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IND vs SL T20I सीरीज की स्थिति और Smriti Mandhana की भूमिका
भारत और श्रीलंका के बीच चल रही महिला T20I सीरीज़ ने पिछले हफ्ते तक पूरी दुनिया के क्रिकेट फैंस का ध्यान अपनी तरफ खींच रखा था। हर मैच में रोमांच, जोश और भारतीय टीम का दमदार प्रदर्शन देखने को मिला। हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में भारतीय महिला टीम ने जिस तरह से एक के बाद एक मुकाबले जीते, उसने साफ कर दिया कि इस सीरीज़ में भारत पूरी तरह हावी रहा है। पहले चारों मैच जीतकर भारत ने 4-0 की अजेय बढ़त बना ली थी।
लेकिन जैसे ही 5वें और आख़िरी T20I का दिन आया, एक खबर ने सबको चौंका दिया। जब टीम इंडिया की प्लेइंग XI सामने आई, तो उसमें एक नाम गायब था स्मृति मंधाना। यही वो पल था जब सोशल मीडिया से लेकर क्रिकेट ग्रुप्स तक हर जगह एक ही सवाल घूमने लगा: Smriti Mandhana आख़िरी मैच क्यों नहीं खेल रही हैं?
क्योंकि सच कहें तो इस पूरी सीरीज़ में अगर किसी खिलाड़ी ने सबसे ज़्यादा दिल जीते हैं, तो वो स्मृति मंधाना ही थीं। उनकी बैटिंग, उनका आत्मविश्वास और उनका अंदाज़ सब कुछ भारतीय टीम के लिए बेहद अहम रहा।
यह भारत और श्रीलंका के बीच 5 मैचों की महिला T20I सीरीज़ थी। भारत ने शुरुआत से ही आक्रामक क्रिकेट खेला और श्रीलंका को संभलने का मौका तक नहीं दिया। पहले चार मुकाबले जीतने के बाद सीरीज़ का फैसला पहले ही हो चुका था।
ऐसे में 5वां मैच एक तरह से “डेड रबर” बन गया यानी ऐसा मैच जिसका नतीजा सीरीज़ पर कोई असर नहीं डालता। इसी वजह से टीम मैनेजमेंट के पास यह मौका था कि वो कुछ सीनियर खिलाड़ियों को आराम दे और बेंच पर बैठे खिलाड़ियों को मौका दे सके।
Smriti Mandhana का शानदार प्रदर्शन
अगर Smriti Mandhana के प्रदर्शन की बात करें, तो उन्होंने इस सीरीज़ में वही किया जिसके लिए वो जानी जाती हैं मैच जिताऊ पारियां। खासतौर पर चौथे T20I में खेली गई उनकी 80 रनों की शानदार पारी आज भी फैंस के ज़ेहन में ताज़ा है। उस मैच में उन्होंने न सिर्फ तेज़ रन बनाए, बल्कि टीम को मज़बूत स्थिति में भी पहुंचाया। भारत ने वो मुकाबला 30 रन से जीता, और स्मृति को Player of the Match चुना गया।
उनकी बैटिंग में ठहराव भी था और आक्रामकता भी बिल्कुल एक अनुभवी खिलाड़ी की तरह।
तो फिर आख़िरी मैच में क्यों नहीं खेलीं Smriti Mandhana?
अब असली सवाल यही है। दरअसल, उपलब्ध जानकारी और टीम मैनेजमेंट के संकेतों के मुताबिक, स्मृति मंधाना को जानबूझकर आराम दिया गया।
इसके पीछे कुछ अहम वजहें मानी जा रही हैं:
सीरीज़ पहले ही जीत ली गई थी
स्मृति लगातार मैच खेल रही थीं
आगे आने वाले बड़े टूर्नामेंट्स को देखते हुए उन्हें फ्रेश रखना ज़रूरी था
टीम मैनेजमेंट युवा खिलाड़ियों को मौका देना चाहता था
यानी यह फैसला किसी चोट या फॉर्म की वजह से नहीं, बल्कि रणनीति (strategy) का हिस्सा था।
टीम पर क्या पड़ा असर?
Smriti Mandhana जैसी खिलाड़ी का न होना किसी भी टीम के लिए बड़ा बदलाव होता है, लेकिन भारत की बेंच स्ट्रेंथ इतनी मज़बूत है कि टीम संतुलन बनाए रखने में सक्षम रही। साथ ही नए खिलाड़ियों को खुद को साबित करने का सुनहरा मौका भी मिला।

Smriti Mandhana का 5वें T20I में न खेलना भले ही फैंस के लिए चौंकाने वाला रहा हो, लेकिन यह फैसला पूरी तरह टीम के हित में लिया गया था। सीरीज़ में उनके योगदान को कोई नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता।
उनकी बल्लेबाज़ी, उनका जोश और उनका क्लास यही वजह है कि वो आज भी भारतीय महिला क्रिकेट की सबसे बड़ी स्टार्स में से एक हैं। आने वाले मैचों में एक बार फिर स्मृति मंधाना बल्ला संभालेंगी, और फैंस को उनसे फिर वैसी ही शानदार पारियों की उम्मीद रहेगी।
बड़ी वजह टीम मैनेजमेंट ने आराम दिया
सबसे बड़ी और साफ़ वजह यही है कि टाइमिंग और टीम की रणनीति को ध्यान में रखते हुए टीम मैनेजमेंट ने Smriti Mandhana को आराम (रेस्ट) देने का फैसला लिया। इसमें किसी तरह की चोट, फॉर्म की कमी या चिंता वाली बात बिल्कुल नहीं है बल्कि यह पूरी तरह सोच-समझकर लिया गया कदम है।
मैच से पहले टॉस के वक्त भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर ने खुद इस बात को साफ़ किया। उन्होंने बताया कि इस मुकाबले में Smriti Mandhana और रेणुका सिंह ठाकुर, दोनों को ही आराम दिया गया है। उनकी जगह टीम में जी कमलिनी और स्नेह राणा को प्लेइंग इलेवन में मौका दिया गया। यानी टीम ने आख़िरी मैच को एक तरह से नए चेहरों के लिए आज़माइश के तौर पर देखा।
अगर आसान और आम बोलचाल वाली ज़ुबान में कहा जाए, तो भारत यह सीरीज़ पहले ही जीत चुका है। चार मैच जीतकर 4-0 की बढ़त बना लेने के बाद आख़िरी मुकाबला सिर्फ़ औपचारिकता रह गया था। ऐसे में टीम मैनेजमेंट ने सोचा कि क्यों न सीनियर खिलाड़ियों को थोड़ा सुकून दिया जाए और जो खिलाड़ी अब तक बेंच पर बैठे थे, उन्हें भी खुद को साबित करने का मौका मिले।
Smriti Mandhana और रेणुका सिंह जैसे अनुभवी खिलाड़ी लगातार क्रिकेट खेल रही हैं। आगे आने वाले बड़े टूर्नामेंट जैसे WPL (वीमेंस प्रीमियर लीग) और आगामी T20 वर्ल्ड कप काफी अहम हैं। इसलिए उन्हें अभी तरोताज़ा रखना भी ज़रूरी है, ताकि वो बड़े मुकाबलों में पूरी ताक़त और फोकस के साथ उतर सकें।
हरमनप्रीत कौर ने यह भी कहा कि टीम का बैटिंग ऑर्डर पहले से ही मज़बूत है, इसलिए इस मैच में कुछ बदलाव करना सुरक्षित लगा। टीम को भरोसा था कि नए खिलाड़ियों के आने से संतुलन नहीं बिगड़ेगा।
तो कुल मिलाकर बात बिल्कुल साफ़ है Smriti Mandhana का न खेलना किसी परेशानी की वजह से नहीं, बल्कि यह एक सोची-समझी रणनीति थी। आराम भी मिला, नए खिलाड़ियों को मौका भी मिला, और टीम की तैयारी आगे के बड़े इम्तिहानों के लिए और मज़बूत हो गई। यानी यह फैसला नुकसान का नहीं, बल्कि फ़ायदे का सौदा था टीम इंडिया के लिए भी और आने वाले मैचों के लिए भी।
नई चेहरा — G Kamalini की एंट्री
Smriti Mandhana की जगह टीम में जी कमलिनी (G Kamalini) को मौका मिला है, और यह मुकाबला उनके लिए बेहद खास बन गया क्योंकि यही उनका T20I डेब्यू है। किसी भी खिलाड़ी के करियर में पहला इंटरनेशनल मैच हमेशा यादगार होता है, और कमलिनी के लिए भी यह एक बड़ा लम्हा है।
अगर कमलिनी की बात करें, तो वह कोई अनजाना नाम नहीं हैं। उन्होंने इससे पहले ICC Women’s U19 T20 World Cup में शानदार प्रदर्शन किया था। वहां उनकी बैटिंग में आत्मविश्वास, धैर्य और मैच की समझ साफ दिखाई दी। उन्होंने साबित किया कि उनमें बड़ा खिलाड़ी बनने की पूरी काबिलियत है, और इसी दम पर उन्होंने युवाओं के बीच अपनी पहचान बनाई।
अब जब उन्हें सीनियर टीम में मौका मिला है, तो यह सिर्फ़ एक खिलाड़ी का डेब्यू नहीं है, बल्कि यह टीम इंडिया की सोच और दूरदर्शिता को भी दिखाता है। भारतीय टीम अब सिर्फ़ मौजूदा जीत पर नहीं, बल्कि भविष्य की तैयारी पर भी पूरा ध्यान दे रही है। नए और उभरते हुए टैलेंट को मौके देना इसी रणनीति का हिस्सा है।
आसान और आम ज़ुबान में कहें तो, टीम मैनेजमेंट यह साफ़ संदेश दे रहा है कि जो खिलाड़ी मेहनत करेगा और घरेलू व जूनियर स्तर पर अच्छा खेलेगा, उसके लिए दरवाज़े खुले हैं। कमलिनी का डेब्यू इसी भरोसे की मिसाल है।
इस तरह से Smriti Mandhana की गैरमौजूदगी में भी यह मैच खास बन गया, क्योंकि एक नई खिलाड़ी को खुद को साबित करने का मौका मिला। हो सकता है आज नहीं, लेकिन आने वाले वक्त में जी कमलिनी भारतीय महिला क्रिकेट का एक बड़ा नाम बनें|
Smriti Mandhana: रिकॉर्ड और परिस्थिति
इसके अलावा एक दिलचस्प बात यह भी है कि Smriti Mandhana इस सीरीज़ में एक बड़ा रिकॉर्ड तोड़ने के बेहद क़रीब थीं। अगर वह 5वीं T20I में खेलतीं और वहां 62 रन बना लेतीं, तो वह साल 2025 में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाली बल्लेबाज़ बन सकती थीं वो भी पुरुष और महिला, दोनों कैटेगरी में। इस तरह वह शुभमन गिल के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ देतीं।
लेकिन चूँकि स्मृति इस मैच में नहीं खेलीं, इसलिए यह मौका उनसे चूक गया। जाहिर है, यह बात उनके फैंस के लिए थोड़ी मायूसी वाली हो सकती है, क्योंकि हर कोई उन्हें एक और रिकॉर्ड बनाते हुए देखना चाहता था। मगर क्रिकेट सिर्फ़ रिकॉर्ड्स का खेल नहीं है, बल्कि समझदारी, सब्र और सही वक्त पर सही फैसला लेने का भी खेल है। जब टीम पहले ही सीरीज़ जीत चुकी हो, तो खिलाड़ियों को आराम देना भी रणनीति का अहम हिस्सा बन जाता है।
क्या इससे टीम इंडिया पर कोई असर पड़ेगा?
कुछ फैंस को भले ही Smriti Mandhana का न खेलना थोड़ा अजीब लगा हो, लेकिन सच्चाई यह है कि भारतीय टीम की बैटिंग लाइनअप काफी मज़बूत है। टीम में पहले से ही शैफाली वर्मा, हरमनप्रीत कौर और ऋचा घोष जैसी दमदार बल्लेबाज़ मौजूद हैं, जो किसी भी हालात में मैच का रुख पलट सकती हैं। इसलिए टीम के आत्मविश्वास या संतुलन पर कोई बड़ा सवाल खड़ा नहीं होता।
Smriti Mandhana की फॉर्म और मानसिक तैयारी
इस साल Smriti Mandhana ने अपने करियर में कई ऊँचे मुक़ाम हासिल किए हैं। उन्होंने: T20I में 4,000 रन पूरे किए कुल मिलाकर 10,000 इंटरनेशनल रन का बड़ा आंकड़ा छुआ|
यह किसी भी महिला क्रिकेटर के लिए एक बड़ी और क़ाबिल-ए-तारीफ़ उपलब्धि है। कुछ वक्त पहले उनके फॉर्म को लेकर जो बातें हो रही थीं, उनका जवाब स्मृति ने मैदान पर अपने बल्ले से दिया। उन्होंने T20 क्रिकेट में शानदार वापसी की, अपनी बैटिंग को संतुलित किया और टीम को कई बार बड़े स्कोर तक पहुँचाया।
इसलिए यह बिल्कुल साफ़ है कि Smriti Mandhana की काबिलियत और फॉर्म पर कोई सवाल नहीं है। बस इस एक मैच के लिए, टीम की ज़रूरत और भविष्य की तैयारी को देखते हुए, उन्हें आराम दिया गया है।
आख़िर में यही कहा जा सकता है कि कभी-कभी एक मैच छोड़ना, आने वाले बड़े इम्तिहानों की तैयारी का हिस्सा होता है। Smriti Mandhana आज भी टीम इंडिया की रीढ़ हैं और आगे भी रहेंगी|
इस फैसले का मतलब क्या है?
तो आख़िर में बात बिल्कुल साफ़ है Smriti Mandhana का 5वीं T20I में न खेलना न तो किसी चोट की वजह से था और न ही किसी तरह के विवाद की वजह से। यह फैसला पूरी तरह से टेक्निकल सोच, टीम मैनेजमेंट की प्लानिंग और टूर मैनेजमेंट की रणनीति का हिस्सा था।
भारत पहले ही यह सीरीज़ जीत चुका था, इसलिए आख़िरी मैच में टीम पर किसी तरह का दबाव नहीं था। ऐसे हालात में टीम मैनेजमेंट ने यही बेहतर समझा कि सीनियर खिलाड़ियों को थोड़ा आराम दिया जाए और युवा खिलाड़ियों को खुद को साबित करने का मौका मिले। यही वजह है कि प्लेइंग इलेवन में बदलाव देखने को मिला और भविष्य की तैयारी पर भी ध्यान दिया गया।
आज के दौर में क्रिकेट हो या फुटबॉल, हर जगह rest और rotation policy आम बात हो चुकी है। लगातार मैच, लम्बी सीरीज़ और टूर खिलाड़ियों पर जिस्मानी और ज़ेहनी दोनों तरह का दबाव डालते हैं। ऐसे में अगर सही वक्त पर खिलाड़ियों को आराम न दिया जाए, तो आगे चलकर इसका नुकसान हो सकता है।
भारतीय महिला क्रिकेट टीम भी अब इसी सोच के साथ आगे बढ़ रही है। टीम सिर्फ़ आज का मैच नहीं देख रही, बल्कि आने वाले बड़े इम्तिहानों जैसे बड़े टूर्नामेंट्स और वर्ल्ड कप को ध्यान में रखकर फैसले ले रही है। खिलाड़ियों के workload, उनकी फिटनेस और उनकी मानसिक तैयारी को अब उतनी ही अहमियत दी जा रही है।
इसलिए Smriti Mandhana को आराम देने का फैसला किसी भी तरह से कमज़ोरी नहीं, बल्कि समझदारी और दूरदर्शिता की मिसाल है। यह फैसला दिखाता है कि टीम इंडिया अब भविष्य की तरफ़ देख रही है सोच-समझकर, सब्र के साथ और सही रणनीति के तहत।
यानी कुल मिलाकर कहा जाए तो यह फैसला नुकसान का नहीं, बल्कि फायदे का सौदा है टीम के लिए भी और स्मृति के आने वाले बड़े मुकाबलों के लिए भी।
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