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India‑US trade deal पर Rahul Gandhi का तीखा हमला, एपस्टीन फाइल्स का ज़िक्र — क्या है मामला?
24 फ़रवरी 2026 को मध्य प्रदेश के भोपाल में एक बड़ा किसान महा‑चौपाल (farmers’ gathering) हुआ, जिसमें Rahul Gandhi ने सीधे Prime Minister Narendra Modi को कटघरे में खड़ा कर दिया। उनका कहना था कि जो India‑US trade deal हुआ है, वो देश के हितों के खिलाफ है। राहुल ने कहा, “ये समझौता बिल्कुल भी देश की भलाई की परवाह किए बिना किया गया, जैसे देश ही बेच दिया गया हो।”
राहुल का कहना था कि ये डील चार महीनों तक लंबी बातचीत में फंसी रही, लेकिन अचानक Modi government ने इसे बिना किसी cabinet discussion के final कर दिया। उनका आरोप था कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि US pressure, और Epstein files और Adani case का डर सरकार पर साया डाला हुआ था।
Rahul Gandhi ने Epstein files का जिक्र करते हुए कहा कि अभी भी अमेरिका में लाखों फाइलें बंद पड़ी हैं — जिनमें emails, messages और videos शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ खास नाम पहले ही leak हो चुके हैं, जिनमें एक बड़े नेता और कुछ और प्रमुख लोगों के नाम भी हैं। उनका कहना था कि ये files सिर्फ़ pressure weapon के तौर पर इस्तेमाल हो रही हैं ताकि Indian government को दबाया जा सके।
उन्होंने साफ़ कहा कि ये सिर्फ़ कोई मामूली political issue नहीं है, बल्कि इसके पीछे कोई बड़ी ताक़त काम कर रही है, जो इस trade agreement को ज़बरदस्ती आगे बढ़ा रही है।
राहुल ने यह भी कहा कि आम लोग और किसान इस डील के असर को समझें, क्योंकि ये सिर्फ़ elite और corporate interests के लिए बनाया गया समझौता है, देश के गरीब और मिडिल‑class जनता के लिए नहीं।
अडानी मामले का भी ज़िक्र
Rahul Gandhi ने America में चल रहे Adani case को भी trade deal से जोड़ दिया। उनका कहना है कि इस मामले में business tycoon Gautam Adani को खासतौर पर निशाना बनाया गया है, और इसका असर सीधे BJP की financial structure पर पड़ रहा है। Rahul ने कहा कि Modi government को डर था कि अगर ये मामला आगे बढ़ा, तो इससे देश का political और economic future दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
उनका ये भी कहना था कि इन दोनों मामलों के दबाव में Prime Minister ने trade agreement में कई sensitive चीज़ें, including important data, अमेरिका को सौंप दी हैं — जो बिल्कुल भी national interest के मुताबिक़ नहीं है।
क्या Rahul ने सच में कहा कि “देश बेचा गया”? जी हाँ। Rahul Gandhi ने अपने बयान में बिल्कुल साफ़ कहा:
“जिस trade deal को India और America ने किया, उसमें Modi जी ने देश को बेचना मान लिया।”
“यह deal सीधे farmers, छोटे उद्योगों और देश के sensitive data पर असर डालती है।”
“ये trade agreement देश के हितों के लिए नुकसानदेह है।”
उन्होंने सिर्फ़ deal के तरीक़े पर सवाल नहीं उठाया, बल्कि यह भी कहा कि इससे farmers और domestic industries को बहुत बड़ा नुकसान होगा और India की autonomy पर भी बड़ा सवाल उठता है। Rahul ने जोर देकर कहा कि ये सिर्फ़ कोई आम मामला नहीं है — बल्कि इसमें देश के गरीब और middle-class लोग भी सीधे प्रभावित होंगे, और elite corporate interests को फायदा पहुँचाने के लिए बनाया गया समझौता है।
Rahul Gandhi ने ये भी कहा कि देश के लोगों को इस बात की पूरी जानकारी होनी चाहिए कि कैसे powerful lobby groups और foreign pressures के चलते ये deal थोड़े जल्दी में final कर दी गई। उनका message था कि जनता को alert और informed रहना चाहिए, ताकि उनके interests का कोई नुकसान न हो।
राहुल का मोदी को चैलेंज: ‘डील रद्द करो’
Rahul Gandhi ने सीधे Prime Minister Modi को चुनौती दी कि अगर वाक़ई देश के interests को प्राथमिकता देनी है, तो ये trade deal तुरंत रद्द करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका की Supreme Court ने Trump-tariff system को अवैध घोषित कर दिया है, ऐसे में भारत को भी ऐसा decision लेना चाहिए, लेकिन लगता है Modi सरकार में himmat (courage) अभी तक नहीं जुट पाई है।
Kisano aur domestic industries पर इस deal का असर भी बड़ा होगा। Rahul Gandhi ने विस्तार से बताया कि अगर यह समझौता लागू हुआ:
Farmers को सीधे नुकसान होगा, क्योंकि American agricultural products बहुत सस्ते दामों पर भारत में बिकेंगे और स्थानीय उत्पादकों के लिए जगह मुश्किल हो जाएगी।

Small industries और textile sector भी प्रभावित होंगे, क्योंकि competition में Indian products पीछे रह सकते हैं।
Data और market access का control बड़े foreign companies के हाथ में जा सकता है, जिससे देश की आर्थिक self-reliance खतरे में पड़ जाएगी।
Rahul का कहना है कि ये केवल कोई आम business deal नहीं है, बल्कि यह India के economic future को सीधे खतरे में डालने जैसा है। उनका emphasis यह था कि जनता को समझना चाहिए कि ये deal सिर्फ़ elite और corporate interests के लिए बनाई गई है, और आम लोग और छोटे उद्योग इससे नुकसान में पड़ सकते हैं।
Rahul ने ये भी कहा कि देश के लोगों को alert aur informed रहना चाहिए, ताकि वे समझ सकें कि ये समझौता क्यों जल्दी में फाइनल किया गया और इसके पीछे कौन‑सी बड़ी ताक़त काम कर रही है। उनका मानना है कि Modi government को देशहित के लिए फैसला लेने की हिम्मत दिखानी होगी, नहीं तो ये deal long-term नुकसान पहुंचा सकती है।
राजनीतिक बहस और प्रतिक्रियाएँ
Rahul Gandhi के आरोपों पर BJP ke leaders ने सिर्फ जवाब ही नहीं दिया, बल्कि सीधे राहुल को निशाना बनाकर कुछ काफी तीखे बयान भी दिए।
सरकारी और BJP की प्रतिक्रिया कुछ ऐसी रही: उनके नेताओं ने कहा कि Rahul के आरोप बिल्कुल बेबुनियादी (baseless) हैं और ऐसे बयान देश की image को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
केंद्रीय मंत्री Gajendra Singh Shekhawat ने तो यहां तक कह दिया कि Rahul के ‘देश बेचा’ जैसे बयान सिर्फ आलोचना नहीं हैं, बल्कि “mental health पर भी सोचना चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि Rahul के ये बयान और allegations देश की reputation को धूमिल करने वाले हैं, और ये राजनीति से हटकर एक तरह के personal attack की तरह हैं।
सरकार की तरफ़ से यह भी जोर देकर कहा गया कि यह trade agreement India और America के बीच समान हितों पर आधारित है, और इसे national interest को ध्यान में रखकर आगे बढ़ाया गया है, किसी भी तरह के foreign pressure में आकर नहीं।
विश्लेषक क्या कहते हैं?
विश्लेषकों के मुताबिक़ ये मुद्दा सिर्फ़ video statements या speeches का मामला नहीं है। बल्कि ये trade, security, agriculture और global politics से जुड़ा एक बड़ा मामला है। ऐसे agreements कई अलग‑अलग stages से गुजरते हैं — policy, economic calculations, domestic interests और international pressure शामिल होते हैं। इसलिए किसी भी आरोप को सिर्फ़ political bias से अलग कर के, neutral facts पर आँकना ज़रूरी है।
Rahul Gandhi ने India-US trade agreement को Epstein files और Adani case के साथ जोड़ते हुए बड़ा और गंभीर इल्ज़ाम लगाया कि ये deal essentially “desh becha gaya” जैसा है। उन्होंने कहा कि ये समझौता सीधे farmers, domestic industries और national security interests के खिलाफ है, और Modi government इस पूरे मामले में illegal pressure के तहत काम कर रही है।
दूसरी तरफ़ BJP और government ने इन आरोपों को outright reject कर दिया और इसे सिर्फ़ political statement-making बताया। उनका कहना है कि ये allegations सच नहीं हैं और सिर्फ़ media और public debate में attention grab करने के लिए use किए जा रहे हैं।
देश में इस मुद्दे पर अभी भी wide discussion चल रही है। लोगों में confusion और debate दोनों ही बढ़ रही हैं, और आगे आने वाले दिनों में political, media और public discussion इस पूरे मामले को नए मोड़ पर ले जा सकते हैं।
Rahul Gandhi ने जहां इसे serious national issue बताया, वहीं सरकार इसे political rhetoric के रूप में present कर रही है। मतलब ये कि देश के आम लोग, खासकर farmers और small businesses, इस मामले की impact को समझने की कोशिश कर रहे हैं।
विश्लेषकों के अनुसार यह मुद्दा सिर्फ़ video statements या speeches का नहीं है, बल्कि trade, security, agriculture और global politics से जुड़ा हुआ बड़ा मामला है। ऐसे agreements कई चरणों से गुजरते हैं — policy, economic calculations, domestic interests और international pressure शामिल होते हैं। इसलिए आरोपों को political bias से अलग करके neutral facts पर देखना ज़रूरी है।
Rahul Gandhi ने India-US trade agreement को Epstein files और Adani case के साथ जोड़ते हुए कहा कि यह deal देश के हितों के खिलाफ है और इसे लेकर Modi government पर अवैध दबाव है। उनका कहना था कि ये समझौता farmers, domestic industries और national security पर असर डालेगा और देश की autonomy पर सवाल उठाएगा।
दूसरी तरफ़ BJP और सरकार ने इसे सिर्फ़ political rhetoric बताया और allegations को खारिज किया। देश में इस मुद्दे पर अभी भी debate और चर्चा जारी है, और आगे मीडिया और public discussion इसे नया मोड़ दे सकते हैं।
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