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Vaishnavi Adkar के बारे में सबकुछ
भारतीय टेनिस की दुनिया में एक और यादगार और सुनहरा लम्हा जुड़ गया है। महज़ 21 साल की नौजवान खिलाड़ी Vaishnavi Adkar ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने पूरे मुल्क को फख्र महसूस करवाया है। उन्होंने ITF वुमेन वर्ल्ड टेनिस टूर के W100 सिंगल्स फाइनल में जगह बनाकर इतिहास रच दिया। खास बात ये है कि Sania Mirza के बाद वह पहली भारतीय महिला बनी हैं जो इस बड़े स्तर के सिंगल्स फाइनल तक पहुंची हैं। यह सिर्फ एक खिलाड़ी की कामयाबी नहीं, बल्कि भारतीय महिला टेनिस के लिए उम्मीद की एक नई रोशनी है।
अगर हम Vaishnavi Adkar की शुरुआत की बात करें तो उनका जन्म 14 दिसंबर 2004 को पुणे, महाराष्ट्र में हुआ। बहुत छोटी सी उम्र, यानी सिर्फ 7 साल की उम्र में उन्होंने टेनिस रैकेट थाम लिया था। उस वक्त शायद किसी को अंदाज़ा भी नहीं रहा होगा कि ये नन्ही सी बच्ची एक दिन मुल्क का नाम रौशन करेगी। बचपन से ही उनमें खेल के प्रति गज़ब का जुनून और लगन दिखाई देती थी। जब बाकी बच्चे आम खेलों में मसरूफ रहते थे, तब Vaishnavi Adkar घंटों कोर्ट पर पसीना बहाती थीं।
उनके खेल की सबसे बड़ी खासियत उनकी दो-हाथ वाली बैकहैंड शॉट मानी जाती है। ये शॉट उनका असली हथियार है, जिससे वह सामने वाली खिलाड़ी को दबाव में ले आती हैं। उनकी टेक्निक काफी मजबूत है और खेल के दौरान उनका सब्र, सुकून और दिमागी मजबूती साफ दिखाई देती है। टेनिस जैसा खेल सिर्फ ताकत से नहीं, बल्कि दिमाग और हौसले से भी जीता जाता है, और Vaishnavi Adkar ने यह बात बहुत कम उम्र में समझ ली थी।
धीरे-धीरे उन्होंने जूनियर लेवल पर अपनी पहचान बनानी शुरू की। ITF जूनियर रैंकिंग में वह नंबर 115 तक पहुंचीं, जो अपने आप में बड़ी उपलब्धि थी। यह इस बात का सबूत था कि वह सिर्फ घरेलू स्तर तक सीमित रहने वाली खिलाड़ी नहीं हैं, बल्कि इंटरनेशनल सर्किट पर भी अपनी छाप छोड़ने का माद्दा रखती हैं।
साल 2024 उनके करियर के लिए बेहद खास रहा। ITF W15 अहमदाबाद टूर्नामेंट में उन्होंने सिंगल्स और डबल्स दोनों खिताब अपने नाम किए। यह जीत उनके लिए एक बड़ा मोड़ साबित हुई। इस खिताब ने उनके आत्मविश्वास को नई उड़ान दी और दुनिया को यह संदेश दिया कि Vaishnavi Adkar लंबी रेस की घोड़ी हैं।
फिर आया साल 2025, जब उन्होंने समर वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया। यह उपलब्धि इसलिए भी खास थी क्योंकि भारतीय टेनिस को लंबे अरसे बाद किसी बड़े मल्टी-स्पोर्ट इवेंट में मेडल मिला था। करीब 46 साल के इंतज़ार के बाद यह कामयाबी हासिल हुई। उस वक्त भी खेल जगत में यही चर्चा थी कि भारतीय महिला टेनिस को उसकी नई सितारा मिल चुकी है।
लेकिन असली धमाका उन्होंने तब किया जब W100 जैसे बड़े टूर्नामेंट के सिंगल्स फाइनल में जगह बनाई। यह लेवल साधारण नहीं होता। यहां दुनिया भर की टॉप रैंकिंग खिलाड़ी हिस्सा लेती हैं। ऐसे में एक 21 साल की भारतीय खिलाड़ी का फाइनल तक पहुंचना किसी ख्वाब से कम नहीं। इस सफर के दौरान Vaishnavi Adkar ने कई ऊंची रैंकिंग वाली और अनुभवी खिलाड़ियों को हराया। हर मुकाबले में उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया और खेल में निखार साफ नजर आने लगा।
फाइनल तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था। हर मैच में उन्हें कड़ी टक्कर मिली, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। कोर्ट पर उनका रवैया बेहद प्रोफेशनल और शांत रहा। हार-जीत खेल का हिस्सा है, लेकिन जिस अंदाज़ में उन्होंने खुद को पेश किया, उसने सबका दिल जीत लिया। भले ही फाइनल मुकाबले में जीत हाथ नहीं लगी, लेकिन वहां तक पहुंचना ही इतिहास बन गया।
इस शानदार प्रदर्शन का असर उनकी वर्ल्ड रैंकिंग पर भी पड़ा। उनकी रैंकिंग में बड़ा उछाल आया और वह कई पायदान ऊपर चढ़ गईं। यह इस बात का इशारा है कि आने वाले वक्त में वह और बड़े टूर्नामेंट्स में भारत का परचम लहराती नजर आ सकती हैं।
आज भारतीय टेनिस फैंस के दिलों में एक नई उम्मीद जागी है। लंबे समय से महिला सिंगल्स में किसी बड़ी सफलता का इंतज़ार था। Sania Mirza के बाद जो खालीपन महसूस हो रहा था, उसे अब Vaishnavi Adkar भरती हुई दिखाई दे रही हैं। लोग अब उन्हें भविष्य की स्टार के तौर पर देखने लगे हैं।
सबसे खास बात यह है कि Vaishnavi Adkar की कहानी सिर्फ प्रतिभा की नहीं, बल्कि मेहनत, सब्र और यकीन की कहानी है। उन्होंने धीरे-धीरे अपने खेल को तराशा, खुद पर भरोसा रखा और हर मौके का भरपूर फायदा उठाया। यही वजह है कि आज वह उस मुकाम पर खड़ी हैं, जहां पहुंचना हर खिलाड़ी का ख्वाब होता है।
आने वाला वक्त उनके लिए और भी अहम होने वाला है। अगर वह इसी जुनून और जज्बे के साथ आगे बढ़ती रहीं, तो वह जल्द ही WTA टूर पर भी अपनी मजबूत पहचान बना सकती हैं। भारतीय टेनिस को एक नई दिशा मिल सकती है और युवा खिलाड़ियों को एक नई प्रेरणा।
आखिर में यही कहा जा सकता है कि Vaishnavi Adkar ने सिर्फ एक फाइनल नहीं खेला, बल्कि एक नई कहानी की शुरुआत की है। यह कहानी है हौसले की, मेहनत की और उस यकीन की, जो किसी भी ख्वाब को हकीकत में बदल सकता है। भारतीय टेनिस का यह सुनहरा सफर अभी शुरू हुआ है, और उम्मीद है कि आने वाले सालों में Vaishnavi Adkar और भी बड़े कारनामे कर के देश का सर फख्र से ऊंचा करेंगी।
W100 फाइनल: क्या इतिहास रचा वैष्णवी अडकर ने?
फरवरी 2026 में जब बैंगलुरु में ITF W100 ओपन टूर्नामेंट शुरू हुआ, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि एक युवा भारतीय खिलाड़ी ऐसा तहलका मचा देगी। Vaishnavi Adkar उस वक्त वर्ल्ड रैंकिंग में करीब 690वें नंबर पर थीं। रैंकिंग के लिहाज़ से देखा जाए तो वो ज़्यादा बड़ी दावेदार नहीं मानी जा रही थीं, लेकिन खेल के मैदान में नाम नहीं, प्रदर्शन बोलता है — और उन्होंने अपने खेल से सबको खामोश कर दिया।
टूर्नामेंट के हर मुकाबले में उनका आत्मविश्वास साफ नज़र आ रहा था। राउंड ऑफ 16 में उनका सामना जापान की अनुभवी खिलाड़ी मैई होंटामा से हुआ। कागज़ों पर होंटामा ज्यादा मजबूत और ऊँची रैंकिंग वाली खिलाड़ी थीं, लेकिन कोर्ट पर कहानी कुछ और ही थी। Vaishnavi Adkar ने पूरे इत्मीनान और सब्र के साथ खेलते हुए उन्हें मात दी। उस जीत ने यह साफ कर दिया कि वो सिर्फ हिस्सा लेने नहीं, बल्कि इतिहास बनाने आई हैं।
इसके बाद क्वार्टरफाइनल में उनका मुकाबला ऑस्ट्रेलिया की टायलाह प्रेस्टन से हुआ। यह मैच भी आसान नहीं था। हर पॉइंट के लिए कड़ी जद्दोजहद हुई, लेकिन Vaishnavi Adkar ने अपने जज्बे और बेहतरीन शॉट्स के दम पर मैच अपने नाम कर लिया। उनकी दो-हाथ वाली बैकहैंड और तेज़ रफ्तार रिटर्न ने विपक्षी खिलाड़ी को काफी परेशान किया।

सेमीफाइनल में उन्होंने थाईलैंड की लनलाना तरारूडी का सामना किया। यह मुकाबला काफी अहम था, क्योंकि यहां से फाइनल का रास्ता खुलना था। लेकिन Vaishnavi Adkar ने किसी तरह की घबराहट नहीं दिखाई। उन्होंने सीधा सेटों में जीत दर्ज की और पूरे कॉन्फिडेंस के साथ फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली। जिस अंदाज़ में उन्होंने यह जीत हासिल की, उसने दर्शकों का दिल जीत लिया।
इस शानदार सफर के साथ Vaishnavi Adkar W100 या उससे ऊपर के लेवल के सिंगल्स फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं। इससे पहले ऐसा कारनामा साल 2009 में सनिया मिर्जा ने किया था। यानी पूरे 17 साल बाद भारतीय महिला टेनिस को ऐसा ऐतिहासिक लम्हा देखने को मिला।
यह सिर्फ एक फाइनल में पहुंचने की कहानी नहीं थी, बल्कि यह उस हौसले, मेहनत और यकीन की दास्तान थी, जिसने एक युवा खिलाड़ी को दुनिया के सामने ला खड़ा किया। बैंगलुरु का वह टूर्नामेंट भारतीय टेनिस के लिए हमेशा एक खास याद बनकर रहेगा, क्योंकि वहीं से एक नए सितारे की असली चमक दुनिया ने देखी।
फाइनल मुकाबला और परिणाम
22 फरवरी 2026 का दिन भारतीय टेनिस फैंस के लिए बेहद खास था। ITF W100 बैंगलोर के फाइनल में Vaishnavi Adkar का मुकाबला बेल्जियम की तजुर्बेकार खिलाड़ी हैन्ने वांडविंकेल से हुआ। यह मैच आसान बिल्कुल भी नहीं था। सामने एक ऐसी खिलाड़ी थीं जिनके पास इंटरनेशनल लेवल का भरपूर अनुभव और जबरदस्त खेल था। मुकाबले में वांडविंकेल ने अपने तजुर्बे और दमदार प्रदर्शन का पूरा फायदा उठाया और 6-0, 6-1 से जीत दर्ज की।
बेशक यह मुकाबला Vaishnavi Adkar के हक में नहीं गया, लेकिन कहानी सिर्फ स्कोरलाइन की नहीं होती। असल बात यह है कि उन्होंने जिस जज़्बे और मेहनत से फाइनल तक का सफर तय किया, वही अपने आप में एक बड़ी कामयाबी और ऐतिहासिक उपलब्धि है। इतने बड़े लेवल के टूर्नामेंट में फाइनल तक पहुंचना ही किसी भी खिलाड़ी के लिए फख्र की बात होती है।
इस पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन की बदौलत Vaishnavi Adkar को कुल 65 WTA रैंकिंग पॉइंट्स मिले और करीब 8,147 अमेरिकी डॉलर की प्राइज मनी भी हासिल हुई। यह इनाम सिर्फ रकम का नहीं, बल्कि उनकी मेहनत की तस्दीक था। हर मैच के साथ उनका कॉन्फिडेंस बढ़ता गया और दुनिया को यह अहसास हुआ कि भारत को एक नई उभरती हुई सितारा मिल गई है।
रैंकिंग में जबरदस्त उछाल
बैंगलुरु W100 में उनके बेहतरीन खेल का असर उनकी वर्ल्ड रैंकिंग पर भी साफ नजर आया। लगभग 224 स्थान की लंबी छलांग लगाते हुए Vaishnavi Adkar विश्व रैंकिंग में नंबर 466 पर पहुंच गईं। यह उनकी अब तक की सबसे बेहतरीन रैंकिंग है। सोचिए, कुछ ही दिनों में इतना बड़ा उछाल — यह किसी ख्वाब के सच होने जैसा है।
यह रैंकिंग सिर्फ नंबर नहीं है, बल्कि इस बात का सबूत है कि उन्होंने कई ऊंची रैंकिंग और ज्यादा तजुर्बे वाली खिलाड़ियों को हराकर यह मुकाम हासिल किया है। यह उनके उज्ज्वल भविष्य की तरफ इशारा करता है। अगर वह इसी रफ्तार और लगन के साथ आगे बढ़ती रहीं, तो आने वाले वक्त में और भी बड़े मंच पर उनका नाम चमक सकता है।
Vaishnavi Adkar का खेल और अंदाज़
अगर उनके खेल की बात करें तो उनकी बैकहैंड शॉट सबसे मजबूत हथियार मानी जाती है। दो-हाथ वाली बैकहैंड से वह विरोधी खिलाड़ी को मुश्किल में डाल देती हैं। कोर्ट पर उनका अंदाज़ बेहद सधा हुआ और सुकून भरा रहता है। वह जल्दबाज़ी में फैसले नहीं लेतीं, बल्कि हर शॉट सोच-समझकर खेलती हैं।
उनकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह दबाव भरे लम्हों में भी अपने जज़्बात पर काबू रखती हैं। मैच कितना भी अहम क्यों न हो, उनके चेहरे पर घबराहट कम ही नजर आती है। यही सब्र और दिमागी मजबूती उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती है।
उनके कोच केदार शाह और भारतीय टेनिस के दिग्गज रोहन बोपन्ना जैसे अनुभवी मार्गदर्शकों का साथ भी उनके करियर में बेहद अहम रहा है। सही ट्रेनिंग, सही सलाह और सही दिशा ने उनके खेल को एक नई ऊंचाई दी है। जब मेहनत और सही रहनुमाई साथ मिल जाए, तो कामयाबी खुद-ब-खुद कदम चूमती है|
भारत के लिए नई उम्मीद
Vaishnavi Adkar की यह उपलब्धि सिर्फ उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं है। यह भारतीय महिला टेनिस के लिए एक नई शुरुआत की तरह है। सनिया मिर्जा के बाद किसी भारतीय महिला का W100 फाइनल में पहुंचना अपने आप में ऐतिहासिक पल है। इससे यह पैगाम जाता है कि भारत की बेटियां भी इंटरनेशनल टेनिस में बड़े कारनामे कर सकती हैं।
अब खेल विशेषज्ञ, कोच और युवा खिलाड़ी सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि Vaishnavi Adkar इस कामयाबी को आगे कैसे ले जाती हैं। उनके पास आने वाले समय में और बड़े इंटरनेशनल टूर्नामेंट खेलने के मौके होंगे। अगर वह इसी जज़्बे और हिम्मत के साथ आगे बढ़ती रहीं, तो यकीनन भारतीय टेनिस का भविष्य बेहद रोशन नजर आता है।
आखिर में यही कहा जा सकता है कि यह सफर अभी शुरू हुआ है। फाइनल की हार ने उनकी चमक को कम नहीं किया, बल्कि उन्हें और मजबूत बनाया है। यह एक नई कहानी की इब्तिदा है — एक ऐसी कहानी, जिसमें मेहनत, सब्र और ख्वाबों की ताकत साफ दिखाई देती है। भारतीय टेनिस फैंस को अब उनसे बड़ी उम्मीदें हैं, और शायद आने वाले सालों में हम उन्हें और भी बड़े खिताब जीतते हुए देखें।
भविष्य की राह
Vaishnavi Adkar ने पहले ही साफ इशारा कर दिया है कि उनका मकसद सिर्फ एक टूर्नामेंट में अच्छा खेलना नहीं, बल्कि लंबी रेस की खिलाड़ी बनना है। उनका सपना है कि वह WTA टूर पर अपनी एक पक्की और मजबूत जगह बनाएं, जहां उनका नाम लगातार बड़े मुकाबलों में दिखाई दे। वह चाहती हैं कि जल्द से जल्द वर्ल्ड रैंकिंग के टॉप-400 में दाखिल हों और वहां टिककर दिखाएं कि वह किसी से कम नहीं हैं।
इसके साथ ही Vaishnavi Adkar की एक और बड़ी ख्वाहिश है — भारत के लिए बिली जीन किंग कप (जिसे पहले Fed Cup कहा जाता था) में खेलना। अपने देश की जर्सी पहनकर इंटरनेशनल स्टेज पर उतरना हर खिलाड़ी का ख्वाब होता है, और उनके दिल में भी यही जुनून साफ दिखाई देता है।
उनकी मेहनत, उनका साफ विज़न और उनका अटूट यकीन इस बात की तरफ इशारा करता है कि भारतीय महिला टेनिस अब एक नए दौर में कदम रख रही है। लंबे वक्त तक जिस निरंतर सफलता का इंतजार था, अब उसकी हल्की-हल्की आहट सुनाई देने लगी है।
अगर हम Vaishnavi Adkar की अब तक की कामयाबियों को देखें, तो उसके पीछे सिर्फ टैलेंट नहीं, बल्कि संघर्ष की लंबी दास्तान छुपी है। घंटों की प्रैक्टिस, हार के बाद दोबारा उठ खड़े होने का हौसला, और हर दिन खुद को बेहतर बनाने की जिद — यही उनकी असली ताकत है।
Sania Mirza के बाद W100 फाइनल तक पहुंचना कोई मामूली बात नहीं। यह एक ऐतिहासिक मुकाम है, जिसने भारतीय टेनिस को फिर से चर्चा में ला दिया है। यह उपलब्धि सिर्फ उनके नाम नहीं, बल्कि उन तमाम लड़कियों के नाम है जो बड़े सपने देखती हैं और उन्हें हकीकत में बदलना चाहती हैं।
आज युवा खिलाड़ी उन्हें देख रही हैं और सोच रही हैं कि अगर Vaishnavi Adkar कर सकती हैं, तो हम भी कर सकते हैं। यही असली प्रेरणा होती है — जब एक खिलाड़ी की सफलता कई और दिलों में उम्मीद जगा देती है।
अगर वह इसी जोश, इसी सब्र और इसी जज्बे के साथ आगे बढ़ती रहीं, तो यकीनन आने वाले सालों में हम उन्हें और बड़े ग्रैंड स्टेज पर, और बड़े खिताबों के लिए लड़ते हुए देखेंगे। भारतीय टेनिस का भविष्य उनके जैसे खिलाड़ियों के कंधों पर है, और यह भविष्य काफी रोशन नजर आता है।
आखिर में यही कहा जा सकता है कि Vaishnavi Adkar ने इतिहास तो रच दिया है, लेकिन उनका असली सफर अभी शुरू हुआ है। मंज़िलें अभी बाकी हैं, ख्वाब अभी बाकी हैं, और भारतीय टेनिस के लिए उम्मीदों का सिलसिला अभी जारी है।
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