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Income Tax Bill 2025: पुराना कानून, नए बदलाव और Withdrawal

Income Tax Bill 2025: पुराना कानून, नए बदलाव और वापसी

Income Tax Bill 2025 के लिए पहले जाने इनकम टैक्स (आयकर) क्या है?

इनकम टैक्स, जिसे हिंदी में आयकर कहा जाता है, आपकी कमाई का वह हिस्सा होता है जो सरकार को दिया जाता है। यह पैसा देश के विकास, नई सड़कों और पुलों के निर्माण, बिजली-पानी जैसी सुविधाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, सामाजिक योजनाओं और राज्य सरकार की ज़रूरतों पर खर्च किया जाता है।

भारत में आयकर से जुड़े नियम Income-Tax Act, 1961 के तहत आते हैं। यह कानून कई सालों से लागू है और समय-समय पर इसमें बदलाव और सुधार किए जाते रहे हैं, ताकि यह बदलते हालात और लोगों की ज़रूरतों के हिसाब से सही तरीके से काम कर सके।

Income Tax Bill 2025 क्या है?

13 फरवरी 2025 को संसद (लोकसभा) में इनकम टैक्स बिल 2025 को भारत की वित्त मंत्री Nirmala Sitaraman ने पेश किया। उन्होंने अपने भाषण में कहा कि इस बिल का उद्देश्य 1961 के पुराने और जटिल आयकर कानून की जगह एक आधुनिक, सरल और पारदर्शी कानून लाना है|

जो बदलते समय और अर्थव्यवस्था की ज़रूरतों के अनुरूप हो। उन्होंने यह भी बताया कि नए प्रावधान आम करदाताओं को राहत देंगे, टैक्स प्रक्रिया को आसान बनाएंगे और डिजिटल युग के हिसाब से सिस्टम को और मज़बूत करेंगे।

इसमें खास ध्यान इस बात पर दिया गया था कि भाषा सीधी-सादी और समझने में आसान हो, बेकार, उलझे हुए और पुराने नियम हटा दिए जाएं, और टैक्स का कानून इतना सरल बनाया जाए कि आम करदाता भी बिना किसी दिक्कत के इसे समझ सके और पालन कर सके।

Income Tax Bill 2025 के बड़े बदलाव और नए सुझाव

अध्यायों की संख्या मौजूदा 52 से घटाकर 23 की गई, जिससे कानूनी जटिलता में कमी आई ।”बेकार, पुराने और नीरस प्रावधानों को हटाकर अनेक सूत्रों और सारणियों को जोड़ा गया, जिससे विषय और भी स्पष्ट हो गया।”

डिजिटल पहुँच का दायरा बढ़ाते हुए, कर अधिकारियों को अब टैक्सदाताओं के ईमेल, ऑनलाइन ट्रेडिंग खाते, सोशल मीडिया और क्लाउड सर्वर तक पहुँच मिल गई | यह बदलाव डेटा-गोपनीयता पर गंभीर प्रश्न उठाता है।

कर की दरें और स्लैब वैसे ही रहे; वेतन पाने वालों और व्यापारियों पर पुरानी दरें ही लागू रहीं। बिल 1 अप्रैल 2026 से लागू होना था, ताकि करदाता पहले से नए नियमों के लिए तैयार हो सकें।

Income Tax Bill 2025 वापस लिए जाने के कारण

8 अगस्त, 2025 को केंद्र सरकार ने इस बिल को वापस ले लिया | सरकार के द्वारा इसका मुख्य कारण तकनीकी गलती, सिस्टम में सुधार की ज़रूरत और नए नियमों के अनुसार ढलने की आवश्यकता बताया गया।

प्रमुख समस्याएँ जिनकी वजह से बिल वापस हुआ:

संपत्ति और वेतन से जुड़े कुछ नियम (जैसे क्लॉज 19-22) में बातें साफ़ नहीं थीं और कुछ नियम आपस में उलझे हुए थे, जिससे भ्रम पैदा हो सकता था।

कुछ प्रावधान, जैसे Clause 263(1)(a)(ix) को हटाने के बाद किए गए बदलाव, आम करदाताओं के लिए परेशानी ला सकते थे। इस बात की ओर चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और वकीलों के संगठनों ने साफ़ तौर पर ध्यान दिलाया।

सेलेक्ट कमेटी (अध्यक्ष: श्री बैजयंता पांडा) ने इस बिल में सुधार के लिए कुल 285 सुझाव दिए। इन सुझावों में नियमों को और साफ़ करना, कर में छूट देना, और जुर्माने के नियमों को नरम करना जैसी बातें शामिल थीं।

एक अहम सुझाव यह था कि Section 87A के तहत मिलने वाली टैक्स रिबेट की सीमा ₹7 लाख से बढ़ाकर ₹12 लाख कर दी जाए, और अधिकतम रिबेट ₹25,000 से बढ़ाकर ₹60,000 कर दी जाए, ताकि ज्यादा लोग इस लाभ का फायदा उठा सकें।ऐसे ईमानदार करदाताओं पर जुर्माना न लगाना, जिन्होंने जानबूझकर कोई गलती नहीं की है, भी राहत भरे सुझावों में से एक था।

इसके अलावा, संपत्ति से जुड़े मामलों, TDS रिफंड पाने की प्रक्रिया, और दान पर मिलने वाली छूट जैसी सुविधाओं में सुधार के सुझाव भी शामिल थे, ताकि करदाताओं का काम आसान और पारदर्शी हो सके।

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