना आम बात है, इसलिए यहाँ की तादाद भी कम नहीं है। कई परिवार अपने अपनों की सलामती की खबर का इंतज़ार कर रहे हैं।

पुणे से लगभग 75 लोग फिलहाल वापसी नहीं कर पाए हैं। इनमें छात्र भी शामिल हैं और कुछ बिज़नेस ट्रिप पर गए लोग भी। अचानक हालात बिगड़ने से उनकी टिकटें कैंसिल हो गईं और उन्हें वहीं रुकना पड़ा।

नाशिक, खासकर मालेगांव इलाके से, करीब 221 लोग अब भी लौट नहीं सके हैं। यहाँ से बड़ी संख्या में लोग रोज़गार और व्यापार के लिए खाड़ी देशों का रुख करते हैं, इसलिए इस इलाके के परिवारों में बेचैनी ज्यादा देखी जा रही है।

अब बात करें नागपुर की, तो सरकारी और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लगभग 43 नागपुर के लोग इस वक्त सऊदी अरब में फँसे हुए हैं। ये वही लोग हैं जो सफ़र, टूरिज़्म या बिज़नेस के मकसद से खाड़ी इलाके में गए थे, लेकिन अचानक हालात बिगड़ने के बाद उनकी वापसी मुमकिन नहीं हो पाई।

इन तमाम लोगों की परेशानी सिर्फ टिकट या सफ़र तक सीमित नहीं है, बल्कि घर से दूर होने की फिक्र, खर्चों का बोझ और अपनों की चिंता भी उन्हें परेशान कर रही है। परिवार वाले यहाँ दुआ कर रहे हैं कि जल्द से जल्द हालात सुधरें और सब सही सलामत अपने वतन लौट आएँ।

उनकी परेशानियाँ और चुनौतियाँ

विदेशों में फँसे Maharashtra के लोग इस वक्त कई तरह की परेशानियों से गुज़र रहे हैं। हालात जितने बाहर से आसान लगते हैं, अंदर से उतने ही मुश्किल हैं। सबसे बड़ी दिक्कत तो ये है कि उनकी फ्लाइटें रद्द हो गईं या बार-बार टलती जा रही हैं। किसी की टिकट कन्फर्म थी, लेकिन अचानक मैसेज आया कि उड़ान कैंसिल हो गई। कुछ लोगों की फ्लाइट घंटों लेट हो रही है, तो कहीं एयरस्पेस बंद होने की वजह से रास्ता ही बदल दिया गया है।

इसके अलावा सबसे भारी पड़ रही है घर से दूरी। अपने मुल्क से दूर, अपने शहर से दूर, और सबसे बढ़कर अपने घरवालों से दूर रहना आसान नहीं होता। यहाँ परिवार वाले बेचैन हैं, तो उधर फँसे लोग भी हर वक्त फिक्र में डूबे रहते हैं। फोन पर बात तो हो जाती है, मगर दिल का सुकून नहीं मिलता।

एक और बड़ी परेशानी है होटल और रहने का बढ़ता हुआ खर्च। कई लोग कुछ दिनों के सफर पर गए थे, लेकिन अब उन्हें हफ्तों रुकना पड़ रहा है। होटल का बिल बढ़ रहा है, खाने-पीने का खर्च अलग है, और कब तक रुकना पड़ेगा इसकी कोई साफ़ तारीख नहीं। ऊपर से राहत या वापसी का पक्का रास्ता नज़र नहीं आता, तो दिल में बेचैनी और बढ़ जाती है।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव, लड़ाई जैसे हालात और उड़ानों के लगातार रद्द होने की वजह से पिछले कुछ दिनों में हालात और पेचीदा हो गए हैं। एयरस्पेस बंद होने से कई अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स का रूट बदल गया है या पूरी तरह रोक दिया गया है। ऐसे में यात्रियों को हर दिन नई खबर का इंतज़ार रहता है — शायद आज कोई अच्छी खबर मिल जाए।

हालाँकि इन सब मुश्किलों के बीच Maharashtra सरकार भी हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठी है। फँसे हुए नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। सबसे पहले तो स्पेशल फ्लाइट्स का इंतज़ाम किया जा रहा है, ताकि जिन इलाकों से सामान्य उड़ानें नहीं चल पा रहीं, वहाँ से भी लोगों को निकाला जा सके।

इसके साथ ही व्हाट्सऐप हेल्पलाइन सेवा शुरू की गई है, जिससे लोग सीधे सरकार से संपर्क कर सकें। कोई मदद माँगना चाहता है, कोई अपने हालात बताना चाहता है, या किसी को वापसी के रास्ते की जानकारी चाहिए — तो इस हेल्पलाइन के ज़रिये वो अपनी बात रख सकता है।

केंद्र और Maharashtra राज्य सरकार मिलकर तालमेल बना रही हैं। यानी सिर्फ Maharashtra सरकार ही नहीं, बल्कि दिल्ली में बैठे अधिकारी भी हालात पर नज़र रखे हुए हैं। दोनों तरफ से कोऑर्डिनेशन किया जा रहा है, ताकि राहत अभियान में देरी न हो।

इसके अलावा स्थानीय मराठी संगठनों और समाजसेवी ग्रुप्स से भी संपर्क किया जा रहा है, ताकि ज़मीन पर फँसे लोगों को तात्कालिक मदद मिल सके — चाहे वो रहने की व्यवस्था हो या ज़रूरी जानकारी।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे खुद इस पूरे मसले पर नजर बनाए हुए हैं। बताया जा रहा है कि वो लगातार अधिकारियों के साथ मीटिंग कर रहे हैं और हालात की समीक्षा कर रहे हैं, ताकि जल्द से जल्द कोई ठोस हल निकल सके।

परिवारों की प्रतिक्रिया

Gulf में फँसे लोगों के घरवालों की हालत इस वक्त बयान से बाहर है। माँ-बाप, भाई-बहन, बीवी-बच्चे — सबके दिल में एक ही फिक्र है कि उनका अपना कब सलामत घर लौटेगा। कई परिवारों का कहना है कि हर रोज़ वो खबरों पर नज़र टिकाए बैठे रहते हैं। फोन की घंटी बजती है तो दिल की धड़कन तेज़ हो जाती है, इस उम्मीद में कि शायद अब वापसी की कोई खुशखबरी मिले।

कुछ खुशनसीब लोग स्पेशल फ्लाइट्स के ज़रिये वापस अपने वतन आ चुके हैं। जब वो एयरपोर्ट पर उतरे, तो परिवार वालों ने राहत की साँस ली। किसी ने अपने बेटे को गले लगाया, किसी ने अपने शौहर को देखकर आँखों से आँसू बहा दिए। वो लम्हा सिर्फ एक सफर की वापसी नहीं था, बल्कि डर और बेचैनी के खत्म होने का एहसास था।

लेकिन अभी भी कई परिवार ऐसे हैं जिनका इंतज़ार जारी है। वो रोज़ दुआ कर रहे हैं, सब्र के साथ उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जल्द ही उनके अपने भी सही-सलामत घर लौट आएँगे।

ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक अब तक लगभग 438 Maharashtra के लोग अलग-अलग खाड़ी मुल्कों में फँसे हुए हैं। इनमें छात्र भी हैं, सैलानी भी, रोज़गार के लिए गए कामगार भी और अपने रिश्तेदारों से मिलने गए लोग भी। अच्छी बात ये है कि इनमें से कई लोगों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है, लेकिन बाकी की वापसी के लिए कोशिशें अभी भी जारी हैं।

Maharashtra सरकार की तरफ से भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सिर्फ वापसी का इंतज़ाम ही नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा और हौसले को बनाए रखने का भी ख्याल रखा जा रहा है। हेल्पलाइन, स्पेशल फ्लाइट्स और लगातार संपर्क के ज़रिये ये यकीन दिलाने की कोशिश हो रही है कि कोई भी अकेला नहीं है।

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