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Parliament Budget Session 2026: तनावपूर्ण वातावरण और Rahul Gandhi का हमला
नई दिल्ली – Parliament Budget Session 2026-27 इन दिनों काफी गरमाए हुए माहौल में चल रहा है। हर तरफ राजनीति की गहमागहमी देखने को मिल रही है। विपक्ष लगातार कोशिश कर रहा है कि बजट पर हो रही आम चर्चा को सरकार के खिलाफ एक बड़ा मुद्दा बनाया जाए।
आज का दिन इसलिए भी खास रहा, क्योंकि नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने लोकसभा में सरकार पर ज़ोरदार हमला बोला। उन्होंने सीधे-सीधे सवाल किया कि, “क्या आपको देश को बेचने में ज़रा भी शर्म नहीं आती?” उनके इस बयान के बाद संसद के अंदर ही नहीं, बल्कि बाहर भी राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई।
आज संसद के दोनों सदनों में बजट पर बहस का दूसरा दिन रहा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संकेत दिया है कि वह शाम तक विपक्ष द्वारा उठाए गए तमाम विवादित मुद्दों पर अपना जवाब देंगी। वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि बजट पर चर्चा लगातार आगे बढ़ रही है, लेकिन बार-बार होने वाले आरोप-प्रत्यारोप, हंगामे और नारेबाज़ी की वजह से सदन की कार्यवाही में रुकावट आ रही है।
कई बार माहौल इतना गर्म हो जाता है कि गंभीर मुद्दों पर ठीक से बात ही नहीं हो पाती। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस से संसद का माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। आम लोगों की उम्मीदें इस सत्र से जुड़ी हुई हैं, लेकिन राजनीतिक खींचतान के कारण कामकाज पर असर पड़ता नज़र आ रहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच यह तनातनी किस दिशा में आगे बढ़ती है।
“क्या आपको भारत बेचने पर शर्म नहीं आती?” – Rahul Gandhi
आज लोकसभा में जब Rahul Gandhi बोलने के लिए खड़े हुए, तो उन्होंने शुरू से ही सरकार के फैसलों पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। उन्होंने खास तौर पर भारत-अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील और कई अहम आर्थिक नीतियों को लेकर सरकार की जमकर आलोचना की।
Rahul Gandhi ने कहा कि सरकार जो फैसले ले रही है, उनसे देश के सबसे बड़े हितों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने सरकार से सीधा सवाल किया कि, “क्या आपको देश को बेचने जैसे फैसले लेने में ज़रा भी शर्म महसूस नहीं होती?”
उन्होंने आगे कहा कि देश की जनता का पैसा, उसकी दिन-रात की मेहनत और देश की कीमती संपत्ति की सही देखभाल करना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। लेकिन मौजूदा नीतियाँ कई मामलों में आम लोगों को कमजोर बना रही हैं, खासकर गरीब तबके पर इसका बुरा असर पड़ रहा है।
Rahul Gandhi ने किसानों, मजदूरों और मध्यम वर्ग की परेशानियों का ज़िक्र करते हुए कहा कि बजट में उनके हितों का सही तरीके से ख्याल नहीं रखा गया है। उनके मुताबिक, सरकार ने इन वर्गों की आवाज़ को गंभीरता से नहीं सुना।
जब Rahul Gandhi अपना भाषण दे रहे थे, उस दौरान संसद का माहौल काफी गरमाया हुआ था। बार-बार शोर-शराबा होता रहा, नारेबाज़ी हुई और सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच तीखी नोक-झोंक देखने को मिली। कई बार तो ऐसा लगा कि सदन किसी बहस की जगह किसी सियासी मैदान में बदल गया है। बजट पर होने वाली चर्चा अब सिर्फ पैसों और योजनाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि वह पूरी तरह से राजनीतिक टकराव का अखाड़ा बन चुकी है।
विपक्ष और सत्तापक्ष में तीखी बहस
आज की बहस के दौरान बीजेपी के सांसदों ने भी राहुल गांधी के आरोपों का ज़ोरदार जवाब दिया। उन्होंने कहा कि Rahul Gandhi जो बातें कर रहे हैं, वो गैर-जिम्मेदाराना हैं और उनके पास कोई ठोस सबूत नहीं है। सत्तापक्ष का कहना था कि सिर्फ आरोप लगाने से देश का भला नहीं होता।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी इस मामले पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के रवैये से खुद लोकसभा स्पीकर भी आहत हुए हैं। उनकी इस टिप्पणी के बाद सदन में एक बार फिर बहस तेज़ हो गई और माहौल और ज़्यादा गरमा गया।
किरन रिजिजू ने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी और उनके साथियों का व्यवहार और बार-बार किया गया हंगामा संसद की गरिमा को ठेस पहुंचा रहा है। उनका कहना था कि सदन में जिस तरह से नारेबाज़ी और शोर-शराबा हो रहा है, उससे लोकतंत्र की मर्यादा पर असर पड़ रहा है।

वहीं बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने और भी सख्त लहजे में बात करते हुए कहा कि यह पूरा हंगामा किसी विदेशी एजेंडे के तहत किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष जानबूझकर संसद के कामकाज में रुकावट डाल रहा है।
इन आरोपों के बाद विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तनातनी और बढ़ गई और मामला एक बड़े राजनीतिक टकराव में बदल गया। सदन के अंदर माहौल इतना बिगड़ गया कि ठीक से काम हो ही नहीं पाया। हालात ऐसे बन गए कि आखिरकार पूरे दिन की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। सरकार और विपक्ष के बीच किसी भी मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई।
इस बीच, कुछ सांसदों ने यह मांग भी उठाई कि हंगामा करने वाले विपक्षी नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना था कि अगर ऐसे व्यवहार पर रोक नहीं लगी, तो संसद की इज्जत और उसकी गरिमा को और नुकसान पहुंचेगा। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में यह सियासी खींचतान किस मोड़ पर पहुंचती है।
Parliament Budget Session 2026 बहस के प्रमुख मुद्दे
इस समय राज्यसभा और लोकसभा, दोनों सदनों में बजट को लेकर लगातार चर्चा चल रही है। सांसद अलग-अलग मुद्दों पर अपनी बात रख रहे हैं और सरकार से जवाब मांग रहे हैं। इस बहस में सबसे ज़्यादा ध्यान भारत-अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते और उसके असर पर दिया जा रहा है।
इसके अलावा यह भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि बजट का किसानों, गरीबों और आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा। राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा पर होने वाला खर्च, बढ़ती महंगाई, बेरोज़गारी और अमीरी-गरीबी के फर्क जैसे मुद्दे भी चर्चा का बड़ा हिस्सा बने हुए हैं।
साथ ही, टैक्स यानी कर नीतियों में होने वाले बदलावों और बजट में किए गए प्रावधानों का फायदा आखिर किस वर्ग को मिलेगा, इस पर भी खूब बहस हो रही है। विपक्ष का कहना है कि सरकार इन तमाम सवालों पर साफ और संतुलित जवाब नहीं दे रही है। इसी वजह से बजट पर होने वाली चर्चा बार-बार विवाद और हंगामे में बदल जाती है, और असली मुद्दे पीछे छूट जाते हैं।
राहुल गांधी ने इस मौके पर खास तौर पर यह आरोप लगाया कि मौजूदा बजट देश को मज़बूत बनाने के बजाय कुछ गिने-चुने खास लोगों और बड़े समूहों को फायदा पहुंचाने के लिए तैयार किया गया है। उनके मुताबिक, आम जनता को इस बजट से वह राहत नहीं मिलने वाली, जिसकी उसे उम्मीद थी। Rahul Gandhi ने कहा कि गरीब, किसान, मजदूर और मध्यम वर्ग की परेशानियों को गंभीरता से नहीं लिया गया है। उनकी यह टिप्पणी सरकार के खिलाफ सबसे सख्त और तीखे आरोपों में से एक मानी जा रही है।
इसी बीच, संसद के अंदर सियासी तनाव और बढ़ गया है। हाल ही में विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के संकेत भी दिए हैं। इससे संसद में पहले से चल रहे गतिरोध और गहरे हो गए हैं। विपक्ष का कहना है कि जो लोग जानबूझकर बजट सत्र को बाधित कर रहे हैं और संसद की कार्यवाही में रुकावट डाल रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने चाहिए।
इन प्रस्तावों और आरोप-प्रत्यारोप का असर सीधे तौर पर सदन के कामकाज पर पड़ रहा है। कई जरूरी मुद्दों पर चर्चा तय समय पर नहीं हो पा रही है। पहले से तय एजेंडे पर भी ठीक से काम नहीं हो रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि बजट बहस को आगे बढ़ाना सरकार और विपक्ष, दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यह सियासी खींचतान किस तरह खत्म होती है और संसद का कामकाज दोबारा पटरी पर कब लौटता है।
निष्कर्ष: राजनीतिक टकराव का केंद्र — बजट बहस
Parliament Budget Session 2026 27 का यह दौर अब सिर्फ पैसों के हिसाब-किताब और योजनाओं की समीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है। अब यह सत्र राजनीतिक टकराव, आरोप-प्रत्यारोप और सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच तीखी बहस का बड़ा केंद्र बन चुका है। Rahul Gandhi का “भारत बेचने पर शर्म नहीं आती” जैसा बयान इस पूरी बहस को एक नया सियासी मोड़ दे गया है। इस बयान के बाद संसद के अंदर ही नहीं, बल्कि बाहर भी चर्चा तेज़ हो गई है। मीडिया से लेकर आम जनता तक, हर कोई इस मुद्दे पर अपनी नज़र बनाए हुए है।
राजनीतिक जानकार और विश्लेषक भी अब इस बात पर गौर कर रहे हैं कि आगे सरकार और विपक्ष कौन-सा कदम उठाने वाले हैं और इस सियासी लड़ाई का देश की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा। आज की संसद की कार्यवाही यह साफ दिखाती है कि लोकतंत्र में बजट सत्र सिर्फ योजनाओं पर चर्चा करने का मंच नहीं होता, बल्कि कई बार यह सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव का मैदान भी बन जाता है।
जिस तरह से हर दिन नए आरोप लगाए जा रहे हैं, बयानबाज़ी हो रही है और हंगामा बढ़ता जा रहा है, उससे यह साफ नजर आ रहा है कि आने वाले दिनों में यह बहस और ज़्यादा तेज़ होगी। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और बयानबाज़ी का दौर अभी थमने वाला नहीं है। अब देखना यह होगा कि यह सियासी माहौल कब शांत होता है और संसद फिर से पूरी गंभीरता के साथ जनता के मुद्दों पर काम करना शुरू करती है।
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