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Big Political Move: Nitish Kumar को Bharat Ratna देने की मांग, Jitan Ram Manjhi का पीएम मोदी से Strong Appeal

Big Political Move: Nitish Kumar को Bharat Ratna देने की मांग, Jitan Ram Manjhi का पीएम मोदी से Strong Appeal

Jitan Ram Manjhi का बयान और सियासी मायने

बिहार की सियासत एक बार फिर पूरे देश की नज़र में आ गई है। इस बार चर्चा का मुद्दा मुख्यमंत्री Nitish Kumar को देश का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ देने की मांग है। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के सरगना और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने खुलकर यह बात कही है और सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि नीतीश कुमार को यह सम्मान दिया जाना चाहिए।

Jitan Ram Manjhi का कहना है कि Nitish Kumar का सियासी सफर कोई छोटा-मोटा नहीं रहा है। उन्होंने दशकों तक जनता की खिदमत की है और खासकर बिहार के लिए जो काम किए हैं, वे काबिले-तारीफ हैं। मांझी के मुताबिक, नीतीश कुमार सिर्फ एक मुख्यमंत्री भर नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक इंसाफ, सुशासन और सबको साथ लेकर चलने वाली सियासत की मिसाल बन चुके हैं।

मांझी ने अपने बयान में यह भी कहा कि एक वक्त था जब बिहार को लोग “बीमारू राज्य” कहकर पुकारते थे। लेकिन नीतीश कुमार के नेतृत्व में वही बिहार धीरे-धीरे अपनी पहचान बदलने में कामयाब हुआ।

शिक्षा के मैदान में सुधार हुए, स्कूल जाने वाली लड़कियों के लिए साइकिल और पोशाक जैसी योजनाएं आईं। स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतरी हुई, सड़कें बनीं, गांव-गांव तक बिजली पहुंची और सबसे अहम बात यह कि कानून-व्यवस्था पर सख्ती हुई।

Jitan Ram Manjhi का मानना है कि ऐसे नेता को भारत रत्न जैसे बड़े सम्मान से नवाज़ा जाना चाहिए, ताकि पूरे मुल्क में अच्छी हुकूमत और सुशासन की सियासत को बढ़ावा मिले। उनका कहना है कि अगर ऐसे काम करने वालों को सम्मान मिलेगा, तो आने वाली नस्लें भी ईमानदारी और मेहनत से काम करने की राह चुनेंगी।

सियासी जानकारों की मानें तो मांझी की यह मांग सिर्फ सम्मान की बात नहीं है। इसके पीछे गहरे राजनीतिक मायने भी छुपे हुए हैं। एक तरफ यह कोशिश है कि नीतीश कुमार का कद बिहार से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर और बुलंद किया जाए। वहीं दूसरी तरफ एनडीए के अंदर यह पैगाम भी दिया जा रहा है कि सहयोगी दल नीतीश कुमार की लीडरशिप और उनके कामों को दिल से कबूल करते हैं।

कुल मिलाकर कहा जाए तो जीतन राम मांझी का यह बयान बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर रहा है। अब देखना यह है कि केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मांग पर क्या रुख अपनाते हैं। लेकिन इतना तो तय है कि नीतीश कुमार एक बार फिर चर्चा के मरकज़ में हैं और उनकी सियासत, उनके काम और उनके योगदान पर पूरे देश में बहस तेज़ हो गई है।

Nitish Kumar का राजनीतिक सफर

Nitish Kumar का सियासी सफर कोई एक-दो साल का नहीं, बल्कि करीब पचास सालों में फैला हुआ है। उन्होंने अपनी राजनीति की शुरुआत छात्र जीवन से की थी और वहीं से धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए लोकसभा पहुंचे, फिर राज्यसभा का रास्ता तय किया और आखिरकार बिहार की सत्ता की कमान संभाली। यह सफर आसान नहीं था, लेकिन लगातार मेहनत और तजुर्बे ने उन्हें एक मजबूत नेता बना दिया।

Nitish Kumar की अगुवाई में बिहार ने कई मोर्चों पर बड़ा बदलाव देखा। सबसे पहले बात करें कानून-व्यवस्था की, तो साल 2005 के बाद अपराध पर सख्ती की गई। पुलिस और प्रशासन को मजबूत किया गया, जिससे राज्य की बिगड़ी हुई छवि धीरे-धीरे सुधरने लगी और लोगों में भरोसा पैदा हुआ।

महिला सशक्तिकरण के मामले में भी नीतीश कुमार ने अहम कदम उठाए। पंचायतों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण देकर उन्होंने यह साबित किया कि औरतें भी हुकूमत और फैसलों में बराबरी की हकदार हैं। इससे गांव-देहात की महिलाओं को नई पहचान और हौसला मिला।

तालीम और सेहत के मैदान में भी उनकी सरकार ने कई काम किए। स्कूल जाने वाली बच्चियों के लिए साइकिल योजना और पोशाक योजना शुरू की गई, ताकि पढ़ाई बीच में न छूटे। अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं के ढांचे को भी पहले से बेहतर बनाया गया, जिससे आम आदमी को राहत मिली।

अगर इन्फ्रास्ट्रक्चर की बात करें, तो सड़कों का जाल बिछाया गया, पुल बने और बिजली गांव-गांव तक पहुंचाई गई। इन सब बदलावों ने बिहार की तस्वीर को काफी हद तक बदल दिया।

यही वजह है कि Nitish Kumar को लोग अब सिर्फ एक मुख्यमंत्री के तौर पर नहीं देखते, बल्कि उन्हें प्यार और एहतराम से “सुशासन बाबू” कहकर पुकारते हैं। उनके कामों ने उन्हें बिहार की सियासत में एक खास मुकाम दिलाया है।

भारत रत्न: सम्मान और परंपरा

भारत रत्न मुल्क का सबसे बड़ा और सबसे इज़्ज़तदार नागरिक सम्मान माना जाता है। यह सम्मान उन शख्सियतों को दिया जाता है, जिन्होंने अपने काम और खिदमत से देश का नाम रोशन किया हो या समाज के लिए कोई असाधारण योगदान दिया हो। अब तक यह सम्मान राजनीति ही नहीं, बल्कि कला, विज्ञान, खेल और सामाजिक सेवा जैसे कई अलग-अलग मैदानों में बेहतरीन काम करने वालों को मिल चुका है।

अगर सियासत की बात करें, तो कुछ बड़े और कद्दावर नेताओं के नाम इस फेहरिस्त में शामिल हैं। पंडित जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी और प्रणब मुखर्जी जैसे नेताओं को भारत रत्न से नवाज़ा जा चुका है। इन नेताओं ने अपने दौर में देश की दिशा और दशा तय करने में अहम भूमिका निभाई।

अब ऐसे में जब Nitish Kumar के लिए भारत रत्न की मांग उठी है, तो यह अपने आप में एक नई बहस को जन्म दे रही है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या किसी ऐसे नेता को, जो अभी ज़िंदा हैं और पूरी तरह से सियासत में सक्रिय हैं, भारत रत्न दिया जाना चाहिए या नहीं। कुछ लोग इसे उनके लंबे अनुभव और कामों की सही कद्र मानते हैं, तो कुछ का कहना है कि इस तरह के सम्मान पर फैसला बहुत सोच-समझकर और राजनीति से ऊपर उठकर होना चाहिए।

कुल मिलाकर, Nitish Kumar के नाम को भारत रत्न की इस इज़्ज़तदार सूची में शामिल करने की मांग ने मुल्क की सियासत में एक नई चर्चा और सोच को जन्म दे दिया है, जो आने वाले वक्त में और तेज़ हो सकती है।

समर्थन और विरोध की आवाज़ें

Jitan Ram Manjhi की इस अपील के बाद बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे मुल्क की सियासत में तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। कहीं इस मांग का जोरदार समर्थन हो रहा है, तो कहीं इस पर सवाल भी उठाए जा रहे हैं।

जो लोग समर्थन में बोल रहे हैं, उनका कहना है कि नीतीश कुमार ने समाज में इंसाफ और तरक्की दोनों के बीच एक बेहतर संतुलन कायम किया है। उनके मुताबिक, बिहार में विकास के साथ-साथ पिछड़े, गरीब और कमजोर तबकों को भी आगे बढ़ाने की कोशिश की गई, और यही वजह है कि उनके काम को अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलनी चाहिए। समर्थकों का मानना है कि अगर ऐसे कामों को सम्मान मिलेगा, तो अच्छी सियासत को बढ़ावा मिलेगा।

वहीं विरोधी खेमे की राय इससे अलग है। उनका तर्क है कि भारत रत्न जैसे बड़े सम्मान को सियासत से ऊपर रखकर देखा जाना चाहिए। विरोधियों का कहना है कि किसी ऐसे नेता को, जो अभी पूरी तरह से राजनीति में सक्रिय है, यह सम्मान देना विवाद को जन्म दे सकता है और इसकी गरिमा पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।

कुछ विपक्षी नेताओं ने इस मांग को सीधा-सीधा सियासी स्टंट करार दिया है। उनका कहना है कि ऐसे मुद्दों को चुनावी या राजनीतिक फायदे के लिए उछालना ठीक नहीं है। हालांकि, विपक्ष के भीतर भी कुछ आवाज़ें ऐसी हैं, जो यह मानती हैं कि नीतीश कुमार के योगदान का आकलन बिना किसी भेदभाव के, पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ होना चाहिए।

कुल मिलाकर, Jitan Ram Manjhi की इस अपील ने सियासी माहौल में हलचल मचा दी है और यह साफ है कि नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग आने वाले दिनों में बहस का बड़ा मुद्दा बनी रहेगी।

प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका

भारत रत्न देने का जो पूरा तरीका होता है, उसमें आख़िरी फैसला केंद्र सरकार और राष्ट्रपति के स्तर पर लिया जाता है। इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका को भी काफी अहम माना जा रहा है।

अभी तक प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ़ से इस मांग पर कोई साफ़ और आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सियासी गलियारों में चर्चा ज़ोरों पर है। लोग यह कयास लगा रहे हैं कि क्या केंद्र सरकार इस मांग पर गंभीरता से गौर करेगी या फिर इसे फिलहाल एक सियासी बयान मानकर नज़रअंदाज़ कर देगी।

इस मांग का असर सिर्फ दिल्ली तक ही सीमित नहीं है, बल्कि बिहार की सियासत पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ सकता है। अगर इस मुद्दे को तवज्जो मिलती है, तो इससे नीतीश कुमार की राष्ट्रीय पहचान और स्वीकार्यता और मज़बूत हो सकती है। साथ ही, एनडीए के भीतर यह पैगाम भी जा सकता है कि गठबंधन में एकजुटता है और सहयोगी दल एक-दूसरे के नेतृत्व और काम की कद्र करते हैं।

दूसरी तरफ़, विपक्ष के लिए यह मामला एक नई चुनौती बन सकता है। Nitish Kumar के विकास मॉडल, सुशासन और सामाजिक सुधारों पर एक बार फिर बहस तेज़ हो सकती है, जिससे सियासी माहौल गर्माने के पूरे आसार हैं।

कुल मिलाकर, Jitan Ram Manjhi की तरफ़ से नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग सिर्फ एक सम्मान की गुज़ारिश नहीं है, बल्कि यह बिहार से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक एक बड़ा सियासी संदेश देती है। यह मांग Nitish Kumar के लंबे राजनीतिक सफर, उनके सुशासन के तरीके और समाज में किए गए सुधारों को एक बार फिर चर्चा के मरकज़ में ले आई है।

अब सबकी नज़र इस बात पर टिकी है कि केंद्र सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है। क्या यह मांग आगे चलकर किसी औपचारिक प्रस्ताव की शक्ल लेगी या फिर सिर्फ सियासी बहस तक ही सीमित रह जाएगी यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। मगर इतना तय है कि इस बयान ने बिहार की राजनीति में नई सरगर्मी पैदा कर दी है और नीतीश कुमार एक बार फिर राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में आ गए हैं।

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