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Maharashtra Municipal corporation election result 2026: एक ऐतिहासिक जनादेश
15 जनवरी 2026 को Maharashtra Municipal corporation election और महानगरपालिकाओं के चुनाव के लिए ज़ोरदार मतदान हुआ। राज्य की कुल 29 महानगरपालिका और नगर निगमों में लोगों ने बढ़-चढ़कर वोट डाले। इसके अगले ही दिन यानी 16 जनवरी 2026 को मतगणना हुई और Maharashtra Municipal corporation election result 2026 सामने आए, जिनसे साफ हो गया कि जनता का मूड किस तरफ है।
इस चुनाव में कुल 893 वार्डों के लिए 2,869 सीटों पर मुकाबला हुआ। खास बात यह रही कि इन सीटों के लिए करीब 15,931 उम्मीदवार मैदान में थे। कहीं सत्ताधारी दलों के दिग्गज नेता थे तो कहीं नए चेहरे भी अपनी किस्मत आज़मा रहे थे। यही वजह है कि इस चुनाव को लेकर पूरे महाराष्ट्र में सियासी गर्मी देखने को मिली।
Maharashtra की राजनीति में स्थानीय निकायों के चुनाव सिर्फ़ पार्षद चुनने तक सीमित नहीं होते, बल्कि इन्हें जनता का असली और सीधा जनादेश माना जाता है। लोग अपने रोज़मर्रा के मसलों जैसे सड़क, पानी, सफ़ाई, ट्रैफिक और बिजली के आधार पर वोट देते हैं।
इसी कारण इन चुनावों को बड़े दलों के लिए लिटमस टेस्ट माना जाता है। इस बार भी भाजपा (BJP), शिवसेना के दोनों गुट, कांग्रेस, NCP और AIMIM जैसे बड़े सियासी दल आमने-सामने थे और मुकाबला काफ़ी दिलचस्प रहा।
अगर मुख्य नतीजों और पार्टी प्रदर्शन की बात करें, तो तस्वीर बिल्कुल साफ नज़र आती है। इस बार भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति ने ज़बरदस्त प्रदर्शन किया है। बड़े पैमाने पर यही देखने को मिला कि महायुति गठबंधन ने 29 में से ज़्यादातर नगर निगमों में बाज़ी मार ली। शुरुआती रुझानों से लेकर अंतिम नतीजों तक महायुति का पलड़ा भारी ही रहा।
भाजपा-नेतृत्व वाली महायुति करीब 25 नगर निगमों में जीत की ओर मज़बूती से बढ़ती दिखाई दी। मुंबई की बात करें तो बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC), जिसे लंबे समय से शिवसेना का गढ़ माना जाता रहा है, वहाँ भी इस बार महायुति बहुमत के आंकड़े से ऊपर जाती नज़र आई। यह नतीजा अपने आप में बहुत मायने रखता है, क्योंकि BMC को महाराष्ट्र की राजनीति का दिल कहा जाता है।
सिर्फ़ मुंबई ही नहीं, नवी मुंबई नगर निगम में भी भाजपा ने निर्णायक बढ़त बना ली। यहाँ पार्टी ने साफ कर दिया कि शहरी इलाकों में उसका संगठन मज़बूत है और वोटर उसके साथ खड़ा है। पुणे, नागपुर, ठाणे जैसे बड़े शहरों में भी महायुति का दबदबा साफ-साफ दिखाई दिया।
मुख्य नगर निगमों में महायुति की यह पकड़ इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि भाजपा और उसके सहयोगी शिवसेना के शिंदे गुट ने उन पारंपरिक महाराष्ट्रीय सियासी ताक़तों को सीधी चुनौती दी है, जो सालों से इन शहरों में मजबूत मानी जाती थीं। इस चुनाव ने यह भी दिखा दिया कि शहरी मतदाता अब सिर्फ़ नाम या विरासत के आधार पर नहीं, बल्कि काम और स्थिरता के नाम पर वोट दे रहा है।
कुल मिलाकर, महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव 2026 ने साफ संदेश दे दिया है शहरों की सियासत में हवा बदल रही है, और जनता ने इस बार खुलकर अपना फैसला सुनाया है।
Mumbai BMC election result 2026 — राजनीतिक बदलाव का प्रतीक
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में इस बार मुकाबला काफ़ी कड़ा और दिलचस्प देखने को मिला। कुल 227 सीटों के लिए हुई इस सियासी जंग में महायुति गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन किया है। शुरुआती रुझानों से ही यह साफ हो गया था कि भाजपा और शिंदे-शिवसेना का गठबंधन मज़बूत हालत में है। दोनों दलों ने मिलकर कई अहम वार्डों में जीत दर्ज की और बढ़त बनाए रखी।
वहीं दूसरी तरफ़ कांग्रेस को इस चुनाव में सिर्फ़ कुछ ही वार्डों तक सीमित सफलता मिल पाई। पार्टी जिन इलाकों में कभी मज़बूत मानी जाती थी, वहाँ भी उसे ज़्यादा समर्थन नहीं मिला। AIMIM ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हुए दो सीटों पर जीत हासिल की, जिससे यह साफ हो गया कि कुछ खास इलाकों में उसका आधार धीरे-धीरे मज़बूत हो रहा है।
BMC के ये नतीजे इसलिए भी इतिहासिक माने जा रहे हैं, क्योंकि बरसों से इस BMC पर ठाकरे गुट की मजबूत पकड़ मानी जाती रही है। लेकिन इस बार हालात बदले हुए नज़र आए और सत्ता के समीकरण पूरी तरह बदलते दिखाई दिए।
ठाणे नगर निगम
ठाणे नगर निगम में भी महायुति गठबंधन का दबदबा साफ देखने को मिला। यहाँ गठबंधन ने कुल 51 सीटों पर जीत दर्ज की। इनमें से शिंदे-शिवसेना 27 सीटों पर आगे रही, जबकि भाजपा ने 24 सीटें जीतकर अपनी ताक़त साबित की।
यह नतीजा इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि ठाणे को शिंदे शिवसेना का गढ़ समझा जाता है। अपने ही घरेलू इलाके में शानदार प्रदर्शन कर शिंदे गुट ने यह दिखा दिया कि ज़मीनी स्तर पर उसकी पकड़ अब भी मज़बूत है।
पनवेल नगर निगम
पनवेल नगर निगम के नतीजे तो और भी ज़्यादा चौंकाने वाले रहे। यहाँ भाजपा ने एकदम साफ और मजबूत बहुमत हासिल करते हुए 46 सीटों पर जीत दर्ज की। बाकी सभी दल इस मुकाबले में काफ़ी पीछे रह गए।
पनवेल में भाजपा की यह जीत इस बात का साफ इशारा है कि स्थानीय लोगों के बीच पार्टी की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है और शहरी वोटर उसके विकास और संगठनात्मक मज़बूती से संतुष्ट नज़र आ रहा है।
लातूर नगर निगम
लातूर नगर निगम में माहौल थोड़ा अलग दिखाई दिया। यहाँ कांग्रेस ने 43 सीटों के साथ ज़बरदस्त जीत दर्ज की और साफ बहुमत हासिल किया। भाजपा इस नगर निगम में दूसरे नंबर पर रही।
लातूर के नतीजे यह दिखाते हैं कि महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में अब भी कांग्रेस की जमीनी पकड़ कायम है, और हर इलाके का सियासी मिज़ाज एक जैसा नहीं होता।
AIMIM की मजबूत मौजूदगी
अगर पूरे महाराष्ट्र की बात करें तो ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने इस बार सबका ध्यान खींचा है। पार्टी ने राज्य भर में करीब 95 सीटों पर जीत हासिल की है।
इन नतीजों से यह साफ हो गया है कि AIMIM अब सिर्फ़ सीमित इलाकों तक सिमटी पार्टी नहीं रही, बल्कि महाराष्ट्र के शहरी इलाकों में तेज़ी से उभरती एक सियासी ताक़त बनती जा रही है। आने वाले चुनावों में इसका असर और भी ज़्यादा देखने को मिल सकता है।

Maharashtra Municipal corporation election result 2026 सभी नगर निगमों का सीट-वार
Maharashtra Municipal corporation election result 2026 ने राज्य की सियासत की दिशा बिल्कुल साफ कर दी है। इन चुनावों ने यह बता दिया कि शहरी महाराष्ट्र में इस वक्त किसकी हवा चल रही है और जनता किस पर भरोसा जता रही है। राज्य के कुल 29 नगर निगमों में हुए इस बड़े चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति का दबदबा साफ-साफ दिखाई दिया।
हालाँकि, कुछ इलाकों में कांग्रेस और AIMIM ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई और यह दिखाया कि मुकाबला पूरी तरह एकतरफा नहीं रहा। फिर भी, कुल मिलाकर तस्वीर यही रही कि महायुति इस चुनाव की सबसे बड़ी विजेता बनकर उभरी।
- बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC – मुंबई)
Mumbai BMC Election, जिसे महाराष्ट्र की राजनीति का दिल कहा जाता है, इस बार सबसे ज़्यादा चर्चा में रही। यहाँ कुल 227 सीटों के लिए ज़बरदस्त मुकाबला हुआ।
नतीजों में सामने आया कि
भाजपा ने 89 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में अपनी जगह बनाई।
शिंदे-शिवसेना ने 29 सीटें हासिल कीं।
वहीं ठाकरे गुट (UBT) को 65 सीटों पर संतोष करना पड़ा।
कांग्रेस ने 24 सीटें जीतीं।
AIMIM को 8 सीटें,
MNS को 6 सीटें,
जबकि अन्य और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 6 सीटों पर जीत दर्ज की।
इन आंकड़ों से साफ हो गया कि महायुति (BJP + Shinde Sena) को BMC में स्पष्ट बहुमत मिला है। यह नतीजा इसलिए भी ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार ठाकरे गुट BMC की सत्ता से लगभग बाहर होता नज़र आया। सालों से जिस BMC पर उनकी मज़बूत पकड़ मानी जाती थी, वहाँ इस बार तस्वीर पूरी तरह बदल गई।
- पुणे नगर निगम (PMC)
पुणे नगर निगम में भी भाजपा का जलवा देखने को मिला। यहाँ कुल 165 सीटों के लिए चुनाव हुआ।
भाजपा ने 116 सीटें जीतकर एकतरफा दबदबा बना लिया।
कांग्रेस को 15 सीटें मिलीं।
NCP (अजित पवार गुट) ने 21 सीटें,
NCP (शरद पवार गुट) ने 3 सीटें,
MNS को 6 सीटें,
और अन्य दलों को भी 4 सीटें मिलीं।
पुणे में नतीजों ने यह साफ कर दिया कि भाजपा यहाँ बिना किसी बड़े मुकाबले के सत्ता की सबसे मज़बूत दावेदार बन चुकी है, जबकि कांग्रेस दूसरे नंबर पर रही।
- नागपुर नगर निगम
नागपुर में भाजपा ने ऐसा प्रदर्शन किया, जिसे लोग रिकॉर्ड ब्रेक जीत कह रहे हैं। यहाँ कुल 151 सीटें थीं।
भाजपा ने 102 सीटें जीत लीं।
कांग्रेस को 34 सीटें,
AIMIM को 7 सीटें,
और अन्य दलों को 5 सीटें मिलीं।
नागपुर में भाजपा का यह प्रदर्शन उसकी संगठनात्मक ताक़त और ज़मीनी पकड़ को साफ दिखाता है।
- ठाणे नगर निगम
ठाणे नगर निगम में मुकाबला खासा दिलचस्प रहा। यहाँ कुल 131 सीटें थीं।
शिंदे-शिवसेना ने 54 सीटें जीतकर अपनी मज़बूती साबित की।
भाजपा को 41 सीटें मिलीं।
ठाकरे गुट ने 18 सीटें,
कांग्रेस को 9 सीटें,
और अन्य दलों को भी 9 सीटें मिलीं।
ठाणे को शिंदे गुट का गढ़ माना जाता है, और यहाँ उनका किला बरकरार रहना इस बात का संकेत है कि महायुति की पकड़ यहाँ बेहद मज़बूत है।
- नवी मुंबई नगर निगम (NMMC)
नवी मुंबई में भी भाजपा ने साफ बहुमत हासिल किया। कुल 111 सीटों में से
भाजपा ने 65 सीटें जीत लीं।
शिंदे-शिवसेना को 19 सीटें,
NCP (अजित पवार) को 12 सीटें,
कांग्रेस को 6 सीटें,
और अन्य दलों को 7 सीटें मिलीं।
यह नतीजा दिखाता है कि नवी मुंबई में भाजपा की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।
- नासिक नगर निगम
नासिक नगर निगम में भी महायुति का पलड़ा भारी रहा।
कुल 122 सीटों में से
भाजपा ने 72 सीटें,
शिंदे-शिवसेना ने 26 सीटें,
कांग्रेस को 3 सीटें,
NCP को 4 सीटें,
MNS को 4 सीटें,
और अन्य दलों को 9 सीटें मिलीं।
- औरंगाबाद (छत्रपति संभाजीनगर)
यहाँ मुकाबला थोड़ा अलग रहा। कुल 115 सीटों में
AIMIM सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और उसे 36 सीटें मिलीं।
भाजपा को 34 सीटें,
शिंदे-शिवसेना को 21 सीटें,
कांग्रेस को 12 सीटें,
और अन्य दलों को 12 सीटें मिलीं।
हालाँकि AIMIM सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन उसे स्पष्ट बहुमत नहीं मिला।
- लातूर नगर निगम
लातूर में तस्वीर बिल्कुल अलग नज़र आई। यहाँ कुल 70 सीटें थीं और
कांग्रेस ने 43 सीटों के साथ ज़बरदस्त जीत दर्ज की।
भाजपा को 19 सीटें,
और अन्य दलों को 8 सीटें मिलीं।
लातूर का नतीजा यह दिखाता है कि राज्य के कुछ हिस्सों में कांग्रेस की पकड़ अब भी काफ़ी मज़बूत है।
पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम
यहाँ कुल 139 सीटों में
भाजपा ने 82 सीटें जीतकर साफ बहुमत हासिल किया।
NCP (अजित पवार) को 31 सीटें,
कांग्रेस को 14 सीटें,
और अन्य दलों को 12 सीटें मिलीं।
- कोल्हापुर नगर निगम
कोल्हापुर में मुकाबला संतुलित रहा। कुल 81 सीटों में
कांग्रेस को 32 सीटें,
भाजपा को 27 सीटें,
NCP को 14 सीटें,
और अन्य दलों को 8 सीटें मिलीं।
कुल मिलाकर पार्टी-वार प्रदर्शन
अगर पूरे महाराष्ट्र की तस्वीर देखें, तो सभी नगर निगमों को मिलाकर
भाजपा ने 1,050 से ज़्यादा सीटें जीतीं।
शिंदे-शिवसेना को 420 से ज़्यादा सीटें मिलीं।
कांग्रेस ने 310 से अधिक सीटें जीतीं।
NCP (दोनों गुट) को मिलाकर 260 से ज़्यादा सीटें मिलीं।
AIMIM ने करीब 95 सीटें,
MNS ने 40 सीटें,
और अन्य व निर्दलीय उम्मीदवारों ने 300 से ज़्यादा सीटों पर जीत दर्ज की।
कुल मिलाकर, महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव 2026 ने यह साफ कर दिया है कि शहरी महाराष्ट्र में इस वक्त महायुति की सियासी पकड़ सबसे मज़बूत है, जबकि विपक्ष को अब नए सिरे से अपनी रणनीति पर काम करना होगा।
राजनीतिक विश्लेषण — क्या बदला?
महायुति का बढ़ता दायरा
इस बार के Maharashtra Municipal corporation election में महायुति गठबंधन ने ऐसी कामयाबी हासिल की है, जिसकी उम्मीद बहुत कम लोगों ने की थी। स्थानीय निकायों में मिली यह ज़बरदस्त जीत यूँ ही नहीं हुई, बल्कि इसके पीछे कई ठोस वजहें नज़र आती हैं।
लोगों का मानना है कि विकास के काम, प्रशासनिक अनुभव और ज़मीन पर पार्टी कार्यकर्ताओं की लगातार सक्रियता ने महायुति को सीधा फ़ायदा पहुँचाया। शहरों में रहने वाले वोटरों को लगा कि यही गठबंधन उनके रोज़मर्रा के मसलों को बेहतर तरीके से संभाल सकता है।
मराठी राजनीति के बदलते समीकरण
इन चुनावों ने यह भी साफ कर दिया कि मराठी राजनीति के पुराने समीकरण अब बदल रहे हैं। जिन पार्टियों का कभी शहरी इलाकों पर मज़बूत दबदबा माना जाता था जैसे पारंपरिक शिवसेना (UBT), कांग्रेस और NCP उन्हें इस बार कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा।
खासतौर पर शिवसेना के दोनों गुटों, यानी उद्धव ठाकरे गुट (UBT) और शिंदे गुट के बीच हुए बंटवारे ने पार्टी को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुँचाया। वोट बैंक दो हिस्सों में बँट गया, जिसका सीधा फ़ायदा महायुति को मिला। दूसरी तरफ़ कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का प्रदर्शन भी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा और कई जगह वे मुकाबले में काफी पीछे छूटते नज़र आए।
स्थानीय मुद्दों का सीधा असर
Maharashtra MCE चुनावों में अक्सर बड़े भाषणों या राष्ट्रीय मुद्दों से ज़्यादा स्थानीय समस्याएँ अहम होती हैं, और इस बार भी यही देखने को मिला। सड़कें टूटी हैं या नहीं, पानी की सप्लाई ठीक है या नहीं, नालियों की सफ़ाई हो रही है या नहीं, कूड़ा उठाने की व्यवस्था, पार्किंग की परेशानी और शहरी सुविधाओं की हालत इन सब बातों पर जनता ने खुलकर अपना फैसला सुनाया।
मतदाताओं ने साफ तौर पर यह संदेश दिया कि उन्हें स्थिर प्रशासन, काम करने वाली सरकार और बेहतर सुशासन चाहिए। इसी वजह से लोगों ने ऐसे दलों को समर्थन दिया, जिनसे उन्हें अपने शहरों में सुधार की उम्मीद नज़र आई।
जनता का साफ संदेश
कुल मिलाकर, इन चुनावों से जनता का संदेश बिल्कुल साफ है लोग अब वादों से ज़्यादा काम, स्थिरता और ज़मीनी सुधार को अहमियत दे रहे हैं। यही वजह है कि महायुति गठबंधन को इतना बड़ा समर्थन मिला और महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में एक नया दौर शुरू होता दिखाई दे रहा है।
भविष्य के राजनीतिक संकेत
राजनीति के लिए यह चुनाव एक संकेतक
Maharashtra Municipal corporation election 2026 को राज्य की राजनीति के लिए एक स्पष्ट संकेतक माना जा रहा है। इन चुनावों ने दिखा दिया कि राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति नीति को शहरी महाराष्ट्र में काफी हद तक स्थानीय स्तर पर भी स्वीकार्यता और समर्थन मिला है। जनता ने स्पष्ट रूप से यह संदेश दिया कि अब उन्हें स्थिर और सक्षम प्रशासन चाहिए।
वहीं, विपक्षी दलों के लिए यह नतीजे एक चेतावनी भी हैं। उन्हें अब अपनी रणनीति, संगठनात्मक मजबूती और जमीनी सक्रियता पर काम करना होगा, नहीं तो आने वाले बड़े चुनावों में उनका नुकसान और बढ़ सकता है।
युवा मतदाता और नागरिक सुविधाओं का महत्व
Maharashtra Municipal corporation election में यह भी देखा गया कि युवा मतदाता और शहरी नागरिक अपने फैसले में अब नयी प्राथमिकताएँ लेकर आए हैं। वे सिर्फ पारंपरिक राजनीतिक नामों या वादों पर भरोसा नहीं कर रहे। बल्कि उनका ध्यान सड़कों, पानी, सफाई, पार्किंग और शहरी सुविधाओं जैसे मुद्दों पर केंद्रित है। यही कारण है कि Maharashtra Municipal corporation election में जनता ने स्थिरता और सुशासन को अहमियत दी।
इसका अर्थ यही है कि आने वाले चुनावों में भी, खासकर विकास और प्रशासनिक क्षमता वाले दलों को मतदाता प्राथमिकता देंगे।
महायुति का दबदबा और विपक्ष की स्थिति
Maharashtra Municipal corporation election 2026 ने यह स्पष्ट कर दिया कि महायुति गठबंधन ने अधिकांश महानगरपालिकाओं में अपनी पकड़ मज़बूत कर ली है।
वहीं, पारंपरिक विपक्षी दल जैसे कांग्रेस और NCP अपेक्षित गति नहीं जुटा पाए। हालांकि कुछ क्षेत्रों में कांग्रेस और अन्य पार्टियों ने जीत हासिल की, लेकिन संपूर्ण परिणाम राज्य के राजनीतिक नक्शे में बड़े बदलाव का संकेत दे रहे हैं।
भविष्य की राजनीति पर असर
Maharashtra Municipal corporation election केवल नगर निगमों तक सीमित नहीं है। इसे 2029 के विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए एक तैयारी माना जा रहा है। महायुति की यह जीत आने वाले चुनावों में उसकी स्थिति को और मज़बूत कर सकती है, जबकि विपक्ष को नए तरीके से सोचना और रणनीति बदलनी होगी।
कुल मिलाकर, Maharashtra Municipal corporation election 2026 ने यह साफ़ कर दिया है कि शहरी महाराष्ट्र में राजनीति का मिज़ाज बदल चुका है, और जनता ने इस बार स्थिरता, सुशासन और विकास को अपनी प्राथमिकता बनाया है।
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